
अल्बर्ट आइंस्टीन
परिचय
Albert Einstein बीसवीं सदी के सबसे प्रतिष्ठित वैज्ञानिक हैं — एक ऐसी शख्सियत जिनका नाम खुद प्रतिभा का पर्याय बन चुका है। भौतिकी में उनके योगदान ने अंतरिक्ष, समय, गुरुत्वाकर्षण, ऊर्जा और प्रकाश की प्रकृति के बारे में मानवजाति की समझ को मूल रूप से बदल दिया। दक्षिणी जर्मनी के किंगडम ऑफ़ वुर्टेमबर्ग में एक यहूदी परिवार में जन्मे Einstein ने बचपन से ही एक असाधारण मानसिकता के संकेत दिए, जो आगे चलकर सदियों पुरानी वैज्ञानिक रूढ़िवादिता को पलट देने वाली थी। बीसवीं सदी के पहले दशकों में उन्होंने जो सिद्धांत विकसित किए, वे आधुनिक भौतिकी की नींव बने — ब्रह्मांड विज्ञान से लेकर क्वांटम यांत्रिकी तक, परमाणु ऊर्जा से लेकर दूरसंचार तक, हर क्षेत्र को नए सिरे से परिभाषित किया। लेकिन Einstein महज एक गणना करने वाली मशीन से कहीं बढ़कर थे। वे एक जुनूनी मानवतावादी थे, एक प्रतिबद्ध शांतिवादी, एक समर्पित वायलिन वादक, और एक राजनीतिक कार्यकर्ता जिन्होंने फासीवाद, राष्ट्रवाद और युद्ध के खिलाफ आवाज़ उठाई। उनका जीवन दो विश्वयुद्धों, अपनी मातृभूमि से निर्वासन और परमाणु युग की भयावह शुरुआत — जो कुछ हद तक उन्हीं के समीकरणों से संभव हुई — का गवाह रहा। Einstein को समझने का मतलब है न केवल उस क्रांति को समझना जो उन्होंने विज्ञान में ला दी, बल्कि उस गहरे इंसानी व्यक्तित्व को भी समझना जिसने उस क्रांति को आगे बढ़ाया और उसके परिणामों से जूझता रहा।
Einstein का सैद्धांतिक काम प्रयोगशाला के प्रयोगों से नहीं, बल्कि विचार-प्रयोगों से जन्मा था — सावधानीपूर्वक की गई कल्पनाशील कवायदें, जिनमें वे खुद को प्रकाश की किरण के साथ-साथ दौड़ते हुए या किसी लिफ्ट में स्वतंत्र रूप से गिरते हुए कल्पित करते थे। जांच-पड़ताल की यह पद्धति, जो गहरी दार्शनिक और कड़ाई से गणितीय थी, ने उस वर्ष विशेष सापेक्षता सिद्धांत को जन्म दिया जिसे अब उनका "annus mirabilis" यानी चमत्कारी वर्ष कहा जाता है, और एक दशक बाद सामान्य सापेक्षता सिद्धांत को। दोनों सिद्धांतों ने न्यूटन की यांत्रिकी को इस कदर पलट दिया कि वैज्ञानिक जगत स्तब्ध रह गया, और अंततः यह पुष्टि हुई कि ब्रह्मांड किसी की कल्पना से भी अधिक अजीब और भव्य है। ब्लैक होल, गुरुत्वाकर्षण द्वारा प्रकाश का मुड़ना, ब्रह्मांड का विस्तार, द्रव्यमान और ऊर्जा की समतुल्यता — ये सब Einstein के समीकरणों से निकले, इससे पहले कि इनमें से किसी का भी प्रत्यक्ष रूप से अवलोकन किया जा सका। उनकी यह भविष्यवाणी कि गुरुत्वाकर्षण प्रकाश को मोड़ता है, 1919 में एक सूर्यग्रहण के दौरान सिद्ध हुई, और Einstein रातोंरात ऐसी प्रसिद्धि पा गए जैसी विज्ञान ने पहले कभी नहीं देखी थी।
उनका निजी जीवन जटिल और कभी-कभी दर्दनाक रहा। एक साथी भौतिकशास्त्री Mileva Maric के साथ उनकी पहली शादी से बच्चे हुए, लेकिन अंततः तलाक पर जाकर खत्म हुई। अपनी चचेरी बहन Elsa से दूसरी शादी ने जीवन में स्थिरता तो लाई, पर बौद्धिक साझेदारी नहीं। अपने बेटे Eduard के साथ उनके रिश्ते कठिन रहे, जो सिज़ोफ्रेनिया से पीड़ित था, और बड़े बेटे Hans Albert से वे कई वर्षों तक लगभग अलग-थलग रहे। Einstein की शोहरत ने प्रशंसा के साथ-साथ परेशानियाँ भी लाईं — जर्मनी के यहूदी-विरोधी राष्ट्रवादियों से, उनके शांतिवाद से सशंकित राजनीतिक अधिकारियों से, और बाद में McCarthy दौर के दौरान अमेरिकी सरकारी एजेंसियों से। इन तूफानों में वे अपने स्वभावगत हास्य, अलगाव और सच्चे नैतिक साहस के मिश्रण के साथ डटे रहे।
यह जीवनी Einstein के जीवन का पूरा सफर दर्शाती है — जर्मन शहर Ulm में उनके बचपन से लेकर स्विट्ज़रलैंड के उनके निर्माण-काल तक, Bern के पेटेंट कार्यालय में गुमनामी के उस दशक तक जहाँ उन्होंने अपना सबसे महान सैद्धांतिक काम किया, अंतरराष्ट्रीय ख्याति तक पहुँचने तक, नाज़ी जर्मनी से उनके पलायन तक, और Princeton के Institute for Advanced Study में उनके अंतिम दशकों तक। यह न केवल उनकी खोजों की वैज्ञानिक विषयवस्तु की पड़ताल करती है, बल्कि उस इंसान के व्यक्तित्व, आदतों और दर्शन की भी, जिसने ब्रह्मांड को देखने का मानवजाति का नज़रिया बदल दिया।
जर्मनी में बचपन
Albert Einstein का जन्म 14 मार्च 1879 को जर्मन साम्राज्य के वुर्टेमबर्ग राज्य के उल्म शहर में हुआ था। उनके पिता, Hermann Einstein, पहले रजाई-गद्दे के व्यापारी थे और बाद में एक विद्युत-रासायनिक उद्यमी बन गए। उनकी माँ, Pauline Koch, एक समृद्ध अनाज व्यापारी की बेटी थीं। दोनों माता-पिता अश्केनाज़ी यहूदी थे — अपने विचारों में धर्मनिरपेक्ष, लेकिन अपनी पहचान के प्रति पूरी तरह सचेत। वे एक ऐसे समाज में रहते थे जहाँ, कानूनी रूप से समानता मिलने के बावजूद, कई तबकों में यहूदियों को अभी भी संदेह और शत्रुता की दृष्टि से देखा जाता था।
Einstein परिवार म्यूनिख तब आया जब Albert केवल एक साल के थे। इसकी वजह थी Hermann का अपने भाई Jakob के साथ व्यापार में उतरना — Jakob एक प्रशिक्षित इंजीनियर थे। दोनों भाइयों ने मिलकर एक कंपनी बनाई जो म्यूनिख और फिर इटली में बिजली का बुनियादी ढाँचा — गैस लाइटिंग और टेलीफोन प्रणाली — स्थापित करती थी। युवा Albert म्यूनिख में एक मध्यमवर्गीय यहूदी परिवार की अपेक्षाकृत सुखी ज़िंदगी में पले-बढ़े, जहाँ उनके माता-पिता — विशेषकर संगीत में पारंगत उनकी माँ — ने एक बौद्धिक वातावरण बनाए रखा था।
Einstein का बचपन कुछ ऐसे असाधारण पहलुओं से भरा था जो अब किंवदंतियाँ बन चुके हैं, हालाँकि कभी-कभी इन्हें बढ़ा-चढ़ाकर पेश किया जाता है। उन्हें बोलना देर से आया — कहा जाता है कि तीन या चार साल की उम्र तक वे पूरे वाक्य नहीं बोल पाते थे — और इस देरी ने उनके माता-पिता को कुछ चिंतित कर दिया था। उनके पिता को बौद्धिक अक्षमता की आशंका हुई। बाद में जीवन में Einstein ने खुद याद किया कि वे दूसरे बच्चों से अलग थे — अधिक अंतर्मुखी, कम मिलनसार, और अकेले सोचते रहने के लंबे दौरों के शिकार। यांत्रिक चीज़ें उन्हें बेहद आकर्षित करती थीं और वे घंटों पहेलियाँ सुलझाने या निर्माण-किट से कुछ बनाने में डूबे रह सकते थे।
एक महत्वपूर्ण घटना तब हुई जब Albert पाँच साल के थे और बीमारी के दौरान उनके पिता उन्हें एक पॉकेट कम्पास तोहफे में लाए। वह लड़का कम्पास की सुई की उस अदृश्य, अकथनीय मजबूरी से अभिभूत हो गया जो उसे हमेशा उत्तर की ओर इशारा करने पर मजबूर करती थी। उन्हें अहसास हुआ कि कोई चीज़ दूरी से,겉보기में खाली अंतरिक्ष के पार, उस सुई को दिशा दे रही है। दृश्य घटनाओं के पीछे छिपी एक व्यवस्था का यह अनुभव जीवन भर Einstein की वैज्ञानिक कल्पनाशक्ति के केंद्र में बना रहा। वे सबसे बढ़कर यही समझना चाहते थे कि चीज़ों की सतह के नीचे क्या है।
उनकी औपचारिक शिक्षा म्यूनिख के एक कैथोलिक प्राथमिक विद्यालय से शुरू हुई, जहाँ वे गिने-चुने यहूदी छात्रों में से एक थे। अधिकतर विषयों में उनका शैक्षणिक प्रदर्शन अच्छा था और गणित में उनकी विशेष प्रतिभा दिखती थी। उन्होंने वायलिन की शिक्षा भी ली, जिस पर उनकी माँ ज़ोर देती थीं। शुरुआत में उन्होंने इसका विरोध किया, लेकिन धीरे-धीरे वे एक कुशल शौकिया संगीतकार बन गए। संगीत — विशेषकर Mozart और Bach की वायलिन सोनाटा और कंसर्टो — उनके जीवन भर का जुनून बन गया। बाद में उन्होंने कहा कि संगीत और भौतिकी दोनों एक ही अंतर्निहित व्यवस्था की अभिव्यक्तियाँ हैं — जब भी वे सोचते-सोचते किसी दीवार से टकराते, तो वायलिन बजाते रहते जब तक उनका मन शांत न हो जाए और समाधान सामने न आ जाए।
जब Albert लगभग नौ या दस साल के थे, तब Max Talmud नाम के एक युवा मेडिकल छात्र ने Einstein परिवार के यहाँ नियमित रूप से शुक्रवार की शाम का खाना खाना शुरू किया। यहूदी परंपरा के अनुसार सब्बाथ के भोजन पर छात्रों को आमंत्रित किया जाता था, और Talmud इस प्रतिभाशाली बालक के लिए एक बौद्धिक मार्गदर्शक बन गए। वे Albert के लिए लोकप्रिय विज्ञान की किताबें लाते थे, जिनमें प्राकृतिक विज्ञान पर सचित्र ग्रंथों की एक श्रृंखला भी थी, जिसने युवा Einstein के उत्सुक मन के लिए भौतिकी और जीव विज्ञान की दुनिया के द्वार खोल दिए। Talmud ने Einstein को Kant की 'Critique of Pure Reason' से भी परिचित कराया — एक चुनौतीपूर्ण दार्शनिक ग्रंथ जिसे उस बारह वर्षीय बच्चे ने गहरी एकाग्रता के साथ पढ़ा। इन अनौपचारिक पाठों ने Einstein की प्रारंभिक बौद्धिक नींव को उनकी औपचारिक शिक्षा से कहीं अधिक गहराई से आकार दिया।
बारह साल की उम्र में Einstein ने एक ही गर्मी की छुट्टियों में खुद से बीजगणित और यूक्लिडीय ज्यामिति की किताबें पढ़ डालीं और इतनी गहराई से प्रमाणों को समझा कि Talmud के पास उन्हें देने के लिए कोई नया सवाल नहीं बचा। इसके बाद उन्होंने कलन की एक पाठ्यपुस्तक भी पूरी कर ली। जब वे माध्यमिक शिक्षा के लिए म्यूनिख के Luitpold Gymnasium में दाखिल हुए, तब तक वे गणित में अपने साथियों से काफी आगे निकल चुके थे। इस विद्यालय में वैज्ञानिक जिज्ञासा और स्वतंत्र सोच की बजाय लैटिन, ग्रीक और रटने पर जोर दिया जाता था, जो Einstein के स्वभाव के बिल्कुल विपरीत था। उन्हें वहाँ की शिक्षण-पद्धति दमनकारी लगी और आज्ञाकारिता व अनुरूपता पर दिया जाने वाला जोर उनकी प्रकृति के खिलाफ था। कुछ शिक्षकों के साथ उनके संबंध कठिन रहे, और ऐसी रिपोर्टें भी हैं — हालाँकि कुछ को Einstein ने खुद नकारा भी — कि एक शिक्षक ने उनसे कहा था कि वे जीवन में कुछ भी हासिल नहीं कर पाएँगे।
यह दौर Einstein परिवार के लिए गंभीर आर्थिक संकट का भी समय था। Hermann और Jakob की बिजली कंपनी म्यूनिख को बिजली आपूर्ति का एक बड़ा ठेका जीतने में नाकाम रही, और 1890 के दशक के मध्य में परिवार ने इटली जाने का फैसला किया — पहले मिलान और फिर पाविया, जहाँ नए व्यापारिक अवसर दिख रहे थे। उस समय पंद्रह साल के Albert को म्यूनिख में अपनी पढ़ाई पूरी करने के लिए पीछे छोड़ दिया गया। वे वहाँ बहुत दुखी रहे। किसी तरह उन्होंने एक डॉक्टर से नर्वस थकान का प्रमाणपत्र हासिल किया और उसकी मदद से बिना डिग्री पूरी किए विद्यालय छोड़ दिया और इटली में अपने परिवार के पास पहुँच गए।
इस फैसले के परिणाम भुगतने पड़े। विद्यालय का प्रमाणपत्र न होने की वजह से Einstein सीधे किसी स्विस विश्वविद्यालय में दाखिला नहीं ले सकते थे। उन्होंने ज़्यूरिख के Swiss Federal Polytechnic — Eidgenössische Technische Hochschule, यानी ETH — में प्रवेश पाने की कोशिश की और पंद्रह साल की उम्र में प्रवेश परीक्षा दी, जो अधिकांश आवेदकों से एक साल कम थी। गणित और विज्ञान में उन्होंने शानदार प्रदर्शन किया, लेकिन फ्रेंच भाषा और वनस्पति विज्ञान के हिस्सों में असफल रहे। ETH के रेक्टर की सलाह पर उन्होंने स्विट्जरलैंड के Aarau के एक कैंटोनल विद्यालय में एक साल बिताया और अपनी माध्यमिक शिक्षा पूरी की। Aarau का यह साल उनके जीवन में बदलाव लाने वाला साबित हुआ। उस विद्यालय की प्रगतिशील शिक्षण-पद्धति — जिसमें रटने और दोहराने की बजाय दृश्य-चिंतन और स्वयं-निर्देशित जिज्ञासा पर जोर था — Einstein के लिए एकदम सटीक थी। उन्होंने बाद में इसे अपना अब तक का सबसे अच्छा विद्यालय बताया।
शिक्षा और शुरुआती संघर्ष
Einstein उस वर्ष की शरद ऋतु में ETH, ज़्यूरिख में दाखिल हुए जब उनकी उम्र सत्रह साल हो गई, और उन्होंने गणित व भौतिकी में शिक्षक-प्रशिक्षण कार्यक्रम में नामांकन लिया। ETH पारंपरिक जर्मन अर्थ में कोई विश्वविद्यालय नहीं था, बल्कि एक उच्च प्रतिष्ठित तकनीकी महाविद्यालय था जो इंजीनियर, वैज्ञानिक और शिक्षक तैयार करता था। इसके संकाय में कई著名 वैज्ञानिक शामिल थे और इसकी प्रयोगशाला सुविधाएँ यूरोप में सर्वश्रेष्ठ में से एक थीं।
युवा Einstein कुछ मायनों में एक कठिन छात्र साबित हुए। उन्हें कुछ पाठ्यक्रम उबाऊ लगते थे और वे अक्सर व्याख्यान छोड़ देते थे, परीक्षाओं की तैयारी के लिए अपने मित्र Marcel Grossmann के सुव्यवस्थित नोट्स पर निर्भर रहते थे। उनकी आदत थी कि वे बौद्धिक रूप से अपनी राह खुद चुनते थे — पाठ्यक्रम से मेल खाए या न खाए, जो विचार उन्हें रोचक लगे उसी पर चलते रहते थे। उनके प्राध्यापक उन्हें प्रतिभाशाली तो मानते थे, लेकिन जिद्दी भी। भौतिकी के प्राध्यापक Heinrich Weber ने कथित तौर पर उनसे कहा था: "तुम एक होशियार लड़के हो, Einstein, बहुत होशियार। लेकिन तुममें एक बड़ी कमी है: तुम किसी की बात नहीं मानते।"
यह स्वतंत्रता महज़ अहंकार नहीं थी। Einstein एक गहरी पहेली के धागे को खींच रहे थे जो उन्हें सोलह साल की उम्र से परेशान कर रही थी, जब उन्होंने कल्पना की थी कि प्रकाश की एक किरण के पीछे दौड़ना और उसी गति से उसके साथ-साथ चलना कैसा लगेगा। James Clerk Maxwell द्वारा प्रतिपादित शास्त्रीय विद्युतगतिकी (Classical electrodynamics) यह भविष्यवाणी करती थी कि प्रकाश एक विद्युत-चुंबकीय तरंग है जो ईथर नामक एक माध्यम में एक निश्चित गति से संचरित होती है। यदि आप प्रकाश के साथ उसी गति से यात्रा कर सकें, तो आपको क्या दिखाई देगा? वह तरंग जमी हुई प्रतीत होनी चाहिए। लेकिन Maxwell के समीकरण एक जमी हुई विद्युत-चुंबकीय तरंग को निषिद्ध करते प्रतीत होते थे। कुछ न कुछ गड़बड़ थी — या तो यांत्रिकी में, या विद्युतगतिकी में, या फिर दोनों में। यह विचार-प्रयोग अंततः वर्षों के परिश्रम के बाद विशेष सापेक्षता सिद्धांत (special theory of relativity) तक पहुँचा।
ज़्यूरिख़ में Einstein की मुलाकात Mileva Maric से हुई, जो एक सर्बियाई भौतिकी की छात्रा थीं और उन बहुत कम महिलाओं में से एक थीं जिन्हें ETH के भौतिकी कार्यक्रम में प्रवेश मिला था। वे पहले घनिष्ठ मित्र बने, फिर प्रेमी। Mileva बुद्धिमान, परिश्रमी और भौतिकी में गहरी रुचि रखने वाली थीं। उनका रिश्ता गहरा और बौद्धिक रूप से उत्तेजक था। वे छुट्टियों के दौरान खूब पत्र-व्यवहार करते थे, और उनके पत्र वैज्ञानिक चर्चाओं और व्यक्तिगत स्नेह से भरे होते थे। Einstein के Mileva को लिखे पत्र एक ऐसे युवक की छवि प्रस्तुत करते हैं जो गर्मजोश, कभी-कभी चंचल और कभी-कभी बेहद गंभीर था, और जो अपने वैज्ञानिक विचारों पर उनसे बराबरी के स्तर पर चर्चा करता था।
अंतिम परीक्षाओं में Einstein और Mileva दोनों ने शिक्षक योग्यता परीक्षा दी। Einstein सम्मानजनक, हालाँकि असाधारण नहीं, अंकों से उत्तीर्ण हुए। Mileva, जो Einstein के बच्चे की माँ बनने वाली थीं, परीक्षा में अनुत्तीर्ण हो गईं। अगले वर्ष वे फिर असफल रहीं और उन्हें कभी अपनी डिग्री नहीं मिली। उनका बच्चा — एक लड़की — विवाह से पहले ही जन्मी थी और या तो शैशवावस्था में ही उसकी मृत्यु हो गई या उसे गोद दे दिया गया। ऐतिहासिक अभिलेख इस बारे में स्पष्ट नहीं है, और इस बच्चे का भाग्य विद्वानों के बीच विवाद का विषय बना रहा है। यह प्रसंग एक त्रासदी थी जिसे Mileva जीवन भर अपने साथ ढोती रहीं।
स्नातक होने के बाद Einstein खुद को एक बेहद निराशाजनक स्थिति में पाते हैं। वे एक शैक्षणिक पद चाहते थे — किसी विश्वविद्यालय में एक सहायक पद जो उन्हें आजीविका कमाते हुए शोध करने का अवसर देता। उन्होंने ETH के प्राध्यापकों को, अन्य विश्वविद्यालयों को और हर उस संस्थान को बार-बार आवेदन किया जो कोई भी छोटा-सा पद दे सकता था। हर आवेदन अस्वीकार कर दिया गया। इसके कारण पूरी तरह स्पष्ट नहीं हैं। कुछ इतिहासकारों का सुझाव है कि एक कठिन और ज़िद्दी छात्र के रूप में उनकी प्रतिष्ठा उनके विरुद्ध काम आई। अन्य लोग शैक्षणिक नियुक्ति प्रक्रिया में सूक्ष्म यहूदी-विरोध (anti-Semitism) की ओर इशारा करते हैं। कारण जो भी रहा हो, स्नातक होने के बाद Einstein ने एक वर्ष से अधिक समय अस्थिर बेरोज़गारी की स्थिति में बिताया — छात्रों को ट्यूशन देते हुए और अस्थायी पद स्वीकार करते हुए, साथ ही अपना वैज्ञानिक अध्ययन और चिंतन जारी रखते हुए।
यह स्थिति Marcel Grossmann के पिता के हस्तक्षेप से सुलझी, जिन्होंने Einstein की सिफ़ारिश Friedrich Haller से की, जो बर्न स्थित स्विस फ़ेडरल पेटेंट कार्यालय के निदेशक थे। 1902 की गर्मियों में Einstein को पेटेंट कार्यालय में तकनीकी विशेषज्ञ तृतीय श्रेणी के रूप में नियुक्त किया गया। इस नियुक्ति से एक साधारण किंतु पर्याप्त वेतन मिलता था और उन्हें स्थायी रोज़गार के साथ-साथ कार्यालय के बाहर के घंटों में बौद्धिक स्वतंत्रता भी मिलती थी।
विवाह और प्रारंभिक पारिवारिक जीवन
पेटेंट कार्यालय में अपना पद संभालने से पहले, Einstein के निजी जीवन में महत्त्वपूर्ण बदलाव आए। उनके पिता Hermann का अक्टूबर 1902 में मिलान में निधन हो गया, एक ऐसी मृत्यु जिसने Einstein को गहरे तक प्रभावित किया। Hermann ने अपने बेटे को वयस्क होते देखा था, लेकिन उसकी सफलताएँ देखने के लिए जीवित नहीं रहे। इस मृत्यु ने उन बाधाओं में से एक को हटा दिया — Hermann Mileva को अपनी बहू के रूप में स्वीकार नहीं करते थे — जिसने Einstein के विवाह को टाल रखा था। जनवरी 1903 में Albert और Mileva ने बर्न में एक छोटे से नागरिक समारोह में विवाह किया।
उनका घरेलू जीवन सादा था। वे छोटे किराये के अपार्टमेंट में रहते थे, दोस्तों को साधारण खाने पर बुलाते थे, और फुर्सत के वक्त अपनी बौद्धिक रुचियों में डूबे रहते थे। उनके पहले बेटे, Hans Albert, का जन्म मई 1904 में हुआ। Einstein उस बच्चे से बेहद प्यार करते थे और बच्चे की देखभाल में उस तरह शामिल होते थे जो उस ज़माने में और उनकी पृष्ठभूमि के किसी पुरुष के लिए असामान्य माना जाता था। दूसरे बेटे, Eduard, का जन्म 1910 में हुआ। Eduard एक संवेदनशील और संगीत में प्रतिभाशाली बच्चा निकला, जिसने बाद में सिज़ोफ्रेनिया विकसित किया, जिसने उसके माता-पिता को जीवन भर दुख दिया।
