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जेम्स कुक: प्रशांत युग के नाविक, अन्वेषक और मानचित्रकार

जेम्स कुक: प्रशांत युग के नाविक, अन्वेषक और मानचित्रकार

गति

परिचय

James Cook मानव अन्वेषण के इतिहास की सबसे प्रभावशाली हस्तियों में से एक हैं। उत्तरी Yorkshire के एक साधारण से गाँव में जन्मे इस इंसान ने अपनी विनम्र पृष्ठभूमि से उठकर खोज के तीन सबसे महत्वाकांक्षी समुद्री अभियानों की कमान सँभाली — उनका जीवन दृढ़ता, बौद्धिक प्रतिभा और ज्ञान की सेवा में अथक महत्वाकांक्षा की एक अनूठी कहानी है। उन्होंने दुनिया का नक्शा नए सिरे से खींचा। उन्होंने उन तटरेखाओं को फिर से परिभाषित किया जो सदियों से समुद्री नक्शों पर महज़ अनुमान के तौर पर दर्ज थीं। वे किसी भी यूरोपीय से अधिक दक्षिण की ओर गए, यह साबित किया कि प्रशांत महासागर के समशीतोष्ण अक्षांशों में कोई विशाल और रहने योग्य दक्षिणी महाद्वीप मौजूद नहीं है, और यह भी स्थापित किया कि आर्कटिक की बर्फ ने उन अक्षांशों पर उत्तर-पश्चिमी मार्ग को व्यावसायिक दृष्टि से अव्यावहारिक बना दिया है जहाँ वह विद्यमान था। उन्होंने New Zealand का नक्शा अद्भुत सटीकता के साथ तैयार किया, Australia की पूरी पूर्वी तटरेखा का सर्वेक्षण किया, और प्रशांत महासागर के द्वीपों का इतने विस्तृत ढंग से दस्तावेज़ीकरण किया कि आने वाली पीढ़ियों के लिए उनके उत्तराधिकारियों के पास जोड़ने के लिए बहुत कम बचा।

Cook महज़ एक नाविक नहीं थे। वे एक वैज्ञानिक थे, एक नक्शानवीस थे, एक खगोलशास्त्री के सहयोगी थे, अपने दल के स्वास्थ्य को बनाए रखने की ज़िद में एक तरह के चिकित्सक भी थे, और उनके सामने आने वाले लोगों तथा प्राकृतिक संसारों के गहरे पर्यवेक्षक भी। वे अपने अभियानों पर ब्रिटिश ज्ञानोदय काल के कुछ श्रेष्ठतम वैज्ञानिक मस्तिष्कों को साथ लेकर चले, और मिलकर उन्होंने प्राकृतिक दुनिया, प्रशांत महासागर के लोगों और पृथ्वी के महासागरों के वास्तविक विस्तार के बारे में ज्ञान का एक असाधारण भंडार तैयार किया। उनके अभियानों की पत्रिकाएँ, जो एक जिज्ञासु जनता के लिए संपादित रूप में प्रकाशित हुईं, ने Cook को उनके अपने जीवनकाल में ही एक प्रसिद्ध व्यक्तित्व बना दिया। उन्हें Royal Society का फ़ेलो चुना गया, नाविकों में स्कर्वी की रोकथाम पर उनके कार्य के लिए उन्हें उसका सर्वोच्च सम्मान प्रदान किया गया, और वे उस युग के अग्रणी बुद्धिजीवियों के साथ पत्राचार करते थे जो अनुभवजन्य खोज को लगभग हर चीज़ से ऊपर मानता था।

फिर भी James Cook की विरासत जटिल है, विवादित है, और कई मायनों में आज भी सक्रिय रूप से बहस और पुनर्मूल्यांकन का विषय बनी हुई है। New Zealand, Australia, Hawaii और उन अनेक प्रशांत द्वीपों के लोग जहाँ वे गए, उन्होंने उनके आगमन को एकतरफ़ा लाभ के रूप में नहीं अनुभव किया। उनके अभियानों ने उपनिवेशीकरण, विस्थापन, बीमारी और सांस्कृतिक विनाश की लहरों का द्वार खोल दिया, जिसने उनके सामने आने वाले समाजों को या तो बदल दिया या तहस-नहस कर दिया। वे खुद पारंपरिक अर्थों में उपनिवेशवादी नहीं थे। उन्होंने न तो स्थायी बस्तियाँ बसाईं और न ही आबादियों का कत्लेआम किया। लेकिन उनके सुव्यवस्थित नक्शों और पत्रिकाओं ने साम्राज्य की पाठ्यपुस्तकों का काम किया — वे सटीक औज़ार जिन्होंने प्रशांत महासागर में ब्रिटिश औपनिवेशिक विस्तार को न केवल संभव बनाया बल्कि तेज़ भी किया। Cook किस चीज़ का प्रतिनिधित्व करते हैं — क्या उन्हें सराहा जाए, शोक के साथ याद किया जाए, या इन दोनों से कहीं अधिक सूक्ष्म दृष्टि से देखा जाए — यह सवाल उन देशों की सांस्कृतिक राजनीति का एक केंद्रीय प्रश्न बन गया है जिन्हें उनके अभियानों ने सबसे गहराई से प्रभावित किया।

यह जीवनी Cook के जीवन और कार्य के हर पहलू के साथ गंभीरता से जुड़ने का प्रयास करती है। यह उत्तरी Yorkshire में एक मज़दूर की झोपड़ी से लेकर अज्ञात जलराशियों में प्रवेश करने वाले महामहिम के जहाज़ों की पिछली डेक तक की उनकी असाधारण यात्रा का अनुसरण करती है। यह तीनों महान अभियानों की बारीकी से जाँच करती है — न केवल यह खोजते हुए कि क्या खोजा गया, बल्कि यह भी कि वे खोजें कैसे हुईं, किन परिस्थितियों में, और किस मानवीय कीमत पर। यह उनकी नौवहन और वैज्ञानिक उपलब्धियों की गहराई से पड़ताल करती है और अन्वेषण ही नहीं, बल्कि विज्ञान, चिकित्सा और नक्शानवीसी के व्यापक इतिहास में उनके योगदान का मूल्यांकन करती है। और यह उनके सामने आने वाले स्वदेशी लोगों के साथ उनके संबंधों से ईमानदारी के साथ जूझती है — यह समझने की कोशिश करते हुए कि उनका इरादा क्या था और उनके अभियानों ने आखिरकार क्या परिणाम दिए।

James Cook को उनकी पूरी जटिलता के साथ समझा जाना चाहिए। वे अपने युग के इंसान थे, अठारहवीं सदी के ब्रिटेन के मूल्यों और धारणाओं से गढ़े हुए, फिर भी कई मायनों में वे उन मूल्यों से परे भी गए — जिज्ञासा, निष्पक्षता और बौद्धिक विनम्रता की जो क्षमता उनमें थी, वह उन्हें अपने समकालीनों में अलग खड़ा करती थी। उनकी मृत्यु हिंसक रूप से हुई, उन्हीं लोगों के हाथों जिनकी दुनिया को उनके अपने काम ने काफी हद तक तबाह करने में योगदान दिया था, और उस अंत में एक कड़वी विडंबना है जो तब से उनकी प्रतिष्ठा को छाए हुए है। लेकिन उस अंत से पहले एक असाधारण उपलब्धियों से भरा जीवन था, और इस विवरण की शुरुआत उसी जीवन के आरंभ से होनी चाहिए — इंग्लैंड के उत्तर में एक छोटे से गाँव से।

प्रारंभिक जीवन और मूल

Yorkshire के North Riding में स्थित Marton का गाँव अठारहवीं सदी के आरंभ में एक साधारण कृषि बस्ती थी — ग्रामीण इंग्लैंड के परिदृश्य में बिखरे हुए अनगिनत छोटे समुदायों में से एक, जो खेती के मौसम की लय और स्थानीय जमींदारों के भाग्य से बंधी हुई थी। यहीं James Cook का जन्म हुआ, James Cook सीनियर — एक स्कॉटिश कृषि मजदूर — और Grace Pace — जो उस इलाके में लंबे समय से बसे एक स्थानीय परिवार की महिला थीं — की दूसरी संतान के रूप में। भावी खोजकर्ता जिस घर में पैदा हुए, वह साधारण साधनों और सीमित क्षितिजों वाला था, जहाँ जीवन किसी महत्वाकांक्षा या तरक्की की उम्मीद से नहीं, बल्कि ग्रामीण गरीबी की व्यावहारिक जरूरतों से चलता था।

Cook के पिता काम और बेहतर हालात की तलाश में स्कॉटलैंड के Roxburghshire से Yorkshire आए थे, जो उस समय स्कॉटिश मजदूरों के दक्षिण की ओर लगातार होते पलायन का हिस्सा था। वे स्पष्ट रूप से मेहनती और भरोसेमंद इंसान थे — ऐसे गुण जिन्होंने उन्हें धीरे-धीरे स्थानीय सम्मान औरささやかी तरक्की दिलाई। वे साधारण खेत मजदूर से उठकर 'hind' बने — Thomas Skottowe नाम के एक स्थानीय जमींदार के खेत पर एक निगरानी की जिम्मेदारी वाला पद। Cook परिवार और Squire Skottowe के बीच यह रिश्ता James Cook के जीवन की एक निर्णायक कड़ी साबित हुआ, क्योंकि Skottowe ही वह शख्स थे जिन्होंने इस लड़के में कुछ असाधारण देखा और यह सुनिश्चित करने के लिए कदम उठाए कि उसकी क्षमता ग्रामीण परिस्थितियों के बोझ तले दब कर न रह जाए।

Cook ने अपना सबसे पहला बचपन Marton में बिताया, लेकिन Skottowe के अधीन उनके पिता की बेहतर होती संभावनाओं के चलते परिवार Great Ayton गाँव में चला गया, जब वे अभी छोटे ही थे। Great Ayton Cleveland इलाके की सौम्य पहाड़ियों की तलहटी में बसा एक कुछ बड़ा समुदाय था, और यहीं Cook ने अपने बचपन के सबसे गठन-काल के वर्ष बिताए। Great Ayton के आसपास के North York Moors का परिदृश्य — उसके विस्तृत क्षितिज और ऊँची जमीन से दिखती North Sea की दूर की चमक — किसी भी औपचारिक शिक्षा से ज्यादा युवा Cook की कल्पना पर असर डाल सकती थी। वे ऐसी दुनिया में पले-बढ़े जहाँ आसमान विशाल था और दूरियाँ अनंत, जहाँ समुद्र हमेशा एक उपस्थिति था — भले ही अभी मंजिल नहीं।

Squire Skottowe ने ही युवा Cook के लिए Great Ayton के गाँव के स्कूल में बुनियादी शिक्षा का इंतजाम किया और लड़के की स्पष्ट प्रतिभा को पहचानते हुए खुद फीस अदा की। Pullen नाम के स्कूल शिक्षक ने Cook को पढ़ने, लिखने और अंकगणित की बुनियादी बातें सिखाईं। यही वे औजार थे जिनसे बाद में Cook ने खुद को और आगे शिक्षित किया, नौवहन और खगोल विज्ञान के कठिन गणित में महारत हासिल की, और वे सुव्यवस्थित डायरियाँ लिखीं जिन्होंने उन्हें अंततः प्रसिद्ध किया। Skottowe के हस्तक्षेप के बिना, यह पूरी तरह संभव था कि Cook का जीवन कृषि मजदूरों के बेटों के लिए तय उसी संकरी राह पर चलता रहता — बिना किसी ऐसे मोड़ के जो उन्हें बड़ी दुनिया तक ले जाता।

Cook की माँ, Grace, एक स्पष्ट रूप से दृढ़ इच्छाशक्ति वाली महिला थीं, जिन्होंने कई बच्चों को जन्म दिया और एक खेत मजदूर की मामूली तनख्वाह पर घर-परिवार चलाया। वे अपने बेटे की शोहरत देखने के लिए जीवित नहीं रहीं — उनके सबसे बड़े कारनामों के दौरान, जब वे समुद्र में थे, उनकी माँ का देहांत हो गया — लेकिन उनका Cook के स्वभाव पर गहरा असर था। Cook का घर-परिवार, उस युग के अधिकांश घरों की तरह, मेहनत, आत्मनिर्भरता और व्यावहारिक कुशलता के प्रोटेस्टेंट मूल्यों पर चलता था। ये मूल्य Cook के चरित्र में इतनी गहराई से समा गए थे कि अपने पूरे करियर में उनके अधीन काम करने वाले हर अफसर, नाविक और प्रकृतिविद् को ये साफ नज़र आते थे।

Cook के बचपन का उत्तरी Yorkshire एक ऐसा इलाका था जिसे खेती, ऊन के व्यापार और समुद्र की निकटता ने आकार दिया था। विशाल मूरलैंड तट से अंदर की ओर फैले हुए थे, जिनके खुले विस्तार नदी की घाटियों से कटे हुए थे और छोटे-छोटे पत्थर के गाँवों से भरे पड़े थे जो खेतिहर समुदायों की सीमाओं को दर्शाते थे। समुद्र तट खुद बेहद मनोरम था — ऊँची चट्टानें और संकरे बंदरगाह — और यह Whitby, Scarborough तथा Staithes जैसे बंदरगाह शहरों पर केंद्रित एक व्यस्त मछली पकड़ने और व्यापारिक अर्थव्यवस्था को टिकाए हुआ था। ये समुदाय समुद्र के इर्द-गिर्द इस तरह बसे थे जैसे अंदरूनी गाँव नहीं बसे थे, और दोनों दुनियाओं के करीब पलते हुए युवा Cook ने उस समुद्री सोच को आत्मसात कर लिया जो उनके पूरे जीवन की दिशा तय करने वाली थी।

अपनी साधारण पढ़ाई पूरी करने के बाद Cook के सामने वही आम सवाल था जो उस दौर में उनके तबके के युवाओं के सामने होता था: रोज़ी-रोटी कैसे कमाई जाए। विकल्प सीमित थे। खेती, जैसे उनके पिता करते थे, कड़ी मेहनत और कम मेहनताने वाली ज़िंदगी थी। दस्तकारी के लिए शिक्षुता और कुछ शुरुआती साधन चाहिए थे। और फिर था समुद्र, जो Yorkshire तट के पास के समुदायों के लिए हमेशा मौजूद था, हमेशा एक विकल्प था, और हमेशा उन बेचैन नौजवानों को पुकारता था जो उसकी आवाज़ सुन सकते थे।

परिवार के बाहर Cook की पहली नौकरी Staithes गाँव में थी, जो उत्तरी Yorkshire के तट पर चट्टानों के किनारे बसा एक मछुआरों का गाँव था। उन्हें William Sanderson नाम के एक किराना और कपड़े के व्यापारी के यहाँ दुकान सहायक और सामान्य मदद के लिए रखा गया था। Staithes में ही समुद्र पहली बार उनके लिए सच्चे अर्थों में ध्यान का केंद्र बना। गाँव पर मछली पकड़ने का उद्योग हावी था — बंदरगाह छोटी-बड़ी नावों से भरा रहता था और पुरुष आबादी की दिनचर्या ज़मीन की नहीं, समुद्र की लय के हिसाब से चलती थी। Cook ने Staithes में करीब डेढ़ साल बिताया, व्यापार के बारे में कुछ खास नहीं सीखा लेकिन समुद्र के बारे में — उसके मिजाज़, उसकी माँगों और उसकी संभावनाओं के बारे में — बहुत कुछ अपने भीतर उतार लिया।

यह किस्सा, जो बाद की पुनर्कथाओं में निश्चित रूप से बढ़ा-चढ़ाकर पेश किया गया, यह है कि Cook को दराज से एक शिलिंग उठाते पकड़ा गया था — चोरी के इरादे से नहीं, बल्कि महज उसके अनजाने रूप-रंग के प्रति उत्सुकता से — और Sanderson ने यह भाँपते हुए कि इतना बेचैन और विचलित युवक किराने के व्यापार के लिए सही नहीं है, व्यावहारिकता दिखाते हुए उनका परिचय Whitby के Walker परिवार से करा दिया। इस किस्से की बारीकियाँ सही हों या न हों, यह तो तय है कि Cook ने Staithes छोड़ा और Whitby पहुँचे, और इस बदलाव ने सब कुछ बदल दिया।

Whitby, Staithes से कई गुना ज़्यादा महत्वाकांक्षी और परिष्कृत दुनिया थी, हालाँकि दोनों शहरों को समुद्र पर निर्भरता एक सूत्र में बाँधती थी। शहर का बंदरगाह बड़े समुद्री जहाज़ों को सँभाल सकता था, इसके जहाज़-निर्माण कारखानों में इंग्लैंड के कुछ सबसे व्यावहारिक जहाज़ बनते थे, और यहाँ के जहाज़ मालिकों और कप्तानों के समुदाय ने पीढ़ियों से समुद्री ज्ञान और परंपरा जमा की थी। Cook जैसी बुद्धिमत्ता और शारीरिक ऊर्जा वाले युवक के लिए यह बिल्कुल सही माहौल था — जो उस शिक्षा की शुरुआत करने के लिए जिसने उन्हें वह बनाया जो वे बने।

शिक्षुता और प्रारंभिक नौसैनिक करियर

अठारहवीं सदी के मध्य में Whitby इंग्लैंड के पूर्वी तट के सबसे महत्वपूर्ण बंदरगाहों में से एक था — एक ऐसा शहर जिसकी किस्मत समुद्र से गहराई से जुड़ी हुई थी। इसका बंदरगाह कोयले, लकड़ी और अन्य भारी मालों के व्यापार से गुलज़ार रहता था, इसके जहाज़-निर्माण केंद्र North Sea और उससे आगे की कठिन परिस्थितियों के लिए उपयुक्त मज़बूत और व्यावहारिक जहाज़ बनाने के लिए मशहूर थे, और यहाँ के Quaker जहाज़-मालिकों और कप्तानों का समुदाय अनुशासित और कुशल नाविकता की एक ऐसी परंपरा का प्रतिनिधित्व करता था जिसका उस समय इंग्लैंड में कोई सानी नहीं था। Cook इसी दुनिया में आया जब वह John Walker की देखरेख में आया — Quaker आस्था के एक प्रमुख Whitby जहाज़-मालिक — और इसी दुनिया में उसे वह शिक्षा मिली जिसने उसके जीवन की बाकी सभी उपलब्धियों की नींव रखी।

John Walker एक समृद्ध और सम्मानित व्यक्ति थे, एक जहाज़-मालिक जो Tyne और Thames के कोयला क्षेत्रों तथा दक्षिणी इंग्लैंड के बंदरगाहों के बीच व्यापार में लगे collier brigs के एक बेड़े को चलाते थे। वे एक गहरे गंभीर और नैतिक रूप से सुदृढ़ व्यक्ति भी थे — ये गुण उनकी Quaker आस्था के अनुरूप थे — और वे अपने घर और अपने व्यवसाय को एक जैसी सावधानी और सिद्धांतनिष्ठा से चलाते थे। Cook को एक प्रशिक्षु नाविक के रूप में लिया गया, और उसने अपना करियर उस बेनाम काम से शुरू किया जो समुद्र माँगता है: डेक माँजना, रस्सियाँ खींचना, मौसम पढ़ना सीखना, और नाविकता के लिए ज़रूरी शारीरिक कौशल विकसित करना।

अपनी शिक्षुता के दौरान Cook जिन जहाज़ों पर सेवा करता था, वे Walker के बेड़े के कोयला ढोने वाले brigs थे — खासतौर पर Freelove और Three Brothers नाम के जहाज़। ये Whitby cats थे, जैसा कि स्थानीय प्रकार को जाना जाता था — चौड़े, सपाट तले वाले और उथले मसौदे के जहाज़, जो North Sea के कठिन पानियों में भारी माल ढोने के लिए बनाए गए थे। वे सुंदर या तेज़ नहीं थे, लेकिन अत्यंत व्यावहारिक थे — वे ऐसे बंदरगाहों और नदी के मुहानों में काम कर सकते थे जहाँ गहरे मसौदे के जहाज़ नहीं जा सकते थे, और वे असाधारण रूप से मज़बूत थे। Cook का बाद में अन्वेषण की अपनी यात्राओं के लिए Whitby प्रकार के जहाज़ों पर — जिनमें Endeavour भी शामिल है — ज़ोर देना सीधे तौर पर इन जहाज़ों में मिली उसकी शिक्षा और उनके गुणों की उसकी समझ का परिणाम था।

