
ओशिनिया: द्वीपों की प्रशांत दुनिया, प्राचीन संस्कृतियाँ, और विशाल नीले क्षितिज
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ओशिनिया प्रशांत महासागर का वह विशाल क्षेत्र है जिसमें ऑस्ट्रेलिया, न्यूज़ीलैंड और दुनिया के सबसे बड़े महासागर में फैले हज़ारों द्वीप शामिल हैं। ज़मीन के हिसाब से लगभग 85 लाख वर्ग किलोमीटर में फैला यह क्षेत्र, समुद्री दृष्टि से करीब 7 करोड़ वर्ग किलोमीटर तक विस्तृत है। ओशिनिया में पृथ्वी की कुछ सबसे प्राचीन मानव सभ्यताएँ बसती हैं, यहाँ ऐसी असाधारण जैव विविधता पाई जाती है जो और कहीं नहीं मिलती, और यहाँ के परिदृश्य अपनी मनमोहक सुंदरता के लिए जाने जाते हैं — ऑस्ट्रेलिया के आंतरिक भाग के लाल रेगिस्तानों से लेकर माइक्रोनेशिया के प्रवाल एटोल और पापुआ न्यू गिनी की ज्वालामुखीय चोटियों तक।
ओशिनिया शब्द में सामान्यतः चार उप-क्षेत्र शामिल माने जाते हैं: ऑस्ट्रेलिया और न्यूज़ीलैंड, मेलानेशिया (न्यू गिनी से फिजी तक फैली द्वीपीय श्रृंखला), माइक्रोनेशिया (उत्तर-पश्चिमी प्रशांत के बिखरे हुए द्वीपीय देश), और पॉलिनेशिया (हवाई, न्यूज़ीलैंड और ईस्टर द्वीप से घिरा मध्य और पूर्वी प्रशांत का विशाल त्रिकोण)। इन सभी क्षेत्रों में मिलाकर 14 संप्रभु राष्ट्र हैं, दर्जनों क्षेत्र अन्य देशों के अधीन हैं, और कुल मिलाकर लगभग 4 करोड़ 40 लाख लोग यहाँ रहते हैं, जिनमें से अधिकांश ऑस्ट्रेलिया में निवास करते हैं।
सिंहावलोकन और भूगोल
ऑस्ट्रेलिया, जो एक महाद्वीप-देश है और ओशिनिया का केंद्र माना जाता है, विश्व का छठा सबसे बड़ा देश है और क्षेत्रफल के मामले में इस क्षेत्र का सबसे बड़ा देश है। यह लगभग 77 लाख वर्ग किलोमीटर में फैला है और हिंद महासागर तथा प्रशांत महासागर के बीच स्थित है। ऑस्ट्रेलिया का भू-दृश्य प्राचीन और क्षरित भूभाग से परिभाषित होता है: विशाल आंतरिक भाग अधिकांशतः शुष्क या अर्ध-शुष्क है, जहाँ ग्रेट विक्टोरिया रेगिस्तान, गिब्सन रेगिस्तान, सिम्पसन रेगिस्तान और नलारबोर मैदान मिलकर एक विशाल केंद्रीय शुष्क क्षेत्र बनाते हैं। पूर्वी तट अपेक्षाकृत समशीतोष्ण और उपजाऊ है, और ग्रेट डिवाइडिंग रेंज पूर्वी समुद्र तट के साथ-साथ फैली हुई है। इस महाद्वीप का सबसे प्रतिष्ठित भू-आकार उलुरु है — एक विशाल बलुआ पत्थर की अखंड चट्टान जो नॉर्दर्न टेरिटरी के समतल रेगिस्तान से 348 मीटर ऊपर उठती है और अनांगु आदिवासी लोगों के लिए पवित्र स्थल है।
न्यूज़ीलैंड, ऑस्ट्रेलिया से लगभग 2,000 किलोमीटर दक्षिण-पूर्व में स्थित है और इसमें दो मुख्य द्वीप — नॉर्थ आइलैंड और साउथ आइलैंड — तथा अनेक छोटे द्वीप शामिल हैं। यह पृथ्वी के सर्वाधिक भूगर्भीय रूप से सक्रिय देशों में से एक है, क्योंकि यह प्रशांत और ऑस्ट्रेलियाई टेक्टोनिक प्लेटों की सीमा पर स्थित है। साउथ आइलैंड की सदर्न आल्प्स श्रृंखला पूरे द्वीप की लंबाई में फैली है, जिसमें 3,724 मीटर ऊँचा आओराकी माउंट कुक शामिल है। नॉर्थ आइलैंड में एक सक्रिय ज्वालामुखीय पठार और भूतापीय गतिविधि पाई जाती है।