शादी के शुरुआती सालों में भले ही गर्मजोशी थी, लेकिन कई कारणों से रिश्ते में तनाव आता जा रहा था। Mileva अपनी परीक्षाओं में असफल होने के बाद अपनी वैज्ञानिक महत्वाकांक्षाएं छोड़ चुकी थीं और अब मुख्य रूप से घर-गृहस्थी और बच्चों की देखभाल में लगी थीं। Einstein का काम में बढ़ता हुआ डूबाव उन्हें अक्सर एक अनुपस्थित पति और पिता बनाता था। उनकी बढ़ती ख्याति के साथ आने वाली सामाजिक ज़िम्मेदारियाँ Mileva को मुश्किल लगती थीं। Mileva ने Einstein के वैज्ञानिक कार्य में कितना योगदान दिया, इस बारे में विद्वानों में लंबे समय से बहस चली आ रही है। कुछ शोधकर्ताओं ने पत्रों और परिस्थितिजन्य साक्ष्यों के आधार पर तर्क दिया है कि वे एक महत्वपूर्ण बौद्धिक सहयोगी थीं। अधिकांश इतिहासकार इस निष्कर्ष पर पहुँचते हैं कि हालाँकि Mileva एक विचार-परामर्शदाता की भूमिका निभाती थीं और भावनात्मक सहारा देती थीं, फिर भी Einstein की सैद्धांतिक खोजें मूल रूप से उन्हीं की अपनी थीं। यह बहस, हालांकि, एक ऐसे रिश्ते को लेकर वास्तविक अनिश्चितता को दर्शाती है जिसमें वैज्ञानिक विचार और व्यक्तिगत अंतरंगता बहुत गहराई से एक-दूसरे से जुड़े हुए थे।
पेटेंट ऑफिस के वर्ष
Bern स्थित स्विस संघीय पेटेंट ऑफिस Einstein के वैज्ञानिक विकास के लिए एक अप्रत्याशित रूप से उपजाऊ माहौल साबित हुआ। पेटेंट परीक्षक के रूप में उनके काम में तकनीकी आवेदनों का मूल्यांकन करना, यांत्रिक और विद्युत उपकरणों को समझना, और भौतिक सिद्धांतों तथा उनके तकनीकी कार्यान्वयन के बीच के संबंध के बारे में गहराई से सोचना शामिल था। प्रौद्योगिकी के साथ यह व्यावहारिक जुड़ाव उनकी सैद्धांतिक प्रवृत्तियों का पूरक बना और समस्याओं की मूल संरचना को पहचानने की उनकी क्षमता को और तेज़ किया।
Einstein का कार्यदिवस आमतौर पर सुबह आठ बजे से शाम छह बजे तक होता था, जिसमें दोपहर के खाने के लिए एक घंटे का अवकाश होता था। वे अपने आधिकारिक कर्तव्यों को कुशलता से निपटाने में माहिर हो गए थे, जिससे उनके दिमाग में अपनी सोच के लिए जगह बचती थी। वे अपने मेज़ की दराज में कागज़ रखते थे और जैसे ही कोई निगरान आता, उसे फटाफट छिपा लेते थे — अपनी आधिकारिक ज़िम्मेदारियों की आड़ में भौतिकी पर काम करते हुए। उन्होंने बाद में याद किया कि पेटेंट ऑफिस "वह धर्मनिरपेक्ष मठ था जहाँ मैंने अपने सबसे सुंदर विचारों को आकार दिया।"
इन्हीं वर्षों के दौरान Einstein पेटेंट ऑफिस से परे, Bern के बौद्धिक जीवन में भी हिस्सा लेते थे। उन्होंने दो दोस्तों — Maurice Solovine और Conrad Habicht — के साथ एक छोटा-सा चर्चा समूह बनाया, जिसे उन्होंने मज़ाक में Olympia Academy का नाम दिया। तीनों नियमित रूप से मिलते और दर्शन, विज्ञान व साहित्य पढ़कर उन पर चर्चा करते। उन्होंने Mach की Science of Mechanics, Hume की Treatise of Human Nature, Mill की Logic, और Poincare की संकलित रचनाओं पर काम किया। ये दार्शनिक पठन, विशेष रूप से न्यूटन के निरपेक्ष स्थान और समय की Mach की आलोचना और कार्य-कारण के बारे में Hume का संदेहवाद, ने सीधे तौर पर भौतिकी की नींव के प्रति Einstein के दृष्टिकोण को प्रभावित किया।
वे उन समस्याओं पर भी गहन काम कर रहे थे जो ETH के दिनों से उनके मन में घर कर गई थीं। वे ऊष्मागतिकी की नींव, ब्राउनियन गति की प्रकृति — किसी तरल में निलंबित छोटे कणों की अनियमित कंपन — और सबसे बढ़कर, यांत्रिकी और विद्युतगतिकी के बीच के संबंध को समझने की कोशिश कर रहे थे। ये सदी के मोड़ पर भौतिकी की सबसे गहरी और सबसे विवादास्पद समस्याओं में से थीं, और Einstein प्रमुख अनुसंधान केंद्रों से दूर, किसी पुस्तकालय या प्रयोगशाला तक पहुँच के बिना, अपने विचारों पर चर्चा करने के लिए किसी सहयोगी के बिना, केवल अपने असाधारण दिमाग और जो किताबें व पत्रिकाएं वे जुटा सकते थे उनके सहारे इन पर काम कर रहे थे।
चमत्कारी वर्ष
भौतिकी के इतिहास में 1905 का साल Einstein का annus mirabilis — यानी उनका चमत्कारी वर्ष — के नाम से जाना जाता है। कुछ ही महीनों की अवधि में, जब वे पेटेंट कार्यालय में पूरे समय काम कर रहे थे और अपने नवजात बेटे Hans Albert की देखभाल भी कर रहे थे, Einstein ने चार शोधपत्र लिखे जिन्होंने मिलकर भौतिकी की बुनियाद को ही बदल दिया। हर शोधपत्र एक अलग समस्या से जुड़ा था, और हर एक वैज्ञानिक तर्कशक्ति की एक अद्वितीय मिसाल था।
मार्च में प्रस्तुत पहले शोधपत्र में प्रकाश-विद्युत प्रभाव की एक क्रांतिकारी व्याख्या पेश की गई — यह प्रेक्षण कि किसी धातु की सतह पर प्रकाश पड़ने से इलेक्ट्रॉन बाहर निकल सकते हैं, लेकिन तभी जब प्रकाश की आवृत्ति एक निश्चित सीमा से अधिक हो, चाहे उसकी तीव्रता कुछ भी हो। शास्त्रीय तरंग सिद्धांत इस आवृत्ति-सीमा की निर्भरता को स्पष्ट नहीं कर सकता था। Einstein ने प्रस्तावित किया कि प्रकाश, अपने तरंग गुणों के बावजूद, ऊर्जा के असतत पैकेटों — क्वांटा — से बना हुआ भी व्यवहार कर सकता है, जिनमें से प्रत्येक की ऊर्जा प्रकाश की आवृत्ति के समानुपाती होती है। यह विचार Planck की क्वांटम परिकल्पना पर आधारित था, लेकिन उससे कहीं आगे जाता था — यह सुझाव देते हुए कि क्वांटीकरण विकिरण की एक मूलभूत विशेषता है, न कि महज एक गणितीय युक्ति। इसी शोधपत्र के लिए Einstein को अंततः नोबेल पुरस्कार मिला; इसने क्वांटम यांत्रिकी की नींव रखी और प्रकाश की द्वैत प्रकृति — तरंग और कण दोनों — को स्थापित किया।
मई में प्रस्तुत दूसरे शोधपत्र में Brownian गति का सैद्धांतिक स्पष्टीकरण दिया गया — यानी द्रव में निलंबित सूक्ष्म कणों की यादृच्छिक गति, जिसे वनस्पतिशास्त्री Robert Brown ने 1827 में पहली बार वर्णित किया था। Einstein ने दिखाया कि यह गति आसपास के द्रव के अणुओं के साथ अनगिनत छोटी-छोटी टक्करों का परिणाम है, और उन्होंने इस गति के सांख्यिकीय गुणों का वर्णन करने वाला एक गणितीय सूत्र व्युत्पन्न किया। इस शोधपत्र ने परमाणुओं और अणुओं के अस्तित्व के पक्ष में ठोस परोक्ष प्रमाण प्रस्तुत किए, जिसे उस समय कुछ भौतिकविद् अभी भी विवादास्पद मानते थे, और इसने ऊष्मागतिकी तथा परमाणु सिद्धांत के बीच एक सीधा संबंध स्थापित किया।
जून और सितंबर में प्रस्तुत तीसरे और चौथे शोधपत्रों ने मिलकर विशेष सापेक्षता का सिद्धांत और उसका सबसे प्रसिद्ध निष्कर्ष प्रस्तुत किया। जून के शोधपत्र में स्वयं सिद्धांत प्रस्तुत किया गया — यांत्रिकी की बुनियाद को Maxwell के विद्युतचुम्बकत्व के समीकरणों के अनुरूप बनाने के लिए उसका एक व्यवस्थित पुनर्निर्माण। मूल अंतर्दृष्टि यह थी कि प्रकाश की गति सभी प्रेक्षकों के लिए समान होती है, चाहे उनकी गति कैसी भी हो — और यह सिद्धांत, सापेक्षता के सिद्धांत (कि भौतिकी के नियम सभी जड़त्वीय निर्देश-तंत्रों में समान हैं) के साथ मिलकर, निरपेक्ष स्थान और समय की न्यूटनीय अवधारणाओं के संपूर्ण पुनर्विचार की मांग करता था। विशेष सापेक्षता के अनुसार, सापेक्ष गति में स्थित प्रेक्षकों के लिए समय अलग-अलग दर से बीतता है, गति की दिशा में लंबाइयाँ सिकुड़ती हैं, और एक साथ घटित होने की अवधारणा निरपेक्ष न होकर सापेक्ष होती है। ये भविष्यवाणियाँ अजीब और अस्वाभाविक लगती थीं, फिर भी वे केवल दो सरल अभिधारणाओं से अटल तार्किक अनिवार्यता के साथ निकलती थीं।
सितंबर के शोधपत्र ने विशेष सिद्धांत से एक संक्षिप्त किंतु गहन निष्कर्ष निकाला: द्रव्यमान और ऊर्जा की तुल्यता। Einstein ने दिखाया कि ऊर्जा का द्रव्यमान होता है, और द्रव्यमान संचित ऊर्जा का एक रूप है। उनके बीच का संबंध अद्भुत सरलता वाले एक समीकरण में व्यक्त किया गया: ऊर्जा बराबर है द्रव्यमान गुणा प्रकाश की गति का वर्ग। यह समीकरण, अपने सबसे प्रसिद्ध रूप E equals mc squared में लिखा गया, इस तथ्य को व्यक्त करता है कि थोड़ी-सी मात्रा के द्रव्यमान में भी ऊर्जा की अपार मात्रा समाई होती है — एक ऐसा निष्कर्ष जो दशकों बाद अंततः परमाणु ऊर्जा और परमाणु हथियार, दोनों के विकास का आधार बना।
ये चारों शोध-पत्र कुछ ही महीनों के अंतराल में प्रतिष्ठित पत्रिका Annalen der Physik को सौंपे गए थे। Einstein उस वक्त छब्बीस साल के थे, एक पेटेंट दफ्तर में गुमनामी में काम कर रहे थे — न कोई शैक्षणिक संस्था से जुड़ाव था, न किसी बड़े शोध संस्थान तक पहुँच। ये पत्र प्रकाशित हुए, और फिर चुप्पी छा गई। पहचान धीरे-धीरे मिली। भौतिकविद Max Planck, जो Annalen der Physik के संपादक थे, ने लगभग तुरंत ही सापेक्षता के शोध-पत्र का महत्त्व भाँप लिया और Einstein से पत्र-व्यवहार शुरू कर दिया। Planck का समर्थन इस मायने में निर्णायक साबित हुआ कि इससे व्यापक भौतिकी समुदाय का ध्यान Einstein के काम की ओर खिंचा।
यह कहानी कि एक ही साल में ये चारों शोध-पत्र कैसे तैयार हुए, तब से विज्ञान के इतिहासकारों को हमेशा मोहित करती रही है। Einstein ने बाद में 1905 के उन महीनों को असाधारण मानसिक उर्वरता का दौर बताया — जब बरसों से मन में पकती आ रही विचारों को अचानक एक स्पष्ट और संप्रेषणीय रूप मिल गया हो। वे पेटेंट दफ्तर में पूर्णकालिक काम कर रहे थे और शाम और सप्ताहांत भौतिकी को देते थे — उनके अपने कहे अनुसार, नींद बहुत कम लेते थे। उन महीनों की वह सृजनात्मक तीव्रता उनके शेष करियर में दोबारा कभी उसी रूप में नहीं आई, भले ही सामान्य सापेक्षता का बाद का विकास कई मायनों में और भी अधिक माँग करने वाली बौद्धिक उपलब्धि था। यह चमत्कारी वर्ष एक ऐसे सृजनात्मक विस्फोट का प्रतीक है जिसे अधिकतर वैज्ञानिक जीवन में एक बार भी नहीं अनुभव कर पाते — और जिसे Einstein ने विज्ञान के इतिहास में अतुलनीय गहराई और विस्तार के साथ जिया।
विशेष सापेक्षता सिद्धांत
विशेष सापेक्षता सिद्धांत, जो जून 1905 के शोध-पत्र "On the Electrodynamics of Moving Bodies" में प्रस्तुत किया गया, उस गहरे तनाव को सुलझाता है जो 1860 के दशक में Maxwell द्वारा विद्युतचुंबकत्व के सूत्रीकरण के बाद से भौतिकी में बना हुआ था। Maxwell के समीकरणों ने भविष्यवाणी की थी कि विद्युतचुंबकीय तरंगें — जिनमें प्रकाश भी शामिल है — एक निश्चित गति से, लगभग तीन लाख किलोमीटर प्रति सेकंड, संचरित होती हैं। लेकिन इससे एक गहरा सवाल उठा: किसके सापेक्ष निश्चित? न्यूटनीय यांत्रिकी एक निरपेक्ष अंतरिक्ष की कल्पना करती थी — एक स्थिर पृष्ठभूमि जिसके सापेक्ष सभी गतियाँ मापी जा सकें। भौतिकविदों ने एक माध्यम की परिकल्पना की थी जिसे luminiferous ether कहा जाता था — जो पूरे अंतरिक्ष में भरा हुआ है और जिसके सापेक्ष प्रकाश अपनी विशिष्ट गति से चलता है।
समस्या यह थी कि कोई भी प्रयोग ether का पता नहीं लगा सका। 1887 का Michelson-Morley प्रयोग, जिसमें विभिन्न दिशाओं में प्रकाश की गति की तुलना करके ether में पृथ्वी की गति मापने की कोशिश की गई थी, कोई अंतर नहीं पा सका। इस शून्य परिणाम को समझाने के लिए किए गए विभिन्न प्रयास — यह सुझाव देकर कि वस्तुएँ ether में चलते हुए सिकुड़ जाती हैं, या कि ether पृथ्वी के साथ खिंचता चलता है — असंतोषजनक और तदर्थ थे।
Einstein का तरीका था — सब कुछ नए सिरे से शुरू करना। Maxwell के समीकरणों को न्यूटनीय यांत्रिकी से संगत बनाने की जुगत लगाने के बजाय, उन्होंने Maxwell के समीकरणों को मूलभूत मान लिया और यांत्रिकी को उनके अनुकूल नए सिरे से गढ़ा। उन्होंने दो सिद्धांत प्रस्तावित किए: पहला, कि भौतिकी के नियम सभी जड़त्वीय संदर्भ फ्रेमों में (यानी एक-दूसरे के सापेक्ष नियत वेग से चलने वाले फ्रेमों में) एक समान हैं; और दूसरा, कि निर्वात में प्रकाश की गति सभी प्रेक्षकों के लिए समान है, चाहे स्रोत या प्रेक्षक की गति कुछ भी हो। केवल इन्हीं दो अभिधारणाओं से विशेष सापेक्षता की पूरी संरचना उभर आती है।
इसके परिणाम चौंकाने वाले हैं। काल-प्रसरण: किसी प्रेक्षक के सापेक्ष गतिमान घड़ी धीमी चलती है। लंबाई-संकुचन: किसी प्रेक्षक के सापेक्ष गतिमान वस्तु गति की दिशा में छोटी दिखती है। एक-साथता की सापेक्षता: जो दो घटनाएँ एक प्रेक्षक के लिए एक साथ होती हैं, वे सापेक्ष गति में किसी दूसरे प्रेक्षक के लिए जरूरी नहीं कि एक साथ हों। द्रव्यमान-वृद्धि: किसी गतिमान वस्तु का त्वरण के प्रति जड़त्वीय प्रतिरोध गति बढ़ने के साथ बढ़ता जाता है और प्रकाश की गति पर अनंत हो जाता है — इसीलिए प्रकाश की गति किसी भी द्रव्यमान वाली वस्तु के लिए अधिकतम संभव गति है।
ये परिणाम केवल सैद्धांतिक नहीं हैं। इन्हें अनगिनत बार प्रयोगों द्वारा सिद्ध किया जा चुका है। GPS उपग्रहों को सापेक्षतावादी समय-विस्तार (relativistic time dilation) के लिए सुधार करना पड़ता है, वरना उनकी स्थिति की गणनाओं में भारी त्रुटियाँ जमा हो जाती हैं। कण त्वरक (particle accelerators) नियमित रूप से कणों को उन वेगों तक त्वरित करते हैं जहाँ सापेक्षतावादी द्रव्यमान वृद्धि स्पष्ट रूप से दिखाई देती है। ऊपरी वायुमंडल से पृथ्वी की सतह तक पहुँचने वाले म्यूऑन (muons) का अस्तित्व — उनके कम अर्ध-जीवन (half-lives) के बावजूद — समय-विस्तार द्वारा समझाया जाता है। विशेष सापेक्षता विज्ञान के इतिहास में सबसे अधिक परखे गए सिद्धांतों में से एक है।
Einstein ने स्वयं इस सिद्धांत को ऐसी स्पष्टता और संक्षिप्तता के साथ प्रस्तुत किया जो मूलभूत सिद्धांतों को पहचानने की उनकी प्रतिभा को दर्शाता है। उन्होंने अनावश्यक मान्यताओं — ईथर, परम स्थान, परम समय — को हटा दिया और न्यूनतम आवश्यक आधारों पर सिद्धांत का निर्माण किया। यह दृष्टिकोण, जो Mach और Hume के उनके अध्ययन से प्रभावित था, उनके महानतम सैद्धांतिक कार्य की पहचान बन गया।
सामान्य सापेक्षता का सिद्धांत
विशेष सापेक्षता का सिद्धांत, जैसा कि इसके नाम से ही स्पष्ट है, एक विशेष मामला था — यह जड़त्वीय निर्देश तंत्रों (inertial frames) पर, यानी नियत वेग से गतिमान प्रेक्षकों पर लागू होता था। Einstein इस सीमा से तुरंत असंतुष्ट हो गए। वास्तविक दुनिया में वस्तुएँ त्वरित होती हैं और गुरुत्वाकर्षण सर्वव्यापी है। वे एक ऐसा सिद्धांत चाहते थे जो गुरुत्वाकर्षण को समाहित कर सके और सभी निर्देश तंत्रों को — चाहे वे त्वरित हों या नहीं — संभाल सके।
विशेष से सामान्य सापेक्षता तक का सफर दस वर्षों — 1905 से 1915 तक — में तय हुआ, और यह किसी एक व्यक्ति द्वारा की गई सबसे कठिन बौद्धिक यात्राओं में से एक थी। Einstein ने बाद में स्वयं इस प्रयास को वर्षों तक अंधेरे में टटोलने, गलत रास्तों पर चलने और नए सिरे से शुरुआत करने के रूप में वर्णित किया। उन्होंने मौलिक गलतियाँ कीं, ऐसे शोध-पत्र प्रकाशित किए जिन्हें बाद में वापस लेना या सुधारना पड़ा, इन असफलताओं से अपनी स्वाभाविक दृढ़ता के साथ उबरे, और अंततः एक ऐसे सिद्धांत तक पहुँचे जो अपने विस्तार और सौंदर्य में अद्भुत था और एक सदी से भी अधिक समय से अप्रतिद्वंद्वी बना हुआ है।
निर्णायक अंतर्दृष्टि लगभग 1907 में, शुरुआती दौर में ही आई, जब Einstein विशेष सापेक्षता पर एक शोध-पत्र की समीक्षा कर रहे थे और अचानक उन्हें वह विचार आया जिसे उन्होंने अपने जीवन का सबसे सुखद विचार कहा। उन्हें एहसास हुआ कि स्वतंत्र रूप से गिरता हुआ व्यक्ति — मुक्त पतन में, बिना किसी रुकावट के — अपना वजन महसूस नहीं करेगा। उसके लिए गुरुत्वाकर्षण अदृश्य होगा। इसका मतलब था कि मुक्त पतन गुरुत्वाकर्षण की अनुपस्थिति के समतुल्य है — कि एक स्वतंत्र रूप से गिरते निर्देश तंत्र में, भौतिकी के नियम वैसे ही दिखते हैं जैसे वे अंतरिक्ष के गुरुत्वाकर्षण-मुक्त क्षेत्र में दिखते हैं। समतुल्यता का यह सिद्धांत — गुरुत्वाकर्षणीय और जड़त्वीय प्रभावों की समतुल्यता — सामान्य सापेक्षता की आधारशिला बनने वाला था।
Einstein ने इस अंतर्दृष्टि को व्यक्त करने के लिए आवश्यक गणितीय ढाँचा विकसित करने में वर्षों बिताए। उन्हें एक ऐसे फ्रेमवर्क की जरूरत थी जो वक्र स्पेसटाइम (curved spacetime) — एक ऐसे ब्रह्मांड की ज्यामिति जिसमें गुरुत्वाकर्षण कोई बल नहीं बल्कि स्थान और काल के चार-आयामी ताने-बाने की वक्रता है — का वर्णन कर सके। इसके लिए टेंसर कलन (tensor calculus) और रीमानी ज्यामिति (Riemannian geometry) की जरूरत थी — ऐसे गणितीय उपकरण जो Einstein को अपने मित्र Marcel Grossmann की सहायता से सीखने पड़े, जो उस समय ETH में गणित के प्राध्यापक थे। Einstein और Grossmann के बीच यह सहयोग अत्यंत महत्वपूर्ण था, और Einstein ने अपने पूरे करियर में Grossmann के प्रति अपना ऋण खुलकर स्वीकार किया।
सामान्य सापेक्षता के अंतिम क्षेत्र समीकरण (field equations) नवंबर 1915 में प्रकाशित हुए, एक उन्मत्त और अत्यंत श्रमसाध्य कार्यकाल के बाद, जिसमें Einstein एक साथ गणितज्ञ David Hilbert के साथ होड़ में भी थे, जिनकी पहुँच Einstein के पूर्व कार्य तक थी और जो अपने स्वयं के क्षेत्र समीकरणों के संस्करण पर काम कर रहे थे। Einstein और Hilbert के बीच प्राथमिकता विवाद बाद में Einstein के पक्ष में सुलझाया गया, और सामान्य सापेक्षता के निर्माता के रूप में Einstein को सार्वभौमिक रूप से मान्यता दी जाती है।