North Sea एक युवा नाविक के लिए दुनिया के सबसे कठिन प्रशिक्षण स्थलों में से एक है। इसका पानी कई क्षेत्रों में उथला है, जिससे बुरे मौसम में यह अस्त-व्यस्त और अप्रत्याशित हो जाता है। यह भयंकर तूफानों का सामना करता है, खासकर शरद और सर्दियों में, और इसके ज्वार-भाटे और धाराएँ जटिल और खतरनाक हैं। इसके अनेक बंदरगाहों के रास्ते रेत के बैंकों और उथले क्षेत्रों से घिरे हैं जो मौसम के साथ बदलते रहते हैं। जिस नाविक ने North Sea और इंग्लैंड के तट पर अपना पेशा सीखा, उसने उसे पूरी तरह सीखा — क्योंकि पूरी तरह न सीखने का विकल्प तबाही था। Cook ने इन्हीं पानियों में अपनी कला में महारत हासिल की, वे प्रवृत्तियाँ, वह ज्ञान और वह विवेक विकसित किया जो उसके बाद के करियर की सभी चुनौतियों में उसके काम आया।

यात्राओं के बीच Cook, Whitby में Walker के घर में रहता था, और यहीं उसने वह स्व-शिक्षा प्राप्त की जिसने उसे एक कुशल नाविक से एक प्रतिभाशाली दिशानिर्धारक में बदल दिया। John Walker के घर में नौवहन और गणित के ग्रंथों की एक समृद्ध लाइब्रेरी थी, और Cook ने गणित, खगोल विज्ञान और नौवहन के अध्ययन में उस तीव्रता के साथ खुद को झोंक दिया जिसने उसे जानने वाले सभी लोगों को प्रभावित किया। वह शैक्षणिक अर्थ में औपचारिक रूप से पढ़ा-लिखा व्यक्ति नहीं था, लेकिन उसमें स्व-निर्देशित सीखने की एक असाधारण क्षमता थी — जटिल सामग्री को आत्मसात करने और उसे व्यावहारिक रूप से लागू करने की। उसने खगोलीय नौवहन का गणित सीखा, quadrant और बाद में sextant को बड़ी कुशलता से इस्तेमाल करना सीखा, और मानचित्रकला के सिद्धांतों की ऐसी समझ विकसित की जिसने उसे बाद में अभूतपूर्व सटीकता के नक्शे बनाने में सक्षम किया।

Walker बेड़े में बिताए वे वर्ष Cook की पाठशाला थे। वे केवल नाविकी के व्यावहारिक कौशल ही नहीं सीख रहे थे, बल्कि नेविगेशन का वह गहरा बौद्धिक ढाँचा भी आत्मसात कर रहे थे जिसमें खगोलीय गोले की ज्यामिति, अक्षांश और देशांतर निर्धारण का गणित, नक्शे बनाने और सुधारने के सिद्धांत, तथा ज्वार-भाटे के व्यवहार और चंद्र चक्रों के बीच का संबंध शामिल था। यह सब वे काफी हद तक अपने दम पर कर रहे थे — समुद्र में कड़ी मेहनत के एक पूरे दिन के बाद, शाम को, Walker के घर में मोमबत्ती की रोशनी में या जहाज की तंग बर्थ में। इसके लिए जो अनुशासन और आत्म-निर्देशन चाहिए था, वह खुद में एक शिक्षा थी — व्यवस्थित सोच और निरंतर परिश्रम की वे आदतें गढ़ रहा था जो आगे चलकर उनके जीवन के हर काम में उनकी पहचान बन गईं।

Cook ने Walker बेड़े में कई वर्ष काम किया और अंततः कोलियर जहाज Friendship पर मेट के पद तक पहुँचे। इस वक्त तक वे एक पूरी तरह दक्ष नाविक और नेविगेटर बन चुके थे, जिन्हें Whitby के समुद्री समुदाय में जाना और सम्मान दिया जाता था। John Walker उनकी काबिलियत का इतना ऊँचा मूल्यांकन करते थे कि उन्होंने उन्हें Friendship की कमान सौंपने का प्रस्ताव दिया — जो Cook जैसी पृष्ठभूमि के एक युवक के लिए एक बड़ा कदम होता और उनकी जिम्मेदारी संभालने की तैयारी की मुहर होती। लेकिन Cook ने एक ऐसा फैसला किया जिसने उन्हें जानने वाले सभी लोगों को चौंका दिया: उन्होंने यह प्रस्ताव ठुकरा दिया और रॉयल नेवी में एक साधारण नाविक के रूप में भर्ती हो गए।

इस फैसले के पीछे के कारण पूरी तरह स्पष्ट नहीं हैं, और Cook ने खुद कोई विस्तृत स्पष्टीकरण नहीं छोड़ा। सबसे तर्कसंगत व्याख्या यह है कि Cook ने उसी आत्म-जागरूक स्पष्टता से — जो उनकी सोच की जीवनभर पहचान रही — यह भाँप लिया कि व्यापारिक सेवा, चाहे कितनी भी सुखद और सम्मानजनक हो, उनकी महत्वाकांक्षाओं की एक सीमा तय कर देती थी। रॉयल नेवी, अपनी तमाम कठोरताओं और अनिश्चितताओं के बावजूद, वह कुछ दे सकती थी जो व्यापारिक सेवा नहीं दे सकती थी: असली प्रतिष्ठा की संभावना, दुनिया के सबसे रोचक और चुनौतीपूर्ण समुद्रों में भेजे जाने का मौका, और अपनी बढ़ती क्षमताओं के अनुरूप जिम्मेदारी पाने का अवसर। वे असाधारण प्रतिभा के एक ऐसे युवक थे जो Whitby के कोयला व्यापार में जहाँ तक जाया जा सकता था, वहाँ तक पहुँच चुके थे। नेवी दुनिया का सबसे माँग भरा समुद्री संगठन था, और यही वह जगह थी जहाँ उनकी जैसी प्रतिभा वाला आदमी अपने लायक काम पा सकता था।

वे HMS Eagle — एक साठ तोपों वाले युद्धपोत — पर एक सक्षम नाविक के रूप में शामिल हुए, और महीने भर के भीतर उन्हें मास्टर के मेट के पद पर पदोन्नत कर दिया गया — यह इस बात का प्रमाण था कि उनके साथ काम करने वाले हर किसी को उनकी योग्यता कितनी साफ दिखती थी। उन्होंने सात वर्षीय युद्ध के कठिन शुरुआती वर्षों में सेवा की, जो एक वैश्विक संघर्ष था जिसने ब्रिटेन को उत्तरी अमेरिका से लेकर भारत तक कई मोर्चों पर फ्रांस से टकरा दिया था। उनकी सेवा की सराहना की गई और उन्हें पुरस्कृत किया गया। उन्हें Eagle का बोसन नियुक्त किया गया और फिर उन्होंने मास्टर की परीक्षा पास की — एक ऐसी योग्यता जो उन्हें महामहिम के जहाजों को नेविगेट करने का अधिकार देती थी — और यह उस समय हुआ जब युद्ध दुनिया में शक्ति का संतुलन नए सिरे से तय कर रहा था।

अठारहवीं सदी के मध्य में रॉयल नेवी दुनिया की सबसे शक्तिशाली नौसेना थी, लेकिन यह एक ऐसा संगठन भी था जिसकी आंतरिक जटिलता और असमानता काफी गहरी थी। कमीशन प्राप्त अधिकारियों और वारंट अधिकारियों के बीच की खाई चौड़ी थी और सामाजिक रूप से बनाए रखी जाती थी। मास्टर के रूप में Cook की स्थिति उन्हें वारंट अधिकारी वर्ग में रखती थी — तकनीकी रूप से विशेषज्ञ और व्यावहारिक दृष्टि से अपरिहार्य, लेकिन सामाजिक रूप से उन कमीशन प्राप्त अधिकारियों के अधीन जिनके नीचे वे काम करते थे। वे इस स्थिति और इसके निहितार्थों से भली-भाँति परिचित थे, और कमीशन प्राप्त अधिकारी के पद तथा कमान तक उनका आखिरकार पहुँचना उन्होंने असाधारण प्रदर्शन के बल पर हासिल किया — न कि सामाजिक संपर्कों या संरक्षण के जरिए। उनकी पृष्ठभूमि के किसी व्यक्ति के लिए यह रास्ता किसी अधिकारी वर्ग में पैदा हुए व्यक्ति की तुलना में कहीं लंबा और कठिन था, लेकिन उन्होंने इसे दृढ़ संकल्प के साथ तय किया और अंततः इसके शिखर तक पहुँचे।

पदोन्नति की सीढ़ियाँ

सात साल के युद्ध ने Cook को उनका बड़ा अवसर दिया, हालाँकि पहली नज़र में ऐसा नहीं लगता था। उन्हें HMS Pembroke का मास्टर नियुक्त किया गया — यह चौंसठ तोपों वाला एक युद्धपोत था — और वे कनाडा को फ्रांसीसी नियंत्रण से छीनने के ब्रिटिश प्रयास के तहत उत्तरी अमेरिका के लिए रवाना हुए। इसके बाद जो अभियान चला, जिसकी परिणति General Wolfe द्वारा Quebec की प्रसिद्ध विजय में हुई, वह ब्रिटिश सैन्य इतिहास के सबसे चर्चित प्रसंगों में से एक है, और उसमें Cook की भूमिका उतनी ही जोखिम भरी थी जितनी महत्त्वपूर्ण।

Quebec पर ब्रिटिश हमले में सबसे बड़ी बाधा थी सेंट लॉरेंस नदी — उत्तरी अमेरिका के सबसे लंबे और सबसे जटिल जलमार्गों में से एक — जिसके समुद्री मार्ग उथले पानी, तेज़ धाराओं और नौवहन संबंधी खतरों से भरे पड़े थे, जिन्हें लंबे समय से शहर की प्राकृतिक सुरक्षा माना जाता था। फ्रांसीसियों ने अनेक नौवहन संकेतकों को हटा दिया था या उनमें हेरफेर कर दिया था, इस विश्वास के साथ कि कोई भी शत्रु बेड़ा पूरी ताकत के साथ नदी को सुरक्षित रूप से पार नहीं कर सकता। Cook को नदी के मार्ग का सर्वेक्षण करने का काम सौंपा गया — यह काम उन्होंने रात के अँधेरे में, फ्रांसीसी तटीय दलों की गोलाबारी के बीच, गहराई मापते हुए और उस सुरक्षित रास्ते को चिह्नित करते हुए किया जिससे ब्रिटिश बेड़ा शहर पर अपनी तोपें साध सके। उन्होंने यह काम असाधारण कौशल और साहस के साथ किया और नदी के मार्गों का एक ऐसा सर्वेक्षण तैयार किया जिसके दम पर Admiral Saunders पूरे बेड़े को सुरक्षित रूप से आगे ले जाने में सफल रहे। Cook के इस सर्वेक्षण के बिना शायद ब्रिटिश हमला संभव ही न हो पाता।

Quebec अभियान ने Cook को एक ऐसे काम से परिचित कराया जिसने उनकी कल्पनाशक्ति को जगाया और उनकी क्षमताओं के साथ पूरी तरह मेल खाया: तटरेखाओं, मार्गों और बंदरगाहों की सटीक और व्यवस्थित माप और अभिलेखन। इस काम के लिए न केवल नाविकी और पथप्रदर्शन में दक्षता चाहिए थी, बल्कि एक ऐसा वैज्ञानिक दिमाग भी, जो क्रमबद्ध अवलोकन और सटीक अभिलेखन करने में सक्षम हो। Cook में ये सभी गुण थे, और सेंट लॉरेंस मार्गों के जो सर्वेक्षण उन्होंने तैयार किए, उनकी गुणवत्ता ने तुरंत ही आधिकारिक हलकों में ध्यान आकर्षित किया।

Quebec के पतन और कनाडा पर ब्रिटिश नियंत्रण की स्थापना के बाद Cook को न्यूफाउंडलैंड के तट के सर्वेक्षण का काम सौंपा गया। यह काम कई गर्मियों तक चला और इसके परिणामस्वरूप ऐसे नक्शों की एक श्रृंखला तैयार हुई जो पीढ़ियों तक उन जलक्षेत्रों के लिए मानक संदर्भ बने रहे। न्यूफाउंडलैंड के सर्वेक्षण तकनीकी दृष्टि से अत्यंत चुनौतीपूर्ण थे — कठिन परिस्थितियों में एक अत्यंत जटिल तटरेखा के साथ किए गए, जिसमें अनगिनत खाड़ियाँ, संकरी खाड़ियाँ, द्वीप और उथले क्षेत्र मापे और दर्ज किए जाने थे। Cook ने इस काम में वही व्यवस्थित सम्पूर्णता लाई जो उन्होंने सेंट लॉरेंस पर दिखाई थी, और साथ ही तटीय सर्वेक्षण के उन तरीकों और दृष्टिकोणों को विकसित किया जो बाद में प्रशांत महासागर में उनके बहुत काम आए।

न्यूफाउंडलैंड का तट उन नौवहन चुनौतियों से एकदम अलग किस्म की चुनौतियाँ पेश करता था जो Cook ने उत्तरी सागर या सेंट लॉरेंस में झेली थीं। कोहरा घना और लगातार बना रहता था, हिमखंड अप्रत्याशित थे, और तटरेखा स्वयं अत्यंत जटिल थी — प्रायद्वीपों, खाड़ियों और अपतटीय द्वीपों का एक ऐसा भग्न परिदृश्य जो किसी सरल विवरण को चुनौती देता था। Cook ने इस समस्या से अपनी विशिष्ट शैली में निपटा — धैर्य, सटीकता और व्यवस्थित संगठन के संयोजन से — एक ऐसी सर्वेक्षण प्रणाली स्थापित की जो तट के साथ-साथ क्रमबद्ध रूप से आगे बढ़ती थी, दिशाएँ और गहराइयाँ मापती थी, खतरों की स्थिति दर्ज करती थी, और तटरेखा का एक ऐसा चित्र तैयार करती थी जो सटीक भी था और व्यावहारिक रूप से उपयोगी भी।

यह न्यूफ़ाउंडलैंड में उनके सर्वेक्षण के दौरान ही था जब Cook की एक ऐसी मुलाकात हुई जो उनके करियर के निर्णायक क्षणों में से एक साबित होने वाली थी। न्यूफ़ाउंडलैंड से एक सूर्यग्रहण दिखाई दे रहा था, और Cook ने — जिनके पास ज़रूरी उपकरण थे और उनका उपयोग करने का गणितीय ज्ञान भी — बड़ी सावधानी से इस ग्रहण का अवलोकन किया और उसे दर्ज किया, फिर अपने अवलोकनों का उपयोग करते हुए Burgeo Islands की देशांतर स्थिति अत्यंत सटीकता से निकाली। उन्होंने अपने नतीजे लिखकर ब्रिटेन की सर्वोच्च वैज्ञानिक संस्था Royal Society को भेजे, और वे सोसाइटी के Philosophical Transactions में प्रकाशित हुए। यह एक महत्त्वपूर्ण पल था: Cook खुद को महज़ एक कुशल नौसैनिक सर्वेक्षक के रूप में नहीं, बल्कि एक सच्चे वैज्ञानिक दिमाग वाले इंसान के रूप में पेश कर रहे थे — जो ज्ञान की उन्नति में योगदान देने में सक्षम थे — और Royal Society ने इसे गंभीरता से लिया।

यही प्रतिष्ठा, और नाविक एवं सर्वेक्षक के रूप में उनकी सिद्ध योग्यता, Cook को उस समय नौसेना के अधिकारियों की नज़र में ले आई जब वे यह तय कर रहे थे कि प्रशांत महासागर की यात्रा का नेतृत्व किसे सौंपा जाए। इस यात्रा का उद्देश्य शुक्र पारगमन — एक दुर्लभ खगोलीय घटना — का अवलोकन करना था, जिसे पृथ्वी की सतह पर अलग-अलग दूरी पर स्थित कई बिंदुओं से देखकर पृथ्वी और सूर्य के बीच की दूरी बड़ी सटीकता से निकाली जा सकती थी। Royal Society ने Admiralty से एक जहाज़ और एक कमांडर की मांग की थी, और विचार-विमर्श के बाद यह ज़िम्मेदारी Cook पर आ पड़ी। उन्हें Royal Navy में लेफ्टिनेंट नियुक्त किया गया, एक परिवर्तित Whitby कोलियर जहाज़ की कमान सौंपी गई जिसे अब His Majesty's Bark Endeavour का नाम दिया गया था, और उन्हें खगोलशास्त्रियों व प्रकृतिविदों की एक टीम को प्रशांत महासागर ले जाने और शुक्र पारगमन का अवलोकन कराने का काम दिया गया।

ऐसे किसी असाइनमेंट के लिए Cook एक अपेक्षाकृत कनिष्ठ अधिकारी थे, और जो लोग यह मानते थे कि यह कमान किसी वरिष्ठ व्यक्ति को मिलनी चाहिए थी, उनमें से सभी इस चुनाव को समझ या स्वीकार नहीं कर पाए। लेकिन जिन्होंने न्यूफ़ाउंडलैंड में उनका काम देखा था और जो समझते थे कि इस यात्रा में वास्तव में क्या माँगा जाता है, वे जानते थे कि Cook ही इसके लिए सही व्यक्ति हैं। यह यात्रा मुख्यतः एक सैन्य अभियान नहीं थी; इसके लिए ठीक उसी किस्म की वैज्ञानिक नाविकता की ज़रूरत थी — नौवहन की प्रतिभा और व्यवस्थित अवलोकन का संयोजन — जिसे Cook एक दशक से अधिक समय से विकसित और प्रदर्शित करते आ रहे थे। जब वे रवाना हुए तब उनकी उम्र तीस के अंत में थी — एक ऐसे युग के मानकों पर भी देर से खिलने वाले, जब नौसेना में तरक्की अक्सर धीमी हुआ करती थी। लेकिन इस इंतज़ार ने उन्हें तैयारी और अनुभव की वह गहराई दी थी जो उन्हें अजेय बनाती थी।

रवानगी से पहले, Cook ने Elizabeth Batts से विवाह किया, जो Barking की एक परिवार से थीं। इस विवाह से आने वाले वर्षों में कई बच्चे हुए, हालाँकि Cook की लगभग स्थायी अनुपस्थिति का मतलब था कि पति और पिता के रूप में उनकी भूमिका हमेशा अधूरी ही रही। Elizabeth Cook असाधारण दृढ़ता और हिम्मत वाली महिला साबित हुईं — पति की लंबी-लंबी यात्राओं के वर्षों के दौरान उन्होंने घर संभाला और बच्चों को बड़े करते हुए लगभग अकेले ही सब कुछ किया। वे अपने पति से कई दशक अधिक जीईं, और काफी बुढ़ापे में उनका निधन हुआ — न केवल अपने पति को, बल्कि अपने लगभग सभी बच्चों को भी खोने के बाद, एक को छोड़कर। Cook का विवाह स्नेह और परस्पर सम्मान का रिश्ता था, जो अधिकतर पत्र-व्यवहार और यात्राओं के बीच मिलने वाले संक्षिप्त अंतरालों में जिया गया। दोनों के लिए इसकी जो भी भावनात्मक कीमत रही हो, इसने Cook को वह स्थिर पारिवारिक आधार दिया जिसने उन्हें समुद्र में अपने काम पर पूरी तरह ध्यान केंद्रित करने दिया।

पहली यात्रा

HMS एंडेवर की यात्रा खोज के इतिहास में सबसे अधिक उत्पादक अभियानों में से एक के रूप में जानी जाती है। इसमें खगोलीय विज्ञान, प्राकृतिक इतिहास, नृजातीय अध्ययन, मानचित्रकला और नौकायन कला का ऐसा संगम था जो ब्रिटिश ज्ञानोदय की बौद्धिक महत्वाकांक्षाओं को उनके सबसे आत्मविश्वास भरे रूप में प्रतिबिंबित करता था। Cook इस अभियान के कमांडर और प्रेरणाशक्ति थे, लेकिन वे उन लोगों की प्रतिभा के मामले में भी असाधारण रूप से भाग्यशाली थे जो उनके साथ थे — खासतौर पर युवा प्राकृतिक दार्शनिक Joseph Banks, जो अपने खर्च पर प्रकृतिविदों, कलाकारों और सेवकों की एक टीम के साथ जहाज पर सवार हुए थे। उनके उत्साह और मेधा ने इस यात्रा की वैज्ञानिक उपलब्धियों को उससे कहीं अधिक समृद्ध बना दिया जितनी वे अन्यथा होतीं।

एंडेवर उस समय के किसी भी मानक से न तो खूबसूरत जहाज थी और न ही प्रभावशाली। वह Whitby प्रकार की एक परिवर्तित कोयला नौका थी — चौड़े पेटे वाली, अपेक्षाकृत कम गहराई में चलने वाली, और बिल्कुल अनाकर्षक। लेकिन Cook ने ठीक इसी प्रकार का जहाज चुनने पर जोर दिया था, क्योंकि Whitby के कोयला व्यापार में बिताए अपने वर्षों से वे इसकी खूबियाँ जानते थे: जरूरत पड़ने पर इसे मरम्मत के लिए किनारे पर चढ़ाया जा सकता था, यह उथले तटीय जलों में चल सकती थी, और यह बेहद मजबूत और विशाल थी। यह चुनाव बेहद सटीक साबित हुआ। एंडेवर ने चट्टानों, उथले पानी और तूफानों का सामना किया जो किसी अधिक भव्य लेकिन कम व्यावहारिक जहाज को तबाह कर देते।

इस यात्रा का प्राथमिक वैज्ञानिक उद्देश्य ताहिती द्वीप से शुक्र के पारगमन का अवलोकन करना था, जिसे कुछ साल पहले ब्रिटिश कप्तान Samuel Wallis ने देखा था और जो इस घटना के अवलोकन के लिए एक उपयुक्त दक्षिणी स्थान प्रदान करता था। अटलांटिक महासागर को पार करते हुए Cape Horn तक और फिर प्रशांत महासागर में दक्षिण की ओर की यात्रा अपने आप में नौकायन की एक महत्वपूर्ण उपलब्धि थी। Cook और उनके दल ने बिना किसी गंभीर घटना के ताहिती पहुँचकर Point Venus के नाम से जानी जाने वाली जगह पर समुद्र तट पर वेधशाला स्थापित की और इस महत्वपूर्ण अवलोकन की सावधानीपूर्वक तैयारी की।

शुक्र के पारगमन का अवलोकन निर्धारित दिन किया गया, जिसमें Cook ने स्वयं खगोलशास्त्री Charles Green के साथ विस्तृत अभिलेख तैयार किए, जिन्हें इसी उद्देश्य से इस यात्रा पर भेजा गया था। अवलोकन हुआ, आंकड़े दर्ज किए गए और यात्रा का प्राथमिक वैज्ञानिक उद्देश्य पूरा हुआ। लेकिन बाद के विश्लेषण में एक निराशाजनक समस्या सामने आई जिसने पृथ्वी के विभिन्न स्थानों से किए गए पारगमन के सभी अवलोकनों को परेशान किया: तथाकथित "ब्लैक ड्रॉप प्रभाव" — एक प्रकाशीय घटना जिसके कारण सूर्य की परत पर शुक्र के स्पर्श के सटीक क्षण को उस परिशुद्धता के साथ निर्धारित करना मुश्किल हो गया जो गणना के लिए आवश्यक थी। इस यात्रा के पारगमन अवलोकनों को दुनिया भर के अन्य केंद्रों से प्राप्त अवलोकनों के साथ मिलाने पर पृथ्वी-सूर्य दूरी का एक मान निकला जो पिछले अनुमानों से बेहतर था, लेकिन वैज्ञानिकों की उम्मीदों जितना सटीक नहीं था।

खगोलीय कार्य पूरा होने पर Cook ने उन बंद आदेशों को खोला जो रवाना होने से पहले नौसेना मंत्रालय ने उन्हें दिए थे और जिनकी सामग्री पारगमन के अवलोकन के बाद ही खोली जानी थी। इन आदेशों में उन्हें काल्पनिक महान दक्षिणी महाद्वीप — Terra Australis Incognita — की खोज करने का निर्देश दिया गया था, जिसके बारे में सैद्धांतिक भूगोलवेत्ताओं का लंबे समय से मानना था कि यह उत्तरी गोलार्ध के भूभागों को संतुलित करने के लिए दक्षिणी गोलार्ध में अवश्य मौजूद होना चाहिए। Cook को इस महाद्वीप की खोज करनी थी और यदि वे इसे पाते तो ब्रिटिश ताज के नाम पर उसके तटों का मानचित्रण करना था और उपयुक्त क्षेत्रों पर अधिकार जताना था। यदि उन्हें ताहिती के दक्षिण में यह महाद्वीप न मिलता, तो उन्हें पश्चिम की ओर जाकर न्यूजीलैंड के तट की जाँच करनी थी, जिसे एक सदी से भी पहले डच अन्वेषक Abel Tasman ने आंशिक रूप से देखा था।

Tahiti से रवाना होने से पहले Cook ने वहाँ काफी समय बिताया, और यह प्रवास वैज्ञानिक दृष्टि से की गई टिप्पणियों और प्रशांत द्वीपीय समाजों की समझ विकसित करने, दोनों ही लिहाज़ से अत्यंत मूल्यवान साबित हुआ। उन सभी लोगों के वृत्तांतों के अनुसार जो Tahiti वासियों से मिले थे, वे असाधारण शारीरिक सौंदर्य, मिलनसारिता और उदारता से संपन्न लोग थे, जो पारस्परिक आदान-प्रदान और सामूहिक दायित्व के सिद्धांतों पर आधारित एक ऐसे समाज में जीवन व्यतीत करते थे जो यूरोपीय अनुभव से बिल्कुल अलग था। वे कुशल नाविक, कलाकार और किसान भी थे, और उनकी संस्कृति उससे कहीं अधिक परिष्कृत थी जितना शुरुआती यूरोपीय आगंतुक अक्सर स्वीकार करते थे।

Endeavour के दल और Tahiti वासियों के बीच संबंध शुरू से ही जटिल थे। यूरोपीयों के पास लोहे का होना — जो पॉलिनेशियाई समाजों में अत्यंत मूल्यवान सामग्री थी — ने एक ऐसी गतिशीलता पैदा की जो कभी-कभी अस्थिरता का कारण बनती थी। Tahiti वासियों द्वारा लोहे की वस्तुओं की चोरी और उसके जवाब में यूरोपीयों की हिंसा या हिंसा की धमकी, इस मेल-मुलाकात की बार-बार दोहराई जाने वाली विशेषताएँ थीं जिन्हें कोई भी पक्ष दूसरे के मूल्यों और अपेक्षाओं के संदर्भ में पूरी तरह नहीं समझ पाता था। Cook आमतौर पर इन तनावों के प्रति अपने समकालीनों की तुलना में अधिक संयमित और विचारशील रवैया रखते थे, लेकिन वे भी जब आवश्यक व्यवस्था बनाए रखने की बात आती तो बल प्रयोग या उसकी धमकी से परहेज़ नहीं करते थे।

Tahiti से प्रस्थान करने और पड़ोसी Society Islands में से कई का दौरा करने के बाद Cook काल्पनिक महाद्वीप की तलाश में दक्षिण की ओर मुड़े। उन्हें वहाँ केवल खुला समुद्र मिला, जो स्वयं में उस महाद्वीप की सीमा को लेकर प्रचलित आशावादी धारणाओं के विरुद्ध एक महत्वपूर्ण नकारात्मक प्रमाण था। फिर वे पश्चिम की ओर मुड़े और New Zealand के North Island पर पहुँचे, इस प्रकार वहाँ पहुँचने वाले केवल दूसरे यूरोपीय कमांडर बने और वहाँ निवास करने वाले Maori लोगों के साथ व्यवस्थित संपर्क स्थापित करने का प्रयास करने वाले पहले।

Maori लोग Tahiti वासियों से बिल्कुल भिन्न थे। वे एक योद्धा समाज थे, कुलों और जनजातीय संबद्धताओं के इर्द-गिर्द संगठित, कट्टर रूप से क्षेत्रीय, युद्ध में निपुण और एक गौरवशाली तथा दृढ़ सांस्कृतिक परंपरा के वाहक। Endeavour के दल और Maori के बीच शुरुआती मुठभेड़ें गलतफहमी, भय और हिंसा से भरी हुई थीं। शुरुआती मुठभेड़ों में कई Maori मारे गए, एक तथ्य जिसे Cook ने अपनी डायरी में स्पष्ट खेद के साथ स्वीकार किया, और इन मौतों का कारण गलतफहमी तथा दोनों पक्षों की बल प्रयोग पर उतर आने की प्रवृत्ति के दुर्भाग्यपूर्ण संयोग को बताया। वे शांतिपूर्ण संबंध स्थापित करने के लिए उत्सुक थे, यह समझते हुए कि उनके सर्वेक्षण कार्य की सफलता इसी पर निर्भर है, और उन्होंने उपहारों का आदान-प्रदान, धैर्य और Tupaia की मध्यस्थता के ज़रिये इसके लिए व्यवस्थित प्रयास किए। Tupaia एक Tahitian पुजारी और नाविक थे जो Tahiti में इस यात्रा में शामिल हो गए थे, और प्रशांत भाषाओं तथा रीति-रिवाजों का उनका ज्ञान अमूल्य साबित हुआ।

Cook ने कई महीने New Zealand के North Island और South Island, दोनों की परिक्रमा करते हुए बिताए और इतने सटीक नक्शे तैयार किए कि वे उसके बाद बहुत लंबे समय तक उन जलमार्गों के लिए अंतिम संदर्भ स्रोत बने रहे। यह सर्वेक्षण कठिन परिस्थितियों में किया गया था, जिसमें जहाज़ को आवश्यक माप लेने के लिए तट के बेहद करीब चलाना पड़ता था, जहाँ मौसम का खतरा तो था ही, कभी-कभी स्थानीय निवासियों की शत्रुता का भी सामना करना पड़ता था। इस दौरान Cook की नाविक कुशलता अनुकरणीय रही, जिन्होंने Endeavour को उन परिस्थितियों में सुरक्षित रखा जो उनके कौशल और अनुभव की हर क्षमता को परखती थीं।

न्यूज़ीलैंड से Cook पश्चिम की ओर न्यू हॉलैंड के तट की तरफ रवाना हुए, जैसा कि उस समय यूरोपीय लोग ऑस्ट्रेलिया को जानते थे। उनका इरादा पूर्वी तट की जांच करने का था, जिसे किसी भी यूरोपीय ने न तो देखा था और न ही मानचित्र पर अंकित किया था। वे दक्षिण-पूर्वी तट पर उतरे और उत्तर की ओर बढ़ते हुए वहाँ के भूगोल और वहाँ के निवासियों का उसी सूक्ष्मता से अवलोकन और दस्तावेज़ीकरण करते रहे, जो उनकी हर काम की पहचान थी। पहली महत्वपूर्ण लैंडिंग एक ऐसी खाड़ी में हुई जो वनस्पति नमूनों से इतनी समृद्ध थी कि Banks और उनके साथी प्रकृतिविद Daniel Solander ने इसे Botany Bay नाम देने का सुझाव दिया — एक ऐसा नाम जो बाद में कहीं अधिक अंधकारमय उद्देश्यों से जुड़ गया, जब इसे ब्रिटेन की पहली दंड-कॉलोनी की जगह के रूप में चुना गया।

Cook का ऑस्ट्रेलिया के आदिवासी लोगों से सामना संक्षिप्त रहा और कम से कम उनके अपने नज़रिये से, सार्थक संवाद स्थापित करने में काफ़ी हद तक असफल रहा। आदिवासी लोगों ने Cook द्वारा पेश की गई वस्तुओं और मित्रता के भाव-भंगिमाओं में कोई खास दिलचस्पी नहीं दिखाई, और उनकी यह प्रत्यक्ष उदासीनता यूरोपीय लोगों को हैरान और परेशान करती रही। Cook की डायरी में दर्ज अवलोकन यह दर्शाते हैं कि उन्होंने जो देखा उसे समझने की एक वास्तविक, भले ही सीमित, कोशिश की, लेकिन दोनों समाजों के बीच सांस्कृतिक दूरी इतनी विशाल थी और यह मुलाकात इतनी संक्षिप्त और सतही थी कि वास्तविक समझ संभव ही नहीं थी। Cook की डायरी में एक विचार दर्ज है जिसमें उन्होंने सुझाया कि आदिवासी लोग यूरोपीय वस्तुओं या समाज के बिना भी पूरी तरह खुश लगते हैं और शायद किसी हद तक उनसे अनजान रहकर बेहतर ही हैं — यह एक विशिष्ट ज्ञानोदय-काल का नज़रिया था जो आदिवासी यथार्थ से कम और यूरोपीय बेचैनियों से अधिक बात करता था।

पूरी पहली यात्रा का सबसे नाटकीय प्रसंग Great Barrier Reef पर हुआ, जब Endeavour रात के अंधेरे में एक मूँगे की चट्टान से टकरा गई और इतनी बुरी तरह क्षतिग्रस्त हो गई कि कई घंटों तक उसके बचने की उम्मीद सच में संदिग्ध लगने लगी। दल ने रात भर और अगले दिन तक पंपों और जो भी साधन उपलब्ध थे उनके ज़रिये जहाज़ को डूबने से बचाए रखने की कोशिश की, और आखिरकार fothering नामक एक तकनीक कारगर साबित हुई — जिसमें oakum और गोबर से लिपे हुए एक पाल को पतवार के नीचे से खींचकर छेद को ढका गया — और इससे पानी का बहाव इतना कम हो गया कि जहाज़ किसी तरह तट तक पहुँच सका। Cook ने इस संकट को उस शीतलता और दबाव में स्पष्ट निर्णय-क्षमता के साथ संभाला जो उनके सबसे प्रशंसनीय गुणों में से थे। उन्होंने अपने दल को घबराहट से बचाए रखा, मरम्मत के प्रयासों को व्यवस्थित दक्षता के साथ निर्देशित किया, और जब जहाज़ को अंततः उस नदी के मुहाने पर किनारे लगाया गया जिसे उन्होंने Endeavour River नाम दिया, तो उन्होंने अपनी विशिष्ट पूर्णता के साथ मरम्मत का काम संगठित किया।

ऑस्ट्रेलियाई तट का सर्वेक्षण Cape York की नोक तक पूरा करने के बाद, Cook Torres Strait से गुज़रे और उसकी नौगम्यता की पुष्टि की, फिर Batavia की ओर उत्तर-पश्चिम मुड़े — जो उस डच औपनिवेशिक बंदरगाह का नाम था जो आज इंडोनेशिया में है — जहाँ जहाज़ की बड़े पैमाने पर मरम्मत हुई। Batavia दल के लिए विनाशकारी साबित हुआ। यह बंदरगाह अपनी अस्वास्थ्यकर परिस्थितियों के लिए बदनाम था, और वहाँ लगी बीमारियों — मुख्यतः मलेरिया और पेचिश — ने Cook के उतने ही आदमियों की जान ले ली जितने प्रशांत महासागर के तमाम खतरों ने मिलकर नहीं ली थीं। Batavia में या वापसी की यात्रा के दौरान जिन लोगों की मृत्यु हुई उनमें Charles Green भी शामिल थे — वह खगोलशास्त्री जो शुक्र के पारगमन के अवलोकन के लिए आए थे — और Tupaia भी, जो उल्लेखनीय ताहीती नाविक थे जिनकी उपस्थिति पूरी यात्रा में अत्यंत मूल्यवान रही थी।

एंडेवर लगभग तीन साल समुद्र में बिताने के बाद ब्रिटेन वापस लौटी, और अपने साथ प्राकृतिक इतिहास के नमूनों, चित्रों, मानव-जातिवैज्ञानिक अवलोकनों और भौगोलिक सर्वेक्षणों का वह असाधारण संग्रह लेकर आई जो किसी एक यात्रा में कभी एकत्र नहीं हुआ था। Joseph Banks उस समय की मशहूर हस्ती बन गए थे — समाज में उनका जोरदार स्वागत हुआ, राजा ने उनसे मुलाकात की, और उन्हें प्राकृतिक विज्ञान के महान संरक्षक और प्रवर्तक के रूप में चारों ओर सराहा गया। Cook को भी पहचान मिली, हालाँकि तात्कालिक सामाजिक दृष्टि से वह थोड़ी कम थी। उन्हें कमांडर के पद पर पदोन्नत किया गया, राजा ने उनसे भेंट की, और उन्होंने एडमिरल्टी के समक्ष अपनी खोजों को प्रस्तुत किया। इस यात्रा ने उन्हें एक कुशल लेकिन अपेक्षाकृत अज्ञात नौसैनिक अधिकारी से ब्रिटेन के सबसे प्रसिद्ध खोजकर्ताओं में से एक बना दिया था।

दूसरी यात्रा

अगर पहली यात्रा व्यापक अर्थों में खोज की यात्रा थी, तो दूसरी यात्रा खंडन की यात्रा थी। इसका मुख्य उद्देश्य महान दक्षिणी महाद्वीप के सवाल को हमेशा के लिए सुलझाना था। यूरोप के सैद्धांतिक भूगोलवेत्ता पहली यात्रा में Cook की विफलता से बेपरवाह रहते हुए इस तर्क पर आ टिके थे कि वह महाद्वीप और भी दक्षिण में होगा, उन अक्षांशों से परे जहाँ तक Cook पहुँचे थे। Cook की दूसरी यात्रा का मकसद इतना दक्षिण तक जाना था कि इस सिद्धांत को निश्चित रूप से सिद्ध या खारिज किया जा सके, और यह इतनी पूर्णता के साथ सफल रही कि बहस की कोई गुंजाइश ही नहीं बची।

दूसरी यात्रा में दो जहाज — रेज़ोल्यूशन और एडवेंचर — काम में लाए गए, जो इस अभियान के बढ़े हुए पैमाने और महत्वाकांक्षा का प्रमाण था। Cook ने रेज़ोल्यूशन की कमान संभाली और Tobias Furneaux ने एडवेंचर की। दोनों जहाज व्हिटबी किस्म के थे — यह एक सोचा-समझा चुनाव था जो पहली यात्रा से मिले सबक को दर्शाता था। Joseph Banks ने शुरू में दूसरी यात्रा पर फिर से जाने की योजना बनाई थी, और वे प्रकृतिवादियों की और भी बड़ी टीम लाना चाहते थे तथा रेज़ोल्यूशन में कई ढाँचागत बदलावों की माँग कर रहे थे, जिनसे जहाज खतरनाक रूप से ऊपर से भारी हो जाता। जब नौसेना ने उनकी सबसे कठोर माँगें मानने से इनकार कर दिया, तो Banks एक चर्चित नाराजगी में वापस हट गए और अंततः एक निजी अभियान पर आइसलैंड चले गए। दूसरी यात्रा में उनकी जगह जर्मन प्रकृतिवादी Johann Reinhold Forster और उनके बेटे Georg ने ली, जिनका इस यात्रा की वैज्ञानिक उपलब्धियों में योगदान महत्वपूर्ण रहा, हालाँकि उनका व्यक्तिगत स्वभाव Banks की तुलना में काफी कठिन था।

दूसरी यात्रा ने Cook को किसी भी पूर्व नाविक से कहीं अधिक दक्षिण में, अंटार्कटिका के चारों ओर फैले बर्फीले जल तक पहुँचाया। उन्होंने अंटार्कटिक वृत्त को कई बार पार किया — यह पहले कभी नहीं हुआ था — और ऐसे अक्षांशों तक पहुँचे जहाँ समुद्र बर्फ और हिमशैलों से पटा पड़ा था। वे स्वयं अंटार्कटिक महाद्वीप को देख नहीं पाए, हालाँकि कुछ जगहों पर वे इतने करीब थे कि लगभग निश्चित था कि पैक बर्फ की उस दीवार के पार कहीं न कहीं ज़मीन ज़रूर होगी। उनका निष्कर्ष, जो उनकी डायरी में अपनी विशिष्ट सटीकता के साथ दर्ज है, यह था कि यदि कोई दक्षिणी महाद्वीप वाकई मौजूद है, तो वह दक्षिणी बर्फ में इतनी गहराई में है कि वहाँ पहुँचना असंभव होगा और यदि पहुँच भी गए तो वह किसी मानवीय उद्देश्य के लिए बेकार है। उन्होंने प्रभावी रूप से महान दक्षिणी महाद्वीप को एक रहने योग्य और आर्थिक दृष्टि से उपयोगी भूमि के रूप में प्रचलित मिथक को नष्ट कर दिया, भले ही उन्होंने तकनीकी रूप से यह साबित नहीं किया कि वह अस्तित्व में नहीं है।