सामान्य सापेक्षता सिद्धांत गुरुत्वाकर्षण को द्रव्यमान और ऊर्जा की उपस्थिति से उत्पन्न स्पेसटाइम की वक्रता के रूप में वर्णित करता है। पदार्थ स्पेसटाइम को बताता है कि कैसे मुड़ना है, और मुड़ा हुआ स्पेसटाइम पदार्थ को बताता है कि कैसे गतिमान होना है। सूर्य की परिक्रमा करने वाला कोई ग्रह किसी गुरुत्वाकर्षण बल द्वारा खींचा नहीं जाता — वह मुड़े हुए स्पेसटाइम में सबसे सीधे संभव पथ पर चलता है। प्रकाश, द्रव्यमान न होने के बावजूद, गुरुत्वाकर्षण से विक्षेपित होता है क्योंकि वह भी उसी मुड़े हुए स्पेसटाइम से होकर गुज़रता है।
यह भविष्यवाणी — कि किसी विशाल पिंड के गुरुत्वाकर्षण क्षेत्र से प्रकाश मुड़ जाएगा — सूर्यग्रहण के दौरान परखी जा सकती थी, जब सूर्य के किनारे के पास के तारे दिखाई देते हैं। Einstein ने इस विक्षेपण की मात्रा का अनुमान लगाया था, जो न्यूटनीय यांत्रिकी द्वारा अनुमानित मान से दोगुनी थी। मई 1919 में, दो ब्रिटिश अभियानों ने — जिनमें से एक का नेतृत्व Arthur Eddington ने किया — सूर्यग्रहण का अवलोकन किया और सूर्य के चारों ओर तारों के प्रकाश के विक्षेपण को मापा। परिणामों ने प्रायोगिक त्रुटि की सीमाओं के भीतर Einstein की भविष्यवाणी की पुष्टि की।
चमत्कारी वर्ष का वैज्ञानिक संदर्भ
1905 में Einstein ने जो हासिल किया उसकी पूरी महत्ता को समझने के लिए, उस वैज्ञानिक परिदृश्य को जानना ज़रूरी है जिसमें वे काम कर रहे थे। बीसवीं सदी की शुरुआत में भौतिकी एक रचनात्मक संकट की अवस्था में थी। Newton का शास्त्रीय यांत्रिकी और Maxwell का शास्त्रीय विद्युतगतिकी — दोनों ही अत्यंत सफल सिद्धांत थे, जिनमें से प्रत्येक प्रायोगिक साक्ष्यों के विशाल भंडार से प्रमाणित था। लेकिन वे मूलतः असंगत प्रतीत होते थे, और उन्हें मेल कराने के प्रयासों से तदर्थ परिकल्पनाओं और अनसुलझे विरोधाभासों का एक उलझा जाल तैयार हो गया था।
ईथर की समस्या इस संकट का सबसे स्पष्ट लक्षण थी। Maxwell के विद्युतचुंबकत्व के सिद्धांत में प्रकाश को एक माध्यम से होकर गुज़रने वाली तरंग माना गया था, ठीक वैसे ही जैसे ध्वनि तरंगें हवा से होकर गुज़रती हैं। लेकिन कोई भी इस माध्यम की पहचान नहीं कर पाया था और न ही इससे होकर गुज़रने वाली गति का पता लगा पाया था। 1887 के Michelson-Morley प्रयोग ने, जिसमें विभिन्न दिशाओं में प्रकाश की गति में किसी भी अंतर को मापने के लिए एक अत्यंत सटीक इंटरफेरोमीटर का उपयोग किया गया था, कोई अंतर नहीं पाया — अनुमानित ईथर से होकर पृथ्वी की गति का कोई पता लगाने योग्य निशान नहीं मिला। यह परिणाम इतना चौंकाने वाला था कि इसने सैद्धांतिक जोड़-तोड़ का एक छोटा-सा उद्योग खड़ा कर दिया। आयरिश भौतिक विज्ञानी George Fitzgerald और डच भौतिक विज्ञानी Hendrik Lorentz ने स्वतंत्र रूप से यह प्रस्ताव रखा कि ईथर से होकर गतिमान वस्तुएँ अपनी गति की दिशा में थोड़ी सिकुड़ जाती हैं — ठीक उतनी, जितनी किसी भी पता लगाने योग्य प्रभाव को打消 करने के लिए आवश्यक हो। Lorentz ने इस विचार को एक परिष्कृत गणितीय ढाँचे में विकसित किया और ऐसे समीकरण निकाले जो वर्णन करते थे कि सापेक्ष गति में आसंदर्भ तंत्रों के बीच स्थान और समय के मापन किस प्रकार रूपांतरित होंगे।
Lorentz के रूपांतरण — जो बिल्कुल सही निकले — की व्याख्या Lorentz ने स्वयं ईथर से होकर गति के कारण उत्पन्न वास्तविक भौतिक प्रभावों के रूप में की थी। Einstein की वैचारिक क्रांति यह थी कि उन्होंने उन्हीं गणितीय रूपांतरणों की बिल्कुल अलग व्याख्या की: इन्हें किसी माध्यम से होकर गति के प्रभावों के रूप में नहीं, बल्कि स्थान और समय की प्रकृति के मूलभूत परिणामों के रूप में देखा। ईथर को पूरी तरह नकारकर और Lorentz के रूपांतरणों की एक नई व्याख्या अपनाकर, Einstein ने उस बात को स्पष्ट किया जिसे Lorentz ने गणितीय रूप से तो वर्णित किया था, लेकिन भौतिक रूप से पूरी तरह समझा नहीं था।
सांख्यिकीय यांत्रिकी की ऊष्मागतिकीय नींव भी सक्रिय बहस का एक और क्षेत्र थी। पदार्थ के स्थूल ऊष्मागतिकीय गुणों — तापमान, दाब, ऊष्मा — और परमाणुओं तथा अणुओं के सूक्ष्म व्यवहार के बीच के संबंध को Ludwig Boltzmann, Josiah Willard Gibbs और अन्य वैज्ञानिक सुलझाने में लगे थे। आणविक अवस्थाओं के सांख्यिकीय वितरण के संदर्भ में Boltzmann की एन्ट्रॉपी की व्याख्या प्रतिभाशाली थी, लेकिन विवादास्पद भी — कुछ प्रमुख भौतिकविदों, विशेष रूप से Ernst Mach ने, दार्शनिक आधार पर परमाण्विक परिकल्पना को पूरी तरह खारिज कर दिया, यह तर्क देते हुए कि परमाणु अवेक्षणीय सैद्धांतिक निर्माण मात्र हैं जिन्हें भौतिकी के सिद्धांत से हटा दिया जाना चाहिए। Einstein के 1902-1904 के सांख्यिकीय यांत्रिकी पर लेख और 1905 का ब्राउनियन गति पर शोधपत्र इस बहस से सीधे जुड़े थे — उन्होंने मात्रात्मक भविष्यवाणियाँ प्रस्तुत कीं जिन्हें जब प्रयोगात्मक रूप से सत्यापित किया गया, तो परमाण्विक परिकल्पना को उसका सबसे ठोस समर्थन मिला।
क्वांटम परिकल्पना उस दौर का सबसे क्रांतिकारी नया विकास थी। Max Planck ने 1900 में ऊर्जा क्वांटा की अवधारणा प्रस्तुत की थी — एक गर्म पिंड से उत्सर्जित विकिरण के स्पेक्ट्रम की व्याख्या करने के लिए, जिसे ब्लैकबॉडी विकिरण की समस्या कहा जाता था। Planck की व्युत्पत्ति सही थी, लेकिन उसकी भौतिक व्याख्या अनिश्चित थी। उन्होंने क्वांटीकरण को विकिरण क्षेत्र का नहीं, बल्कि गुहा की दीवारों में स्थित अनुनादकों का गुण माना। Einstein के 1905 के फोटोइलेक्ट्रिक प्रभाव पर शोधपत्र ने इससे कहीं अधिक साहसी कदम उठाया — यह प्रस्ताव करते हुए कि स्वयं प्रकाश क्वांटीकृत है, अर्थात विकिरण क्षेत्र असतत क्वांटा से मिलकर बना है, जिनमें से प्रत्येक प्रकाश की आवृत्ति के समानुपाती ऊर्जा वहन करता है। यह विचार Maxwell के प्रकाश के तरंग सिद्धांत का खंडन करता प्रतीत होता था, और अधिकांश भौतिकविदों ने — यहाँ तक कि Planck ने भी — इसे गहरी संशय की दृष्टि से देखा।
इस प्रकार Einstein एक साथ भौतिकी की तीन सबसे गहरी समस्याओं पर काम कर रहे थे, और उन्होंने इन्हें सुलझाया — या इनके समाधान की दिशा में निर्णायक कदम उठाए — एक ही वर्ष में। उनकी उपलब्धि की व्यापकता उतनी ही उल्लेखनीय है जितनी उसकी गहराई। अधिकांश भौतिकविद, यहाँ तक कि सबसे महान भी, अपने पूरे करियर में एक ही क्षेत्र में काम करते हैं। Einstein की ऊष्मागतिकी, विद्युतगतिकी और क्वांटम सिद्धांत के बीच सहजता से विचरण करने की क्षमता — प्रत्येक समस्या की मूल संरचना को पहचानते हुए और अप्रासंगिक तत्वों को परे हटाते हुए — भौतिक अंतर्ज्ञान, गणितीय कौशल और दार्शनिक साहस के असाधारण संयोजन को दर्शाती है।
Einstein की यहूदी पहचान और ज़ायोनीवाद
Einstein का अपनी यहूदी पहचान के साथ संबंध जटिल, गहरे व्यक्तिगत था, और उनके जीवनकाल में उनके आंतरिक विकास तथा यूरोपीय यहूदी इतिहास की बाह्य परिस्थितियों, दोनों के प्रभाव में काफी बदलता रहा। उनके माता-पिता धर्मनिरपेक्ष यहूदी थे जिन्होंने अपने बच्चों को न्यूनतम यहूदी शिक्षा दी, और Einstein का यहूदी धार्मिक आचरण से कोई विशेष औपचारिक संबंध नहीं रहा। म्युनिख के gymnasium में किशोरावस्था में उन्होंने कुछ समय के लिए व्यक्तिगत धार्मिकता का एक तीव्र दौर अनुभव किया, लेकिन जल्द ही इससे विमुख हो गए जब उन्होंने लोकप्रिय विज्ञान की पुस्तकें पढ़नी शुरू कीं और धार्मिक परंपरा तथा वैज्ञानिक तर्कसंगतता के बीच टकराव महसूस किया। जीवन भर वे सांस्कृतिक रूप से स्वयं को यहूदी मानते रहे, लेकिन धार्मिक आचरण को उन्होंने अस्वीकार किया।
उनकी यहूदी पहचान मुख्यतः आस्था का विषय नहीं, बल्कि एकजुटता का विषय थी — एक साझा इतिहास और साझी भेद्यता की स्वीकृति, जिसे यहूदी-विरोधी भावना के अनुभवों ने नज़रअंदाज़ करना असंभव बना दिया था। 1890 के दशक में फ्रांस में हुए Dreyfus Affair को उन्होंने एक युवा के रूप में करीब से देखा, और इसने उन पर यूरोपीय यहूदी-विरोधी भावना की गहराई और स्थायित्व की छाप छोड़ी — यहाँ तक कि उन समाजों में भी जो겉으로से उदार दिखते थे। प्रथम विश्वयुद्ध के दौरान और उसके बाद जर्मनी में यहूदी-विरोध की बढ़ती लहर ने यहूदी प्रश्न को तात्कालिक और व्यक्तिगत बना दिया।
ज़ायोनीवाद के साथ Einstein का रिश्ता शुरुआत में ठंडा था। वे किसी भी रूप में राष्ट्रवाद के प्रति संशयी थे — यहूदी राष्ट्रवाद भी इससे अछूता नहीं था — और उन्हें यह चिंता सताती थी कि फ़िलिस्तीन में एक यहूदी राज्य यूरोपीय जातीय राष्ट्रवाद की समस्याओं से ऊपर उठने के बजाय उन्हें ही दोहराएगा। वे फ़िलिस्तीन में यहूदी बसने वालों और अरब आबादी के बीच के संबंधों को लेकर भी चिंतित थे, और उन्होंने हमेशा बहिष्कार और वर्चस्व की जगह सहअस्तित्व और आपसी समझ की वकालत की।
जिस चीज़ ने उन्हें ज़ायोनी आंदोलन का सक्रिय समर्थक बनाया, वह राजनीतिक राष्ट्रवाद नहीं, बल्कि जेरूसलम में Hebrew University की विशेष परियोजना थी। Einstein विश्वविद्यालय की योजना में शुरुआती चरण से ही शामिल थे, और 1923 में वे फ़िलिस्तीन गए — यह मध्य-पूर्व की उनकी पहली यात्रा थी। वहाँ यहूदी समुदायों को देखकर वे भीतर से हिल गए — यूरोपीय उत्पीड़न की राख से एक सच्ची नई संस्कृति खड़ी करने का वह संघर्ष उन्हें छू गया — और उन्होंने विश्वविद्यालय के पहले गवर्नर बोर्ड का सदस्य बनना स्वीकार किया। Hebrew University के प्रति उनका लगाव जीवन भर उनकी सबसे गहरी प्रतिबद्धताओं में से एक बना रहा।
1933 में नाज़ियों के सत्ता में आने से Einstein का यहूदी पहचान से रिश्ता गहरे और मार्मिक तरीके से बदल गया। जिस समुदाय से वे कुछ बौद्धिक दूरी बनाए रखते थे, वह अचानक और भयावह रूप से संकट में पड़ गया। उनकी प्रतिक्रिया व्यावहारिक और व्यक्तिगत दोनों थी: उन्होंने यहूदी वैज्ञानिकों और बुद्धिजीवियों को नाज़ी जर्मनी से बाहर निकलने में मदद करने के लिए अथक प्रयास किए — अपनी प्रसिद्धि से दरवाज़े खुलवाए और अपने संपर्कों से पद और वीज़ा दिलवाए। उनके हस्तक्षेप से सैकड़ों लोगों को फ़ायदा पहुँचा।
द्वितीय विश्व युद्ध और Holocaust के बाद Einstein के सामने इस तबाही की पूरी गहराई सामने आई। उनकी प्रतिक्रिया जटिल थी: उन्होंने 1948 में इज़राइल राज्य की स्थापना का समर्थन किया, लेकिन साथ ही अपने अरब पड़ोसियों के साथ उसके संबंधों को लेकर चिंता जताते रहे और दोनों जनसमूहों के अधिकारों की रक्षा करने वाले द्विराष्ट्रीय समाधान की वकालत करते रहे। जब इज़राइल के पहले राष्ट्रपति Chaim Weizmann का 1952 में निधन हुआ, तो Einstein से राष्ट्रपति पद स्वीकार करने का अनुरोध किया गया। उन्होंने इनकार कर दिया — अपनी चिर-परिचित आत्म-जागरूकता के साथ — यह कहते हुए कि लोगों से व्यवहार करने और आधिकारिक कार्यों को निभाने की स्वाभाविक योग्यता और अनुभव उनमें नहीं है। और शायद, वे एक व्यक्ति की बजाय एक प्रतीक बनने को भी तैयार नहीं थे।
Einstein की अमेरिका यात्राएँ और Princeton में आगमन
1933 में यूरोप से अपनी अंतिम विदाई से पहले Einstein ने संयुक्त राज्य अमेरिका की कई विस्तारित यात्राएँ कीं। इन यात्राओं ने वहाँ बसने के उनके अंतिम फ़ैसले को आकार दिया और उन्हें अमेरिकी संस्कृति तथा शैक्षणिक परिवेश की एक ऐसी समझ दी, जिससे उनका यह बदलाव अन्यथा की तुलना में कुछ सहज हो गया।
उनकी पहली यात्रा 1921 में हुई, जब वे जेरूसलम में Hebrew University के लिए धन-संग्रह अभियान पर Chaim Weizmann के साथ गए। यह दौरा एक सार्वजनिक आयोजन के रूप में अभूतपूर्व रूप से सफल रहा। New York और अन्य शहरों में दुनिया के सबसे मशहूर वैज्ञानिक की एक झलक पाने के लिए भारी भीड़ उमड़ पड़ी। Einstein का जश्न मनाया गया, लगातार साक्षात्कार लिए गए और तस्वीरें खिंचाई गईं। उन्होंने Princeton, Columbia और City College of New York में व्याख्यान दिए, और Princeton University से मानद उपाधि प्राप्त की। अपनी प्रसिद्धि के प्रति अमेरिकी प्रतिक्रिया की तीव्रता उन्हें एक साथ मनोरंजक भी लगी और कुछ हद तक अभिभूत करने वाली भी।
वे 1930-31 में और फिर 1931-32 में लौटे, हर बार पासाडेना स्थित कैलिफोर्निया इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी में कई महीने बिताए, जहाँ उन्होंने उन खगोलविदों के साथ मिलकर काम किया जो ब्रह्मांड की बड़े पैमाने की संरचना के अध्ययन में सामान्य सापेक्षता को सक्रिय रूप से लागू कर रहे थे। ये वे वर्ष थे जब Edwin Hubble और अन्य वैज्ञानिक ब्रह्मांड के विस्तार और ब्रह्मांड विज्ञान के लिए उसके निहितार्थ को स्थापित कर रहे थे, और Einstein ने खुद को उन प्रेक्षणात्मक खगोलविदों के साथ एक उपयोगी संवाद में पाया जिनका काम सीधे उन समीकरणों से जुड़ा था जो उन्होंने विकसित किए थे। उन्होंने पहले अपने क्षेत्र समीकरणों में एक पद जोड़ा था — ब्रह्मांडीय स्थिरांक — ताकि उनके समीकरण किसी फैलते या सिकुड़ते ब्रह्मांड की भविष्यवाणी न करें, क्योंकि वे सौंदर्यगत आधार पर मानते थे कि ब्रह्मांड स्थिर होना चाहिए। जब Hubble के प्रेक्षणों ने दिखाया कि ब्रह्मांड वास्तव में फैल रहा है, तो Einstein ने ब्रह्मांडीय स्थिरांक को अपनी सबसे बड़ी भूल बताया — एक ऐसा कथन जिसमें बाद में और भी विडंबना आ गई जब ब्रह्मांड विज्ञानियों को डार्क एनर्जी के एक रूप के प्रमाण मिले जो ब्रह्मांडीय स्थिरांक जैसी ही भूमिका निभाता है।
इंस्टीट्यूट फॉर एडवांस्ड स्टडी, जिसकी स्थापना 1930 में Louis Bamberger और उनकी बहन Caroline Bamberger Fuld के एक बड़े दान से हुई थी, विशेष रूप से इसलिए बनाया गया था ताकि शुद्ध बौद्धिक कार्य के लिए एक ऐसा आश्रय मिल सके जो साधारण विश्वविद्यालय जीवन के अध्यापन और प्रशासनिक बोझ से मुक्त हो। इसकी पहली स्थायी नियुक्ति Einstein थे, जो 1933 में इंस्टीट्यूट से जुड़े। उन्हें एक अच्छा वेतन, एक घर, एक सहायक और जो भी शोध वे चाहें करने की पूर्ण स्वतंत्रता दी गई। इंस्टीट्यूट ने अन्य प्रवासी विद्वानों को भी आकर्षित किया — गणितज्ञों, इतिहासकारों, सामाजिक वैज्ञानिकों को — और यह दुनिया के सबसे प्रतिष्ठित बौद्धिक केंद्रों में से एक बन गया।
Princeton में अपने सहयोगियों के साथ Einstein का संबंध गर्मजोशी भरा, लेकिन कभी-कभी दूरी वाला भी था। व्यक्तिगत मुलाकातों में वे सहज और मिलनसार थे, लेकिन अपना अधिकांश समय दफ्तर या घर में अपने एकीकृत क्षेत्र सिद्धांत पर काम करते हुए बिताते थे, और भौतिकी की मुख्यधारा से क्रमशः अलग होते जा रहे थे। वे इंस्टीट्यूट की चाय-गोष्ठियों और कभी-कभार के व्याख्यानों में शामिल होते थे, लेकिन बौद्धिक संवादों में चुनिंदा रहते थे। इंस्टीट्यूट के युवा गणितज्ञ और भौतिकीविद् उनका बहुत सम्मान करते थे, लेकिन उन्हें लगता था कि Einstein की भौतिकी उन दिशाओं से भटकती जा रही है जो उन्हें सबसे अधिक आशाजनक लगती थीं।
Einstein और आधुनिक ब्रह्मांड विज्ञान का विकास
Einstein के सामान्य सापेक्षता के सिद्धांत और आधुनिक ब्रह्मांड विज्ञान के उद्भव के बीच का संबंध विज्ञान के इतिहास में इसके सबसे नाटकीय उदाहरणों में से एक है — जहाँ एक भौतिक सिद्धांत अपने प्रेक्षणात्मक प्रमाण से पहले आया और उसकी भविष्यवाणी भी की। Einstein ने 1915 में अपने क्षेत्र समीकरण प्रकाशित किए, और एक साल के भीतर ही Willem de Sitter, Karl Schwarzschild और Alexander Friedmann ने उन समीकरणों के सटीक हल निकाल लिए जो विशिष्ट भौतिक परिदृश्यों का वर्णन करते थे। Schwarzschild का हल, जो क्षेत्र समीकरणों से निकाला गया था, जब Schwarzschild खुद प्रथम विश्व युद्ध में रूसी मोर्चे पर तैनात थे — साल खत्म होने से पहले ही बीमारी से उनकी मृत्यु हो गई — एक पूर्णतः गोलाकार, गैर-घूर्णन द्रव्यमान के बाहर के सटीक स्पेसटाइम ज्यामिति का वर्णन करता था, और इस हल के गणित में उसकी भविष्यवाणी छिपी थी जिसे बाद में ब्लैक होल कहा जाएगा। Friedmann के हल, जो 1922 में मिले, एक फैलते या सिकुड़ते ब्रह्मांड का वर्णन करते थे — ऐसे हल जिन्हें Einstein ने शुरू में गणितीय जिज्ञासाएँ मानकर नकार दिया था, लेकिन जो बाद में भौतिक वास्तविकता का वर्णन करते साबित हुए।
Georges Lemaitre, जो एक बेल्जियन पादरी और खगोलशास्त्री थे, उन्होंने 1927 में Friedmann के विस्तारित ब्रह्मांड के मॉडल को आगे बढ़ाया और यह प्रस्ताव रखा कि वर्तमान विस्तार से यह संकेत मिलता है कि अतीत में एक ऐसा क्षण था जब ब्रह्मांड अत्यंत सघन अवस्था में था, और वहीं से उसकी उत्पत्ति हुई — जिसे बाद में बिग बैंग के नाम से जाना गया। Einstein ने शुरुआत में इस विचार को नकार दिया और कथित तौर पर Lemaitre से कहा कि उनका गणित तो सही है, लेकिन उनकी भौतिकी घटिया है। जब 1920 के दशक के अंत और 1930 के दशक की शुरुआत में Hubble के अवलोकन संबंधी साक्ष्य ब्रह्मांड के विस्तार के पक्ष में ठोस रूप से सामने आए, तो Einstein ने इसे स्वीकार कर लिया और उस कॉस्मोलॉजिकल कॉन्स्टेंट को त्याग दिया जिसे उन्होंने ठीक ऐसी ही किसी भविष्यवाणी को रोकने के लिए प्रस्तुत किया था।
ब्रह्मांड विज्ञान के लिए सामान्य सापेक्षता के निहितार्थों पर अभी भी काम हो रहा है। 1920 के दशक के अंत में जिस ब्रह्मांड के विस्तार की इतनी निर्णायक रूप से पुष्टि हुई थी, उसे 1998 में त्वरित गति से बढ़ता हुआ पाया गया — इस खोज के लिए Einstein के कॉस्मोलॉजिकल कॉन्स्टेंट के समकक्ष एक पद को शामिल करना आवश्यक हो गया, जिसे अब खाली अंतरिक्ष की ऊर्जा घनत्व के रूप में व्याख्यायित किया जाता है, जिसे खगोल भौतिकीविद डार्क एनर्जी कहते हैं। डार्क मैटर का अस्तित्व, ब्लैक होल के गुण-धर्म, गुरुत्वीय तरंगों की प्रकृति — ये सभी सक्रिय शोध के क्षेत्र हैं जिनमें सीधे तौर पर Einstein के समीकरण शामिल हैं।