अंटार्कटिक अभियानों के बीच, Cook ने प्रशांत महासागर के द्वीपों का दौरा और पुनर्दौरा उस व्यवस्थित गहनता के साथ किया जैसे कोई किसी विश्वकोश का अंतिम संस्करण तैयार कर रहा हो। वे ताहिती, सोसाइटी द्वीपसमूह और पहली यात्रा में मिले अन्य द्वीपसमूहों पर वापस गए। उन्होंने मार्केसस, टोंगा, ईस्टर द्वीप और न्यू हेब्रीडीज़ — जो अब वानुअतु है — का दौरा किया, और न्यू कैलेडोनिया सहित कई ऐसे द्वीपसमूहों की खोज की जो पहले यूरोपीय लोगों को ज्ञात नहीं थे। हर दौरे से विस्तृत नक्शे, प्राकृतिक जगत के व्यापक अवलोकन और मिले हुए लोगों के सावधानीपूर्वक दर्ज किए गए विवरण सामने आए।

दूसरी यात्रा देशांतर (longitude) की समस्या को सुलझाने में Cook की सफलता के लिए भी उल्लेखनीय है। समुद्र में देशांतर का निर्धारण करना सदियों से नौवहन की एक महान अनसुलझी समस्या रही थी, जिसके कारण अनगिनत जहाज़ तबाह हुए और नौवहन संबंधी अनेक त्रुटियाँ हुईं। सैद्धांतिक समाधान — यानी खगोलीय अवलोकन द्वारा निर्धारित स्थानीय समय की तुलना किसी निश्चित संदर्भ याम्योत्तर (meridian) के समय से करना — काफी पहले से ज्ञात था, लेकिन इसके लिए एक असाधारण रूप से सटीक घड़ी की आवश्यकता थी जो समुद्री यात्रा के दौरान तापमान परिवर्तन, कंपन और भौतिक झटकों के बावजूद सही समय बनाए रख सके। ब्रिटिश Board of Longitude द्वारा देशांतर पुरस्कार की पेशकश ने ऐसी घड़ी — समुद्री कालमापी (marine chronometer) — के विकास को प्रेरित किया था, और Cook दूसरी यात्रा पर इसका एक प्रारंभिक मॉडल अपने साथ ले गए, जिसे उन्होंने चंद्र-दूरी गणना की स्थापित विधियों के विरुद्ध परखा। कालमापी का प्रदर्शन प्रभावशाली रहा, और Cook की डायरी में इस उपकरण के प्रति उनके उत्साहपूर्ण समर्थन ने Royal Navy द्वारा इसे अंततः सार्वभौमिक रूप से अपनाए जाने में महत्त्वपूर्ण भूमिका निभाई।

दूसरी यात्रा के दौरान Adventure, Resolution से बिछड़ गया, और Furneaux अंततः स्वतंत्र रूप से इंग्लैंड लौट आए — अपने साथ एक भयावह खबर लेकर: न्यूज़ीलैंड में किनारे भेजे गए उनके कुछ साथियों को Maori ने मार डाला और खा लिया था। यह घटना ब्रिटिश जनमानस को हिला गई और उस सौहार्दपूर्ण संपर्क की उस कहानी को जटिल बना गई जिसे पहली यात्रा ने बड़े जतन से गढ़ा था। जब Cook न्यूज़ीलैंड लौटने पर इस बारे में जाने, तो उन्होंने खेद और नियंत्रित क्रोध के मिले-जुले भाव से प्रतिक्रिया दी — उन्होंने किसी व्यापक प्रतिशोधात्मक कार्रवाई का सहारा नहीं लिया, लेकिन विभिन्न माध्यमों से यह स्पष्ट कर दिया कि ऐसी घटनाओं को आसानी से नज़रअंदाज़ नहीं किया जाएगा। इस नरसंहार के प्रति उनकी प्रतिक्रिया उस कठिन स्थिति को उजागर करती है जिसमें वे हमेशा रहे: शांतिपूर्ण संबंध बनाए रखने की कोशिश करते हुए अपने दल की सुरक्षा सुनिश्चित करना — उन परिस्थितियों में जहाँ गलतफहमी और हिंसा हमेशा बस एक घटना की दूरी पर थी।

दूसरी यात्रा के दौरान Easter Island की यात्रा ने Cook की डायरियों के सबसे प्रसिद्ध अंशों में से एक को जन्म दिया — उस दूरस्थ और एकाकी द्वीप के परिदृश्य में बिखरी विशाल पत्थर की मूर्तियों का उनका वर्णन। मूर्तियों का उनका विवरण, उनके उद्देश्य और उत्पत्ति को समझने के उनके प्रयास, और द्वीप की स्पष्ट रूप से घटती जनसंख्या पर उनके अवलोकन — सभी उनकी विशिष्ट विचारशीलता को दर्शाते हैं। उन्होंने समझा कि यह द्वीप एक ऐसी सभ्यता का प्रतिनिधित्व करता है जो किन्हीं ऐसे कारणों से — जिन्हें वे जान नहीं सके — भयावह पतन का शिकार हो गई थी, और उन्होंने जो देखा उसका उनका विवरण Easter Island के अतीत की पहेली को सुलझाने का किसी यूरोपीय पर्यवेक्षक द्वारा किए गए पहले गंभीर प्रयासों में से एक था।

Cook दूसरी यात्रा से उससे भी अधिक उत्साहपूर्ण स्वागत के साथ लौटे जो पहली यात्रा के बाद उन्हें मिला था। वे दक्षिणी बर्फ में जाकर जीवित वापस आए थे — यही अपने आप में पर्याप्त उपलब्धि थी। उन्होंने दक्षिणी महाद्वीप की समस्या को सुलझा दिया था। उन्होंने नौवहन के लिए कालमापी के व्यावहारिक मूल्य को सिद्ध कर दिया था। और उन्होंने भौगोलिक, प्राकृतिक-ऐतिहासिक एवं मानवशास्त्रीय अवलोकनों का एक और विशाल संग्रह तैयार किया था जिसने वैज्ञानिक समुदाय को वर्षों तक व्यस्त रखा। उन्हें पोस्ट कैप्टन के पद पर पदोन्नत किया गया और Greenwich Hospital में एक मुख्यतः औपचारिक पद पर नियुक्त किया गया — यह नियुक्ति उन्हें उनकी असाधारण सेवा के वर्षों के बाद विश्राम और सुविधा देने के उद्देश्य से की गई थी। उन्हें Royal Society का Fellow चुना गया और अपने दल में उचित पोषण व स्वच्छता बनाए रखकर स्कर्वी की रोकथाम पर उनके कार्य के लिए Society के सर्वोच्च सम्मान — Copley Medal — से नवाज़ा गया।

लेकिन Cook एक ऐसे इंसान नहीं थे जो चैन से बैठ सकें। Greenwich की अपनी नियुक्ति में वे बेचैन रहते थे — एक अस्पताल के कप्तान के औपचारिक कर्तव्य उस मन और आत्मा के लिए नाकाफी थे जो अन्वेषण की चुनौतियों की आदी थी। जब एडमिरल्टी ने एक तीसरे अभियान की योजना बनाना शुरू किया — जो Northwest Passage की खोज के लिए था, यानी उत्तरी अमेरिका के शीर्ष से होकर अटलांटिक और प्रशांत महासागर को जोड़ने वाला वह किंवदंती बन चुका समुद्री मार्ग — तो Cook ने खुद को उसका कमांडर नियुक्त करने का प्रस्ताव रखा। यह एक ऐसा फैसला था जिसने उनके कुछ मित्रों और सहयोगियों को हैरान कर दिया, जिनका मानना था कि उन्होंने आराम का हक कमा लिया है और आगे की समुद्री यात्राओं के खतरे उठाने की कोई जरूरत नहीं है। लेकिन Cook तट पर नहीं रह सकते थे। समुद्र और उसका काम उनके अस्तित्व का बहुत गहरा हिस्सा बन चुका था।

तीसरा अभियान और अंतिम यात्रा

तीसरे अभियान की योजना दूसरे अभियान जैसे ही पैमाने पर बनाई गई थी — दो जहाज, Resolution और Discovery, और दो उद्देश्य। Cook को प्रशांत महासागर की ओर रवाना होना था, Omai नाम के एक युवा ताहीती व्यक्ति को वापस पहुँचाना था जिसे एक अजीबोगरीब जिज्ञासा की वस्तु की तरह इंग्लैंड लाया गया था और अब उसे उसके घर लौटाया जाना था, और फिर उत्तर की ओर बढ़कर Northwest Passage के प्रशांत महासागरीय प्रवेश द्वार की तलाश करनी थी। यह अभियान इस सवाल का एक अंतिम और निर्णायक जवाब देने के लिए था कि क्या उत्तरी अमेरिका के शीर्ष से होकर कोई नौगम्य उत्तरी समुद्री मार्ग वाकई मौजूद है — एक ऐसा सवाल जो सदियों से यूरोपीय भौगोलिक कल्पना को मथता रहा था।

Cook के तीसरे अभियान को इतिहासकार आम तौर पर पहले दो अभियानों जितना सीधा-सफल नहीं मानते, और यह केवल इसलिए नहीं कि यह उनकी मृत्यु पर जाकर खत्म हुआ। तीसरे अभियान में एक प्रकार का तनाव महसूस होता है — एक ऐसा अहसास कि Cook, जो अब अपनी उम्र के चालीसवें दशक के अंत में थे और वर्षों की थकाऊ समुद्री सेवा के बाद शारीरिक क्षय के लक्षण दिखा रहे थे, पूरी तरह वही इंसान नहीं रहे थे जिन्होंने पहले दो अभियानों की कमान इतनी शानदार एकरूपता से संभाली थी। इसके प्रमाण मुख्य रूप से उनकी डायरियों में और उनके अधीन काम करने वालों के विवरणों में मिलते हैं, जो एक ऐसे नेता की तस्वीर उभारते हैं जिनकी चुनौतियों और निराशाओं के प्रति प्रतिक्रियाएँ कभी-कभी उनके पहले के करियर की तुलना में कम संतुलित, कम धैर्यशील और कम मानवीय हो गई थीं। Cook हमेशा से कठोरता के सक्षम थे, लेकिन तीसरे अभियान में यह कठोरता कभी-कभी कुछ और ही रूप ले लेती थी — एक ऐसी निर्दयता, दंड देने की एक ऐसी तत्परता, जिसने उनके कुछ सबसे अनुभवी अधिकारियों को भी चिंतित और विचलित कर दिया।

यह बदलाव शारीरिक बीमारी की वजह से था, सेवा के लंबे वर्षों की थकान से, या किसी गहरे मनोवैज्ञानिक क्षरण से — यह अब निश्चितता के साथ कह पाना संभव नहीं है। जो बात स्पष्ट है वह यह है कि तीसरे अभियान के Cook कुछ मायनों में उस इंसान का एक घटा हुआ रूप थे जिन्होंने पहले दो अभियानों में इतने कुशल प्रभुत्व के साथ प्रशांत महासागर को नापा था।

यह अभियान पहले दोनों की तरह उत्तमाशा अंतरीप (Cape of Good Hope) के रास्ते प्रशांत महासागर की ओर बढ़ा और Omai को उनकी मातृभूमि वापस पहुँचाने के दायित्व को पूरा करने में Society Islands में काफी समय बिताया। ताहीती और आस-पास के द्वीपों में बिताए गए समय में मुलाकात, उपहारों के आदान-प्रदान, चोरी और तनाव के वे जाने-पहचाने पैटर्न फिर से दिखे जो Cook की पहले की यात्राओं की पहचान रहे थे, लेकिन अब उनमें एक तीखापन आ गया था। विशेष रूप से चोरी के प्रति Cook की प्रतिक्रियाएँ तीसरे अभियान में उल्लेखनीय रूप से कठोर हो गई थीं, और ऐसी घटनाएँ हुईं जिनमें पॉलिनेशियाई लोगों के विरुद्ध बंधकों को रखने और शारीरिक दंड देने का उनका तरीका उन सीमाओं को लाँघ गया जिनका पहले का Cook शायद अधिक सावधानी से पालन करते।

सोसाइटी द्वीपों से, Cook ने उत्तर की ओर उन जलमार्गों में प्रवेश किया जो वास्तव में अनजाने थे, और हवाई द्वीपसमूह की खोज की — मध्य उत्तरी प्रशांत महासागर में स्थित बड़े ज्वालामुखीय द्वीपों का एक समूह, जो समस्त प्रशांत द्वीप समूहों में सबसे घनी आबादी वाले और सामाजिक दृष्टि से सबसे विकसित द्वीपों में से था। हवाई के निवासी, जो उन पॉलिनेशियाई नाविकों के वंशज थे जिन्होंने सदियों पहले इन द्वीपों पर बसेरा किया था, उन्होंने Resolution और Discovery का स्वागत जिज्ञासा, आतिथ्य और विस्मय के मिले-जुले भाव से किया। Cook का आगमन हवाई के धार्मिक कैलेंडर की उस अवधि के साथ मेल खाता था जो देवता Lono से जुड़ी थी — कृषि और शांतिपूर्ण गतिविधियों के देवता। Cook के जहाज़ों का आकार और स्वरूप, उनके विशाल मस्तूलों और पालों समेत, Lono के आगमन से जुड़ी धार्मिक प्रतीकों से काफी हद तक मिलता-जुलता था। चाहे हवाईवासियों ने वास्तव में Cook को Lono समझा हो या नहीं — जैसा कि कुछ इतिहासकारों ने तर्क दिया है — उनका स्वागत असाधारण रूप से उष्मापूर्ण था, और इस पहली यात्रा में दोनों समूहों के बीच वस्तुओं और आतिथ्य का आदान-प्रदान काफी हद तक शांतिपूर्ण और परस्पर संतोषजनक रहा।

हवाई से, Cook उत्तर और उत्तर-पूर्व की ओर अमेरिकी तट की ओर रवाना हुए, और आज के Oregon के प्रशांत तट पर पहुँचकर तटरेखा को क्रमबद्ध रूप से उत्तर की ओर मापते गए — आज के British Columbia, Alaska से होते हुए बेरिंग सागर और आर्कटिक महासागर तक। यह कठिन और प्रायः खतरनाक काम था, जो ठंडी और धुंध भरी परिस्थितियों में एक अत्यंत जटिल तटरेखा के साथ किया गया। Cook को कोई उत्तर-पश्चिमी मार्ग नहीं मिला। Alaska के सुदूर उत्तर-पश्चिमी छोर पर Icy Cape पर आर्कटिक बर्फ की दीवार ने उन्हें वापस मुड़ने पर मजबूर कर दिया। इससे यह साबित हो गया कि भले ही पूर्व में कनाडाई आर्कटिक की भूलभुलैया में कहीं कोई मार्ग मौजूद भी हो, वह उन अक्षांशों में नौगम्य नहीं था जहाँ तक वे पहुँच सके थे। वे बेरिंग जलसंधि से दक्षिण की ओर लौटे, जलसंधि के एशियाई किनारे के साथ-साथ अमेरिकी किनारे का भी अन्वेषण किया, और अंततः सर्दियाँ बिताने के लिए हवाई लौट आए।

हवाई की दूसरी यात्रा की शुरुआत खराब हुई और अंत विनाशकारी रहा। सर्दियों के लिए रसद जुटाने हेतु लंबे प्रवास ने हवाईवासियों के आतिथ्य पर दबाव डाला, और छोटी-मोटी चोरी का वह सिलसिला, जिसने Cook की सभी प्रशांत यात्राओं को उलझाया था, अब गंभीर टकराव का रूप लेने लगा। जब एक रात Discovery की एक नाव चुरा ली गई, तो Cook ने योजना बनाई कि हवाई के राजा Kalani'opu'u को नाव की वापसी की गारंटी के तौर पर Resolution पर बंधक बना लिया जाए — यह एक ऐसी रणनीति थी जिसे उन्होंने अन्य परिस्थितियों में कुछ हद तक सफलतापूर्वक आज़माया था। उस अभागे दिन की सुबह वे नौसैनिकों की एक टुकड़ी के साथ तट पर उतरे और राजा को जहाज़ पर ले जाने का प्रयास किया।

स्थिति तेज़ी से बिगड़ती गई। खबर आई कि खाड़ी के दूसरी ओर एक झड़प में एक सरदार मारा गया है, और Cook की छोटी-सी टुकड़ी के इर्द-गिर्द भीड़ क्रोधित और सशस्त्र होती जा रही थी। Cook ने स्थिति पर नियंत्रण बनाए रखने की कोशिश की, लेकिन हालात उनके वश से बाहर हो चुके थे। इसके बाद हुई मारपीट में Cook को पीछे से वार किया गया, वे समुद्र तट के किनारे उथले पानी में गिर पड़े, और उन्हें चाकू मारकर तथा पीट-पीटकर मार डाला गया। उनके कई नौसैनिक भी मारे गए। जो बच गए वे जहाज़ों की ओर पीछे हट गए।

Cook की मृत्यु एक ऐसा आघात थी जिसकी गूँज ब्रिटेन और पूरे यूरोप में फैल गई। वे पचास वर्ष के थे, अपनी ख्याति के शिखर पर, और बहुतों की धारणा थी कि वे सक्रिय सेवा से एक सुखद सेवानिवृत्ति की दहलीज़ पर खड़े थे। शोक वास्तविक और व्यापक था। इस यात्रा पर उनके साथी अधिकारी, जो इस घटना से गहरे हिल गए थे, उनके अवशेषों की वापसी के लिए बातचीत करते रहे — हालाँकि हवाईवासियों ने उनके शरीर के साथ अपने सम्मानित मृतकों की परंपरा के अनुसार व्यवहार किया था, और जो अंततः वापस मिला और समुद्र को समर्पित किया गया, वह दुनिया के उस कभी सबसे प्रसिद्ध अन्वेषक का बस एक अंश मात्र था।

तीसरी यात्रा को अंततः Captain Charles Clerke ने पूरा किया, जिन्होंने Cook की मृत्यु के बाद कमान संभाली — हालाँकि वे खुद भी तपेदिक से गंभीर रूप से बीमार थे। Clerke ने Bering Strait के रास्ते Northwest Passage खोजने का दूसरा प्रयास किया, लेकिन बर्फ ने उन्हें एक बार फिर वापस लौटने पर मजबूर कर दिया। घर वापसी की यात्रा के दौरान ही वे अपनी बीमारी से चल बसे, और कमान John Gore को सौंप दी गई, जो जहाज़ों को सुरक्षित रूप से ब्रिटेन वापस ले आए। इस यात्रा की भौगोलिक उपलब्धियाँ अपने आप में काफी महत्वपूर्ण थीं, लेकिन Cook की मृत्यु की परिस्थितियों ने उन पर छाया डाल दी — यही घटना पूरे अभियान की सार्वजनिक स्मृति में सबसे केंद्रीय प्रसंग बनकर रह गई।

नौवहन और मानचित्रण की उपलब्धियाँ

Cook ने एक नाविक और मानचित्रकार के रूप में जो कुछ हासिल किया, उसे समझने के लिए यह जानना ज़रूरी है कि जब उन्होंने अपना करियर शुरू किया था, तब भौगोलिक ज्ञान की स्थिति क्या थी। अठारहवीं सदी के मध्य तक दुनिया के प्रमुख भूभागों की रूपरेखा तो सामान्यतः ज्ञात हो चुकी थी, लेकिन उपलब्ध नक्शों की सटीकता में ज़बर्दस्त अंतर था, और बड़े-बड़े इलाके या तो बिल्कुल खाली थे या महज़ अटकलों से भरे हुए। प्रशांत महासागर तो विशेष रूप से एक विशाल अज्ञात भूभाग था — तीन करोड़ वर्गमील पानी में बिखरे उसके द्वीप, बड़े पैमाने पर बिना सर्वेक्षण के तट, और केवल सामान्य शब्दों में समझी गई धाराएँ और हवाएँ। दक्षिणी गोलार्ध में चालीसवें अक्षांश के नीचे का इलाका लगभग पूरी तरह अनचार्टेड था। अमेरिका का उत्तरी प्रशांत तट केवल धुंधली-सी रूपरेखा में जाना जाता था। न्यूज़ीलैंड की एक बार आंशिक और अस्पष्ट यात्रा हुई थी। पूर्वी ऑस्ट्रेलिया तो कभी देखा ही नहीं गया था।

Cook ने यह सब बदल दिया। अपनी तीन यात्राओं के दौरान उन्होंने दुनिया के सटीक भौगोलिक ज्ञान में जितना योगदान दिया, उतना इतिहास में किसी और व्यक्ति ने नहीं किया — न पहले, न बाद में। न्यूज़ीलैंड के उनके नक्शे इतने सटीक थे कि उनका उपयोग नाविक उन्नीसवीं सदी के काफी समय तक करते रहे। पूर्वी ऑस्ट्रेलियाई तट का उनका सर्वेक्षण उस भूभाग के बारे में बाद के समस्त यूरोपीय ज्ञान की नींव बना। प्रशांत द्वीप समूहों के उनके नक्शे — जो एक ऐसी व्यवस्थित सूक्ष्मता के साथ तैयार किए गए थे जिसके करीब कोई पूर्ववर्ती यात्री भी नहीं आया था — ने नाविकों को उन जलमार्गों के लिए भरोसेमंद मार्गदर्शन दिया जिन पर पहले केवल अनुमान के आधार पर चला जाता था। अमेरिका के उत्तरी प्रशांत तट — Oregon से Bering Strait तक — के उनके सर्वेक्षण उस तटरेखा के पहले व्यवस्थित अभिलेख थे, और कई वर्षों तक वे ही प्रामाणिक माने जाते रहे।

Cook के नक्शों को असाधारण बनाने वाली बात केवल उनका विस्तार नहीं, बल्कि उनकी सटीकता थी। पहली यात्रा में lunar distance की गणनाओं के कुशल उपयोग से और बाद की यात्राओं में chronometer की रीडिंग से हासिल किए गए उनके longitude निर्धारणों की परिशुद्धता उस युग के मानकों के हिसाब से उल्लेखनीय थी। तटरेखाओं, द्वीपों और बंदरगाहों को उन्होंने जो स्थान निर्धारित किए, बाद के सर्वेक्षणों ने लगातार यह साबित किया कि वे सत्य के असाधारण रूप से निकट थे। यह सब उन्होंने गणितीय कौशल, सावधानीपूर्ण उपकरण-उपयोग, और माप के उस सहज बोध के संयोजन से हासिल किया जिसे केवल कलात्मक ही कहा जा सकता है।

तटीय सर्वेक्षण की Cook की पद्धति अपने आप में मानचित्र-निर्माण की परंपरा में एक महत्वपूर्ण योगदान थी। दूर से तट की सामान्य रूपरेखा मात्र दर्ज करने की बजाय वे व्यवस्थित रूप से तट के करीब काम करते थे — बार-बार गहराई नापते, तटीय विशेषताओं के आपसी संबंध देखते, और जब भी मौसम अनुकूल होता, खगोलीय अवलोकनों से अपनी स्थितियों की जाँच करते। वे जानते थे कि एक नक्शा जो किसी चट्टान की स्थिति या किसी जलमार्ग की गहराई को थोड़ा भी गलत दिखाए, वह जहाज़ों को तबाही की ओर ले जा सकता है। इसीलिए वे इस काम में जो कर्तव्यनिष्ठा लाते थे, वह पेशेवर गर्व और उन लोगों के जीवन के प्रति वास्तविक चिंता — दोनों को एक साथ दर्शाती थी, जो आगे चलकर उनके नक्शों का उपयोग करने वाले थे।

शुक्र के पारगमन (Transit of Venus) के अवलोकन, भले ही अंततः "ब्लैक ड्रॉप इफेक्ट" के कारण अपेक्षा से कम सटीक रहे, फिर भी व्यापक अर्थों में मानचित्र-निर्माण के क्षेत्र में एक महत्वपूर्ण योगदान थे। पृथ्वी से सूर्य की दूरी निर्धारित करना सौरमंडल के पैमाने को अंशांकित करने के लिए आवश्यक था, जो बदले में खगोलीय नेविगेशन में प्रयुक्त चंद्र-गति की तालिकाओं की सटीकता के लिए अपरिहार्य था। Cook की इन अवलोकनों में भूमिका — चाहे एक आयोजक और कमांडर के रूप में जिसने इन अवलोकनों को संभव बनाया, या स्वयं अवलोकन कार्य में एक भागीदार के रूप में — उन्हें उस व्यापक प्रयास से जोड़ती थी जिसका उद्देश्य वह गणितीय ढाँचा स्थापित करना था जिस पर सटीक नेविगेशन निर्भर करता था।

दूसरी यात्रा में दक्षिणी बर्फ को भेदने की नेविगेशन संबंधी उपलब्धि अपने नकारात्मक पहलुओं में उतनी ही महत्वपूर्ण थी जितनी सकारात्मक पहलुओं में। दक्षिणी गोलार्ध में किसी भी पूर्ववर्ती नाविक से अधिक अक्षांशों तक जाकर, और वहाँ केवल बर्फ और समुद्र पाकर, Cook ने प्रभावी रूप से दक्षिणी गोलार्ध का मानसिक नक्शा नए सिरे से खींचा। उन्होंने यह स्थापित किया कि यदि कोई दक्षिणी महाद्वीप अस्तित्व में था, तो वह स्थायी बर्फ में जमा हुआ था और नेविगेशन के लिए अगम्य था। यह नकारात्मक खोज समुद्री व्यापार और भविष्य के अभियानों की योजना के लिए उतनी ही महत्वपूर्ण थी जितनी कोई भी सकारात्मक खोज होती।

दूसरी यात्रा में Cook का समुद्री क्रोनोमीटर के साथ कार्य संभवतः नेविगेशन की कला में उनका सबसे व्यावहारिक रूप से महत्वपूर्ण योगदान था। क्रोनोमीटर, जिसे घड़ीसाज़ John Harrison ने दशकों के परिश्रम के बाद विकसित किया था, ने सिद्धांत रूप में समुद्र में देशांतर निर्धारित करने की समस्या हल कर दी थी, परंतु इसे व्यवहार में परखा जाना आवश्यक था — यह दिखाया जाना ज़रूरी था कि यह वास्तविक एक लंबी समुद्री यात्रा के दौरान असली समुद्री परिस्थितियों में काम करता है। Cook के उत्साहपूर्ण परीक्षण और क्रोनोमीटर के समर्थन को, जो दूसरी यात्रा के वृत्तांत में प्रकाशित हुआ, अत्यधिक महत्ता मिली। वे दुनिया के सबसे सम्मानित नाविक थे, और उनकी आत्मविश्वासपूर्ण अनुशंसा कि क्रोनोमीटर समुद्र में देशांतर निर्धारित करने के लिए एक विश्वसनीय और व्यावहारिक उपकरण है, इसे अपनाए जाने में निर्णायक सिद्ध हुई। क्रोनोमीटर ने बाद में नेविगेशन को पूरी तरह बदल दिया और देशांतर को लेकर उस अनिश्चितता को समाप्त कर दिया जो इतनी सारी समुद्री आपदाओं का कारण रही थी।

Cook की तीसरी यात्रा ने उत्तरी प्रशांत महासागर के तट पर स्थित उत्तरी अमेरिका के तटवर्ती क्षेत्रों को उन प्रदेशों की सूची में जोड़ा जिन्हें उन्होंने व्यवस्थित रूप से सर्वेक्षित और चार्ट किया था। ओरेगॉन से बेरिंग जलडमरूमध्य तक का तट यूरोपीय मानचित्रकारों के लिए बिल्कुल अज्ञात था — या यूँ कहें कि अत्यंत अस्पष्ट रूप से ज्ञात था — जब Cook ने अपना सर्वेक्षण शुरू किया। उन्होंने जिन परिस्थितियों में यह कार्य किया उन्हें देखते हुए उल्लेखनीय सटीकता के साथ इसका मानचित्र बनाया, ऐसे चार्ट तैयार किए जिनका उपयोग बाद के नाविकों और व्यापारियों ने दशकों तक किया। इस सर्वेक्षण में अलास्का का तट, अलास्का प्रायद्वीप, एलेउशियन द्वीपसमूह और स्वयं बेरिंग जलडमरूमध्य शामिल था — एक विशाल और जटिल भूभाग जिसके भौगोलिक स्वरूप को Cook व्यवस्थित रूप से समझने और दर्ज करने वाले पहले यूरोपीय थे।

Cook की तीन यात्राओं की संचित मानचित्रकारी उपलब्धि रूपांतरकारी थी। उनकी पहली यात्रा से पहले, प्रशांत महासागर काफ़ी हद तक अज्ञात था। उनकी तीसरी यात्रा के बाद, इसकी प्रमुख विशेषताओं का सर्वेक्षण और मानचित्रण उस व्यक्ति ने कर दिया था जो मानचित्रकारी कला के सबसे कुशल प्रतिपादकों में से एक थे जो आज तक जिए हैं। Cook द्वारा बनाए गए प्रशांत महासागर के चार्ट केवल तकनीकी रूप से सटीक नहीं थे; वे व्यवस्थित बौद्धिकता की कृतियाँ थीं, ठोस ज्यामितीय सिद्धांतों पर आधारित, कई स्वतंत्र मापों से जाँची-परखी, और ऐसे रूप में प्रस्तुत जिसे किसी भी अनुभव के नाविक आत्मविश्वास के साथ उपयोग कर सकते थे। उन्होंने मानचित्रकारी परिशुद्धता का एक ऐसा मानक स्थापित किया जो पीढ़ियों तक नौसैनिक सर्वेक्षण के लिए कसौटी बना रहा।

वैज्ञानिक योगदान

Cook स्वयं पेशेवर अर्थ में प्राकृतिक वैज्ञानिक नहीं थे, लेकिन उनकी यात्राएं अठारहवीं सदी के सबसे उपयोगी वैज्ञानिक अभियानों में से एक थीं, और विज्ञान को संभव बनाने और उसे आगे बढ़ाने में उनकी भूमिका महज प्रशासनिक स्तर से कहीं अधिक थी। वे वास्तव में प्राकृतिक दुनिया के प्रति बौद्धिक जिज्ञासा रखते थे, व्यवस्थित अवलोकन और सटीक अभिलेखन के महत्व को समझते थे, और उन्होंने अपने जहाजों पर ऐसे हालात बनाए जिनमें वैज्ञानिक प्रभावी ढंग से काम कर सकें। उनकी तीन यात्राओं की वैज्ञानिक उपलब्धियों ने प्राकृतिक इतिहास, नृविज्ञान, खगोलविज्ञान और समुद्रविज्ञान को पूरी तरह बदल दिया।

पहली यात्रा का वनस्पति-संबंधी कार्य, जो मुख्य रूप से Joseph Banks और Daniel Solander द्वारा किया गया, पादप नमूनों और चित्रों का एक विशाल संग्रह तैयार करने में सफल रहा, जिसमें सैकड़ों ऐसी प्रजातियां शामिल थीं जो यूरोपीय विज्ञान के लिए पहले से अज्ञात थीं। Banks अपने साथ दो पेशेवर वनस्पति चित्रकार — Sydney Parkinson और Alexander Buchan — लेकर आए थे, जिनके द्वारा यात्रा के दौरान संग्रहित पौधों के बारीक और सूक्ष्म चित्र असाधारण वैज्ञानिक महत्व के थे। पहली यात्रा के दौरान जुटाया गया संग्रह अंततः हजारों नमूनों तक पहुंच गया, जिनमें ब्राज़ील, Tierra del Fuego, ताहिती, न्यूजीलैंड और ऑस्ट्रेलिया के पौधे शामिल थे, और Kew Gardens तथा ब्रिटिश म्यूज़ियम में इन सबको संसाधित और वर्गीकृत करने में दशकों का काम लगा।

प्राकृतिक इतिहास का काम वनस्पति विज्ञान से कहीं आगे तक फैला हुआ था। यात्राओं के दौरान किए गए प्राणिशास्त्रीय संग्रहों में ऐसे जानवर भी शामिल थे जो विज्ञान के लिए पूरी तरह अज्ञात थे — इनमें कंगारू भी था, जिसे ऑस्ट्रेलियाई तट पर Endeavour के प्रवास के दौरान देखा और रेखाचित्रों में उकेरा गया था, और जब यह यूरोप की जानकारी में आया तो काफी उत्साह और विवाद का विषय बना। प्रशांत महासागर का समुद्री जीवन, दक्षिणी महासागर के पक्षी, प्रशांत द्वीपों और ऑस्ट्रेलिया के कीड़े-मकोड़े और सरीसृप, तथा उत्तरी प्रशांत तट के स्तनधारी जीव — इन सभी ने उन संग्रहों में योगदान दिया जिन्होंने प्राकृतिक दुनिया की विविधता के बारे में यूरोप की समझ को नया रूप दिया।

दूसरी यात्रा ने भी अपनी खुद की महत्वपूर्ण वैज्ञानिक उपलब्धियां दीं, विशेष रूप से Forster परिवार के कार्य के संदर्भ में। Johann Reinhold Forster एक सूक्ष्म दृष्टि वाले, यद्यपि कठिन स्वभाव के व्यक्ति थे, और प्राकृतिक दुनिया, संस्कृतियों और भ्रमण किए गए स्थानों की भौगोलिक बनावट पर उनके अवलोकन वास्तविक वैज्ञानिक मूल्य के थे। उनके पुत्र Georg Forster, जो यात्रा के दौरान अपनी बीसवीं सदी के शुरुआती वर्षों में थे, एक प्रतिभाशाली लेखक और वैज्ञानिक साबित हुए, और आधिकारिक वृत्तांत से अलग स्वतंत्र रूप से प्रकाशित उनका यात्रा विवरण अठारहवीं सदी की सबसे उत्कृष्ट अन्वेषण-लेखन रचनाओं में से एक है।

इन यात्राओं के सबसे महत्वपूर्ण वैज्ञानिक योगदानों में मानव संस्कृतियों और समाजों पर किया गया कार्य था। यूरोपीय विज्ञान के लिए, प्रशांत महासागर के लोग सामाजिक और सांस्कृतिक विकास का एक उल्लेखनीय प्राकृतिक प्रयोग प्रस्तुत करते थे। वे अपने द्वीपों पर पुरानी दुनिया की महान सभ्यताओं के संपर्क के बिना पहुंचे थे, और अलगाव में अपनी सामाजिक संरचनाएं, तकनीकें, धर्म और कलाएं विकसित की थीं — उनके समाज मानव संस्कृति को उन रूपों में देखने का अवसर देते थे जो यूरोपीय विज्ञान के पूर्व अनुभव से बिल्कुल भिन्न थे। Cook और उनके साथ यात्रा करने वाले वैज्ञानिकों ने इन संस्कृतियों को अलग-अलग स्तर की सटीकता और सहानुभूति के साथ देखा, और उनके विवरण, यद्यपि अनिवार्य रूप से यूरोपीय धारणाओं और पूर्वाग्रहों से रंगे हुए थे, फिर भी कई प्रशांत समाजों का पहला व्यवस्थित नृजातीय दस्तावेज़ीकरण बने।

चिकित्सा विज्ञान में, विशेष रूप से स्कर्वी की रोकथाम में Cook के अपने योगदान को रॉयल सोसाइटी द्वारा Copley Medal से सम्मानित कर औपचारिक रूप से मान्यता दी गई। विटामिन C की कमी से होने वाला स्कर्वी लंबी समुद्री यात्राओं का सबसे बड़ा काल था — तूफानों, चट्टानों या दुश्मन के हमलों से भी अधिक घातक — और इसने नौकायन के पूरे युग में यात्राओं की अवधि को सीमित किया तथा दल-बलों को तबाह किया। Cook ने आहार संबंधी उपायों, स्वच्छता पर दृढ़ आग्रह और जब भी संभव हो ताजे भोजन के उपयोग के संयोजन से अपने जहाजों में स्कर्वी को लगभग पूरी तरह समाप्त कर दिया — यह एक व्यावहारिक उपलब्धि थी जिसने अनगिनत जीवन बचाए। वे इस प्रक्रिया की जैव रसायन नहीं समझते थे, लेकिन उन्होंने आहार और स्वास्थ्य के बीच व्यावहारिक संबंध को भली-भाँति समझा था और उन्होंने स्कर्वी-रोधी खाद्य पदार्थों के सेवन को उसी अधिकार के साथ लागू किया जो वे अपने जहाजों पर हर दूसरी बात में दिखाते थे।

Cook द्वारा अपनाए गए स्कर्वी-रोधी उपायों में से एक था अपने जहाजों को नियमित रूप से सौकरक्राट, पोर्टेबल सूप, माल्ट और खट्टे फलों के उत्पादों से सुसज्जित रखना, साथ ही हर बंदरगाह और द्वीप पर रुकने के दौरान ताजे फल और सब्जियाँ खोजकर खाने की स्थायी नीति बनाए रखना। उन्होंने जहाज पर स्वच्छता के ऐसे मानक बनाए रखे जो उस युग के लिए असामान्य थे — निचले डेक की नियमित हवाबाजी और धुलाई तथा अपने दल के व्यक्तिगत स्वच्छता पर ध्यान देने की माँग करते हुए। यह संदिग्ध है कि क्या उन्होंने आधुनिक जैव रासायनिक दृष्टि से स्वच्छता और रोग-निवारण के बीच के संबंध को पूरी तरह समझा था, लेकिन उन्होंने अनुभव के आधार पर यह जान लिया था कि जो दल स्वच्छ और पोषित रहता है, वह स्वस्थ भी रहता है, और इस समझ को उन्होंने पूर्ण निरंतरता के साथ लागू किया।

यात्राओं का खगोलीय कार्य शुक्र के पारगमन के अवलोकन से कहीं आगे तक फैला था। Cook और उनके वैज्ञानिक सहयोगियों ने तीनों यात्राओं के दौरान चंद्र दूरियों, तारकीय स्थितियों और मौसम संबंधी घटनाओं के अवलोकन किए, जिससे उस काल के खगोलीय उद्यमों को वास्तविक मूल्य का डेटा प्राप्त हुआ। Cook के अपने सावधानीपूर्ण देशांतर निर्धारण, जो तीनों यात्राओं के दौरान किए गए और बाद के सर्वेक्षणों द्वारा लगातार सत्यापित हुए, प्रशांत महासागर की गणितीय भूगोल में एक महत्त्वपूर्ण योगदान के रूप में सामने आए।

यात्राओं के दौरान समुद्र विज्ञान संबंधी अवलोकन भी किए गए, जिनमें गहराई पर समुद्री तापमान के मापन, धाराओं और हवाओं के अवलोकन तथा विभिन्न स्थानों पर ज्वार-भाटे के व्यवहार के अभिलेख शामिल थे। इन अवलोकनों ने धीरे-धीरे विकसित हो रहे समुद्र विज्ञान में योगदान दिया, हालाँकि एकत्रित डेटा के पूर्ण विश्लेषण के लिए यात्राओं की समाप्ति के बाद दशकों का काम आवश्यक था। Cook के नौवहन अभिलेखों में विश्व के विभिन्न बिंदुओं पर कम्पास के चुंबकीय विचलन की विस्तृत जानकारी भी थी — ऐसा डेटा जिसने पृथ्वी के चुंबकीय क्षेत्र और नौवहन के लिए उसके व्यावहारिक महत्त्व की समझ में योगदान दिया।

यात्राओं का नृवंशविज्ञान और भाषाई कार्य, हालाँकि संक्षिप्त संपर्क की परिस्थितियों और पर्यवेक्षकों की सांस्कृतिक मान्यताओं द्वारा अनिवार्य रूप से सीमित था, फिर भी वास्तविक ऐतिहासिक महत्त्व के अभिलेख तैयार करता रहा। Banks, Forsters और Cook के दल के अन्य सदस्यों द्वारा संकलित प्रशांत भाषाओं की शब्दावलियाँ, कई मामलों में उन भाषाओं के सबसे प्रारंभिक व्यवस्थित अभिलेख थीं जो बाद में यूरोपीय संपर्क से काफी हद तक बदल गईं और कुछ मामलों में लगभग या पूरी तरह लुप्त हो गईं। Cook की यात्राओं के दौरान दर्ज हवाई, माओरी, ताहीती, टोंगन और अनेक अन्य प्रशांत संस्कृतियों के विवरण, चाहे कितने भी अपूर्ण हों, पॉलिनेशियाई सभ्यता के इतिहास और विविधता को समझने में लगे नृविज्ञानियों और भाषाविदों के लिए अमूल्य तुलनात्मक डेटा उपलब्ध कराते रहे हैं।

तीसरी यात्रा के वैज्ञानिक योगदान में उत्तरी प्रशांत तट के प्राकृतिक इतिहास का विस्तृत अध्ययन शामिल था, साथ ही उत्तरी प्रशांत के अनेक पक्षियों, समुद्री स्तनधारियों और पौधों के पहले यूरोपीय अभिलेख भी थे, और क्रमबद्ध मौसम संबंधी अवलोकन थे जिन्होंने उत्तरी प्रशांत की जलवायु को समझने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। बेरिंग जलडमरूमध्य और आर्कटिक महासागर की बर्फीली परिस्थितियों के यात्रा-अभिलेख, आर्कटिक पर्यावरण के पहले व्यवस्थित यूरोपीय अवलोकनों में से थे और इन्होंने वह आधारभूत डेटा उपलब्ध कराया जिससे बाद के बदलावों को मापा जा सका।