2015 में Laser Interferometer Gravitational-Wave Observatory द्वारा गुरुत्वीय तरंगों का पता लगाना शायद सामान्य सापेक्षता के सूत्रीकरण के बाद की एक सदी में उसकी सबसे शानदार प्रत्यक्ष पुष्टि थी। Einstein ने 1916 में ही गुरुत्वीय तरंगों के अस्तित्व की भविष्यवाणी कर दी थी, अपने फील्ड समीकरण प्रकाशित करने के तुरंत बाद, लेकिन बाद में उन्हें इनकी वास्तविकता पर संदेह होने लगा और एक बिंदु पर वे इस निष्कर्ष पर पहुंचे कि ये महज एक गणितीय कलाकृति हैं जिनका कोई भौतिक अस्तित्व नहीं है। 2015 की खोज — जो एक अरब से भी अधिक प्रकाश-वर्ष दूर दो ब्लैक होल के विलय से उत्पन्न तरंगों की थी — ने न केवल गुरुत्वीय तरंगों की, बल्कि उन द्रव्यमानों वाले ब्लैक होल के अस्तित्व की भी पुष्टि की जिनकी सामान्य सापेक्षता ने बहुत पहले भविष्यवाणी की थी। Einstein का सिद्धांत, जो बिना किसी प्रयोगशाला की पहुंच के एक मेज पर बैठकर विकसित किया गया था, उसने उन परिघटनाओं का सटीक वर्णन किया था जिन्हें एक सदी बाद तक देखा नहीं जा सका।
शिक्षा, रचनात्मकता और वैज्ञानिक चिंतन की प्रकृति पर Einstein के विचार
Einstein ने शिक्षा, रचनात्मकता और वैज्ञानिक सोच की प्रकृति के बारे में विस्तार से लिखा और बोला, और इन विषयों पर उनके विचारों को व्यापक रूप से पढ़ा गया है और वे प्रभावशाली रहे हैं। ये विचार एक ऐसे व्यक्ति के अनुभवों को दर्शाते हैं जिसने पारंपरिक शिक्षा को काफी हद तक अनुपयोगी पाया था और जो मानता था कि रचनात्मक वैज्ञानिक सोच के विकास के लिए उससे अलग किसी चीज़ की आवश्यकता है जो अधिकांश स्कूल प्रदान करते हैं।
उनकी मूल मान्यता यह थी कि विज्ञान में तकनीकी ज्ञान की तुलना में जिज्ञासा और कल्पनाशीलता अधिक महत्वपूर्ण हैं, और शिक्षा का उद्देश्य इन गुणों को दबाने के बजाय उन्हें पोषित करना होना चाहिए। वे पारंपरिक जर्मन शिक्षा में रटने, आज्ञाकारिता और तथ्यात्मक ज्ञान के प्रतिस्पर्धात्मक संचय पर दिए जाने वाले जोर की आलोचना करते थे। छात्रों को परीक्षाओं में उगलने के लिए जानकारी से भरने की gymnasium की पद्धति उन्हें वास्तविक बौद्धिक विकास के विपरीत लगती थी। Aarau के प्रगतिशील कैंटोनल स्कूल में बिताए उस वर्ष ने, जहाँ दृश्य-चिंतन और रचनात्मक अन्वेषण को प्रोत्साहित किया जाता था, उन पर एक स्थायी छाप छोड़ी।
उनका मानना था कि सबसे गहरी वैज्ञानिक खोजें न तो व्यवस्थित प्रयोग से आती हैं और न ही मौजूदा सिद्धांतों के क्रमबद्ध अनुप्रयोग से, बल्कि एक तरह की सहज समझ से आती हैं — समस्या की संरचना को भांपने की वह क्षमता जो सतही जटिलता के पार जाकर अंतर्निहित सरलता को देख सके। उनकी अपनी सबसे बड़ी खोजें इसी तरह आई थीं: प्रयोगात्मक डेटा का सर्वेक्षण करके नहीं, बल्कि यह पूछकर कि सिद्धांतों का सबसे सरल और सुंदर समुच्चय क्या हो सकता है जो विचाराधीन परिघटनाओं की व्याख्या कर सके। विचार-प्रयोग — वह कल्पित परिदृश्य, वह Gedankenexperiment — उनकी खोज का प्राथमिक साधन था।
वे उन सामाजिक परिस्थितियों के बारे में भी स्पष्ट रूप से बोलते थे जो वैज्ञानिक रचनात्मकता के लिए ज़रूरी होती हैं। विज्ञान को स्वतंत्रता चाहिए — जांच-पड़ताल की स्वतंत्रता, राजनीतिक या वैचारिक दबाव से मुक्ति, और विचारों को जहाँ तक वे ले जाएं वहाँ तक जाने की आज़ादी। वे किसी भी ऐसी व्यवस्था के कड़े विरोधी थे जो विज्ञान को राजनीतिक निगरानी के अधीन कर दे या वैज्ञानिकों को पूर्व-निर्धारित वैचारिक आवश्यकताओं के अनुसार अपने निष्कर्ष ढालने पर मजबूर करे। नाज़ी जर्मनी के प्रति उनका विरोध आंशिक रूप से व्यक्तिगत था और आंशिक रूप से सैद्धांतिक: यहूदी वैज्ञानिकों को निकालने और सापेक्षता के सिद्धांत को यहूदी भौतिकी कहकर नकारने की नाज़ी कोशिश दरअसल विज्ञान पर ही एक हमला था।
विज्ञान और धर्म के संबंध पर वे हमेशा सोच-समझकर और बारीकी से बात करते थे। वे किसी व्यक्तिरूपी ईश्वर में विश्वास नहीं रखते थे, लेकिन उनका यह ज़रूर मानना था कि विज्ञान एक प्रकार की धार्मिक भावना से प्रेरित होता है — ब्रह्मांड के रहस्य और व्यवस्था के प्रति एक श्रद्धाभाव, जिसे वे वैज्ञानिक प्रेरणा का सबसे गहरा स्रोत मानते थे। उनका विश्वास था कि विज्ञान और सच्ची धार्मिक भावना एक-दूसरे के अनुकूल हैं, और दोनों के बीच जो겉ला टकराव दिखता है, वह ईश्वर की उन आदिम अवधारणाओं से उपजता है जिन्हें गहन धर्मशास्त्र ने बहुत पहले ही छोड़ दिया था।
Einstein के अंतिम वर्ष और Russell-Einstein घोषणापत्र
Einstein के जीवन का अंतिम दशक गिरते स्वास्थ्य, अपने एकीकृत क्षेत्र सिद्धांत पर निरंतर काम और परमाणु हथियारों तथा विश्व शांति के मुद्दों पर बढ़ती राजनीतिक सक्रियता से भरा रहा। Hiroshima और Nagasaki पर हुई परमाणु बमबारी और संयुक्त राज्य अमेरिका तथा सोवियत संघ के बीच शुरू हुई परमाणु हथियारों की होड़ ने उन्हें भीतर तक हिला दिया था। उनका यह विश्वास, जो शीत युद्ध के गहराने के साथ और पक्का होता गया, था कि परमाणु हथियारों से मानवता के अस्तित्व को एक ऐसा खतरा है जिसका समाधान केवल ऐसी अंतरराष्ट्रीय संस्थाओं की स्थापना से ही हो सकता है जो परमाणु युद्ध को रोकने में सक्षम हों।
इस दौरान उनकी राजनीतिक गतिविधियों ने FBI का ध्यान खींचा, जो कम से कम 1940 के दशक की शुरुआत से ही उन पर नज़र रखे हुए थी। J. Edgar Hoover के ब्यूरो ने Einstein पर एक फाइल बना रखी थी जो अंततः एक हज़ार से भी अधिक पन्नों तक पहुंच गई। इसमें उनके उदारवादी और वामपंथी विचारधाराओं से जुड़े संगठनों के साथ संबंध, नागरिक अधिकारों और परमाणु हथियारों पर उनके सार्वजनिक बयान, और उन लोगों से उनकी दोस्ती दर्ज थी जिन्हें ब्यूरो राष्ट्र-विरोधी मानता था। यह निगरानी McCarthy युग की राजनीतिक फ़िज़ा को दर्शाती थी, जिसमें कोई भी प्रमुख बुद्धिजीवी जो सोवियत संघ के साथ शांति की वकालत करता हो या अमेरिकी विदेश नीति की आलोचना करता हो, उस पर देशद्रोह का संदेह किया जा सकता था।
Einstein ने McCarthyवादी माहौल का जवाब अपनी विशिष्ट सीधी-सादी शैली में दिया। उन्होंने आरोपों से घिरे शिक्षाविदों का खुलकर समर्थन किया, संसदीय समितियों के सामने घसीटे गए लोगों के अधिकारों की रक्षा में पत्र लिखे, और नागरिक स्वतंत्रता तथा शैक्षणिक स्वतंत्रता पर बिना किसी माफ़ी या लाग-लपेट के अपने विचार व्यक्त किए। वे नस्लीय भेदभाव का सामना कर रहे अफ्रीकी-अमेरिकियों के समर्थन में विशेष रूप से मुखर थे — अमेरिकी नस्लवाद की तुलना यूरोपीय यहूदी-विरोध से करते हुए उन्होंने नस्लीय अलगाव को समाप्त करने की मांग की।
Bertrand Russell के साथ उनके सहयोग से जो Russell-Einstein घोषणापत्र तैयार हुआ, वह उनकी राजनीतिक सक्रियता की परिणति थी। महान ब्रिटिश दार्शनिक और गणितज्ञ Russell, परमाणु हथियारों को लेकर Einstein जितने ही चिंतित थे और इस बात पर भी उनसे सहमत थे कि इस खतरे से निपटने के लिए राष्ट्रों के आपसी संबंधों पर नए सिरे से विचार करना ज़रूरी है। दोनों ने मिलकर कई देशों के著名 वैज्ञानिकों के हस्ताक्षर से एक संयुक्त वक्तव्य जारी करने का फ़ैसला किया, जिसमें सरकारों से यह मानने का आग्रह किया गया कि परमाणु हथियार समस्त मानवता के लिए खतरा हैं और अंतरराष्ट्रीय विवादों को सुलझाने के लिए शांतिपूर्ण उपाय अपनाए जाने चाहिए।
Einstein ने अपनी मृत्यु से कुछ ही दिन पहले इस घोषणापत्र पर हस्ताक्षर किए। यह दस्तावेज़ जुलाई 1955 में, उनके निधन के दो महीने बाद, प्रकाशित हुआ और यह विज्ञान एवं विश्व मामलों पर Pugwash सम्मेलनों का संस्थापक दस्तावेज़ बन गया, जो शीत युद्ध के दोनों पक्षों के वैज्ञानिकों को सामूहिक विनाश के हथियारों के खतरों पर चर्चा करने के लिए एकत्रित करता था। Pugwash आंदोलन, जिसे 1995 में नोबेल शांति पुरस्कार से सम्मानित किया गया, Einstein की अंतिम राजनीतिक संलग्नता की शायद सबसे प्रत्यक्ष संस्थागत विरासत का प्रतिनिधित्व करता है।
यूरोप में शैक्षणिक करियर
1919 के सूर्यग्रहण की पुष्टि से पहले ही भौतिकी जगत में Einstein की प्रतिष्ठा काफी बढ़ चुकी थी। उनके चमत्कारी वर्ष के शोधपत्रों ने प्रमुख हस्तियों का ध्यान आकर्षित किया था, और 1908 तक उन्हें अपनी पहली शैक्षणिक नियुक्ति मिल गई थी — बर्न विश्वविद्यालय में एक privatdozent के रूप में, यानी एक अवैतनिक व्याख्याता जो छात्रों की फीस पर निर्भर थे। 1909 में उन्हें ज़्यूरिख विश्वविद्यालय में सैद्धांतिक भौतिकी के सहायक प्राध्यापक के रूप में नियुक्त किया गया और सात साल बाद उन्होंने पेटेंट कार्यालय छोड़ दिया। वे उस समय तीस वर्ष के थे।
उनका शैक्षणिक करियर तेज़ी से आगे बढ़ा। 1910 में उन्होंने प्राग के जर्मन विश्वविद्यालय में पूर्ण प्राध्यापक पद स्वीकार किया, फिर 1912 में ETH में पूर्ण प्राध्यापक के रूप में ज़्यूरिख वापस लौट आए, जहाँ उन्होंने स्वयं छात्र के रूप में पढ़ाई की थी। ये बदलाव उनकी बढ़ती प्रतिष्ठा और जर्मन भाषी शैक्षणिक विज्ञान में सैद्धांतिक प्रतिभा के लिए प्रतिस्पर्धी बाज़ार, दोनों को दर्शाते थे। हर नियुक्ति में उन्होंने छात्रों को पढ़ाया, संगोष्ठियाँ चलाईं और अपना सैद्धांतिक कार्य जारी रखा, साथ ही सार्वजनिक व्याख्यान भी दिए जो शैक्षणिक हलकों से परे ध्यान आकर्षित करने लगे।
1913 में उन्हें तत्कालीन जर्मन विज्ञान का सबसे प्रतिष्ठित शैक्षणिक प्रस्ताव मिला: प्रशियाई विज्ञान अकादमी के सदस्य और बर्लिन में एक नए Kaiser Wilhelm Institute for Physics के निदेशक के रूप में संयुक्त नियुक्ति — ऐसे पद जो प्रशियाई राज्य द्वारा वित्त पोषित होते और जिनमें शिक्षण का कोई दायित्व नहीं था। यह प्रस्ताव Max Planck और भौतिक रसायनशास्त्री Walther Nernst की पहल का परिणाम था, जो Einstein को मनाने के लिए एक साथ ज़्यूरिख गए थे। Einstein जर्मनी लौट आए — अपने जन्म के देश में, जिसकी नागरिकता उन्होंने किशोरावस्था में त्याग दी थी और जिसकी नागरिकता उन्होंने अब पुनः ग्रहण की।
1914 में बर्लिन यूरोपीय विज्ञान की राजधानी था, और Einstein ने स्वयं को उसके बौद्धिक जीवन में पूरी तरह झोंक दिया। उन्होंने अकादमी में व्याख्यान दिए, उस युग के अग्रणी भौतिकविदों से पत्राचार किया और सामान्य सिद्धांत पर कार्य जारी रखा। लेकिन उनका निजी जीवन बिगड़ता जा रहा था। Mileva के साथ उनका विवाह बेहद दुखी हो चुका था। वे बर्लिन में एकाकी थीं, जर्मनी में अप्रसन्न थीं, और अपनी अधूरी महत्वाकांक्षाओं के बारे में उनके मन में कड़वाहट बढ़ती जा रही थी। जब अगस्त 1914 में युद्ध छिड़ा और Mileva बच्चों के साथ ज़्यूरिख लौट गईं, तो यह अलगाव स्थायी हो गया। वर्षों की दर्दनाक बातचीत के बाद आखिरकार 1919 में उनका तलाक हो गया।
उनकी चचेरी बहन Elsa Lowenthal, जो बर्लिन में रहती थीं और बीमारी के दौरान उनकी देखभाल में मदद कर रही थीं — उन्हें एक पेट की बीमारी थी जिसने उन्हें महीनों बिस्तर पर रखा — उनकी जीवनसंगिनी बनीं और अंततः उनकी दूसरी पत्नी। उन्होंने जून 1919 में विवाह किया, उसी वर्ष जब Mileva से तलाक हुआ था। Elsa स्नेहशील, व्यावहारिक और Einstein की सुख-सुविधा के प्रति समर्पित थीं। उन्होंने घर-परिवार संभाला, उनके सामाजिक जीवन को व्यवस्थित किया और उनके समय पर होने वाले अनावश्यक दबावों से उन्हें बचाया। वे वैज्ञानिक नहीं थीं, लेकिन वे Einstein की एकांत और शांति की ज़रूरत को समझती थीं। उनका विवाह भले ही जुनूनी न रहा हो, लेकिन स्थिर ज़रूर था — आपसी सुविधा और वास्तविक स्नेह की एक साझेदारी।
नोबेल पुरस्कार
1919 के ग्रहण के परिणामों की घोषणा ने Einstein को एक सम्मानित भौतिकशास्त्री से अंतर्राष्ट्रीय ख्याति के व्यक्ति में बदल दिया। दुनिया भर के अखबारों की सुर्खियों ने ऐलान किया कि Newton का युग समाप्त हो गया है, कि बर्लिन के एक यहूदी भौतिकशास्त्री ने ब्रह्मांड के नियमों को फिर से लिख दिया है। यह समय — महायुद्ध की समाप्ति के ठीक एक साल बाद — इस खबर को और भी गहरा अर्थ दे रहा था। एक जर्मन भौतिकशास्त्री ने, ब्रिटिश वैज्ञानिकों के अवलोकनों की मदद से, एक ऐसी उपलब्धि हासिल की थी जो राष्ट्रीय सीमाओं से परे लगती थी — और यह उस क्षण में हुआ जब उन सीमाओं को खून से फिर से खींचा गया था।
Einstein को दुनिया भर से चिट्ठियाँ और तार मिलने लगे। उन्हें हर जगह से व्याख्यान देने के निमंत्रण आने लगे। वे अखबारों के लेखों, पत्रिकाओं की कहानियों और जन-सामान्य की जिज्ञासा का विषय बन गए। उन्हें यह शोहरत असहज करती थी — लगातार आने वाली माँगें, दखलंदाज़ियाँ, और एक रहस्यमय प्रतिभाशाली व्यक्ति की वह लोकप्रिय छवि जो उनकी अपनी उस भावना से बिल्कुल अलग थी कि वे बस एक साधारण इंसान हैं जो कठिन सवालों पर काम कर रहे हैं। लेकिन उन्होंने यह भी माना कि उनकी प्रसिद्धि ने उन्हें उन मुद्दों के लिए एक मंच दिया है जिनकी उन्हें परवाह थी — खासतौर पर युद्ध के बाद अंतर्राष्ट्रीय सुलह और शांतिवाद के कारण के लिए।
नवंबर 1921 में Einstein को भौतिकी का नोबेल पुरस्कार दिया गया — वर्ष 1921 के लिए, हालाँकि इसकी औपचारिक घोषणा और पदक का वितरण अगले वर्ष हुआ। यह पुरस्कार विशेष रूप से प्रकाश-विद्युत प्रभाव के नियम की खोज और उससे सैद्धांतिक भौतिकी को मिली सेवाओं के लिए दिया गया था। इस शब्दावली में नोबेल समिति की सापेक्षता के सिद्धांतों के प्रति सावधानी झलकती थी, जिसे समिति के कुछ सदस्य ग्रहण के परिणामों के बावजूद अभी भी अपुष्ट अटकलें मानते थे। Einstein खुद इस सतर्क शब्दावली पर हल्के से मुस्कुराए, यह समझते हुए कि समिति उन्हें उनके शुरुआती क्वांटम कार्य के लिए पुरस्कृत कर रही है, न कि उन सिद्धांतों के लिए जिन्होंने उन्हें प्रसिद्ध बनाया था।
उन्होंने पुरस्कार की राशि, जैसा उन्होंने तलाक के समझौते में वादा किया था, Mileva और अपने दोनों बेटों की देखभाल के लिए उपयोग की। बड़े बेटे Hans Albert अंततः कैलिफोर्निया विश्वविद्यालय, बर्कले में हाइड्रोलिक इंजीनियरिंग के प्रोफेसर बने। छोटे बेटे Eduard ने बचपन में संगीत की अद्भुत प्रतिभा और बौद्धिक तेजस्विता दिखाई, लेकिन उनके बीस वर्ष की शुरुआत में ही उन्हें सिज़ोफ्रेनिया का निदान हुआ और उन्होंने अपने वयस्क जीवन का अधिकांश समय एक स्विस मनोरोग संस्थान में बिताया। Eduard के साथ Einstein का रिश्ता उनके जीवन के सबसे गहरे दुखों में से एक था। निर्वासन से पहले के वर्षों में वे जब भी हो सका, अपने बेटे से मिलने गए, लेकिन 1933 में जर्मनी छोड़ने के बाद वे कभी Eduard से नहीं मिल सके।
क्वांटम यांत्रिकी की बहसें
प्रकाश-विद्युत प्रभाव पर Einstein के 1905 के शोधपत्र ने उन्हें क्वांटम सिद्धांत के संस्थापकों में से एक बना दिया था। विशिष्ट ऊष्माओं पर, और विकिरण के स्वतःस्फूर्त तथा प्रेरित उत्सर्जन पर उनके बाद के कार्य — जिनमें से बाद वाले ने अंततः लेज़र के विकास की राह खोली — ने इस क्षेत्र में उनके योगदान को और गहरा किया। जब Werner Heisenberg, Niels Bohr, Max Born, Erwin Schrodinger और अन्य लोगों ने 1920 के दशक के मध्य में क्वांटम यांत्रिकी को उसके परिपक्व रूप में विकसित किया, तो वे कई मायनों में उन नींवों पर निर्माण कर रहे थे जिन्हें Einstein ने रखने में मदद की थी।
और फिर भी Einstein इस सिद्धांत को भौतिक वास्तविकता के अंतिम विवरण के रूप में स्वीकार नहीं कर सके। उनकी आपत्तियाँ इसके गणितीय रूपवाद या इसकी भविष्यवाणी की सफलता से नहीं थीं — क्वांटम यांत्रिकी असाधारण रूप से सटीक भविष्यवाणियाँ करती थी — बल्कि इसकी व्याख्या से थीं। मानक कोपेनहेगन व्याख्या में क्वांटम यांत्रिकी, जो मुख्यतः Niels Bohr से जुड़ी थी, यह मानती थी कि क्वांटम तंत्रों के पास माप किए जाने तक कोई निश्चित गुण नहीं होते। तरंग फलन, जो विभिन्न माप परिणामों की प्रायिकताओं को एन्कोड करता है, यह नहीं बताता कि माप के बीच तंत्र क्या कर रहा है, बल्कि केवल यह बताता है कि देखने पर हमें क्या मिलेगा। इस व्याख्या का निहितार्थ यह था कि प्रकृति के मूल में एक अपरिहार्य यादृच्छिकता है — ईश्वर, उस वाक्यांश में जो Einstein ने प्रयोग किया और जो प्रसिद्ध हो गया, पासे खेलता है।
Einstein इसे मानने को तैयार नहीं थे। वे पूरी तरह आश्वस्त थे कि क्वांटम यांत्रिकी अधूरी है — कि इसके पीछे कोई गहरा, नियतात्मक सिद्धांत छुपा है, जिसमें यह जो आभासी यादृच्छिकता दिखती है, उसे उन छुपे हुए चरों (hidden variables) से समझाया जा सकेगा जिन तक हम अभी पहुँचना नहीं जानते। Bohr के साथ उनकी यह असहमति विज्ञान के इतिहास की सबसे प्रसिद्ध बहसों में से एक बन गई, जो आंशिक रूप से 1927 और 1930 के Solvay Conferences में आमने-सामने और आंशिक रूप से प्रकाशित शोधपत्रों के ज़रिए हुई।
Einstein एक प्रतिभाशाली और संसाधन-सम्पन्न आलोचक थे। उन्होंने ऐसे विचार-प्रयोग (thought experiments) गढ़े जो क्वांटम यांत्रिकी में विसंगतियाँ या अपूर्णताएँ उजागर करने के लिए बनाए गए थे। 1927 के Solvay Conference में उन्होंने कई ऐसे विचार-प्रयोग प्रस्तुत किए जिनके बारे में उनका मानना था कि वे यह साबित करते हैं कि अनिश्चितता सिद्धांत को दरकिनार किया जा सकता है। Einstein जब भी कोई तर्क पेश करते, Bohr रात भर उस पर काम करते और अगली सुबह उसका खंडन लेकर लौटते। इन आदान-प्रदानों में Einstein हमेशा पराजित हुए — उनके विचार-प्रयोगों में अक्सर कोई सूक्ष्म त्रुटि होती थी, जो प्रायः सामान्य आपेक्षिकता के प्रभावों की अनदेखी से उपजती थी। वे हर बार खंडन को सहजता से स्वीकार करते थे।
Einstein की आपत्तियों की सबसे गहरी और सबसे स्थायी अभिव्यक्ति 1935 में आई, जब उन्होंने Boris Podolsky और Nathan Rosen के साथ मिलकर वह शोधपत्र प्रकाशित किया जिसे लेखकों के आद्याक्षरों के आधार पर EPR paper के नाम से जाना जाता है। EPR paper में एक ऐसे विचार-प्रयोग का वर्णन था जिसमें दो कण आपस में अंतःक्रिया करने के बाद एक-दूसरे से बड़ी दूरी पर अलग हो जाते हैं। क्वांटम यांत्रिकी की भविष्यवाणी थी कि एक कण के किसी गुण का मापन, दोनों के बीच की दूरी चाहे जितनी भी हो, दूसरे कण की क्वांटम अवस्था को तत्काल प्रभावित कर देगा। Einstein ने इसे "दूरी पर भूतिया क्रिया" ("spooky action at a distance") कहा और तर्क दिया कि यह साबित करता है कि क्वांटम यांत्रिकी अवश्य अधूरी है। उनके अनुसार, कणों के ऐसे स्थानीय गुण — यानी छुपे हुए चर — ज़रूर होने चाहिए जो उनके मापन के परिणाम पहले से तय करते हों, और जिनका वर्णन क्वांटम यांत्रिकी करने में विफल रहती है।
यह बहस Einstein के जीवनकाल में सुलझ नहीं पाई। इसके लिए 1960 के दशक में John Bell के काम की और उसके बाद 1970 के दशक एवं आगे के प्रायोगिक परीक्षणों की ज़रूरत पड़ी, जिन्होंने यह दिखाया कि Einstein की परिकल्पना वाले किसी भी hidden-variable सिद्धांत का क्वांटम यांत्रिकी की भविष्यवाणियों से मेल नहीं बैठता। प्रयोगों ने लगातार क्वांटम यांत्रिकी को सही ठहराया और स्थानीय छुपे हुए चरों की संभावना को नकार दिया। अंततः यही सामने आया कि इस सिद्धांत की अपूर्णता के बारे में Einstein का अंतर्ज्ञान गलत था — या कम से कम, ऐसा लगता है कि ब्रह्मांड में वास्तव में वे अस्थानीय (nonlocal) सहसंबंध मौजूद हैं जो उन्हें बेचैन करते थे।
राजनीतिक विचार और शांतिवाद
Einstein की राजनीतिक सक्रियता आजीवन रही, सुसंगत रही, और इतनी साहसी रही कि उसकी कीमत उन्हें पेशेवर और व्यक्तिगत दोनों स्तरों पर चुकानी पड़ी। उनकी मूल प्रतिबद्धताएँ — शांतिवाद, अंतर्राष्ट्रीयवाद, नागरिक स्वतंत्रताएँ, और यहूदी पहचान — उनकी युवावस्था से लेकर जीवन के अंत तक अडिग रहीं, चाहे उनके इर्द-गिर्द दुनिया कितनी भी बदलती रही और चाहे नई परिस्थितियों के मद्देनज़र कुछ विशेष मतों में बदलाव ज़रूरी हो गया हो।
किशोरावस्था से ही उन्हें जर्मन राष्ट्रवाद से नफ़रत थी और एक किशोर के रूप में ही उन्होंने जर्मन नागरिकता त्याग दी थी। पहले विश्व युद्ध का जर्मन बुद्धिजीवियों ने जिस उत्साह के साथ समर्थन किया, वह उनके लिए अत्यंत वेदनादायक था। अक्टूबर 1914 में तिरानवे प्रमुख जर्मन शिक्षाविदों द्वारा हस्ताक्षरित एक घोषणापत्र ने जर्मनी के युद्ध-उद्देश्यों का समर्थन किया और जर्मन सैन्यवाद को जर्मन संस्कृति के अनुकूल बताते हुए उसका बचाव किया। हाल ही में Berlin पहुँचे Einstein उन बहुत कम जर्मन वैज्ञानिकों में से थे जिन्होंने इस पर हस्ताक्षर करने से इनकार कर दिया। इसके बजाय उन्होंने एक प्रति-घोषणापत्र पर हस्ताक्षर किए जिसमें एक संयुक्त यूरोप और युद्ध की समाप्ति का आह्वान किया गया था।
1920 के दशक में उन्होंने अपनी प्रसिद्धि का उपयोग अंतर्राष्ट्रीय सुलह, निःशस्त्रीकरण और राष्ट्र संघ के समर्थन में किया। उन्होंने राजनीतिक विषयों पर व्याख्यान दिए और साक्षात्कार दिए, शांतिवादी संगठनों से पत्राचार किया, और जर्मनी में राष्ट्रवाद और सैन्यवाद की उठती लहर के खिलाफ आवाज़ उठाई। वे अपने शुरुआती दशकों में ज़ायोनीवाद को लेकर संशय में थे — किसी भी रूप में राजनीतिक राष्ट्रवाद के प्रति संदेहशील थे — लेकिन यहूदी समुदाय के कल्याण और यरुशलम के हिब्रू विश्वविद्यालय के प्रति उनकी गहरी प्रतिबद्धता थी, जिसके वे एक बोर्ड सदस्य बने।
उनके शांतिवाद को नाज़ीवाद के उदय ने चुनौती दी। प्रथम विश्व युद्ध के दौरान और उसके बाद वे अपने शांतिवाद में पूर्णतः दृढ़ रहे थे, परंतु नाज़ी खतरे की प्रकृति भिन्न थी। 1930 के दशक की शुरुआत में उन्होंने अपनी स्थिति में बदलाव करना शुरू किया और यह सुझाया कि कुछ ऐसी परिस्थितियाँ हो सकती हैं जिनमें अत्याचार के विरुद्ध सशस्त्र प्रतिरोध उचित ठहराया जा सकता है। द्वितीय विश्व युद्ध के आरंभ होते-होते वे मित्र राष्ट्रों के पक्ष का समर्थन करने लगे थे, साथ ही यह आशा बनाए रखते हुए कि युद्ध जितना जल्दी संभव हो समाप्त हो और शांति जितनी जल्दी संभव हो स्थापित हो।
नाज़ी जर्मनी से पलायन
जनवरी 1933 में जब Adolf Hitler जर्मनी के चांसलर बने, उस समय Einstein संयुक्त राज्य अमेरिका में थे — पासाडेना स्थित कैलिफोर्निया इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी में व्याख्यानों की एक श्रृंखला के लिए, जिन्हें महीनों पहले ही तय किया गया था। वे पासाडेना में एक किराए के मकान में ठहरे हुए थे और कैलिफोर्निया की धूप, Caltech के खगोलविदों के साथ बातचीत, और उस अपेक्षाकृत आज़ादी का आनंद ले रहे थे जो बर्लिन में घिरते जा रहे राजनीतिक तनाव से परे थी। जर्मनी की खबरें उन तक तेज़ी से पहुँचीं और उन्होंने उनके निहितार्थ को तुरंत और पूरी तरह समझ लिया। वे इससे पहले कई बार अमेरिका आ चुके थे, हर बार बर्लिन लौटते हुए, लेकिन इस बार उन्होंने तत्काल यह पहचान लिया कि वे वापस नहीं जा सकते। संयुक्त राज्य अमेरिका छोड़ने से पहले, उन्होंने सार्वजनिक रूप से घोषणा की कि जब तक नाज़ी सत्ता में हैं, वे जर्मनी नहीं लौटेंगे। यह घोषणा चौंकाने वाली कम, विद्रोहपूर्ण अधिक थी — Einstein का नाम उन प्रमुख यहूदियों की सूचियों में आ चुका था जिनकी संपत्ति ज़ब्त की जा सकती थी, और नाज़ी विचारधारा के पैरोकारों द्वारा "यहूदी भौतिकी" की सार्वजनिक निंदा भी हो चुकी थी।
उन्होंने कई महीने बेल्जियम में दोस्तों के यहाँ रहकर बिताए, इससे पहले कि वे प्रिंसटन, न्यू जर्सी में नवस्थापित इंस्टीट्यूट फॉर एडवांस्ड स्टडी का प्रस्ताव स्वीकार करते। यह संस्थान एक बड़े निजी अनुदान से स्थापित किया गया था और विशेष रूप से इस उद्देश्य से बनाया गया था कि यह अग्रणी विद्वानों को, विशेषकर फ़ासीवाद से भागे यूरोपीय बुद्धिजीवियों को, आकर्षित करे। यहाँ न कोई छात्र थे, न अध्यापन की कोई बाध्यता, और शोध के लिए पर्याप्त संसाधन उपलब्ध थे। Einstein ने प्रोफेसर के रूप में एक नियुक्ति स्वीकार की — जो संस्थान की पहली नियुक्ति थी — और अक्टूबर 1933 में अंतिम बार यूरोप छोड़ा।
जो जर्मनी वे पीछे छोड़ गए, वह एक दुःस्वप्न बन चुकी थी। यहूदी शिक्षाविदों को विश्वविद्यालयों से निकाला जा रहा था। यहूदी दुकानों का बहिष्कार हो रहा था। जो मित्र और सहयोगी जा नहीं सके या नहीं गए, उन्हें अपमानित किया जा रहा था, बर्खास्त किया जा रहा था, और अंततः मार डाला जा रहा था। Einstein का बर्लिन वाला अपार्टमेंट और उनका ग्रीष्मकालीन घर ज़ब्त कर लिए गए। जर्मनी में उनकी संपत्तियाँ छीन ली गईं। उनकी जर्मन नागरिकता और प्रशियन अकादमी की सदस्यता छीन ली गई। अकादमी ने एक बयान जारी किया जिसमें यहूदी सदस्यों को निष्कासित करने को राज्य के कानूनों के अनुरूप बताया गया, और Einstein ने एक सार्वजनिक पत्र के ज़रिए अकादमी के इस समर्पण के प्रति अपनी घोर अवमानना व्यक्त की।
अमेरिकी जीवन में ढलना कई मायनों में उनकी अपेक्षा से कहीं आसान रहा। वे प्रिंसटन में मर्सर स्ट्रीट पर एक साधारण-से घर में बस गए, जो जीवन के अंत तक उनका घर बना रहा। उन्होंने एक सचिव, Helen Dukas, को नियुक्त किया, जो उनकी समर्पित सहायक और साथी बन गईं। उनकी दूसरी पत्नी Elsa उनके साथ अमेरिका आई थीं, लेकिन लंबी बीमारी के बाद 1936 में उनका निधन हो गया। Einstein को उनकी गहरी याद आई, लेकिन वे अपनी दैनिक दिनचर्या अपने स्वभावसुलभ संयमित धैर्य के साथ जारी रखते रहे।
प्रिंसटन में जीवन
1930 के दशक के अंत और 1940 के दशक में Princeton एक छोटा-सा विश्वविद्यालय नगर था — आकर्षक और कुछ हद तक सांस्कृतिक रूप से सीमित, यूरोप के उन बौद्धिक केंद्रों से कोसों दूर जिन्हें Einstein जानते थे। उन्होंने अमेरिकी शैक्षणिक माहौल को जर्मनी की श्रेणीबद्ध विश्वविद्यालय व्यवस्था की तुलना में कहीं अधिक सहज और लोकतांत्रिक पाया, और वे अमेरिकी समाज की खुलेपन की भावना की सराहना करते थे। अक्टूबर 1940 में, Trenton, New Jersey में आयोजित एक समारोह में, वे अपनी सौतेली बेटी Margot और अपनी सचिव Helen Dukas के साथ अमेरिकी नागरिक बन गए।
Princeton में उनकी दिनचर्या किंवदंती बन गई। वे प्रतिदिन Mercer Street स्थित अपने घर से पैदल चलकर Institute जाते थे — एक साधारण सफेद लकड़ी का घर, जिसे उन्होंने Princeton में अपने अधिकांश वर्षों के दौरान किराए पर लिया था और जो आज एक साहित्यिक धरोहर स्थल बन चुका है — प्रायः उनके साथ कोई सहायक या कोई स्नातक छात्र होता जो भौतिकी पर चर्चा करने आया हो। ये सैर एक दैनिक अनुष्ठान बन गई थी जिसे Princeton के निवासी सहज स्वाभाविक मानने लगे थे — सफेद बालों वाले इस भौतिकविद् का वृक्षों से घिरी सड़कों पर इत्मीनान से टहलना शहर की एक पहचानी-सी छवि बन गई थी। वे बच्चों के साथ रुककर बातें करने के लिए जाने जाते थे, राह चलते लोगों से बातचीत करते थे, पड़ोसियों की छोटी-मोटी समस्याओं में मदद करते थे — और इसमें कभी कोई भाव नहीं दिखता था कि उनका समय दूसरों से अधिक मूल्यवान है। Princeton में उनके रोज़मर्रा के व्यवहार की सहजता और सुलभता उस श्रेणीबद्ध औपचारिकता से बिल्कुल अलग थी जो उन्होंने यूरोपीय शैक्षणिक संस्कृति में पीछे छोड़ी थी। वे सादगी से रहते थे — यह प्रसिद्ध है कि वे शायद ही कभी मोज़े पहनते थे, क्योंकि उन्हें ये अनावश्यक और परेशान करने वाले लगते थे — और उनकी दिनचर्या में सुबह काम करना, दोपहर बाद लंबी सैर पर जाना और शाम को वायलिन बजाना शामिल था। उनके पास लगातार लोगों का आना-जाना लगा रहता था — वैज्ञानिक साथी, राजनीतिक हस्तियाँ, पत्रकार, कलाकार — और वे बड़े पैमाने पर पत्र-व्यवहार भी करते थे। जिन उद्देश्यों में उनकी आस्था थी, खासकर नागरिक अधिकारों, शैक्षणिक स्वतंत्रता और शरणार्थियों के कल्याण से जुड़े मामलों में, वे अपना समय उदारता से देते थे।
वे बच्चों से बहुत प्यार करते थे और उन साधारण लोगों के लिए भी वास्तव में सुलभ रहते थे जो उन्हें सवालों या समस्याओं के साथ पत्र लिखते थे। Princeton में उनके पड़ोसी उन्हें एक मिलनसार, बिना किसी दिखावे के आम इंसान के रूप में जानते थे जो सैर के दौरान रुककर बातें करते थे। एक मशहूर किस्सा — जो शायद काल्पनिक भी हो — बताता है कि मोहल्ले की एक छोटी लड़की गणित के गृहकार्य में मदद के लिए उनके पास आई। उन्होंने उसे अंदर बुलाया और दोनों ने दूध और बिस्कुट के साथ बैठकर सवाल हल किए।
अमेरिका में मिली गर्मजोशी के बावजूद, Einstein कई महत्वपूर्ण मायनों में एक बाहरी व्यक्ति बने रहे। उनका जर्मन लहज़ा, उनका यूरोपीय तौर-तरीका, उनकी विशिष्ट शारीरिक बनावट और उनकी प्रसिद्धि — ये सब मिलकर उन्हें अलग पहचान देते थे। वे अमेरिकी लोकतांत्रिक मूल्यों के प्रति गहराई से प्रतिबद्ध थे और नस्लभेद या भेदभाव के किसी भी रूप के घोर विरोधी थे। अफ्रीकी-अमेरिकी गायक और नागरिक अधिकार कार्यकर्ता Paul Robeson के साथ उनकी दोस्ती सच्ची और स्थायी थी। उन्होंने नस्लीय समानता के समर्थन में लिखा और सार्वजनिक रूप से बोले, और अमेरिकी रंगभेद नीति से वे स्तब्ध थे — उन्होंने इसकी तुलना उस यहूदी-विरोधी भावना से की जिससे बचने के लिए वे यूरोप छोड़कर आए थे।
परमाणु बम और नैतिक जवाबदेही
1939 की गर्मियों में, दो हंगेरियन-अमेरिकी भौतिकविद्, Leo Szilard और Eugene Wigner, Einstein के Long Island स्थित ग्रीष्मकालीन कॉटेज पर उन्हें एक गंभीर घटनाक्रम से सावधान करने के लिए पहुँचे। जर्मन वैज्ञानिकों ने हाल ही में परमाणु विखंडन — यानी यूरेनियम परमाणुओं को तोड़ने की प्रक्रिया — में सफलता हासिल की थी, और सैद्धांतिक रूप से यह संभव प्रतीत होता था कि एक विस्फोटक शृंखला अभिक्रिया उत्पन्न की जा सकती है जो भारी मात्रा में ऊर्जा मुक्त करे। जर्मनी ऐसा बम बनाने में सक्षम हो सकता था। Szilard ने राष्ट्रपति Franklin Roosevelt को इस खतरे से आगाह करते हुए एक पत्र का मसौदा तैयार किया था, और वे चाहते थे कि Einstein उस पर हस्ताक्षर करें। Einstein के हस्ताक्षर उस पत्र को अधिकार और वज़न दे देते। उन्होंने Einstein को राज़ी कर लिया, जिन्होंने स्वीकार किया कि उन्होंने अपने समीकरण के सैन्य निहितार्थों के बारे में नहीं सोचा था।
अगस्त 1939 में Einstein द्वारा हस्ताक्षरित Roosevelt को लिखे गए पत्र ने उस परियोजना की नींव रखने में मदद की जो आगे चलकर Manhattan Project बनी — यह अमेरिका का वह कार्यक्रम था जिसका उद्देश्य जर्मनी से पहले परमाणु बम बनाना था। Einstein ने खुद Manhattan Project में कोई भूमिका नहीं निभाई। सैन्य अधिकारियों ने उन्हें सुरक्षा मंजूरी देने से इनकार कर दिया, क्योंकि उनकी शांतिवादी गतिविधियों और कट्टरपंथी संबंधों के आधार पर उन्हें सुरक्षा के लिए खतरा माना गया। विडंबना अत्यंत गहरी है: जिस व्यक्ति के समीकरण ने बम को सैद्धांतिक रूप से संभव बनाया था, उसे उस परियोजना से बाहर रखा गया जिसने इसे वास्तविकता में बनाया।
जब 6 अगस्त 1945 को Hiroshima पर और 9 अगस्त 1945 को Nagasaki पर परमाणु बम गिराए गए, जिनमें एक लाख तीस हजार से दो लाख छब्बीस हजार लोग मारे गए, तो Einstein बुरी तरह हिल गए। उन्होंने बम के उपयोग की वकालत नहीं की थी — केवल इसके विकास की, एक संभावित जर्मन बम के विरुद्ध निरोधक के रूप में। युद्ध के बाद यह सामने आया कि जर्मन बम कार्यक्रम कभी बहुत आगे नहीं बढ़ पाया था। बमों का इस्तेमाल जापान के खिलाफ किया गया था, जिसके पास कोई परमाणु कार्यक्रम था ही नहीं। Einstein ने सार्वजनिक रूप से अपनी पीड़ा व्यक्त की। वे परमाणु हथियार नियंत्रण, परमाणु ऊर्जा की अंतर्राष्ट्रीय देखरेख और युद्ध के उन्मूलन के प्रमुख पैरोकार बन गए। उन्होंने लेख लिखे, साक्षात्कार दिए और ऐसे घोषणापत्रों पर हस्ताक्षर किए जो परमाणु युद्ध को रोकने में सक्षम एक विश्व सरकार की स्थापना का आह्वान करते थे।
अपने अंतिम वर्षों में वे Emergency Committee of Atomic Scientists से जुड़े रहे, जो भौतिकविदों का एक समूह था जो परमाणु हथियारों के खतरों के बारे में जनता को जागरूक करना चाहता था। उन्होंने Bertrand Russell के साथ मिलकर Russell-Einstein Manifesto तैयार किया, जिस पर नौ अन्य著名 वैज्ञानिकों ने हस्ताक्षर किए और जो देशों से परमाणु हथियार त्यागने का आह्वान करता था। यह घोषणापत्र 1955 की गर्मियों में, Einstein की मृत्यु के कुछ समय बाद, पूरा होकर जारी किया गया।
परमाणु बम के साथ उनका नैतिक हिसाब-किताब वास्तविक और सतत था। उन्होंने बम के विकास की ओर ले जाने वाली कारण-श्रृंखला में अपनी भूमिका को स्वीकार किया, लेकिन अपने पुराने कार्यों की पूर्णतः निंदा किए बिना, यह मानते हुए कि नाज़ी बम का खतरा वास्तविक था। पर वे इस बारे में बिल्कुल स्पष्ट थे कि आम नागरिकों के खिलाफ परमाणु हथियारों का इस्तेमाल एक नैतिक त्रासदी थी, और उन्होंने अपने जीवन का अंतिम दशक यह सुनिश्चित करने में लगाया कि मानवता परमाणु विनाश की कगार से पीछे हटने का कोई रास्ता खोज सके।
Einstein और कलाएँ: संगीत, साहित्य और सौंदर्यबोध
Einstein का संगीत से प्रेम उनके व्यक्तित्व की कोई सामान्य या आकस्मिक विशेषता नहीं थी, बल्कि यह एक अनिवार्यता के करीब था। उन्होंने अपने पूरे वयस्क जीवन में एक गंभीर शौकिया की लगन और दक्षता के साथ वायलिन बजाया, और संगीत उनके लिए विश्राम के साथ-साथ सोचने के एक तरीके के रूप में भी काम करता था। उन्होंने एक बार कहा था कि अगर वे भौतिकविद नहीं बने होते तो संगीतकार बनते, और यह तुलना महज वाक्पटुता से परे थी।
उनकी संगीत रुचि मुख्यतः Mozart और Bach तथा शास्त्रीय वियनीज़ परंपरा की रचनाओं से बनी थी। वे शास्त्रीय संगीत की स्पष्टता, व्यवस्था और गणितीय सौंदर्य से गहरे प्रभावित होते थे, और उसमें उन्हें उसी तरह की सुंदरता का प्रतिरूप मिलता था जिसे वे भौतिक सिद्धांत में खोजते थे। वे रोमांटिक संगीत परंपरा की ओर कम आकर्षित थे — Brahms या Wagner जैसे संगीतकारों की भावनात्मक तीव्रता और आत्मपरकता उन्हें Mozart के पियानो कंचर्टो या Bach की पार्टिटा की क्रिस्टलीय संरचनाओं की तुलना में कम शुद्ध और कम अनुशासित लगती थी। वे संगीत में भावनाओं के प्रति उदासीन नहीं थे — वे उससे द्रवित होते थे — लेकिन वे ऐसी भावनाओं को तरजीह देते थे जो रूप द्वारा संगठित हों, न कि ऐसे रूप को जो भावनाओं से दब जाए।
उन्होंने अपने पूरे जीवन में चैंबर म्यूज़िक समूहों में हिस्सा लिया, और उन्हें चैंबर म्यूज़िक की सामूहिक प्रकृति विशेष रूप से संतोषजनक लगती थी। Princeton में वे नियमित रूप से अन्य संगीत प्रेमियों के साथ अनौपचारिक संगीत संध्याओं में भाग लेते थे, जहाँ दर्शकों के लिए नहीं बल्कि स्वयं प्रतिभागियों के आनंद के लिए sonatas और चैंबर रचनाएँ बजाई जाती थीं। उनकी ख्याति एक प्रवाहमान, यदि तकनीकी दृष्टि से अत्यंत कुशल नहीं तो भी सक्षम वायलिन वादक के रूप में थी — वे अच्छा बजा सकते थे, लेकिन लय में चूक हो जाना उनकी आदत थी, जो कभी-कभी उनके अधिक सटीक ताल वाले साथियों को निराश कर देती थी।