स्थानीय मूल निवासियों के साथ संबंध

शायद Cook की विरासत का कोई भी पहलू उनके यात्राओं के दौरान मिले मूल निवासियों के साथ उनके संबंधों जितना जटिल, विवादास्पद या ईमानदारी से विचार किए जाने योग्य नहीं है। इन मुठभेड़ों का इतिहास कोई सीधी-सादी कहानी नहीं है, और इसे न तो उन लोगों द्वारा पूरी तरह बयान किया जा सकता है जो Cook को प्रबुद्ध सांस्कृतिक संवाद के आदर्श के रूप में देखते हैं, और न ही उन लोगों द्वारा जो उन्हें औपनिवेशिक विनाश के अग्रदूत के रूप में निंदा करते हैं। सच्चाई दोनों में से किसी भी कहानी की तुलना में कहीं अधिक सूक्ष्म, कहीं अधिक दुखद और कहीं अधिक मानवीय है।

Cook जिन लोगों से मिले, उनके प्रति उन्होंने सच्ची जिज्ञासा और एक हद तक सम्मान का भाव रखा, जो उन्हें अपने समकालीनों से अलग करता था। वे मिलने वाले लोगों की मानवता के प्रति उदासीन नहीं थे, और उनकी डायरियाँ यह दर्शाती हैं कि वे उनके रीति-रिवाजों, आस्थाओं और सामाजिक संगठन को समझने का निरंतर प्रयास करते थे, भले ही वह समझ उनकी अपनी सांस्कृतिक मान्यताओं के कारण आंशिक या विकृत रही हो। उन्होंने बार-बार अपने दल को निर्देश दिए कि वे मूल निवासियों के साथ न्याय और सम्मान से पेश आएँ, ईमानदारी से व्यापार करें, अनावश्यक हिंसा से बचें और स्थानीय लोगों के अपनी भूमि और संपत्ति पर अधिकार को स्वीकार करें। ये केवल दिखावटी निर्देश नहीं थे; वे वास्तविक मूल्यों की अभिव्यक्ति थे, और उन्होंने उन्हें इतनी नियमितता से लागू किया कि उनका दल अनुभव से जानता था कि वे इस बारे में गंभीर हैं।

साथ ही, Cook अपने युग और अपने देश के प्रतिनिधि थे, और वे यूरोपीय सभ्यता की श्रेष्ठता, खोज के अधिकारों और ब्रिटिश ताज के लिए भूमि पर दावे की वैधता जैसी धारणाओं के दायरे में काम करते थे — जिसके कारण मूल निवासियों के साथ किसी न किसी हद तक टकराव लगभग अपरिहार्य था। विभिन्न क्षेत्रों पर ब्रिटेन के नाम पर अधिकार जमाना, झंडे गाड़ना और उत्कीर्ण निशान छोड़ना — ये सब ऐसे कार्य थे जो उन भूमियों पर संप्रभुता का दावा व्यक्त करते थे, जिनके मौजूदा निवासियों ने ऐसी कोई सहमति नहीं दी थी और यदि उन्हें पता होता कि क्या दावा किया जा रहा है, तो वे कभी देते भी नहीं। यह तथ्य कि Cook के व्यक्तिगत इरादे अपेक्षाकृत निर्दोष थे, दीर्घकाल में इन कार्यों के व्यावहारिक महत्व को नहीं बदलता।

Cook के सबसे अधिक मिलने वाले पॉलिनेशियाई लोगों — ताहीती वासियों, माओरी, हवाईवासियों और प्रशांत महासागर के विभिन्न द्वीपीय समुदायों — के साथ उनके संबंध एक ऐसे बार-बार दोहराए जाने वाले स्वरूप से परिभाषित थे, जो इस मुठभेड़ की बुनियादी असमानता को दर्शाता था। यूरोपीय लोगों के पास लोहे और अन्य व्यापारिक वस्तुएँ थीं जिन्हें प्रशांत के लोग बेहद मूल्यवान मानते थे। उनके पास आग्नेयास्त्र थे जो उन संघर्षों को पल भर में समाप्त कर सकते थे जिन्हें प्रशांत के हथियार केवल लंबा खींच सकते थे। उनके पास ऐसे जहाज थे जो कहीं से भी प्रकट हो सकते थे और अपनी इच्छा से चले जा सकते थे। शक्ति की यह असमानता हर बातचीत को आकार देती थी, चाहे वह उस क्षण में कितनी भी मैत्रीपूर्ण या आपसी संतोषजनक क्यों न दिखती हो।

न्यूज़ीलैंड के माओरी लोगों के साथ Cook के मुठभेड़ हिंसा और संघर्ष को संभालने के मामले में सबसे लगातार चुनौतीपूर्ण साबित हुए। माओरी योद्धा थे, एक ऐसे समाज में संगठित जिसमें सैन्य कौशल और क्षेत्रीय रक्षा केंद्रीय मूल्य थे, और वे केवल इसलिए अजनबियों के सामने झुकने को तैयार नहीं थे क्योंकि उन अजनबियों के पास बेहतर तकनीक थी। पहली यात्रा के दौरान Cook के दल के साथ मुठभेड़ों में कई माओरी मारे गए, और इन मौतों से संबंधित Cook की डायरी की प्रविष्टियाँ एक ऐसे इंसान को दर्शाती हैं जो वास्तव में हुई घटनाओं से परेशान था, और हिंसा को गलतफहमी तथा किसी स्पष्ट खतरे का सामना करने वाले सशस्त्र पुरुषों की दुर्भाग्यपूर्ण स्वाभाविक प्रतिक्रिया के रूप में देख रहा था। चाहे यह व्याख्या उचित थी या नहीं, इसमें इन हिंसक मुठभेड़ों की गतिशीलता को समझने का एक वास्तविक प्रयास झलकता था, न कि माओरी को केवल ऐसे बर्बर लोगों के रूप में खारिज करना जिन्हें उचित दंड मिला।

दूसरी यात्रा तक, Cook ने माओरी के साथ मुठभेड़ के तनाव को संभालने के लिए अधिक प्रभावी रणनीतियाँ विकसित कर ली थीं, जिसमें उपहारों के आदान-प्रदान, धैर्य और विशेष व्यक्तियों को वार्ताकार और मध्यस्थ के रूप में विकसित करने पर अधिक निर्भरता थी। यह संबंध कभी भी पूरी तरह स्थिर नहीं रहा, और दूसरी यात्रा के दौरान Adventure के नाव दल के नरसंहार ने यह दिखा दिया कि यह कितनी जल्दी तबाही में बदल सकता था। लेकिन माओरी के साथ मुठभेड़ को संभालने का Cook का समग्र रिकॉर्ड उनके कई समकालीनों से बेहतर था।

ऑस्ट्रेलिया के आदिवासी लोगों के साथ Cook की मुठभेड़ें संक्षिप्त थीं और कई मायनों में सार्थक संवाद स्थापित करने में और भी कम सफल रहीं। ऑस्ट्रेलिया के पूर्वी तट के आदिवासी लोगों ने यूरोपीय लोगों या उनके व्यापारिक सामान में बहुत कम रुचि दिखाई, एक ऐसी प्रतिक्रिया जिसने Cook को हैरान कर दिया और जिसे वे अपने उपलब्ध वैचारिक ढाँचे के भीतर आसानी से समझ नहीं पाए। आदिवासी जीवन के बारे में उनकी डायरी में उनके विचार अवलोकन और गलतफहमी का एक विशिष्ट मिश्रण दर्शाते हैं — यूरोपीय भौतिक वस्तुओं की अनुपस्थिति पर ध्यान देते हुए, लेकिन उनके स्थान पर विकसित हुई संस्कृति की समृद्धि और जटिलता की सराहना करने में असमर्थ रहे।

Botany Bay में और फिर Cape York की नोक के पास Possession Island पर Cook का अधिकार-ग्रहण समारोह, जिसमें उन्होंने ऑस्ट्रेलिया के पूरे पूर्वी तट पर ब्रिटिश क्राउन का दावा किया, उनके करियर के सबसे महत्वपूर्ण कार्यों में से एक था — इसके तात्कालिक व्यावहारिक प्रभाव के कारण नहीं, बल्कि इससे आगे जो हुआ उसके कारण। Cook की यात्रा के दो दशक से भी कम समय बाद Botany Bay में ब्रिटिश दंड उपनिवेश की स्थापना, और उसके बाद ऑस्ट्रेलिया का उपनिवेशीकरण, ऑस्ट्रेलिया के आदिवासी लोगों के लिए हर आयाम में — जनसांख्यिकीय, सांस्कृतिक, आर्थिक और आध्यात्मिक — विनाशकारी साबित हुआ। यह Cook का इरादा नहीं था, और उनकी मृत्यु के बाद दूसरों द्वारा लिए गए निर्णयों पर निर्भर घटनाक्रमों के लिए उन्हें व्यक्तिगत रूप से जिम्मेदार ठहराना कालविरोधी होगा। लेकिन उनकी यात्राओं ने उन घटनाक्रमों को संभव और किसी हद तक अपरिहार्य बना दिया, और उस संबंध को ईमानदारी से नज़रअंदाज़ नहीं किया जा सकता।

पॉलिनेशियाई लोगों की परिष्कृत समुद्री संस्कृति की Cook ने वास्तव में सराहना की और उसका सम्मान किया। वे उस दीर्घ-दूरी के नेविगेशन के प्रमाण से चकित थे जो प्रशांत द्वीपवासियों द्वारा दूरदराज के द्वीपों में बसावट से प्रमाणित होता था, और उन्होंने यह समझने की कोशिश की कि उन उपकरणों और नक्शों के बिना ऐसा नेविगेशन कैसे संभव हो सकता था जिन्हें यूरोपीय नाविक आवश्यक मानते थे। Tupaia, ताहीती के पुजारी और नाविक जो पहली यात्रा में शामिल हुए, पॉलिनेशियाई नेविगेशन ज्ञान की परिष्कृतता का एक जीवंत प्रमाण थे, और Cook की डायरियाँ Tupaia की क्षमताओं और ज्ञान के प्रति वास्तविक प्रशंसा को दर्शाती हैं। Cook और Tupaia के बीच का संबंध पहली यात्रा के सबसे दिलचस्प मानवीय जुड़ावों में से एक था, हालाँकि Batavia में Tupaia की मृत्यु ने इसे असमय समाप्त कर दिया।

Cook के जीवन के अंत में हवाई में जो घटना घटी, वह उनके पूरे करियर के किसी भी अन्य प्रसंग की तुलना में सबसे अधिक और लगातार ऐतिहासिक बहस का विषय बनी है। यह सवाल कि क्या हवाईवासियों ने Cook को वास्तव में देवता Lono के रूप में पहचाना था, विद्वानों के बीच दोनों पक्षों की ओर से जोरदार तरीके से विवादित रहा है, और यह बहस आज भी इतिहासकारों की उस सोच को आकार देती है जो हवाई की उस मुठभेड़ और उससे उठने वाले सांस्कृतिक समझ के गहरे सवालों से जुड़ी है। जो बात स्पष्ट है, वह यह है कि Kealakekua Bay पर Cook को मारने वाले हवाईवासी महज किसी अतार्किक हिंसा या गलतफहमी के कारण एक हितैषी को नष्ट नहीं कर रहे थे। वे व्यवहार के उस स्वरूप के प्रति प्रतिक्रिया दे रहे थे, जो दो यात्राओं के दौरान क्रमशः अधिक खतरनाक होता गया था और जिसने हवाईवासियों की दृष्टि से उचित आचरण की सीमाओं का उल्लंघन किया था — ठीक उसी तरह जैसे यूरोपीय मानकों की दृष्टि से भी उन सीमाओं का उल्लंघन हुआ था।

यह सवाल कि Cook के मूल निवासी जनों के साथ संबंधों का मूल्यांकन कैसे किया जाए, आखिरकार इस व्यापक सवाल से अलग नहीं किया जा सकता कि उनकी यात्राओं का उन लोगों के लिए दीर्घकाल में क्या अर्थ रहा। Cook के जहाजों और किसी प्रशांत द्वीप समुदाय के बीच हुई सबसे सौम्य और सम्मानजनक मुठभेड़ भी ऐसी मुठभेड़ थी, जिसके अंतिम परिणामों में बीमारियों का प्रसार, व्यापारिक वस्तुओं के आगमन से स्थानीय अर्थव्यवस्थाओं में उथल-पुथल, और वह मानचित्रण एवं दस्तावेज़ीकरण शामिल था जिसने इस क्षेत्र में बाद के औपनिवेशिक प्रवेश को कहीं अधिक आसान बना दिया। Cook ने इन परिणामों का इरादा नहीं किया था, और कई मामलों में उन्होंने स्पष्ट रूप से उस नुकसान को कम करने के कदम भी उठाए जो वे जानते थे कि उनकी उपस्थिति से हो रहा है। लेकिन इरादा और परिणाम अलग-अलग चीज़ें होती हैं, और उनकी यात्राओं के परिणाम उन लोगों के लिए जिनसे वे मिले, अधिकांश मामलों में अंततः विनाशकारी साबित हुए।

विरासत और ऐतिहासिक प्रभाव

James Cook की विरासत अन्वेषण के इतिहास में सबसे अधिक विवादित विरासतों में से एक है, और उनके जीवन और कार्य का मूल्यांकन कैसे किया जाए, इस पर बहस हाल के दशकों में घटने के बजाय और तेज़ हुई है। उनकी मृत्यु के बाद के एक सदी तक उन्हें लगभग सार्वभौमिक रूप से अन्वेषण के नायक के रूप में सराहा गया — एक ऐसे व्यक्ति के रूप में जिनकी वैज्ञानिक उपलब्धियाँ, नौपरिचालन की प्रतिभा, और मूल निवासियों के साथ व्यवहार में अपेक्षाकृत मानवीयता ने उन्हें इस बात का आदर्श बना दिया कि एक खोजकर्ता कैसा होना चाहिए। ब्रिटेन, ऑस्ट्रेलिया, न्यूज़ीलैंड और हवाई में उनके सम्मान में मूर्तियाँ स्थापित की गईं। प्रशांत महासागर में फैले पहाड़ों, खाड़ियों, जलडमरूमध्यों और द्वीपों को उनका नाम दिया गया। उनकी डायरियाँ बार-बार छापी गईं और व्यापक रूप से पढ़ी गईं। वे ऐसी जीवनियों के विषय बने जो उनके साथ संत-चरित्र लेखन की सीमा को छूती श्रद्धा से पेश आईं।

बीसवीं सदी एक अधिक आलोचनात्मक दृष्टिकोण लेकर आई, और बीसवीं सदी के उत्तरार्ध और इक्कीसवीं सदी के आरंभ में वह आलोचनात्मक दृष्टिकोण कुछ और गहरी पड़ताल में और कुछ मायनों में अधिक पीड़ादायक रूप में विकसित हुआ है। प्रशांत क्षेत्र के मूल निवासियों के लिए Cook के जहाजों का आगमन उपनिवेशीकरण, बीमारी, विस्थापन और सांस्कृतिक विनाश की एक ऐसी प्रक्रिया की शुरुआत था जिसने अगली डेढ़ सदी में उनके समाजों को तबाह कर दिया। Cook के दल द्वारा लाई गई बीमारियाँ, या वे बीमारियाँ जो बाद के आगंतुकों के आने पर फैलीं — जिनका आना Cook के नक्शों और डायरियों से संभव हुआ — ने द्वीप की आबादी के बड़े हिस्सों को मार डाला। यूरोपीय बसावट के बाद आई राजनीतिक अधीनता ने मूल निवासियों से उनकी ज़मीन, उनकी स्वायत्तता और कुछ मामलों में उनकी सांस्कृतिक निरंतरता छीन ली। इस दृष्टिकोण से, Cook की यात्राएँ ज्ञानोदय और खोज की कहानी नहीं, बल्कि विनाशकारी उथल-पुथल और क्षति की कहानी हैं।

इस दृष्टिकोण ने उन देशों में Cook को सार्वजनिक रूप से याद किए जाने के तरीके में वास्तविक बदलाव लाए हैं, जो उनकी यात्राओं से सबसे अधिक प्रभावित हुए। न्यूज़ीलैंड में, Cook की विरासत पर बहस मुख्यतः Treaty of Waitangi के ढांचे और Maori-Pakeha सुलह की व्यापक प्रक्रिया के भीतर हुई है, और इसने सार्वजनिक स्मृति के अधिक सूक्ष्म और विवादास्पद स्वरूपों को जन्म दिया है। ऑस्ट्रेलिया में, Aboriginal लोगों के विस्थापन में Cook की भूमिका का सवाल, मान्यता और संधि को लेकर चल रही उस व्यापक राष्ट्रीय बहस से जुड़ गया है जो अभी तक अनसुलझी है। हवाई में, Cook की स्मृति जटिल है — न तो वह केवल उत्सव का विषय है, न ही केवल निंदा का, बल्कि उसे ऐतिहासिक महत्व और निरंतर बनी रहने वाली उभयभावना के मिश्रण के साथ देखा जाता है।

Cook की विरासत पर बहस, अपने सबसे मूलभूत स्तर पर, इस सवाल की बहस है कि ऐतिहासिक व्यक्तित्वों को उन नैतिक मानकों के आधार पर कैसे परखा जाए जो उनके समय में उपलब्ध ही नहीं थे। Cook अठारहवीं सदी के इंसान थे, उसी के मूल्यों से गढ़े हुए और उसी की मान्यताओं के दायरे में काम करने वाले। अपने समय और अपने वर्ग के मानकों के अनुसार, वे अपेक्षाकृत मानवीय और विचारशील व्यक्ति थे। उन्होंने उन लोगों के प्रति, जिनसे वे मिले, अपने अधिकांश समकालीनों से कहीं अधिक संवेदनशीलता दिखाई। उन्होंने जिन संस्कृतियों का दौरा किया, उन्हें समझने और उनका सम्मान करने के लिए वास्तविक प्रयास किए। वे उस हिंसा से व्यथित थे जो इन मुठभेड़ों की एक अपरिहार्य विशेषता थी, और जहाँ तक हो सका, उन्होंने उसे कम करने की कोशिश की। इन सब बातों के बावजूद वे ऐसे व्यक्ति नहीं बन जाते जिन्हें उन लोगों द्वारा सरल रूप से सराहा जा सके जिनके पूर्वजों की दुनिया उनकी यात्राओं ने नष्ट करने में मदद की। लेकिन इससे वे निश्चित रूप से एक अधिक जटिल और अधिक मानवीय व्यक्तित्व बन जाते हैं, जिन्हें न तो शुद्ध प्रशंसा और न ही शुद्ध निंदा पूरी तरह समेट सकती है।

ब्रिटिश साम्राज्य के विस्तार के इतिहास में Cook की यात्राओं की व्यावहारिक विरासत अत्यंत विशाल थी। प्रशांत महासागर के उनके नक्शों ने उस महासागर में ब्रिटिश व्यापारिक और सैन्य विस्तार को बेहद आसान बना दिया। जो भूभाग उन्होंने ताज के लिए दावा किए, वे कालांतर में ऑस्ट्रेलिया और न्यूज़ीलैंड की बसावट वाली उपनिवेश बन गए, जिन्हें आप्रवासन और मूल निवासियों के विस्थापन की उन प्रक्रियाओं के ज़रिए प्रमुखतः ब्रिटिश समाजों में ढाल दिया गया जो Cook की यात्राओं से ही संभव हुई थीं। प्रशांत के व्हेलिंग क्षेत्र, जिनका दोहन Cook की यात्राओं द्वारा उनकी व्यापकता और पहुँच को उजागर किए जाने के तुरंत बाद ही शुरू हो गया था, प्रशांत द्वीपीय समुदायों में यूरोपीय व्यवधान की एक और लहर लेकर आए। चीन व्यापार, जिसे उत्तरी प्रशांत के Cook के नक्शों ने सुगम बनाने में मदद की, ने व्यापारिक ऊर्जाओं को पूर्व की ओर खींचा और इस तरह संपूर्ण प्रशांत बेसिन की राजनीतिक अर्थव्यवस्था को बदल दिया।