Einstein की वैज्ञानिक रचनात्मकता और उनके संगीत अनुभव के बीच का संबंध न तो आकस्मिक था और न ही केवल रूपकात्मक। उन्होंने स्वयं इन दोनों को स्पष्ट रूप से जोड़ा, यह सुझाते हुए कि संगीत और भौतिकी दोनों ही ब्रह्मांड में व्यवस्था और सौंदर्य खोजने की उसी मूलभूत प्रेरणा की अभिव्यक्ति हैं। जब वे किसी समस्या में अटक जाते, तो अक्सर अपना वायलिन उठाते और एक-दो घंटे बजाते, और उन्हें लगता कि इससे उनका मन शांत हो जाता था और कभी-कभी ऐसे हल सामने आ जाते थे जो सीधे ध्यान केंद्रित करने से नहीं मिल पाते थे। पार्श्विक चिंतन का यह अनुभव — जिसमें चेतन मन किसी और काम में लगा हो और अवचेतन मन समस्या पर काम करता रहे — उनकी रचनात्मक प्रक्रिया की एक विशेषता थी।
उनकी साहित्यिक रुचियाँ भी व्यापक थीं; वे जर्मन और अंग्रेज़ी दोनों में खूब पढ़ते थे। उनका विशेष झुकाव दर्शनशास्त्र की ओर था — Schopenhauer, Spinoza, Hume, Kant — और भौतिकी की दार्शनिक नींव से उनका आजीवन जुड़ाव बना रहा, जो कार्यरत वैज्ञानिकों में असामान्य था। वे Dostoyevsky को प्रशंसा के साथ पढ़ते थे और उस रूसी उपन्यासकार की मनोवैज्ञानिक एवं नैतिक अंतर्दृष्टि की गहराई की सराहना करते थे। उन्हें Arthur Conan Doyle की जासूसी कहानियाँ भी पसंद थीं, क्योंकि वे Sherlock Holmes की तार्किक निगमन की पद्धति में वैज्ञानिक तर्कणा का एक रोचक समानांतर पाते थे।
उनकी सौंदर्य-चेतना उनके वैज्ञानिक कार्य तक भी फैली हुई थी। वे अक्सर किसी भौतिक सिद्धांत की सुंदरता को उसकी सत्यता की कसौटी के रूप में देखने की बात करते थे — पर्याप्त कसौटी के रूप में नहीं, बल्कि एक आवश्यक कसौटी के रूप में। एक भद्दा सिद्धांत, जिसमें बहुत अधिक मनमाफ़िक मान्यताओं की ज़रूरत हो या जो सरल और सुंदर ढंग के बजाय जटिल जोड़-तोड़ से परिणाम हासिल करे, उन्हें लगभग निश्चित रूप से गलत, या कम से कम अधूरा लगता था। इस सौंदर्यपरक कसौटी की कभी-कभी अधिक अनुभवमूलक सोच रखने वाले सहयोगियों द्वारा आलोचना की जाती थी — उनके अनुसार यह एक प्रकार की इच्छापूर्ण सोच या सौंदर्यबोधी पूर्वाग्रह था। Einstein ने इस आलोचना को स्वीकार किया, लेकिन अपना मत बनाए रखा: उनका मानना था कि प्रकृति के गहरे नियम सुंदर हैं, और जो सिद्धांत उन्हें सटीक रूप से पकड़ते हैं, वे उस सौंदर्य को प्रतिबिंबित करेंगे।
प्रौद्योगिकी और दैनिक जीवन पर Einstein का प्रभाव
Einstein के सैद्धांतिक कार्य के व्यावहारिक तकनीकी अनुप्रयोग आधुनिक जीवन में इतने व्यापक हैं कि अधिकांश लोग इनका उपयोग करते हैं, बिना यह जाने कि इनकी उत्पत्ति कहाँ से हुई। Einstein के सैद्धांतिक कार्य की तकनीकी विरासत इतनी सर्वव्यापी है कि इसके बिना आधुनिक सभ्यता की कल्पना करना वास्तव में कठिन है। GPS नेविगेशन शायद उनके समीकरणों को व्यवहार में देखने का सबसे सुपरिचित उदाहरण है। Global Positioning System उन उपग्रहों पर निर्भर करती है जिनमें परमाणु घड़ियाँ होती हैं, जो ज़मीन पर स्थित घड़ियों से समकालिक की जाती हैं। ये उपग्रह ज़मीन पर मौजूद पर्यवेक्षकों की तुलना में तेज़ी से गतिमान होते हैं, जिसके कारण विशेष सापेक्षता के अनुसार उनकी घड़ियाँ ज़मीन की घड़ियों की तुलना में थोड़ी धीमी चलती हैं। वे ज़मीन की तुलना में कमज़ोर गुरुत्वाकर्षण क्षेत्र में भी स्थित होते हैं, जिसके कारण सामान्य सापेक्षता के अनुसार उनकी घड़ियाँ थोड़ी तेज़ चलती हैं। ये दोनों प्रभाव आंशिक रूप से एक-दूसरे को निरस्त करते हैं, लेकिन पूरी तरह नहीं: यदि विशेष और सामान्य सापेक्षता दोनों पर आधारित सुधार न किए जाएँ, तो GPS की स्थिति-गणना में प्रतिदिन लगभग दस किलोमीटर की त्रुटि जमा हो जाएगी, जिससे यह प्रणाली अधिकांश उपयोगों के लिए बेकार हो जाएगी। ये सुधार Einstein के समीकरणों का उपयोग करके की जाती हैं।
परमाणु ऊर्जा संयंत्र इस सिद्धांत पर काम करते हैं कि द्रव्यमान और ऊर्जा एक-दूसरे में परिवर्तित हो सकते हैं, जैसा कि E बराबर mc squared के सूत्र में व्यक्त किया गया है। जब यूरेनियम या प्लूटोनियम के नाभिक विखंडित होते हैं, तो उत्पादों का कुल द्रव्यमान मूल नाभिक के द्रव्यमान से थोड़ा कम होता है। द्रव्यमान में यह ज़रा-सा अंतर, जब प्रकाश की गति के वर्ग से गुणा किया जाता है, तो अभिक्रिया से निकलने वाली विशाल ऊर्जा प्राप्त होती है। Einstein के इस समीकरण के बिना परमाणु ऊर्जा को समझना या नियंत्रित करना संभव ही नहीं होता।
मेडिकल इमेजिंग तकनीक क्वांटम यांत्रिकी पर Einstein के काम की गहरी ऋणी है। PET स्कैन — पॉज़िट्रॉन एमिशन टोमोग्राफी — रेडियोधर्मी ट्रेसर का उपयोग करते हैं जो पॉज़िट्रॉन उत्सर्जित करते हैं, जो इलेक्ट्रॉन के प्रतिद्रव्य समकक्ष होते हैं। जब कोई पॉज़िट्रॉन मरीज़ के शरीर में किसी इलेक्ट्रॉन से टकराता है, तो दोनों एक-दूसरे को नष्ट कर देते हैं और विपरीत दिशाओं में जाते हुए दो फ़ोटॉन — गामा किरणें — उत्पन्न करते हैं। मरीज़ के चारों ओर लगे डिटेक्टर इन गामा किरणों को रिकॉर्ड करते हैं और उनके ज़रिए शरीर में ट्रेसर के वितरण की त्रि-आयामी छवि तैयार करते हैं। पॉज़िट्रॉन के अस्तित्व की भविष्यवाणी सापेक्षतावादी क्वांटम यांत्रिकी द्वारा की गई थी, जिसे Einstein के काम ने संभव बनाया।
लेज़र — लाइट एम्प्लिफ़िकेशन बाय स्टिम्युलेटेड एमिशन ऑफ़ रेडिएशन — उत्तेजित उत्सर्जन की उस घटना पर निर्भर करते हैं जिसे Einstein ने 1917 में पहचाना और विश्लेषित किया था। उन्होंने दिखाया कि उत्तेजित ऊर्जा अवस्था में मौजूद एक परमाणु को एक आने वाले फ़ोटॉन द्वारा प्रेरित किया जा सकता है कि वह ठीक उसी ऊर्जा, चरण और दिशा का एक दूसरा फ़ोटॉन उत्सर्जित करे। यह सुसंगत उत्सर्जन ही लेज़र के काम करने का आधार है। लेज़र का उपयोग शल्य चिकित्सा, दूरसंचार, विनिर्माण, शोध और रोज़मर्रा के उपभोक्ता उत्पादों जैसे बारकोड स्कैनर और ऑप्टिकल डिस्क प्लेयर में होता है। वैश्विक इंटरनेट स्वयं लेज़र पर निर्भर करता है, जिनका उपयोग ऑप्टिकल फ़ाइबर के ज़रिए प्रकाश की स्पंदों के रूप में डेटा संचारित करने के लिए किया जाता है। Einstein के 1917 के शोधपत्र के बिना इनमें से कुछ भी अस्तित्व में नहीं होता।
सौर सेल, जो सूर्य के प्रकाश को सीधे बिजली में बदलते हैं, प्रकाश-विद्युत प्रभाव पर काम करते हैं — वही घटना जिसके लिए Einstein को नोबेल पुरस्कार मिला था। जब सूर्य के प्रकाश के फ़ोटॉन सौर सेल की अर्धचालक सामग्री से टकराते हैं, तो वे इस तरह इलेक्ट्रॉन को बाहर निकालते हैं कि एक विद्युत धारा उत्पन्न होती है। इस प्रक्रिया की क्वांटम यांत्रिकी सीधे Einstein के 1905 के विश्लेषण से निकली है। जैसे-जैसे सौर ऊर्जा दुनिया की ऊर्जा प्रणालियों में और अधिक केंद्रीय होती जा रही है, Einstein के शुरुआती क्वांटम कार्य और समकालीन नवीकरणीय ऊर्जा तकनीक के बीच यह संबंध हर बीतते साल के साथ व्यावहारिक दृष्टि से और भी महत्वपूर्ण होता जा रहा है।
Einstein और उनके समकालीन: वैज्ञानिक साझेदारियाँ और प्रतिस्पर्धाएँ
Einstein का वैज्ञानिक जीवन एकांत में नहीं बीता, चाहे अकेले प्रतिभाशाली व्यक्ति की लोकप्रिय छवि कुछ भी कहे। उनके महत्वपूर्ण सहयोग थे, उल्लेखनीय प्रतिस्पर्धाएँ थीं, और सहयोगियों का एक विस्तृत नेटवर्क था जिनका काम उनके अपने काम से उपयोगी तरीकों से जुड़ता था।
Max Planck के साथ उनका संबंध शुरुआती दौर के सबसे महत्वपूर्ण संबंधों में से एक था। Planck, जो Einstein से सत्रह साल बड़े थे, उस समय Annalen der Physik के संपादक थे जब Einstein ने 1905 के अपने शोधपत्र प्रस्तुत किए थे, और उनके महत्व को पहचानने वाले पहले प्रमुख भौतिकविदों में से एक थे। Planck Einstein के समर्थक बने और अंततः 1914 में उनके Berlin जाने की व्यवस्था की। दोनों की वैज्ञानिक प्रवृत्तियाँ अलग-अलग थीं — Planck अधिक रूढ़िवादी, अधिक सतर्क और स्थापित ढाँचों को छोड़ने में अधिक अनिच्छुक थे — लेकिन दोनों में भौतिकी के मौलिक सिद्धांतों को खोजने की गहरी प्रतिबद्धता और एक-दूसरे के काम के प्रति गहरा सम्मान था।
Niels Bohr के साथ उनका संबंध बीसवीं सदी की भौतिकी में सबसे प्रसिद्ध बौद्धिक प्रतिद्वंद्विता थी। Bohr, डेनमार्क के भौतिकशास्त्री जिन्होंने परमाणु का क्वांटम मॉडल विकसित किया और क्वांटम यांत्रिकी की कोपेनहेगन व्याख्या के प्रमुख शिल्पकार थे, कई मायनों में एक भौतिक विचारक के रूप में Einstein के समकक्ष थे। क्वांटम यांत्रिकी की पूर्णता को लेकर उनके बीच कई दशकों तक चली बहस, और विशेष रूप से सोल्वे सम्मेलनों में, विज्ञान के इतिहास की महान बौद्धिक मुठभेड़ों में से एक थी। भौतिकी को लेकर गहरे मतभेद के बावजूद, उन्होंने एक गर्मजोशी भरी व्यक्तिगत मित्रता बनाए रखी, और Einstein की मृत्यु के बाद Bohr की श्रद्धांजलि विज्ञान साहित्य के सबसे मार्मिक दस्तावेज़ों में से एक है।
Marcel Grossmann की सामान्य सापेक्षता के विकास में भूमिका का उल्लेख पहले किया जा चुका है, लेकिन इस पर और ज़ोर देना ज़रूरी है। Einstein और Grossmann ETH में अपने छात्र जीवन से घनिष्ठ मित्र थे, और जब Einstein को एहसास हुआ कि गुरुत्वाकर्षण का सिद्धांत विकसित करने के लिए उन्हें रीमानी ज्यामिति के गणितीय उपकरणों की आवश्यकता है, तो Grossmann ने ही उन्हें इस रूपरेखा से परिचित कराया और प्रारंभिक गणितीय शोध पत्रों में उनके साथ सहयोग किया। Einstein ने जीवन भर इस ऋण को स्वीकार किया। Grossmann की संबंधित गणित पर पकड़ और उसे अपने मित्र के साथ साझा करने की उनकी तत्परता के बिना, सामान्य सापेक्षता के विकास में काफी अधिक समय लग सकता था।
महान जर्मन गणितज्ञ David Hilbert, सामान्य सापेक्षता के विकास के अंतिम चरणों में सहयोगी और प्रतिस्पर्धी दोनों थे। Hilbert Einstein के काम का अनुसरण कर रहे थे और उन्होंने विविधतागत कलन की विधियों का उपयोग करके क्षेत्र समीकरणों के लिए अपना स्वयं का दृष्टिकोण विकसित किया था। यह प्रश्न कि समीकरणों के सही रूप तक पहले कौन पहुँचा — एक ऐसा प्रश्न जिसकी विज्ञान के इतिहासकारों ने गहन जाँच की है — काफी हद तक Einstein के पक्ष में सुलझाया जा चुका है, लेकिन Hilbert का काम इतना स्वतंत्र और समानांतर था कि सामान्य सापेक्षता के गणितीय सूत्रीकरण में उनका योगदान वास्तविक है, भले ही भौतिक व्याख्या पूरी तरह Einstein की थी।
Erwin Schrödinger, जिनका तरंग समीकरण क्वांटम यांत्रिकी का केंद्रीय उपकरण बना, उनके साथ Einstein का संबंध गर्मजोशी भरा और दीर्घकालिक था। Schrödinger ने कोपेनहेगन व्याख्या के प्रति Einstein की असंतुष्टि और इस भावना को साझा किया कि क्वांटम यांत्रिकी अपूर्ण है। इन मुद्दों पर उनके बीच पत्र-व्यवहार व्यापक था, और एक डिब्बे में बंद बिल्ली के बारे में Schrödinger का प्रसिद्ध विचार प्रयोग — एक ऐसी बिल्ली जिसकी अवस्था, क्वांटम यांत्रिकी के अनुसार, देखे जाने तक न जीवित है न मृत — आंशिक रूप से Einstein के साथ हुई चर्चाओं की प्रतिक्रिया थी।
1930 के दशक के शरणार्थी संकट में Einstein की भूमिका
जब जनवरी 1933 में Hitler जर्मनी में सत्ता में आए, तो Einstein उस समय संयुक्त राज्य अमेरिका में थे। उन्होंने जल्दी ही यह समझ लिया कि दुनिया के सबसे प्रसिद्ध वैज्ञानिक के रूप में उनकी हैसियत उन्हें अन्य उत्पीड़ित शिक्षाविदों को जर्मनी के बाहर पद और सुरक्षा दिलाने में असाधारण प्रभाव देती है। उन्होंने इस प्रभाव का उपयोग अगले कुछ वर्षों में बड़े उत्साह और व्यवस्थित तरीके से किया — सिफारिशी पत्र लिखकर, विश्वविद्यालयों के अध्यक्षों और सरकारी अधिकारियों से व्यक्तिगत अपील करके, और शरणार्थी विद्वानों की नियुक्ति के लिए समर्पित संगठनों की स्थापना और उन्हें समर्थन देने में मदद करके।
नाज़ी जर्मनी से शिक्षाविदों के पलायन का पैमाना असाधारण था। 1933 के नाज़ी नस्लीय कानूनों के तहत सैकड़ों विश्वविद्यालय प्राध्यापकों को बर्खास्त कर दिया गया। इनमें गणितज्ञ, भौतिकशास्त्री, रसायनशास्त्री, जीवविज्ञानी, इतिहासकार, दार्शनिक, वकील और अर्थशास्त्री शामिल थे, जिनमें से कई अपने-अपने क्षेत्रों के सबसे प्रतिष्ठित विद्वानों में से थे। उनके जाने से जर्मन शैक्षणिक संस्कृति दरिद्र हो गई और ब्रिटेन, संयुक्त राज्य अमेरिका, तुर्की तथा अन्य जगहों के वे संस्थान समृद्ध हुए जिन्होंने उन्हें अपनाया।
Einstein ने विशेष रूप से भौतिकविदों और गणितज्ञों की मदद करने के लिए बहुत मेहनत की। उन्होंने Rockefeller Foundation को पत्र लिखे, जिसने शरणार्थी विद्वानों को सहायता देने के लिए एक कार्यक्रम शुरू किया था। उन्होंने Princeton University, New School for Social Research और अन्य संस्थानों से अपील की, जो सक्रिय रूप से प्रवासियों की भर्ती कर रहे थे। उन्होंने दुनिया भर में अपने सहयोगियों को व्यक्तिगत पत्र लिखे और उनसे विशेष व्यक्तियों के लिए पद खोजने में मदद माँगी। वे अपना समय और संसाधन उदारतापूर्वक देते थे, और उनके हस्तक्षेप की बदौलत जिन लोगों ने अपनी सुरक्षा और आगे का करियर पाया, उनकी संख्या काफी बड़ी थी।
शरणार्थियों के इस पलायन ने अमेरिकी विज्ञान को ऐसे तरीकों से बदल दिया, जिसे कम करके आँकना मुश्किल है। नाज़ी यूरोप से भागे और अमेरिका में पद पाने वाले भौतिकविद — न केवल Einstein, बल्कि Leo Szilard, Eugene Wigner, John von Neumann, Enrico Fermi, Hans Bethe और कई अन्य — बीसवीं सदी के मध्य में अमेरिकी वैज्ञानिक शक्ति के विकास में केंद्रीय भूमिका निभाते रहे। इनमें से अनेक लोगों ने Manhattan Project पर काम किया। उनकी बौद्धिक संस्कृति, उनके कठोरता और महत्वाकांक्षा के मानदंड, और उनके संस्थागत नेटवर्क अमेरिकी शोध विश्वविद्यालयों और राष्ट्रीय प्रयोगशालाओं में गहराई से समा गए। युद्धोत्तर काल में अमेरिकी विज्ञान काफी हद तक इसी असाधारण प्रवासन की देन था।
एकीकृत क्षेत्र सिद्धांत की खोज
अपने जीवन के अंतिम तीन दशकों में, लगभग 1920 के दशक के मध्य से लेकर अपनी मृत्यु तक, Einstein ने अपनी अधिकांश वैज्ञानिक ऊर्जा एक ही बड़े लक्ष्य को समर्पित कर दी: एक ऐसे एकीकृत क्षेत्र सिद्धांत का निर्माण, जो विद्युत चुंबकत्व और गुरुत्वाकर्षण को एक ही गणितीय ढाँचे में समेट सके। उन्हें उम्मीद थी कि ऐसा सिद्धांत क्वांटम यांत्रिकी में उन्हें नज़र आने वाली समस्याओं को भी सुलझाएगा और एक नियतात्मक आधार प्रदान करेगा, जो क्वांटम घटनाओं की आभासी यादृच्छिकता की व्याख्या कर सके।
एकीकृत क्षेत्र सिद्धांत की यह खोज Einstein के कार्यशील जीवन के अंतिम तीस वर्षों तक चलती रही और अंततः असफल रही। Einstein ने कई दृष्टिकोण आज़माए — सामान्य सापेक्षता में मीट्रिक टेन्सर में संशोधन, उच्च-आयामी स्पेसटाइम से जुड़े सिद्धांत, क्षेत्र समीकरणों के असममित सामान्यीकरण — और इनमें से कोई भी काम नहीं आया। वे अपने जीवन के अंतिम दिनों तक शोध-पत्र प्रकाशित करते और इस समस्या पर काम करते रहे, लेकिन जिस एकीकृत क्षेत्र सिद्धांत की उन्होंने कल्पना की थी, वह कभी नहीं मिला।
पीछे मुड़कर देखें, तो अधिकांश भौतिकविदों का निष्कर्ष है कि Einstein एक गलत दिशा में आगे बढ़ रहे थे, या कम से कम यह कि वे सफलता के लिए ज़रूरी औज़ारों के बिना काम कर रहे थे। बलों की एकता वास्तव में भौतिकी की एक मूलभूत समस्या है — आज के भौतिकविद इसे स्ट्रिंग थ्योरी, लूप क्वांटम ग्रेविटी और अन्य दृष्टिकोणों के ज़रिए खोज रहे हैं — लेकिन Einstein ने जो विशेष राह चुनी, वह उत्तर तक नहीं पहुँची। एक순 ज्यामितीय, नियतात्मक सिद्धांत पर उनका आग्रह और क्वांटम यांत्रिकी को वास्तविकता के मूलभूत विवरण के रूप में स्वीकार करने से उनका इनकार, उन्हें उन दिशाओं से दूर ले गया जो सबसे फलदायी साबित हुईं।
Einstein के अंतिम दशकों के काम में कुछ वीरतापूर्ण भी है और कुछ करुणाजनक भी। वे दुनिया के सबसे प्रसिद्ध वैज्ञानिक थे, एकांत में उस समस्या पर काम कर रहे थे जिसे उनके सहयोगियों ने काफी हद तक छोड़ दिया था, और वे उन सौंदर्यशास्त्रीय तथा दार्शनिक सिद्धांतों से निर्देशित थे जिनसे भौतिकी जगत आगे बढ़ चुका था। युवा भौतिकविद Princeton में उनसे मिलने आते थे, लेकिन उनके दृष्टिकोण को समझने या उसमें साझेदारी करने वाले कम ही थे। वे अपने एकांत से भलीभाँति परिचित थे और अपनी विशिष्ट समभाव की भावना के साथ उसे स्वीकार करते थे।
Einstein-Bohr बहसें और भौतिक वास्तविकता का स्वरूप
क्वांटम यांत्रिकी की व्याख्या को लेकर Einstein और Niels Bohr के बीच जो दार्शनिक विवाद हुआ, वह बीसवीं सदी की महान बौद्धिक मुठभेड़ों में से एक था, और यह महज किसी गणितीय रूपरेखा के अर्थ को लेकर कोई तकनीकी मतभेद नहीं था। यह विवाद भौतिक वास्तविकता की प्रकृति, भौतिकी के सिद्धांत में प्रेक्षक की भूमिका, और विज्ञान की ज्ञान-सीमाओं जैसे मूलभूत प्रश्नों के केंद्र तक जाता था। ये प्रश्न आज भी अनुत्तरित हैं, और Einstein-Bohr की बहस अभी भी क्वांटम यांत्रिकी की नींव से जुड़ी चर्चाओं में सक्रिय रूप से उद्धृत होती है।
Bohr की कोपेनहेगन व्याख्या यह मानती थी कि क्वांटम यांत्रिकी भौतिक वास्तविकता का एक संपूर्ण वर्णन प्रस्तुत करती है, लेकिन यह वर्णन अनिवार्य रूप से प्रायिकता पर आधारित है। क्वांटम निकायों के सभी गुणों के मान एक साथ निश्चित नहीं होते; वे अवस्थाओं के अध्यारोपण में होते हैं, और माप इस अध्यारोपण को ध्वस्त करके एक निश्चित परिणाम देता है, जिसकी प्रायिकताएँ तरंग फलन द्वारा निर्धारित होती हैं। माप की क्रिया स्वयं में मौलिक है — ऐसा नहीं है कि कण के पास माप से पहले कोई निश्चित स्थिति थी जिसे हमने मापकर बाधित कर दिया। बाधित करने के लिए कोई निश्चित स्थिति थी ही नहीं। कोपेनहेगन दृष्टिकोण में वास्तविकता वही है जो देखी और मापी जा सके।
Einstein को यह व्याख्या गहराई से असंतोषजनक लगती थी — कुछ कारण भौतिकी से जुड़े थे, कुछ दर्शन से। वे उस विचार के प्रति प्रतिबद्ध थे जिसे वे यथार्थवाद कहते थे — अर्थात यह कि एक वास्तविक भौतिक जगत है जो प्रेक्षकों और उनके मापों से स्वतंत्र रूप से अस्तित्व में है। वे स्थानीयता के सिद्धांत के प्रति भी प्रतिबद्ध थे — अर्थात यह कि भौतिक प्रभाव अंतरिक्ष में तात्कालिक रूप से प्रसारित नहीं हो सकते। उनके विचार में कोपेनहेगन व्याख्या इन दोनों सिद्धांतों का उल्लंघन करती थी। इसका तात्पर्य था कि क्वांटम निकायों की प्रेक्षण से स्वतंत्र कोई निश्चित अवस्था नहीं होती (जो यथार्थवाद का उल्लंघन है), और EPR तर्क यह सुझाता था कि क्वांटम यांत्रिकी के लिए मनमानी दूरियों पर तात्कालिक सहसंबंध आवश्यक हैं (जो स्थानीयता का उल्लंघन है)।
सन् 1935 में Boris Podolsky और Nathan Rosen के साथ मिलकर लिखा गया EPR शोधपत्र भौतिकी के इतिहास में सर्वाधिक चर्चित शोधपत्रों में से एक है। इसमें एक विचार प्रयोग का वर्णन किया गया था जिसमें दो कण संक्षेप में अन्योन्यक्रिया करते हैं और फिर बड़ी दूरियों तक अलग हो जाते हैं, लेकिन क्वांटम यांत्रिकी की दृष्टि से उलझे रहते हैं — अर्थात वे एक ऐसी अवस्था में होते हैं जिसमें दोनों कणों के संगत गुणों के माप परस्पर सहसंबद्ध हों। यदि आप एक कण की स्थिति को सटीक रूप से मापते हैं, तो क्वांटम यांत्रिकी आपको दूसरे कण की स्थिति तात्कालिक रूप से बता देती है, चाहे उनके बीच की दूरी कुछ भी हो। यदि आप इसके बजाय एक कण का संवेग मापें, तो आपको दूसरे का संवेग भी तुरंत ज्ञात हो जाता है।
Einstein, Podolsky और Rosen ने तर्क दिया कि इससे दो में से एक निष्कर्ष निकलता है: या तो एक कण का माप दूसरे को तात्कालिक रूप से प्रभावित करता है, जो स्थानीयता का उल्लंघन है; या फिर कणों के पास पहले से ही निश्चित स्थितियाँ और संवेग थे, और क्वांटम यांत्रिकी इन पूर्व-विद्यमान मानों का वर्णन करने में सिर्फ विफल हो रही थी, जिससे वह अपूर्ण सिद्ध होती है। उन्होंने दूसरे विकल्प को प्राथमिकता दी और निष्कर्ष निकाला कि क्वांटम यांत्रिकी अपूर्ण है — कि कुछ छिपे हुए चर हैं जिनका वर्णन कोई अधिक पूर्ण सिद्धांत अंततः करेगा।
Bohr ने एक ऐसे तर्क के साथ उत्तर दिया जिसे कुछ लोगों ने ठोस पाया और अन्य ने इतना दुरूह कि समझ से परे। उन्होंने यह स्थापित किया कि EPR तर्क इस बारे में एक गलत धारणा पर आधारित था कि माप के संदर्भ से स्वतंत्र रूप से किसी क्वांटम निकाय का कोई गुण होने का अर्थ क्या है। क्वांटम यांत्रिकी में किसी कण की स्थिति का प्रश्न और उसके संवेग का प्रश्न स्वतंत्र प्रश्न नहीं हैं; एक को मापने के लिए आवश्यक प्रयोगात्मक व्यवस्था दूसरे को मापने के लिए आवश्यक व्यवस्था को असंभव बना देती है। माप से पहले दोनों गुणों का एक साथ अस्तित्व होना किसी सार्थक अर्थ में संभव नहीं है।
यह बहस दोनों में से किसी के भी जीवनकाल में नहीं सुलझी। इसका समाधान आंशिक रूप से आयरिश भौतिक विज्ञानी John Bell के काम से आया, जिन्होंने 1964 में यह दिखाया कि Einstein की कल्पना के अनुसार किसी भी स्थानीय छिपे-चर सिद्धांत (local hidden-variable theory) से उलझे हुए कणों (entangled particles) के मापों के बीच ऐसे सांख्यिकीय सहसंबंध (statistical correlations) का अनुमान लगाया जाएगा जो कुछ असमानताओं — Bell की असमानताओं — को संतुष्ट करते हैं। क्वांटम यांत्रिकी इन असमानताओं के उल्लंघन की भविष्यवाणी करती है। 1970 के दशक में शुरू हुए और बाद के दशकों में परिष्कृत किए गए प्रयोगों ने लगातार Bell की असमानताओं का उल्लंघन दिखाया है, जिससे स्थानीय छिपे-चर सिद्धांत खारिज हो गए हैं। क्वांटम यांत्रिकी के आधार में एक नियतत्ववादी सिद्धांत (deterministic theory) की Einstein की परिकल्पना, उस विशिष्ट रूप में जो उन्होंने सोची थी, प्रयोग द्वारा गलत साबित हो चुकी है।
हालांकि, वास्तविकता की प्रकृति और प्रेक्षक (observer) की भूमिका से जुड़े गहरे सवाल अभी भी वास्तविक रूप से अनुत्तरित हैं। क्वांटम यांत्रिकी की व्याख्या पर भौतिक विज्ञानियों और दार्शनिकों के बीच अभी भी सक्रिय रूप से बहस जारी है, और इसकी कई व्याख्याएं — कोपेनहेगन व्याख्या, बहु-विश्व व्याख्या (many-worlds interpretation), Bohmian mechanics, और अन्य — में से प्रत्येक अलग-अलग तरीकों से Einstein की चिंताओं को सुलझाने का दावा करती है। Einstein और Bohr के बीच 1920 के दशक में शुरू हुई बातचीत आज भी जारी है, और यह बिल्कुल स्पष्ट नहीं है कि यह कब समाप्त होगी या होगी भी या नहीं।
Einstein के वैज्ञानिक शोधपत्र और प्रकाशित कार्य
Einstein का वैज्ञानिक योगदान विशाल था और उनके पूरे करियर में उल्लेखनीय रूप से गुणवत्ता में एकसमान रहा — 1901 में उनके पहले शोधपत्रों से लेकर उनकी मृत्यु से कुछ महीने पहले एकीकृत क्षेत्र सिद्धांत (unified field theory) पर उनके अंतिम कार्य तक, आधी सदी से अधिक सक्रिय प्रकाशन का सफर। उन्होंने लगभग तीन सौ वैज्ञानिक शोधपत्र और सौ से अधिक गैर-वैज्ञानिक रचनाएं प्रकाशित कीं, जिनमें राजनीति, दर्शन और सामाजिक मुद्दों पर निबंध, भाषण और पत्र शामिल हैं। उनके संकलित कार्य, जो Princeton University Press द्वारा Hebrew University of Jerusalem के सहयोग से प्रकाशित किए जा रहे हैं, अब बीस से अधिक खंडों में फैले हैं और उनकी सोच का सबसे व्यापक चित्र सभी आयामों में प्रस्तुत करते हैं।
1902-1904 के उनके शुरुआती शोधपत्र, चमत्कारी वर्ष से पहले के, पहले से ही Einstein की विशिष्ट शैली दर्शाते हैं: स्पष्ट, सीधे, तकनीकी विवरण की बजाय मूलभूत सिद्धांतों पर केंद्रित, और उन मान्यताओं पर सवाल उठाने को तैयार जिन्हें अन्य भौतिक विज्ञानी स्वयंसिद्ध मानते थे। वे ऊष्मागतिकी (thermodynamics) की सांख्यिकीय नींव पर काम कर रहे थे, उन परिस्थितियों की खोज कर रहे थे जिनके तहत ऊष्मागतिकी का दूसरा नियम परमाणुओं के व्यवहार से निकाला जा सकता है, और उन गणितीय उपकरणों को विकसित कर रहे थे जो अंततः Brownian motion के शोधपत्र को संभव बनाएंगे।
1905 के चार शोधपत्र उनके प्रारंभिक करियर की निर्विवाद उपलब्धियां हैं। भौतिकी के इतिहास में किसी भी अन्य शोधपत्र से अधिक इन्हें पुनर्मुद्रित, अनूदित और विश्लेषित किया गया है। प्रकाश विद्युत प्रभाव (photoelectric) पर शोधपत्र अपेक्षाकृत संक्षिप्त और सीधा है; Brownian motion का शोधपत्र गणितीय दृष्टि से अधिक विस्तृत है; विशेष सापेक्षता (special relativity) का शोधपत्र सैद्धांतिक भौतिकी के मानकों के हिसाब से उल्लेखनीय रूप से पठनीय है, जो दो अभिधारणाओं (postulates) के स्पष्ट कथन से शुरू होकर चरण-दर-चरण परिणाम निकालता है; और द्रव्यमान-ऊर्जा तुल्यता (mass-energy equivalence) का शोधपत्र मात्र तीन पृष्ठ लंबा है — एक प्रकार का गणितीय उपसंहार जो लंबे शोधपत्र में स्थापित ढांचे में इतिहास का सबसे प्रसिद्ध समीकरण जोड़ता है।
सामान्य सापेक्षता के सिद्धांत को विकसित करने वाले उनके बाद के शोधपत्र, जो 1907 से 1915 तक तैयार हुए, तुल्यता सिद्धांत (equivalence principle) से क्षेत्र समीकरणों (field equations) तक की दस वर्षीय यात्रा को इस पारदर्शिता के साथ रेखांकित करते हैं जो सिद्धांत के इतिहास को असाधारण रूप से सुलभ बनाती है। कई वैज्ञानिक सिद्धांतों के विपरीत, जिनका विकास केवल पत्राचार और प्रयोगशाला नोटबुक से पुनर्निर्मित किया जाता है, सामान्य सापेक्षता को उसके रचयिता के स्वयं के प्रकाशित कार्य के माध्यम से उल्लेखनीय स्पष्टता के साथ समझा जा सकता है। गलत मोड़, आंशिक सफलताएं और अंतिम विजय — सब कुछ वैज्ञानिक साहित्य में दर्ज है।
व्यक्तिगत जीवन और संबंध
Einstein के व्यक्तिगत संबंध जटिल और कभी-कभी कष्टदायक थे। वे गहरी आत्मीयता और सच्चे स्नेह के लिए सक्षम थे, लेकिन अपने वैज्ञानिक कार्य के प्रति उनकी समर्पण-भावना ने उन्हें अक्सर एक कठिन साथी, पिता और मित्र बना दिया। वे आत्मकेंद्रित हो सकते थे, दूसरों की परवाह न करने वाले, और असुविधाजनक क्षणों में अपनी भीतरी दुनिया में खो जाने के आदी थे।
अपनी पहली पत्नी Mileva के साथ उनका संबंध कड़वाहट और आरोप-प्रत्यारोप के साथ समाप्त हुआ। तलाक की प्रक्रिया वर्षों तक खिंचती रही, जो पैसों को लेकर विवादों और उनके बेटों की कठिन परिस्थिति से और उलझ गई। Einstein का अपने बड़े बेटे Hans Albert के साथ रिश्ता तलाक के कारण शुरुआत में तनावपूर्ण रहा, लेकिन बाद में सुधर गया; Hans Albert ने Princeton में अपने पिता से मुलाकात की और एक ऐसा संबंध बनाए रखा जो कभी पूरी तरह सहज नहीं रहा, फिर भी उसमें सच्ची गर्मजोशी थी। अपने छोटे बेटे Eduard के साथ उनका रिश्ता कहीं अधिक पीड़ादायक बना रहा। Eduard की मानसिक बीमारी, जो उनके बीस के शुरुआती वर्षों में विकराल रूप से सामने आई, Einstein के लिए गहरी पीड़ा का स्रोत थी — जिसके बारे में वे खुलकर शायद ही कभी बोले, लेकिन जिसने उन्हें भीतर तक प्रभावित किया। उन्होंने जीवन भर Eduard की देखभाल के लिए पैसे भेजे, लेकिन यूरोप छोड़ने के बाद वे उससे मिलने का साहस नहीं जुटा सके।
अपनी सचिव Helen Dukas के साथ उनका संबंध उनके बाद के जीवन के सबसे स्थायी और महत्वपूर्ण संबंधों में से एक था। उन्होंने Einstein का घर संभाला, उनका पत्राचार देखा, उन्हें अनचाहे हस्तक्षेपों से बचाया, और लगभग तीस वर्षों तक अपना सब कुछ उनकी सेवा में समर्पित कर दिया। उनकी मृत्यु के बाद, वे उनके कागज़ातों और विरासत की प्रमुख संरक्षकों में से एक बनीं और Einstein Archive की स्थापना में दूसरों के साथ मिलकर काम किया।
Einstein के मित्रों और पत्राचारकों का एक विस्तृत दायरा था, जिसमें बीसवीं सदी के कई प्रमुख वैज्ञानिक, दार्शनिक और कलाकार शामिल थे। उन्होंने Niels Bohr, दार्शनिक Karl Popper, गणितज्ञ Bertrand Russell, मनोवैज्ञानिक और चिकित्सक Sigmund Freud — जिनके साथ उन्होंने युद्ध के मनोविज्ञान पर पत्रों का आदान-प्रदान किया — और उपन्यासकार एवं शांतिवादी Romain Rolland के साथ, तथा अनेक अन्य लोगों के साथ लंबे पत्राचार बनाए रखे। वे अपने क्षेत्र से परे भी लोगों और विचारों के प्रति सच्ची जिज्ञासा रखते थे, और उनकी मित्रता अक्सर पेशेवर जीवन की सीमाओं को पार कर जाती थी।
दर्शन और धर्म
Einstein ने दार्शनिक और धार्मिक प्रश्नों पर गंभीरता से विचार किया और उन्हें अपनी विशिष्ट सीधी और गहरी शैली में अभिव्यक्त किया। उनके विचार अनूठे थे और कभी-कभी उन्हें गलत तरीके से प्रस्तुत किया गया है।
वे किसी भी पारंपरिक अर्थ में धार्मिक नहीं थे। वे किसी ऐसे व्यक्तिगत ईश्वर में विश्वास नहीं रखते थे जो मानवीय मामलों में हस्तक्षेप करे, प्रार्थनाओं का उत्तर दे, धर्मात्माओं को पुरस्कृत करे, या दुष्टों को दंड दे। ईश्वर की ऐसी अवधारणा उन्हें बौद्धिक और नैतिक दृष्टि से असंतोषजनक लगती थी। जब उनसे पूछा जाता था कि क्या वे ईश्वर में विश्वास रखते हैं, तो वे प्रायः Spinoza के ईश्वर की ओर मुड़ जाते थे — वह तार्किक सिद्धांत जो व्यवस्था और बोधगम्यता का आधार है और जो ब्रह्मांड के मूल में है। उन्हें यह विश्वास करना असंभव लगता था कि प्रकृति में उन्हें दिखने वाली अद्भुत व्यवस्था संयोग या आकस्मिकता की उपज है। ब्रह्मांड के रहस्यों के सामने वे एक गहरी श्रद्धा अनुभव करते थे, जिसे उन्होंने कुछ अटपटे शब्दों में "ब्रह्मांडीय धार्मिक भावना" कहा।
यह ब्रह्मांडीय धार्मिक भावना किसी अलौकिक सत्ता में आस्था नहीं थी, बल्कि ब्रह्मांड की व्यवस्था और सौंदर्य के प्रति एक सौंदर्यबोधपूर्ण और बौद्धिक प्रतिक्रिया थी। Einstein का मानना था कि वैज्ञानिक अन्वेषण की सबसे गहरी प्रेरणा यही श्रद्धा और विस्मय की भावना है — यह विश्वास कि ब्रह्मांड बोधगम्य है, कि उसके गहनतम सिद्धांत सुंदर हैं, और कि उसे समझने का प्रयास मनुष्य के लिए उपलब्ध सर्वोच्च गतिविधियों में से एक है।
नैतिकता के विषय में Einstein एक सुसंगत मानवतावादी थे। वे जाति, राष्ट्रीयता या धर्म की परवाह किए बिना, प्रत्येक व्यक्ति की गरिमा में विश्वास रखते थे। वे उत्पीड़न और शोषण के हर रूप के विरोधी थे। वे कट्टर नैतिकता के प्रति संशयवादी थे, लेकिन कुछ मूल मूल्यों — स्वतंत्रता, न्याय, करुणा — के प्रति प्रतिबद्ध थे, जिन्हें वे मानव सभ्यता की नींव मानते थे।
मृत्यु और उसके बाद
1950 के दशक की शुरुआत में Einstein का स्वास्थ्य गिरने लगा। उन्होंने अपने पूरे जीवन में कई बीमारियों का सामना किया था — पेट की तकलीफें, दिल की समस्याएँ, कभी-कभी अत्यधिक थकान के दौर — लेकिन असली संकट अप्रैल 1955 में आया। उन्हें पेट की मुख्य धमनी में एक उभार यानी abdominal aortic aneurysm हो गया, जिसमें से खून बहने लगा। डॉक्टरों ने ऑपरेशन की सलाह दी। Einstein ने मना कर दिया। वे छिहत्तर साल के थे, जो काम वे सबसे ज़्यादा करना चाहते थे वह पूरा हो चुका था, और मृत्यु की संभावना को लेकर उनके मन में एक तरह का सुकून आ गया था। उन्होंने अपने डॉक्टरों से कहा, "मैं तब जाना चाहता हूँ जब मैं चाहूँ। जीवन को कृत्रिम तरीके से लंबा खींचना बेस्वाद है। मैं अपना हिस्सा निभा चुका हूँ; अब जाने का वक्त आ गया है। मैं इसे शालीनता से करूँगा।"
उन्हें Princeton Hospital ले जाया गया, जहाँ अगले कुछ दिनों में उनकी हालत बिगड़ती रही, और 18 अप्रैल 1955 की तड़के सुबह छिहत्तर साल की उम्र में उनका निधन हो गया। उन्होंने कहा था कि उनके कागज़ात और नोटबुक उनके पास रहें, और वे इज़राइल के स्वतंत्रता दिवस के लिए एक भाषण और अपनी unified field theory की गणनाओं पर काम करते रहे थे। उस वक्त मौजूद एक नर्स ने बताया कि अपनी अंतिम साँसों में उन्होंने जर्मन में कुछ शब्द कहे जो वह समझ नहीं पाई। वे अकेले थे।
उनकी इच्छा के अनुसार, न कोई सार्वजनिक समारोह हुआ और न कोई स्मारक बनाया गया। उनके शव का अंतिम संस्कार किया गया और उनकी राख एक गुप्त स्थान पर बिखेर दी गई। pathologist Thomas Harvey ने Einstein के परिवार की अनुमति के बिना उनका मस्तिष्क निकाल लिया, फिर उसे संरक्षित करके दशकों तक अपने पास रखा — यह मशहूर हस्तियों की मृत्यु के इतिहास के अजीबोगरीब प्रसंगों में से एक बन गया। आखिरकार यह वैज्ञानिक जाँच का विषय बना, जिसमें उनके cerebral cortex के कुछ हिस्सों की असामान्य बनावट के बारे में कुछ रोचक लेकिन विवादास्पद और काफी हद तक अनिर्णायक निष्कर्ष सामने आए — ऐसे निष्कर्ष जिन पर अधिकांश neuroscientist काफी संदेह के साथ नज़र डालते हैं।
उनके निधन की खबर पर दुनिया ने श्रद्धांजलि और सच्चे सार्वजनिक शोक का जो उमड़ता हुआ सैलाब दिखाया, वह उनकी असाधारण प्रसिद्धि के लिहाज़ से भी अनोखा था। दुनिया भर के राजनेताओं, वैज्ञानिकों, कलाकारों और आम लोगों ने अपनी क्षति का इज़हार किया। जिस वैज्ञानिक ने ब्रह्मांड की नई परिकल्पना दी थी, उनका अंत वैसे ही हुआ जैसे उन्होंने जीया था — सादगी से, अपनी शर्तों पर, अंत तक काम करते हुए।
Einstein की शोहरत: बोझ भी, मंच भी
1919 के सूर्यग्रहण से मिली पुष्टि के बाद Einstein का एक वैश्विक सेलिब्रिटी के रूप में उभरना एक सच्ची नई सांस्कृतिक घटना थी, जिसके लिए न वे खुद तैयार थे, न उनके आसपास की संस्थाएँ। उनकी प्रसिद्धि की प्रकृति — जो순 अमूर्त चिंतन की एक ऐसी उपलब्धि पर आधारित थी जिसे आम जनता का कोई भी सदस्य वास्तव में नहीं समझ सकता था — बेमिसाल थी। लोग उन्हें इसलिए नहीं देखने आते थे कि वे relativity समझते थे; वे इसलिए आते थे क्योंकि उन्हें लगता था कि इस इंसान ने कुछ असाधारण किया है, किसी तरह से उन्होंने वास्तविकता के ताने-बाने में किसी भी पहले के इंसान से कहीं ज़्यादा गहरे झाँका है, और यह उपलब्धि उन्हें ध्यान देने योग्य शख्सियत बनाती है। इससे पहले भी वैज्ञानिक मशहूर हुए थे, लेकिन फिल्मी सितारों या नेताओं जैसी शोहरत के साथ नहीं — न सड़क पर पहचाने जाते थे, न ऑटोग्राफ माँगने वालों की भीड़ से घिरते थे, न अखबारों की गपशप का विषय बनते थे। Einstein ये सब बन गए, और उन्होंने अपने जीवन के शेष दशक अपनी शोहरत से उपजी अजीब माँगों और अवसरों के बीच रास्ता निकालते हुए बिताए।
शोहरत को लेकर उनके मन में एक दुविधा थी जो उनके स्वभाव की खास पहचान थी। वे अपनी उपलब्धियों को लेकर सच्चे अर्थों में विनम्र थे — इस अर्थ में कि वे खुद को असाधारण नहीं मानते थे। उन्होंने बस अपनी जिज्ञासा का पीछा किया था, और नतीजे उन्हें भी उतने ही अचरज में डालते थे जितना किसी और को। Einstein की वह लोकप्रिय छवि — एक रहस्यमय पैगम्बर जिसने ब्रह्मांड के दिल में झाँक लिया हो — उन्हें खुद मनोरंजक लगती थी। इस नायक-पूजा से, अपने समय पर की जाने वाली माँगों से, और निजी जीवन में लगातार दखलंदाज़ी से वे असहज रहते थे।
लेकिन वे इस बात को लेकर भी पूरी तरह सजग थे कि उनकी प्रसिद्धि उन्हें क्या करने का अवसर देती है। इसने उन्हें एक ऐसा मंच दिया था जो इतिहास में बहुत कम निजी व्यक्तियों को मिला था। उनके सार्वजनिक वक्तव्य पूरी दुनिया में छपते थे। किसी भी मुद्दे पर उनका समर्थन इतना ध्यान खींचता था जो कोई आम नागरिक नहीं खींच सकता था। राजनीतिक कार्यक्रमों में उनकी उपस्थिति से उन्हें दृश्यता और वैधता मिलती थी। उन्होंने इस मंच का उपयोग सोच-समझकर और निरंतरता के साथ किया — अपने सार्वजनिक जीवन भर वे उन मुद्दों की पैरवी करते रहे जो उन्हें सबसे अधिक प्रिय थे: अंतरराष्ट्रीय शांति, नागरिक स्वतंत्रताएँ, नस्लीय समानता, शैक्षणिक स्वतंत्रता, और यहूदी समुदाय का कल्याण।