विज्ञान के इतिहास में Cook की विरासत, उपनिवेशवाद के इतिहास में उनकी विरासत की तुलना में कुछ कम विवादास्पद है, हालांकि यहाँ भी कुछ जटिलताएँ हैं। उनकी यात्राओं से प्राप्त प्राकृतिक इतिहास के संग्रहों ने जीव-वैज्ञानिक वर्गीकरण के विकास में अत्यधिक योगदान दिया, और वर्गीकरण के उस व्यवस्थित कार्य को समर्थन दिया जो अठारहवीं और उन्नीसवीं सदी के प्राकृतिक विज्ञान का केंद्र था। यात्राओं की नृवंशविज्ञान संबंधी टिप्पणियाँ, भले ही यूरोपीय पूर्वाग्रहों से अनिवार्य रूप से आंशिक और विकृत थीं, प्रशांत संस्कृतियों का एक महत्वपूर्ण प्रारंभिक अभिलेख थीं, जिनमें से कुछ Cook के दौरों के बाद की सदियों में नाटकीय रूप से बदल गईं या पूरी तरह लुप्त हो गईं। यात्राओं के खगोलीय और भूमापन संबंधी कार्य ने पृथ्वी के आयामों और सौरमंडल के पैमाने की अधिक सटीक समझ में योगदान दिया।

मानचित्रकारी के इतिहास में Cook का योगदान निर्विवाद और अत्यंत विशाल है। उन्होंने प्रशांत के नक्शे को पूरी तरह बदल दिया — अटकलों और रिक्त स्थानों की जगह इतने सूक्ष्म और सटीक सर्वेक्षण ला दिए कि बाद के किसी भी सर्वेक्षक को उनमें मूलभूत संशोधन की ज़रूरत नहीं पड़ी। तटीय सर्वेक्षण की उनकी पद्धतियाँ इस पेशे का मानक बन गईं। देशांतर निर्धारण के लिए chronometer के उनके उपयोग ने इसे सार्वभौमिक रूप से अपनाए जाने में मदद की। न्यूज़ीलैंड, ऑस्ट्रेलिया, हवाई और उत्तरी अमेरिका के प्रशांत तट के उनके नक्शे इस बात के स्मारक हैं कि व्यवस्थित, कुशल और कर्तव्यनिष्ठ मानचित्रकारी कार्य क्या हासिल कर सकता है।

बाद के अन्वेषण इतिहास पर Cook का प्रभाव प्रत्यक्ष और व्यापक था। अठारहवीं सदी के अंत और उन्नीसवीं सदी की शुरुआत के हर बड़े प्रशांत अन्वेषक ने उनके नक्शेकदम पर चलते हुए उनके नक्शों का उपयोग किया, उनकी डायरियाँ पढ़ीं, और अपनी उपलब्धियों को उनके मानदंड से मापा। La Perouse, Vancouver, Flinders, d'Entrecasteaux, Bougainville — इन सभी ने Cook की प्राथमिकता को स्वीकार किया और उनकी नींव पर अपना काम खड़ा किया। जब नौकायन का युग भाप के युग में बदला और व्यवस्थित सर्वेक्षण ने महान खोज-यात्राओं की जगह ली, तब भी नए सर्वेक्षणों को अंतर्निहित रूप से उसी मानदंड पर परखा जाता था जो Cook ने स्थापित किया था।

Cook की तीसरी यात्रा की विरासत — विशेष रूप से यह प्रदर्शन कि उनके समय की नौपरिवहन क्षमता के अनुसार उपलब्ध अक्षांशों में उत्तर-पश्चिमी मार्ग व्यावसायिक दृष्टि से अव्यावहारिक था — ने आर्कटिक अन्वेषण के परवर्ती इतिहास को महत्वपूर्ण रूप से आकार दिया। Cook के बाद भी उत्तर-पश्चिमी मार्ग की खोज जारी रही, जो भौगोलिक जिज्ञासा और इस उम्मीद से प्रेरित थी कि बेहतर तकनीक या अनुकूल बर्फ की स्थितियाँ उस काम को संभव बना सकती हैं जिसे Cook ने अव्यावहारिक पाया था। यह खोज अंततः उन्नीसवीं सदी में उन अभियानों के माध्यम से सफल रही जिन्होंने इस मार्ग के अधिकांश हिस्से का पता लगाया, और यह आज भी प्रासंगिक बनी हुई है क्योंकि जलवायु परिवर्तन आर्कटिक की बर्फ को इस हद तक कम कर रहा है कि एक नौगम्य उत्तर-पश्चिमी मार्ग इतिहास में पहली बार एक व्यावहारिक वास्तविकता बनता जा रहा है। इस अर्थ में, Cook की तीसरी यात्रा जिस प्रश्न से जूझी थी, उसका उत्तर अभी भी मिल रहा है — उन तरीकों से जिनकी Cook कल्पना भी नहीं कर सकते थे।

Cook के नाम पर स्थानों का नामकरण स्वयं एक प्रकार की मानचित्रकारी विरासत है — उस भूगोल में उनके गुज़रने का एक स्थायी अभिलेख जिसे उन्होंने मापा था। Cook Strait, जो न्यूज़ीलैंड के उत्तरी और दक्षिणी द्वीपों को अलग करती है। Mount Cook, उसी देश की सबसे ऊँची चोटी। ऑस्ट्रेलिया के क्वींसलैंड में Cooktown। अलास्का में Cook Inlet। मध्य दक्षिण प्रशांत में Cook Islands। ये नाम महज़ सम्मान के प्रतीक नहीं हैं; ये उन गुज़रने के अभिलेख हैं, उन विशिष्ट अवसरों के चिह्न जब Cook ने एक ऐसे संसार की किसी विशेष भौगोलिक विशेषता से पहली बार सामना किया और उसे दर्ज किया जिसे यूरोपीय ज्ञान की दृष्टि से पहली बार नाम दिया जा रहा था।

अन्वेषण और यात्रा-साहित्य पर भी उनका प्रभाव काफी गहरा था। उनकी यात्राओं के प्रकाशित विवरण — विशेष रूप से पहली और दूसरी यात्रा की डायरियाँ, जिन्हें सावधानीपूर्वक संपादित कर व्यापक सार्वजनिक प्रशंसा के बीच प्रकाशित किया गया था — ने अन्वेषण-लेखन का एक ऐसा आदर्श स्थापित किया जो सटीक वैज्ञानिक अवलोकन को सजीव कथन और मुलाकातों के मानवीय पहलुओं पर गहन चिंतन के साथ जोड़ता था। इन्हें व्यापक रूप से पढ़ा गया, बार-बार पुनर्मुद्रित किया गया, और उन्नीसवीं सदी की शुरुआत के अन्वेषण-आख्यानों से लेकर बीसवीं सदी के प्रकृति-लेखन तक, यात्रा-साहित्य की परवर्ती परंपरा पर इनका स्पष्ट प्रभाव पड़ा। सटीकता और विस्मय का वह संयोजन जो Cook की डायरियों को अपने सर्वश्रेष्ठ रूप में परिभाषित करता है, एक साहित्यिक उपलब्धि भी थी और एक वैज्ञानिक भी।

व्यक्तिगत चरित्र और नेतृत्व

James Cook को एक ऐतिहासिक व्यक्तित्व से अलग, एक इंसान के रूप में समझना — उपलब्ध साक्ष्यों की प्रकृति के कारण — एक जटिल काम है। उनकी डायरियाँ, जो उनके विचारों और भावनाओं का प्राथमिक अभिलेख हैं, हमेशा उनकी संभावित आधिकारिक हैसियत को ध्यान में रखकर लिखी गई थीं, और वे आम तौर पर व्यक्तिगत भावनाओं की अभिव्यक्ति में संयमित रहती हैं। उन्हें जानने वालों और उनके अधीन काम करने वालों के विवरण कभी-कभी उनके चरित्र की उन झलकियाँ देते हैं जिन्हें डायरियाँ छुपा देती हैं, लेकिन ये विवरण स्वयं चयनात्मक और पूर्वव्यापी हैं — उनसे जुड़ी हर चीज़ पर उनकी ख्याति ने जो प्रभामंडल पीछे की ओर डाला, उसी से आकारित।

जब सारे साक्ष्यों को मिलाकर देखा जाता है, तो एक ऐसे व्यक्ति की तस्वीर उभरती है जिसमें असाधारण आत्म-अनुशासन, बौद्धिक समर्पण और व्यक्तिगत अधिकार था — एक ऐसा व्यक्ति जिसने केवल अपनी इच्छाशक्ति और बुद्धिमत्ता के बल पर खुद को ऐसा बना लिया था जो उसकी पृष्ठभूमि और उस युग में शायद ही कोई और कर पाता। वह नेतृत्व करने के लिए पैदा नहीं हुआ था; उसने दशकों की सीख, अभ्यास और अपनी क्षमताओं के निरंतर परिष्कार से खुद को एक सेनापति के रूप में ढाला। उसकी उपलब्धि की स्वनिर्मित प्रकृति उससे कभी अलग नहीं हुई: वह जीवनभर Yorkshire के एक मजदूर का बेटा रहा, जिसने उधार की किताबों से नौवहन सीखा था, और उससे मिला आत्मविश्वास अर्जित था, विरासत में नहीं मिला था।

आज के मानकों के हिसाब से उसकी नेतृत्व शैली सत्तावादी थी, जैसा कि उस दौर के सभी नौसेना कमांडरों के लिए होना जरूरी था। वह ऐसे जहाजों की कमान संभालता था जहाँ अनुशासन शारीरिक दंड से लागू होता था, जहाँ अधिकारियों और सामान्य नाविकों के बीच एक विशाल सामाजिक खाई थी, और जहाँ कप्तान का आदेश अटल कानून था। इस ढाँचे के भीतर भी, Cook अपने दल की भलाई के प्रति जो सावधानी बरतता था, अपने अनुशासन में जो निरंतरता और अपेक्षाकृत निष्पक्षता दिखाता था, और लंबी यात्राओं में जानलेवा बीमारियों और पोषण की कमी को रोकने के लिए जो असाधारण उपाय करता था — उसके लिए वह विशेष रूप से उल्लेखनीय था। वह इस अर्थ में लोकप्रिय कमांडर नहीं था कि उसके सैनिक उसे पसंद करते हों या गर्मजोशी से उसकी इज्जत करते हों; उसने स्नेह के बजाय सम्मान और आज्ञापालन को प्रेरित किया। लेकिन उसने अपने लोगों को जीवित रखा, जो अठारहवीं सदी के गहरे समुद्री सफर की परिस्थितियों में नेतृत्व का सर्वोच्च रूप था।

Cook की बौद्धिक जिज्ञासा उसके सबसे आकर्षक गुणों में से एक थी। वह हर नए तट, हर नई जनजाति, हर नई प्राकृतिक घटना को वास्तविक समझ की चाह के साथ देखता था। उसकी डायरी की प्रविष्टियाँ सटीक अवलोकन, सावधान निष्कर्ष और उन जगहों पर अनिश्चितता की ईमानदार स्वीकृति से भरी हैं जहाँ उसके आँकड़े निश्चित निष्कर्ष निकालने के लिए पर्याप्त नहीं थे। वह अपने ज्ञान की सीमाएँ जानता था और उन्हें अटकलों या कल्पनाओं से भरने का स्वभाव उसमें नहीं था। यह अनुभवजन्य कठोरता स्वयं उसकी उस स्व-शिक्षा का परिणाम थी जो उसने ज्ञानोदय की वैज्ञानिक परंपरा में हासिल की थी, और इसी ने उसे व्यवहार में उन कई औपचारिक रूप से प्रशिक्षित विद्वानों से बेहतर वैज्ञानिक बनाया जो उसके साथ यात्रा पर गए थे।

उसमें व्यावहारिक समस्या-समाधान की एक अद्भुत क्षमता थी जो उसके पूरे करियर में दर्जनों संकटों में सामने आई। Great Barrier Reef पर आई आपदा जैसी स्थिति को इतनी ठंडे दिमाग और कुशलता से संभालना शायद सबसे शानदार उदाहरण था, लेकिन इस तरह के अनगिनत और मौके थे: मुश्किल मौसम में जहाज की कमान, अपर्याप्त सामग्री से मरम्मत का जुगाड़, सूखी और बंजर दिखने वाली जगहों में ताजे पानी और रसद की खोज, और शारीरिक व मानसिक रूप से थके हुए दल में व्यवस्था बनाए रखना। Cook कभी किसी व्यावहारिक समाधान के अभाव में नहीं दिखा, और जो समाधान वह निकालता था, वे आमतौर पर सही होते थे।

उसकी शारीरिक संरचना उल्लेखनीय थी। उसने ठंड, नमी और अपर्याप्त पोषण की उन परिस्थितियों में दशकों समुद्र में बिताए जो अधिकांश पुरुषों का स्वास्थ्य तोड़ देती थीं, फिर भी वह पहले दो अभियानों के दौरान और तीसरे में भी काफी समय तक सक्रिय और ऊर्जावान बना रहा। तीसरे अभियान में शारीरिक और शायद मानसिक गिरावट के संकेत बताते हैं कि तब तक उसकी संचित शक्ति अंततः चुकने लगी थी, लेकिन यह तथ्य कि उसने असामान्य शारीरिक माँग वाले करियर में इतने लंबे समय तक इतनी असाधारण ऊर्जा बनाए रखी — यह उसके शरीर की मूलभूत मजबूती का प्रमाण है।

Cook के उन वैज्ञानिकों के साथ संबंध जो उनके साथ यात्राओं पर गए, जटिल थे और हमेशा आसान नहीं रहे, लेकिन वे सामान्यतः फलदायी रहे। पहली यात्रा में Banks के साथ, उन्होंने एक कार्यकारी संबंध विकसित किया जो आपसी सम्मान पर टिका था — भले ही दोनों के बीच सामाजिक हैसियत की एक बड़ी खाई थी। Banks की संपत्ति, सामाजिक प्रतिष्ठा और संपर्क उन्हें Cook की तुलना में एक सशक्त स्थिति में रखते थे, और बीच-बीच में तनाव के पल भी आए, लेकिन दोनों समझते थे कि दूसरा इस अभियान में क्या योगदान देता है और उसे उसी के अनुसार महत्व देते थे। दूसरी यात्रा में Forsters के साथ संबंध और कठिन रहे। Johann Reinhold Forster एक बेहद घमंडी और तीखी ज़बान वाले इंसान थे, और Cook के साथ उनके झगड़े अक्सर होते थे और कभी-कभी तीखे भी हो जाते थे। लेकिन Cook इतने धैर्यवान थे — या कहें इतने समझदार — कि वे इन तनावों को संभाल लेते थे और यात्रा के वैज्ञानिक कार्य को प्रभावित नहीं होने देते थे।

Cook एक ऐसे इंसान थे जिनके बेहद करीबी निजी रिश्ते बहुत कम थे। नौसेना अधिकारी Charles Clerke के साथ उनकी दोस्ती, जो कई यात्राओं में उनके साथ रहे और अंततः Cook की मृत्यु के बाद तीसरी यात्रा के जहाज़ों की कमान संभाली, समुद्र पर बिताई उनकी ज़िंदगी के कुछ सच्चे निजी रिश्तों में से एक थी। Clerke की Cook के प्रति निष्ठा और खुद गंभीर रूप से बीमार होने के बावजूद यात्रा जारी रखने का उनका संकल्प इस बात का प्रमाण था कि Cook उन लोगों में कैसी प्रतिबद्धता जगा देते थे जो उन्हें करीब से जानते थे। Cook की मृत्यु पर Clerke और दूसरे अधिकारियों ने जो शोक व्यक्त किया, वह सच्चा और गहरा था — उन लोगों का शोक जिन्होंने न केवल एक कमांडर खोया था, बल्कि उस श्रेष्ठता के मानक को खोया था जिस पर वे खुद को परखते थे।

अपनी पत्नी Elizabeth के साथ उनका रिश्ता ज़्यादातर पत्रों के ज़रिए व्यक्त होने वाले स्नेह का था, क्योंकि उनकी यात्राएँ उन्हें साथ रहने का बहुत कम मौका देती थीं। उनके बीच हुए पत्राचार का एक बड़ा हिस्सा आज भी सुरक्षित है, जो एक ऐसी शादी की तस्वीर पेश करता है जिसमें सच्ची गर्मजोशी और आपसी सम्मान था — दोनों को पता था कि Cook के करियर की उनकी घरेलू ज़िंदगी पर क्या कीमत पड़ रही है, लेकिन यह भी जानते थे कि यह करियर उस इंसान से अलग नहीं किया जा सकता। Elizabeth Cook ने घर संभाला, बच्चों की परवरिश की और लंबे अलगाव को जिस हिम्मत के साथ सहा, उसे Cook ने स्वीकार किया और सराहा। अपने पति से इतने दशकों बाद तक जीवित रहना और उनके कागज़ातों और स्मृति को इतनी सावधानी से सहेजना — यह अपने आप में उस गहरी प्रतिबद्धता का प्रमाण था जो उन्हें उस इंसान और उसके काम से थी।

Cook अपने अधीनस्थ अधिकारियों के साथ उनकी क्षमताओं के आकलन और यह देखते हुए व्यवहार करते थे कि वे उन्हें उसी पूर्णता के साथ लागू करने को तैयार हैं जो वे खुद से माँगते थे। जब तारीफ बनती थी तो वे खुले दिल से तारीफ करते थे, और जब प्रदर्शन उनकी उम्मीदों से कम पड़ता था तो आलोचना में कोई नरमी नहीं बरतते थे। उनके अधीन काम करने वाले कई अधिकारी आगे चलकर उल्लेखनीय करियर बनाने में इसलिए भी सफल रहे क्योंकि उन्हें वहाँ जो प्रशिक्षण मिला और जिन मानकों पर खरा उतरना पड़ा, उसने उन्हें गढ़ा। William Bligh, जो बाद में Bounty के कप्तान के रूप में अपनी बदनामी के लिए जाने गए, तीसरी यात्रा में Cook के अधीन master के रूप में काम करते थे और उन्होंने अपने नौवहन कौशल दुनिया के महानतम नाविकों में से एक से सीखे। George Vancouver, जिन्होंने उत्तरी अमेरिका के प्रशांत तट का वह व्यवस्थित सर्वेक्षण पूरा किया जिसे Cook ने शुरू किया था, वे भी Cook के अधीन रहे और उनके तरीकों तथा मानकों को आगे ले गए।

Cook की मृत्यु का तरीका — एक प्रशांत समुद्र तट पर उन्हीं लोगों के हाथों मारे जाने का, जिनकी दुनिया को उनकी यात्राएँ बदलने में मदद कर रही थीं — एक प्रतीकात्मक गूँज रखता है जिसने तब से लेकर आज तक लेखकों और इतिहासकारों को सोचने पर मजबूर किया है। इसमें कुछ त्रासद भी है और कुछ सटीक भी — प्रशांत महासागर के महान नाविक का अंत प्रशांत महासागर में, प्रशांत के लोगों के हाथों, एक ऐसी मुठभेड़ में जो दो दुनियाओं के बीच मिलन के सारे तनावों और गलतफहमियों को एक जगह साकार करती थी — दो दुनियाएँ जो एक विशाल खाई के पार एक-दूसरे को देख सकती थीं, लेकिन पूरी तरह समझ नहीं सकती थीं। Cook ने अपनी वयस्क ज़िंदगी इन्हीं खाइयों को पाटते हुए गुज़ारी, और जब वह खाई आखिरकार पाटे जाने से इनकार कर गई, तो वे उसी में मिल गए।

यह सवाल अभी भी अनुत्तरित है कि क्या Cook की मृत्यु किसी हद तक उनके उस बिगड़ते हुए निर्णय और आचरण का परिणाम थी, जो तीसरी यात्रा में स्पष्ट रूप से दिखाई दी, या फिर यह महज एक दुखद हादसा था — ऐसी परिस्थितियों में, जिन्हें पहली यात्रा वाले Cook भी शायद अलग तरह से नहीं संभाल पाते। कुछ इतिहासकारों का मानना है कि युवा Cook, जो अधिक धैर्यवान और स्वभाव में अधिक संयत थे, Kealakekua Bay की उस मुठभेड़ को अलग ढंग से संभाल सकते थे और शायद बच निकलते। दूसरे इतिहासकार यह तर्क देते हैं कि इस मुठभेड़ में जो बुनियादी तनाव थे — शक्ति की भारी असमानता, कर्तव्य और उल्लंघन को समझने के परस्पर विरोधी सांस्कृतिक नज़रिए — वे ऐसे थे कि एक बार जब स्थिति बिगड़ने लगी, तो हिंसा लगभग अवश्यंभावी हो गई थी। सच्चाई शायद इन दोनों पक्षों के बीच कहीं है, जैसा कि अक्सर होता है।