राजनीतिक पैरवी के लिए प्रसिद्धि का उपयोग करना अपनी कीमत और जटिलताओं से मुक्त नहीं था। उनकी शांतिवादी विचारधारा, जिसे उन्होंने कई बार पूर्ण रूप से व्यक्त किया था, नाज़ी जर्मनी की वास्तविकता के सामने भोली और यहाँ तक कि खतरनाक मानी जाने लगी और उसकी आलोचना हुई। वामपंथी और उदारवादी कारणों से उनके जुड़ाव ने उन्हें अमेरिकी रूढ़िवादियों का निशाना बनाया, जिन्हें उन पर कम्युनिस्ट सहानुभूति का संदेह था। अपनी वैज्ञानिक विशेषज्ञता से बाहर के विषयों पर — अर्थशास्त्र, राजनीति, अंतरराष्ट्रीय संबंधों पर — उनके वक्तव्य कभी-कभी भौतिकी पर उनके कथनों जितने सुविचारित नहीं होते थे, और उनके आलोचकों ने इन कमज़ोरियों का फ़ायदा उठाया।
वे इन जटिलताओं से वाकिफ़ थे और कभी-कभी उन्होंने यह स्वीकार भी किया कि प्रसिद्धि ने उन्हें ऐसे विषयों पर बोलने के लिए प्रेरित किया जिन्हें वे पूरी तरह नहीं समझते थे। लेकिन वे अपनी राजनीतिक भागीदारी के लिए माफ़ी माँगने वाले नहीं थे। उनका मानना था कि प्रमुख व्यक्तियों का यह दायित्व है कि वे जिन सिद्धांतों को महत्व देते हैं, उनके पक्ष में अपना जो भी प्रभाव हो उसका उपयोग करें — और उन्होंने अपने पूरे वयस्क जीवन में इस दायित्व को लगातार निभाया, चाहे इसकी कुछ कीमत उनकी पेशेवर प्रतिष्ठा को चुकानी पड़ी हो और McCarthy के दौर में कुछ व्यक्तिगत जोखिम भी उठाना पड़ा हो।
उनकी मृत्यु के बाद उनकी छवि को असाधारण हद तक पुनः प्रस्तुत, लाइसेंस और व्यावसायिक रूप दिया गया है। येरुशलम के Hebrew University of Jerusalem, जिसे उन्होंने अपनी बौद्धिक संपदा सौंपी थी, उनकी छवि और स्वरूप के उपयोग का लाइसेंस देता है, और Einstein का चेहरा कॉफ़ी मग से लेकर वायलिन के डिब्बों और प्रेरणादायक पोस्टरों तक तमाम उत्पादों पर नज़र आता है। यह मरणोपरांत व्यावसायीकरण शायद उन्हें एक साथ उतना ही मनोरंजक और हल्का-सा चौंकाने वाला लगता। वे सच में पैसे और हैसियत के परंपरागत प्रतीकों के प्रति उदासीन थे, और उनकी छवि का एक उपभोक्ता उत्पाद में बदल जाना प्रसिद्धि का वह रूप है जिसे उन्होंने कभी नहीं चाहा था और जिसे उस विनम्र, एकांतप्रिय इंसान से जोड़ पाना मुश्किल है जो वे जीवन में थे।
Einstein और ब्लैक होल: एक जटिल संबंध
Einstein की वैज्ञानिक विरासत की सबसे बड़ी विडंबनाओं में से एक यह है कि उनके द्वारा रचे गए सिद्धांत — सामान्य सापेक्षता — ने ब्लैक होल के अस्तित्व की भविष्यवाणी की: ऐसी वस्तुएँ जो इतनी विशाल और इतनी संकुचित होती हैं कि एक निश्चित त्रिज्या के भीतर से कुछ भी नहीं निकल सकता, यहाँ तक कि प्रकाश भी नहीं। Einstein को ब्लैक होल में विश्वास नहीं था। उनका मानना था कि उनके लिए आवश्यक अत्यधिक संकुचन भौतिक रूप से असंभव है, और उन्होंने 1930 के दशक के अंत में शोध पत्र प्रकाशित कर यह तर्क दिया कि तारकीय द्रव्यमान वास्तव में इस तरह की वस्तुओं का निर्माण करने के लिए संकुचित नहीं हो सकते।
Schwarzschild का हल, जो Karl Schwarzschild ने 1916 में खोजा था, एक पूर्णतः गोलाकार, बिना घूमने वाले द्रव्यमान के चारों ओर स्पेसटाइम की सटीक ज्यामिति का वर्णन करता था। इसने एक क्रांतिक त्रिज्या की भविष्यवाणी की — जिसे अब Schwarzschild त्रिज्या कहा जाता है — जिसके भीतर पलायन वेग प्रकाश की गति से अधिक हो जाता है। Schwarzschild की हल खोजने के कुछ ही समय बाद मृत्यु हो गई, और उनके परिणाम की भौतिक व्याख्या दशकों तक विवादास्पद रही। Einstein, उस सिद्धांत के रचयिता होने के बावजूद जिसने इन वस्तुओं की भविष्यवाणी की थी, उन लोगों में शामिल थे जिन्हें उनकी भौतिक वास्तविकता पर संदेह था।
1930 के दशक में Subrahmanyan Chandrasekhar के सैद्धांतिक कार्य ने यह दर्शाया कि एक निश्चित द्रव्यमान से अधिक के तारों को अपकृष्ट इलेक्ट्रॉन पदार्थ के दबाव से सहारा नहीं मिल सकता और वे सिकुड़ते रहेंगे। Einstein और Eddington दोनों ने Chandrasekhar के निष्कर्ष का विरोध किया, और Eddington ने सार्वजनिक रूप से इस विचार का मज़ाक उड़ाया कि तारे सिमटकर बिंदु बन सकते हैं। वे दोनों गलत थे। Chandrasekhar की गणना सही थी, और उन्हें इसके लिए 1983 में भौतिकी का नोबेल पुरस्कार मिला।
ब्लैक होल की प्रत्यक्ष पुष्टि Einstein की मृत्यु के कई दशकों बाद हुई। पहला ठोस अप्रत्यक्ष प्रमाण 1970 के दशक में मिला, जब खगोलविदों ने द्विआधारी तारा प्रणालियों से X-किरण उत्सर्जन देखा, जिससे यह संकेत मिला कि उनमें से एक घटक एक अत्यंत सघन और भारी वस्तु थी — संभवतः एक ब्लैक होल। ब्लैक होल की छाया की प्रत्यक्ष छवि 2019 में प्राप्त हुई, जब Event Horizon Telescope के सहयोग से आकाशगंगा M87 के केंद्र में स्थित महाविशाल ब्लैक होल के आस-पास के क्षेत्र की पहली तस्वीर तैयार की गई। उस तस्वीर में ठीक वही विशेषताएं दिखीं — एक चमकीली अभिवृद्धि डिस्क से घिरा हुआ एक अंधेरा केंद्रीय क्षेत्र — जिनकी भविष्यवाणी सामान्य सापेक्षता ने की थी। Einstein का सिद्धांत, जिसे उन्होंने गुरुत्वाकर्षण की व्याख्या के लिए बनाया था और जिसके बारे में उन्होंने कभी नहीं सोचा था कि यह इतनी अजीब और विचित्र वस्तुओं का वर्णन करेगा, ने एक बार फिर उल्लेखनीय सटीकता के साथ भौतिक वास्तविकता की भविष्यवाणी कर दी थी।
विज्ञान और संस्कृति में Einstein की विरासत
Einstein की विरासत विशाल और बहुआयामी है। भौतिकी में उनका योगदान आधारभूत है। विशेष सापेक्षता का सिद्धांत और उसकी अभिव्यक्ति E बराबर mc वर्ग आधुनिक भौतिकी, इंजीनियरिंग और चिकित्सा के ढांचे में गहराई से समाई हुई है। परमाणु ऊर्जा संयंत्र इस सिद्धांत पर काम करते हैं कि द्रव्यमान को ऊर्जा में बदला जा सकता है। रेडियोधर्मी अनुरेखकों का उपयोग करने वाले चिकित्सा उपकरण भी इसी सिद्धांत पर निर्भर हैं। कण त्वरक, GPS उपग्रह और गुरुत्वाकर्षण तरंगों का पता लगाना — ये सब Einsteinian भौतिकी के अनुप्रयोग हैं।
सामान्य सापेक्षता का सिद्धांत वह ढांचा है जिसके भीतर आधुनिक ब्रह्मांड विज्ञान काम करता है। ब्रह्मांड की उत्पत्ति का बिग बैंग मॉडल, ब्लैक होल का अस्तित्व, ब्रह्मांड का विस्तार, गुरुत्वाकर्षण लेंसिंग की परिघटना — ये सब सामान्य सापेक्षता के परिणाम या अनुप्रयोग हैं। 2015 में LIGO वेधशाला द्वारा गुरुत्वाकर्षण तरंगों का पता लगाना — Einstein द्वारा उनकी भविष्यवाणी किए जाने के लगभग एक सदी बाद, जो उन्होंने सामान्य सापेक्षता पर अपने काम के पहले ही वर्ष में की थी — हाल के दशकों की सबसे प्रसिद्ध वैज्ञानिक उपलब्धियों में से एक थी और इसके लिए 2017 में भौतिकी का नोबेल पुरस्कार दिया गया।
क्वांटम सिद्धांत में उनके योगदान — प्रकाश का क्वांटम, आदर्श गैसों का सांख्यिकीय यांत्रिकी, उद्दीपित उत्सर्जन जो लेज़र की नींव है — आधुनिक तकनीक के ताने-बाने में बुने हुए हैं। लेज़र, जिनका उपयोग शल्यचिकित्सा से लेकर दूरसंचार और डेटा संग्रहण तक हर क्षेत्र में होता है, उन सिद्धांतों पर निर्भर हैं जिन्हें Einstein ने सबसे पहले प्रतिपादित किया था।
भौतिकी से परे, संस्कृति पर Einstein का प्रभाव अत्यंत व्यापक, गहरा और कभी-कभी अपनी विशिष्ट अभिव्यक्तियों में अजीब भी रहा है। लोकप्रिय संस्कृति में उनका नाम प्रतिभा का पर्याय बन गया है। उनकी छवि — बिखरे हुए सफेद बाल, गर्मजोशी भरी आंखें, सौम्य भाव — दुनिया की सबसे पहचानी जाने वाली छवियों में से एक है। उनके समीकरण और सूक्तियां व्यापारिक वस्तुओं, टैटू और प्रेरणादायक पोस्टरों पर छपती हैं। उनके जीवन पर अनगिनत जीवनियां, नाटक, फिल्में और उपन्यास लिखे गए हैं।
इस सांस्कृतिक अमरत्व ने हमेशा उनके वास्तविक विचारों की सही सेवा नहीं की है। Einstein की लोकप्रिय छवि — एक ऐसे एकाकी प्रतिभाशाली व्यक्ति के रूप में जिसने संस्थाओं से बाहर रहकर और विशेषज्ञों की आम राय के विरुद्ध जाकर केवल विचार के बल पर विज्ञान को उलट-पलट कर दिया — एक रोमांटिक सरलीकरण है जो यह गलत तस्वीर पेश करती है कि विज्ञान कैसे काम करता है और Einstein ने वास्तव में कैसे काम किया। वे भौतिकी समुदाय के साथ गहराई से जुड़े हुए थे, उन्होंने कई पूर्ववर्तियों और समकालीनों के कार्य से लाभ उठाया, और रास्ते में गलतियां भी कीं — कुछ तो काफी महत्वपूर्ण।
जो बात सरलीकरण नहीं है, वह है उनकी उपलब्धि की विशालता। सापेक्षता के विशेष और सामान्य सिद्धांत मानव इतिहास की सबसे महान बौद्धिक उपलब्धियों में से एक हैं। यह सोचकर आज भी अचरज होता है कि एक पेटेंट कार्यालय में काम करने वाले व्यक्ति ने — बिना किसी प्रयोगशाला, बिना किसी सहयोगी, और बिना किसी संस्थागत समर्थन के — एक ही वर्ष में चार क्रांतिकारी शोध-पत्र प्रकाशित किए। ये ऐसे शोध-पत्र थे जिन्होंने दो शताब्दियों की भौतिकी को उलट दिया और समझ के बिल्कुल नए क्षितिज खोल दिए। और यह कि उसी व्यक्ति ने अगले दशक में, भारी गणितीय कठिनाइयों से जूझते हुए, गुरुत्वाकर्षण का एक ऐसा सिद्धांत विकसित किया जिसने Newton के सिद्धांत की जगह ली — और साथ ही ऐसी सटीक भविष्यवाणियाँ कीं जिन्हें बाद में प्रेक्षणों द्वारा सत्यापित किया गया — यह एक ऐसी उपलब्धि है जिसकी कोई मिसाल नहीं है।
Einstein संग्रह और निरंतर जारी शोध-कार्य
Einstein की बौद्धिक विरासत — जिसमें उनके वैज्ञानिक पांडुलिपियाँ, पत्राचार और उनके पेशेवर जीवन के पचास से अधिक वर्षों में फैले व्यक्तिगत कागज़ात शामिल हैं — यरुशलम के Hebrew University को सौंपी गई थी, जो 1955 में उनकी मृत्यु के बाद से इन सामग्रियों की प्रमुख संरक्षक रही है। यह संग्रह दुनिया में मौजूद वैज्ञानिक कागज़ातों के सबसे महत्त्वपूर्ण संग्रहों में से एक है, जिसमें अस्सी हज़ार से अधिक वस्तुएँ हैं। इसमें उनके प्रमुख शोध-पत्रों के मसौदे, दुनिया भर के सैकड़ों वैज्ञानिकों, राजनेताओं, कलाकारों और आम लोगों के साथ विस्तृत पत्राचार, निजी डायरियाँ और नोटबुक, तथा ऐसी बहुमूल्य सामग्री शामिल है जो उनके वैज्ञानिक विचारों और व्यक्तिगत जीवन दोनों पर प्रकाश डालती है।
Einstein के संकलित शोध-पत्रों का प्रकाशन, जो 1987 में Princeton University Press और Hebrew University के सहयोग से आरंभ हुआ, विज्ञान के इतिहास में सबसे महत्त्वाकांक्षी और व्यापक संपादकीय परियोजना है। प्रत्येक खंड के साथ विस्तृत टिप्पणियाँ होती हैं जो दस्तावेज़ों को ऐतिहासिक और वैज्ञानिक संदर्भ में रखती हैं, जिससे यह संग्रह उन विद्वानों के लिए भी सुलभ हो जाता है जिन्हें भौतिकी के हर क्षेत्र की विशेष जानकारी नहीं है। यह परियोजना अभी भी जारी है और नए खंड नियमित रूप से प्रकाशित होते रहते हैं, क्योंकि संपादक Einstein के जीवन के बाद के दशकों के पत्राचार और पांडुलिपियों पर काम कर रहे हैं।
Einstein पर शोध-साहित्य विशाल है और लगातार बढ़ता जा रहा है। जीवनियाँ लोकप्रिय से लेकर तकनीकी तक की श्रेणी में आती हैं — Abraham Pais की प्रामाणिक वैज्ञानिक जीवनी Subtle Is the Lord से, जिसे Einstein के वैज्ञानिक कार्य का सबसे विश्वसनीय विवरण माना जाता है, लेकर Walter Isaacson की अधिक सुलभ जीवनी तक, जो 2007 में प्रकाशित हुई। विशेष और सामान्य सापेक्षता के विकास का ऐतिहासिक अध्ययन विज्ञान के इतिहास का एक ठोस उप-क्षेत्र बन गया है, जिसमें इतिहासकार Einstein के विचारों के सटीक क्रम, उनके समकालीनों की भूमिका, और उस सांस्कृतिक व दार्शनिक संदर्भ की जाँच करते हैं जिसमें उनके सिद्धांत विकसित और ग्रहण किए गए।
संग्रह से नई खोजें लगातार सामने आती रहती हैं। प्रतिभागियों के जीवनकाल में प्रतिबंधित रहा पत्राचार अब उपलब्ध हो गया है, जिससे Einstein के व्यक्तिगत जीवन, उनकी राजनीतिक गतिविधियों और वैज्ञानिक पत्राचार के पहले अज्ञात पहलू सामने आए हैं। संग्रह के डिजिटलीकरण ने इसे दुनिया भर के शोधकर्ताओं के लिए सुलभ बना दिया है और ऐसे नए कम्प्यूटेशनल विश्लेषण को संभव बनाया है जो तब असंभव था जब ये सामग्रियाँ केवल भौतिक रूप में उपलब्ध थीं।
Einstein पर जारी शोध-कार्य कई उद्देश्यों की पूर्ति करता है। यह विज्ञान के इतिहास की सबसे महत्त्वपूर्ण घटनाओं में से एक का अधिक सटीक ऐतिहासिक विवरण प्रस्तुत करता है। यह वैज्ञानिक रचनात्मकता के सामाजिक और सांस्कृतिक आयामों को उजागर करता है, यह दर्शाते हुए कि व्यक्तिगत प्रतिभा किस तरह संस्थाओं, समुदायों और ऐतिहासिक संदर्भों की संरचनाओं के भीतर और उनके विरुद्ध काम करती है। और यह एक ऐसे व्यक्तित्व की जीवंत उपस्थिति को बनाए रखता है जिनका उदाहरण वैज्ञानिकों, दार्शनिकों और हर तरह के विचारशील लोगों को प्रेरित करता रहता है — जो उनके जीवन और कार्य में वास्तविकता की प्रकृति से जुड़े गहरे सवालों से गंभीरता से जूझने की मानवीय क्षमता का एक आदर्श देखते हैं।
निष्कर्ष
Albert Einstein छियासी वर्ष जीए और उन्होंने अपना अधिकांश जीवन भौतिक वास्तविकता की गहरी संरचना को समझने के प्रयास में लगाया। इस कोशिश में उन्होंने Isaac Newton के बाद किसी भी वैज्ञानिक से अधिक उपलब्धियाँ हासिल कीं, और यह भी कहा जा सकता है कि Newton से भी अधिक। उन्होंने अंतरिक्ष, समय, गुरुत्वाकर्षण और ऊर्जा के बारे में मानवीय समझ को पूरी तरह बदल दिया। उन्होंने क्वांटम यांत्रिकी को स्थापित करने में मदद की, चाहे वे इस सिद्धांत को अंतिम मानने से इनकार करते रहे। उन्होंने अपनी प्रसिद्धि को नैतिक कारणों के लिए एक मंच की तरह इस्तेमाल किया और अपने पूरे वयस्क जीवन में शांति, न्याय और मानवीय गरिमा की वकालत करते रहे।
वे कोई संत नहीं थे, और ऐतिहासिक दस्तावेज़ों की पूरी तस्वीर इसे स्पष्ट करती है। वे कभी-कभी स्वार्थी थे, अक्सर अपने काम में इस कदर डूबे रहते थे कि परिवार की अनदेखी हो जाती थी, अपने चाहने वालों के प्रति असंवेदनशील हो सकते थे, और कई बार घरेलू ज़िम्मेदारियों की कीमत पर अपने बौद्धिक और व्यक्तिगत हितों को तरजीह देने को तैयार रहते थे। उनकी पहली शादी कड़वाहट के साथ खत्म हुई। उनके छोटे बेटे का भाग्य बेहद दर्दनाक रहा, जिसे Einstein न रोक सके और शायद जिसका सामना करने में खुद को असमर्थ पाया। उनके राजनीतिक निर्णय कभी-कभी भोले थे और राजनीतिक सत्ता की उनकी समझ सीमित थी।
लेकिन इन मानवीय कमज़ोरियों से उनकी उपलब्धियों का कद कम नहीं होता। Einstein का वैज्ञानिक कार्य मानव ज्ञान में एक स्थायी योगदान है — जितना स्थायी कोई ज्ञान हो सकता है, यह देखते हुए कि विज्ञान की प्रकृति निरंतर विकसित होती रहती है। उन्होंने हमें जो ब्रह्मांड दिखाया — वक्र, फैलता हुआ, ब्लैक होल और गुरुत्वाकर्षण तरंगों से भरा और क्वांटम यांत्रिकी की रहस्यमय उलझनों से परिपूर्ण — वह Newton के बताए ब्रह्मांड से कहीं अधिक विचित्र और भव्य है। हम उसे आज बेहतर समझते हैं क्योंकि Einstein इस दुनिया में आए।
भौतिक नियमों में सौंदर्य खोजने का उनका आग्रह, यह विश्वास कि ब्रह्मांड को समझा जा सकता है और उसे समझना किसी भी प्रयास के लायक है, और यह मान्यता कि सत्य की खोज मनुष्य के लिए उपलब्ध सर्वोच्च कार्यों में से एक है — ये प्रतिबद्धताएँ, जो उनके जीवन और कार्य में प्रकट होती हैं, आज भी वैज्ञानिकों, दार्शनिकों और हर तरह के विचारशील लोगों को प्रेरित करती रहती हैं। जैसा कि उन्होंने बुढ़ापे में खुद अपने बारे में कहा था, वे बस एक प्रबल जिज्ञासा के मूर्त रूप थे। उस जिज्ञासा को उसकी चरम अभिव्यक्ति तक पहुँचाते हुए उन्होंने दुनिया को बदल दिया।
Einstein की विरासत का सबसे स्थायी पहलू शायद कोई विशेष परिणाम या समीकरण नहीं, बल्कि वह उदाहरण है जो उन्होंने यह दिखाकर कायम किया कि अपने सर्वोत्तम रूप में वैज्ञानिक सोच कैसी दिखती है। उन्होंने साबित किया कि भौतिक जगत के गहरे सत्यों तक पहुँचना केवल प्रयोगों के ज़रिए ही नहीं, बल्कि अनुशासित कल्पनाशीलता के द्वारा भी संभव है — तार्किक आवश्यकता का चाहे जहाँ भी जाए, वहाँ तक अनुसरण करने की इच्छाशक्ति के ज़रिए, भले ही वह दीर्घकाल से स्थापित मान्यताओं का खंडन करती हो, और सत्य के मार्गदर्शक के रूप में सरलता और सौंदर्य के प्रति प्रतिबद्धता के ज़रिए। ये सोचने के तरीके भौतिकी से बहुत आगे तक जाते हैं, और सामान्य रूप से मानव बौद्धिक जीवन के लिए उनकी प्रासंगिकता ही वह कारण है जिससे Einstein का उदाहरण उनकी मृत्यु के सत्तर से अधिक वर्षों बाद भी इतनी गहराई से अनुगूंजित होता रहता है।
वे अंततः एक ऐसे इंसान भी थे जिन्हें भौतिकी से परे भी बहुत कुछ की परवाह थी। वह शरणार्थी जिसने सताए गए सहकर्मियों की ओर से पत्र लिखे, वह शांतिवादी जिसने परमाणु निरस्त्रीकरण का आह्वान करने वाले घोषणापत्रों पर हस्ताक्षर किए, नागरिक अधिकारों का वह मित्र जिसने नस्लवाद को अमेरिका की सबसे बड़ी बीमारी बताया, वह संगीत प्रेमी जो Princeton में गर्मियों की शामों को अपने पड़ोसियों के साथ Mozart बजाता था — उनके चरित्र के ये पहलू सामान्य सापेक्षता के क्षेत्र समीकरणों जितने ही उनकी विरासत का हिस्सा हैं। Einstein आखिरकार इस संभावना का प्रतिनिधित्व करते हैं कि एक मनुष्य अटल निष्ठा के साथ सत्य की खोज कर सकता है और साथ ही मानव समुदाय से जुड़ा भी रह सकता है और उसके कल्याण के प्रति प्रतिबद्ध भी। यही उदाहरण भविष्य को उनका सबसे महत्वपूर्ण उपहार है।

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