जो बात निर्विवाद है, वह यह है कि पचास वर्ष की आयु में Cook का निधन अन्वेषण, नौसंचालन और दुनिया की सटीक तस्वीर बनाने के व्यापक प्रयास के लिए एक अपूरणीय क्षति थी। उनके पास देने के लिए अभी बहुत कुछ था। जिस ऊर्जा और बुद्धिमत्ता ने अभूतपूर्व व्याप्ति और उपलब्धियों वाली तीन यात्राएँ संभव की थीं, वह चुकी नहीं थी। तीसरी यात्रा के शारीरिक और मानसिक तनावों के बावजूद, वे मूलभूत प्रतिभाएँ अभी भी मौजूद थीं, जिन्होंने Cook को Cook बनाया था। उस सुबह हवाई के एक समुद्र तट पर जिस दुनिया ने उन्हें खोया, उसने केवल एक कप्तान नहीं खोया; उसने अठारहवीं सदी की सबसे असाधारण वैज्ञानिक प्रतिभाओं में से एक को खोया।

निष्कर्ष

James Cook का जीवन एक ऐसी गाथा थी जो लगभग अविश्वसनीय महत्वाकांक्षा और उपलब्धि की कहानी कहती है — Marton की एक मज़दूर की कुटिया से Resolution के quarterdeck तक, उत्तरी सागर की collier brigs से अंटार्कटिका के बर्फीले मैदानों और हवाई की उष्ण खाड़ियों तक। उन्होंने प्रशांत महासागर का नया मानचित्र बनाया। उन्होंने दक्षिणी महाद्वीप की अवधारणा को असत्य सिद्ध किया। उन्होंने देशांतर की समस्या का व्यावहारिक समाधान प्रदर्शित किया। उन्होंने दिखाया कि लंबी समुद्री यात्राओं में नाविकों को जीवित कैसे रखा जाए। उन्होंने उन जनसमूहों और प्राकृतिक संसारों का विवरण प्रस्तुत किया, जिनकी यूरोपीय विज्ञान को बमुश्किल कल्पना थी। और यह सब उन्होंने बुद्धि, कौशल और संकल्प के अनुशासित उपयोग से किया — उन समस्याओं के समाधान के लिए, जो पीढ़ियों से अनसुलझी पड़ी थीं।

उनकी विरासत सरल नहीं है, और जो लोग इसे सरल बनाने की कोशिश करते हैं — चाहे वे उन्हें बिना किसी आपत्ति के महिमामंडित करें या बिना किसी आपत्ति के उनकी निंदा करें — वे उनकी उपलब्धि और प्रभाव की वास्तविक जटिलता के साथ अन्याय करते हैं। वे एक ऐसे व्यक्ति थे जिन्होंने दुनिया को अपने से पहले के लगभग किसी भी इंसान से अधिक स्पष्ट और सटीक रूप से देखा, और जो कुछ उन्होंने देखा उसे इतनी परिशुद्धता और संपूर्णता के साथ व्यक्त किया कि मानवीय ज्ञान का कायाकल्प हो गया। यह कि जिस दुनिया का उन्होंने मानचित्रण किया, उसी दुनिया के लोगों को उनके मानचित्रण के परिणामों से भारी कष्ट उठाना पड़ा — यह उनकी कहानी का बुनियादी दुखद पहलू है, और इसे उपलब्धि के साथ-साथ स्वीकार किया जाना चाहिए, बिना किसी एक को दूसरे से निरस्त किए।

Cook अंततः हम सबकी तरह ही एक इंसान थे — अपने समय और अपनी संस्कृति द्वारा गढ़े हुए, उन मान्यताओं से परे न देख पाने की सीमा में बँधे हुए जिन्हें वे स्वयं नहीं पहचान सकते थे, उदारता और कठोरता दोनों के, प्रतिभा और गलत निर्णय दोनों के सामर्थ्य से युक्त। जो चीज़ उन्हें सामान्य मानवता से ऊपर उठाती थी, वह नैतिक पूर्णता नहीं थी, बल्कि उनकी दृष्टि की असाधारण स्पष्टता और दृढ़ता थी — उनका यह संकल्प कि दुनिया को वैसा देखा जाए जैसी वह वास्तव में है, न कि जैसा सिद्धांत और अटकलों ने उसे कल्पित किया था — और जो कुछ उन्होंने देखा उसे इतनी सच्चाई के साथ दर्ज करने का उनका संकल्प, जिसकी पुष्टि समय और बाद के परीक्षणों ने बार-बार की है। यही उनका स्मारक है, किसी भी मूर्ति से अधिक स्थायी: वे मानचित्र जो उन्होंने बनाए, वे अवलोकन जो उन्होंने दर्ज किए, परिशुद्धता के वे मानक जो उन्होंने स्थापित किए। दुनिया अपना आकार जानती है — बड़े पैमाने पर इसलिए, क्योंकि James Cook ने यह सुनिश्चित करने का बीड़ा उठाया था कि वह जाने।

वे अन्वेषण के इतिहास में एक अद्वितीय व्यक्तित्व के रूप में खड़े हैं — वह शख्स जिसने पृथ्वी के भौगोलिक चित्र को पूरा करने में किसी भी अन्य व्यक्ति से अधिक योगदान दिया, वह चित्र जिसे मानवता तब से जोड़ती आ रही थी जब पहले जहाज़ धरती की दृष्टि से परे निकले थे। उनका कार्य आज भी जीवित है, उनकी पद्धतियाँ उनके पेशे का मानक बन गईं, और जिस दुनिया का उन्होंने इतनी सावधानी से वर्णन किया, वह अपनी भौगोलिक रूपरेखा में उस दुनिया से मिलती-जुलती है जिसमें हम आज रहते हैं। Yorkshire के North Riding में एक मज़दूर की झोपड़ी में जन्मे उस व्यक्ति के लिए, जिसके पास जन्म, धन या शिक्षा की कोई सुविधा नहीं थी, यह एक ऐसी उपलब्धि है जो प्रशंसा और विचार दोनों को आमंत्रित करती है।

शुक्र पारगमन और Royal Society

Cook की पहली यात्रा के केंद्र में जो खगोलीय उद्देश्य था — 3 जून, 1769 को Tahiti द्वीप से सूर्य के सामने शुक्र ग्रह के पारगमन का अवलोकन करना — वह अभियान को उस वैज्ञानिक और भौगोलिक महत्वाकांक्षा के संगम पर रखता है जो व्यवस्थित ज्ञान के प्रबोधन युग के उद्यम की विशेषता थी। शुक्र पारगमन असाधारण वैज्ञानिक महत्व की घटना थी क्योंकि यह रडार खगोल विज्ञान के विकास से पहले पृथ्वी से सूर्य की दूरी सटीक रूप से मापने का एकमात्र उपलब्ध तरीका था, और उस आधार रेखा से सम्पूर्ण सौर मंडल के आयामों की गणना करने का माध्यम था।

यह विधि Edmond Halley ने 1716 में प्रस्तावित की थी, जिन्होंने गणना की थी कि यह पारगमन 1761 और 1769 में दृश्यमान होगा और भावी पीढ़ियों के खगोलशास्त्रियों से आग्रह किया था कि वे पृथ्वी पर दूर-दूर फैले स्थानों से समन्वित अवलोकन करें। पृथ्वी के विभिन्न बिंदुओं से दिखने वाले पारगमन पथ में मामूली अंतर — लंबन — को मापकर त्रिकोणमिति द्वारा सौर दूरी की गणना की जा सकती थी। यह इतिहास में अभूतपूर्व पैमाने की एक अंतर्राष्ट्रीय वैज्ञानिक परियोजना थी, जिसमें चार महाद्वीपों और अनेक द्वीपों पर तैनात पर्यवेक्षक शामिल थे।

Royal Society ने Tahiti को आदर्श दक्षिणी अवलोकन स्थल के रूप में चुना क्योंकि उसकी ज्ञात स्थिति, अनुकूल जलवायु, और Samuel Wallis द्वारा वहाँ के लोगों और संसाधनों के बारे में लाई गई रिपोर्टें थीं — Wallis का HMS Dolphin 1767 में पहली बार यूरोपीय संपर्क स्थापित कर चुका था। Cook को अभियान की कमान सौंपने के लिए आंशिक रूप से उनके गणितीय और नौवहन कौशल के कारण और आंशिक रूप से वैज्ञानिक कर्मियों के साथ काम करने और विस्तारित यात्राओं की जटिल रसद को संभालने की उनकी सिद्ध क्षमता के कारण चुना गया था।

दुर्भाग्य से, पारगमन का वास्तविक अवलोकन उतना निर्णायक नहीं रहा जितना Halley ने आशा की थी। "ब्लैक ड्रॉप इफेक्ट" नामक घटना — एक प्रकाशीय विकृति जिससे शुक्र का किनारा प्रवेश और निकास के समय सौर मंडल से मिला हुआ प्रतीत होता है, जिससे संपर्क का सटीक क्षण धुंधला हो जाता है — ने सभी अवलोकनों में एक अनिश्चितता उत्पन्न कर दी जिसने Halley द्वारा अपेक्षित सटीकता के साथ सौर लंबन की गणना को असंभव बना दिया। इसके बावजूद, समन्वित वैश्विक प्रयास ने उस समय तक उपलब्ध सौर दूरी का सर्वश्रेष्ठ अनुमान प्रस्तुत किया, जो खगोल विज्ञान में एक ऐसा योगदान था जिसने इस उद्यम को उचित ठहराया।

Joseph Banks, जो पहली यात्रा में Cook के साथ एक नागरिक वैज्ञानिक दल के प्रमुख के रूप में गए थे, ने वनस्पति विज्ञान, प्राणि विज्ञान और नृजातिविज्ञान में ऐसे तरीकों से योगदान दिया जो उस खगोलीय उद्देश्य के बराबर या उससे भी अधिक था जो आधिकारिक रूप से अभियान को परिभाषित करता था। Tahiti, New Zealand, Australia और अन्य स्थानों पर किए गए Banks के नमूनों, चित्रों और अवलोकनों के संग्रह ने प्रशांत महासागर के उस व्यवस्थित प्राकृतिक इतिहास की नींव रखी जिसमें अगली पीढ़ी के यूरोपीय वैज्ञानिक संलग्न रहे।

Tahiti और नोबल सैवेज का मिथक

ताहिती समाज के साथ Cook की मुलाकातों के परिणाम उस खगोलीय अवलोकन से कहीं आगे तक गए जिसके लिए उनका अभियान इस द्वीप पर आया था — ये मुलाकातें यूरोपीय सांस्कृतिक कल्पना में इस तरह घुल-मिल गईं जो प्रबोधन (Enlightenment) के उन विचारों को न केवल प्रतिबिंबित करती थीं बल्कि उन्हें आकार भी देती थीं जो सभ्यता, प्रकृति और मानवता की नैतिक दशा से जुड़े थे। ताहिती, जिसे Cook, Banks और अठारहवीं सदी के अंत में वहाँ गए अन्य यूरोपीय लोगों ने अनुभव और वर्णित किया, "नोबल सैवेज" की दार्शनिक अवधारणा के लिए सबसे प्रमुख वास्तविक संदर्भ बन गया — यह विचार कि प्राकृतिक अवस्था में रहने वाले मनुष्य यूरोपीय सभ्यता की कृत्रिमताओं से भ्रष्ट लोगों की तुलना में अधिक सुखी, स्वस्थ और सदाचारी होते हैं।

ताहिती समाज की वास्तविकता यूरोपीय मिथकीकरण से काफी अधिक जटिल थी। ताहिती समाज अत्यंत स्तरीकृत था — एक वंशानुगत अभिजात वर्ग था जो सामान्य लोगों पर काफी अधिकार रखता था, और ताप्पू (tapu) यानी वर्जना संबंधी नियमों की एक ऐसी व्यवस्था थी जो सामाजिक व्यवहार के लगभग हर पहलू को नियंत्रित करती थी। विशेष अनुष्ठानिक संदर्भों में नरबलि दी जाती थी, जिलों और पड़ोसी द्वीपों के बीच युद्ध आम बात थी, और अरिओई समाज — जो द्वीपों के बीच भ्रमण करने वाले कलाकारों और अनुष्ठान विशेषज्ञों का एक संगठन था — धार्मिक अनिवार्यता के रूप में शिशु हत्या का अभ्यास करता था।

Cook स्वयं अपने कुछ समकालीनों के रोमांटिक विवरणों की तुलना में ताहिती समाज के मूल्यांकन में अधिक संतुलित थे — उन्होंने उसके आकर्षण और उसकी जटिलताओं, दोनों को स्वीकार किया। ताहिती में उनके जहाजों की आपूर्ति के दौरान चोरी की जो समस्या उन्हें झेलनी पड़ी — और उसके प्रति उनकी कभी-कभी कठोर प्रतिक्रियाएँ — ये सब रोमांटिक आदर्शीकरण या यांत्रिक औपनिवेशिक तिरस्कार की बजाय अंतर-सांस्कृतिक संपर्क की व्यावहारिक समझ को दर्शाते हैं। उनकी डायरियों में प्रशांत महासागरीय समाजों के प्रति वास्तविक प्रशंसा और उनके समकालीनों के साथ साझा यूरोपीय सांस्कृतिक श्रेष्ठता की धारणाओं के बीच जो तनाव है, वह उन्हें प्रबोधन युग का एक विशिष्ट रूप से द्विअर्थी व्यक्तित्व बनाता है।

Cook और न्यूज़ीलैंड तथा ऑस्ट्रेलिया का मानचित्रण

Cook की सबसे स्थायी व्यावहारिक उपलब्धियों में अक्टूबर 1769 से मार्च 1770 के बीच न्यूज़ीलैंड के दो मुख्य द्वीपों की परिक्रमा और मानचित्रण शामिल है, जिससे तटरेखा के पहले सटीक नक्शे तैयार हुए और यह निश्चित रूप से स्थापित हो गया कि न्यूज़ीलैंड वह दक्षिणी महाद्वीप नहीं है जिसकी यूरोपीय भूगोलवेत्ता लंबे समय से कल्पना करते आ रहे थे, बल्कि यह दो बड़े द्वीप हैं। उनके बनाए नक्शे इतने सटीक थे कि बाद के नाविकों ने उन्हें उन्नीसवीं सदी तक भरोसे के साथ इस्तेमाल किया।

न्यूज़ीलैंड के प्रति उनके दृष्टिकोण ने स्वदेशी लोगों के साथ उनके संबंध की उपलब्धियों और सीमाओं, दोनों को उजागर किया। माओरी के साथ उनकी शुरुआती मुलाकातें हिंसक रहीं — संपर्क के पहले कुछ दिनों में कई माओरी मारे गए, क्योंकि सशस्त्र लोग उन स्थितियों पर प्रतिक्रिया कर रहे थे जिन्हें वे खतरा समझ रहे थे — लेकिन बाद की बातचीत अधिक उत्पादक होती गई जब दोनों पक्षों ने आदान-प्रदान और संवाद के लिए तरीके विकसित किए। Cook ने माओरी की बुद्धिमत्ता, साहस और सांस्कृतिक परिष्कार के प्रति काफी सम्मान विकसित किया, और उनकी डायरियों में माओरी समाज, तकनीक और मूल्यों के कुछ शुरुआती महत्त्वपूर्ण यूरोपीय अवलोकन मौजूद हैं।

Cook ने पहली यात्रा में ऑस्ट्रेलिया के जिस तटीय क्षेत्र का मानचित्रण किया — यानी दक्षिण-पूर्वी छोर से Torres Strait तक का पूर्वी तट — वह भी उतना ही महत्वपूर्ण था। अप्रैल 1770 में Botany Bay पर उतरने के बाद, जहाँ Banks और उनकी टीम ने सबसे व्यापक वनस्पति संग्रह किया (और इसी से उस खाड़ी को यह नाम मिला), Cook ने पाँच महीनों तक तटीय सर्वेक्षण किया और ऐसे नक्शे तैयार किए जो इतने सटीक थे कि 1788 में Sydney में दंड-उपनिवेश स्थापित करने आए First Fleet का मार्गदर्शन कर सके। Cook ने अपनी यात्रा के दौरान जिन क्षेत्रों का भ्रमण किया, वहाँ की भूमि उन्हें लगभग निर्जन प्रतीत हुई — इसी अवलोकन के आधार पर उन्होंने सिफारिश की कि पूर्वी ऑस्ट्रेलियाई तट यूरोपीय बसावट के लिए उपयुक्त है। इस सिफारिश का सीधा असर वहाँ उपनिवेश स्थापित करने के निर्णय पर पड़ा, जिसके परिणाम अगली दो शताब्दियों में ऑस्ट्रेलिया की मूलनिवासी आबादी के लिए बेहद गहरे साबित हुए।

Kealakekua Bay में Cook की मृत्यु: कारण और व्याख्याएँ

14 फरवरी 1779 को Hawaii के Big Island पर स्थित Kealakekua Bay में Cook की मृत्यु प्रशांत महासागर के इतिहास की सर्वाधिक विश्लेषित घटनाओं में से एक है, और इसकी व्याख्या समय के साथ काफी बदलती रही है — जैसे-जैसे इतिहासकारों ने अंतर-सांस्कृतिक संपर्क की गतिशीलता को समझने के लिए अधिक परिष्कृत दृष्टिकोण अपनाए। बुनियादी तथ्य अब भी विवादास्पद नहीं हैं: Cook एक चुराई गई नाव को वापस पाने के लिए हवाईयन प्रमुख Kalaniʻōpuʻu को बंधक बनाने का प्रयास कर रहे थे, और इसी दौरान समुद्र तट पर हुई झड़प में उनके चार नाविकों सहित उनकी हत्या कर दी गई।

इतिहासकार Marshall Sahlins ने 1985 में एक चर्चित विश्लेषण में यह प्रस्तावित किया कि Cook की मृत्यु को हवाईयन धार्मिक संरचनाओं के संदर्भ में समझा जा सकता है: जनवरी 1779 में Kealakekua Bay में Cook का आगमन देवता Lono से जुड़े Makahiki उत्सव के मौसम के साथ मेल खाता था; हवाईयन लोगों ने Cook के आगमन को — और विशेष रूप से उनके जहाजों द्वारा खाड़ी की परिक्रमा को — Lono की पौराणिक वापसी के कर्मकांडी अभिनय के रूप में समझा; और उनका प्रस्थान तथा पुनरागमन (वे तूफान में Resolution का अगला मस्तूल क्षतिग्रस्त होने के बाद वापस लौटे थे) Makahiki आख्यान की संरचना के विरुद्ध था, जिसने अंततः उस टकराव को जन्म दिया जो उनकी मृत्यु का कारण बना।

यह व्याख्या अत्यंत प्रभावशाली सिद्ध हुई, लेकिन मानवशास्त्री Gananath Obeyesekere ने इसे चुनौती दी। उनका तर्क था कि यह व्याख्या यूरोपीय पौराणिक ढाँचों को हवाईयन इतिहास पर थोपने जैसी है, और हवाईयन लोग किसी स्पष्ट रूप से नश्वर मनुष्य को कभी देवता नहीं समझते। Sahlins और Obeyesekere के बीच यह बहस बीसवीं सदी के उत्तरार्ध में मानवशास्त्र की सबसे जीवंत विवादास्पद चर्चाओं में से एक बन गई। इसके केंद्र में यह मूलभूत प्रश्न थे कि संस्कृतियाँ अत्यंत भिन्न 'अन्य' के साथ संपर्क की व्याख्या किस प्रकार करती हैं, और क्या पश्चिमी विद्वान गैर-पश्चिमी ज्ञान-मीमांसाओं को कभी पर्याप्त रूप से समझ सकते हैं।

उस टकराव की विशिष्ट परिस्थितियाँ जो भी रही हों, Cook की मृत्यु उन संचित तनावों का परिणाम थी जो हवाईयन जल में यूरोपीय उपस्थिति के महीनों के दौरान धीरे-धीरे बढ़ते रहे। उनके जहाजों की विशाल रसद-आवश्यकताओं ने हवाईयन संसाधनों पर भारी दबाव डाल दिया था, यूरोपीय नाविकों द्वारा tapu के उल्लंघन से आक्रोश उत्पन्न हो गया था, और प्रमुख को बंधक बनाने की कोशिश — जो तरकीब Cook प्रशांत महासागर में अन्य जगहों पर सफलतापूर्वक आजमा चुके थे — Hawaii के विशिष्ट राजनीतिक एवं धार्मिक संदर्भ में विनाशकारी साबित हुई। उनकी मृत्यु उस युग के अंत का प्रतीक बनी जिसमें एक अकेला सक्षम नेतृत्वकर्ता अपने व्यक्तित्व के बल और व्यावहारिक बुद्धिमत्ता से प्रथम संपर्क की जटिल अंतर-सांस्कृतिक परिस्थितियों को अकेले पार कर सकता था।