मेलानेशिया में न्यू गिनी, बिस्मार्क आर्किपेलागो, सोलोमन द्वीप, वानुआतु, फिजी और न्यू कैलेडोनिया के द्वीप शामिल हैं। यहाँ का भू-भाग सामान्यतः ऊबड़-खाबड़ और पर्वतीय है, जहाँ घने उष्णकटिबंधीय वन पाए जाते हैं। माइक्रोनेशिया में फेडरेटेड स्टेट्स ऑफ माइक्रोनेशिया, पलाऊ, मार्शल द्वीप, किरिबाती, नौरू और मारियाना द्वीप शामिल हैं। माइक्रोनेशिया के कई द्वीप निचले प्रवाल एटोल हैं, जो उन्हें समुद्र के बढ़ते स्तर के प्रति अत्यंत संवेदनशील बनाते हैं। पॉलिनेशिया में समोआ, टोंगा, तुवालु और फ्रेंच पॉलिनेशिया तथा कुक द्वीप जैसे अनेक क्षेत्र शामिल हैं।
ओशिनिया का इतिहास
ओशिनिया में मानव बस्तियों का इतिहास मानव अनुभव की सबसे असाधारण समुद्री प्रवास गाथाओं में से एक है। ऑस्ट्रेलिया में सबसे पहले अफ्रीका और दक्षिण-पूर्व एशिया से आकर बसे लोगों ने कम से कम 65,000 वर्ष पहले, और संभवतः 75,000 वर्ष पहले तक, बसावट शुरू की थी, जो ऑस्ट्रेलियाई आदिवासियों को पृथ्वी की सबसे पुरानी निरंतर सभ्यता बनाती है। मेलानेशियाई लोगों के पूर्वज लगभग 40,000 से 50,000 वर्ष पहले न्यू गिनी और आसपास के द्वीपों में पहुँचे थे।
अधिक दूरस्थ प्रशांत द्वीपों को ऑस्ट्रोनेशियाई लोगों ने बसाया, जो एक समुद्री संस्कृति थी। यह संस्कृति लगभग 5,000 वर्ष पहले ताइवान में उद्भूत हुई और धीरे-धीरे फिलीपींस और इंडोनेशिया से होते हुए दक्षिण की ओर फैलती गई, मेलानेशिया तक पहुँची और फिर पहले से निर्जन प्रशांत में पूर्व की ओर बढ़ी। लापिता संस्कृति, जिसकी पहचान उसकी विशिष्ट मृद्भांड कला से होती है, लगभग 3,500 से 2,500 वर्ष पहले के बीच मेलानेशिया से होते हुए पश्चिमी पॉलिनेशिया तक फैली।
पूर्वी पॉलिनेशिया, जिसमें हवाई, न्यूज़ीलैंड और ईस्टर द्वीप शामिल हैं, की बसावट बाद में हुई और यह मानव इतिहास में नौ-परिचालन की सबसे अद्भुत उपलब्धियों में से एक मानी जाती है। पॉलिनेशियाई नाविकों ने यंत्रों की बजाय तारों, समुद्री लहरों, पक्षियों के व्यवहार और अन्य प्राकृतिक संकेतों का उपयोग करते हुए, दोहरी पतवार वाली नौकाओं में हज़ारों किलोमीटर के खुले समुद्र को पार किया और लाखों वर्ग किलोमीटर में फैले द्वीपों की खोज कर वहाँ बस गए। न्यूज़ीलैंड, जो पृथ्वी पर मनुष्यों द्वारा सबसे अंत में बसाई गई प्रमुख भूमि है, माओरी लोगों के पूर्वजों — पॉलिनेशियाई नाविकों — द्वारा लगभग 700 से 800 वर्ष पहले खोजी गई थी। ईस्टर द्वीप, जो पृथ्वी के सबसे एकांत बसे हुए स्थानों में से एक है, इसी काल के आसपास बसाया गया था।
ओशिनिया से यूरोपीय संपर्क सोलहवीं शताब्दी में शुरू हुआ। Ferdinand Magellan ने 1521 में प्रशांत महासागर को पार किया। स्पेनी, पुर्तगाली, डच, फ्रांसीसी और ब्रिटिश अन्वेषकों ने अगली दो शताब्दियों में धीरे-धीरे प्रशांत का मानचित्रण किया। James Cook की 1768 से 1779 के बीच की तीन अन्वेषण यात्राएँ विशेष रूप से महत्वपूर्ण थीं, जिनमें ऑस्ट्रेलिया, न्यूज़ीलैंड और दर्जनों प्रशांत द्वीपों के तटों का मानचित्रण किया गया और उनकी भौगोलिक जानकारी यूरोपीय दुनिया तक पहुँचाई गई।
यूरोपीय उपनिवेशवाद ने पूरे ओशिनिया में स्वदेशी लोगों के लिए विनाशकारी परिणाम उत्पन्न किए। ऑस्ट्रेलिया में ब्रिटिश उपनिवेशीकरण 1788 में पोर्ट जैक्सन, जो आज सिडनी है, में एक कैदी बस्ती की स्थापना के साथ शुरू हुआ। ऑस्ट्रेलियाई आदिवासी, जिनकी संख्या पहले संपर्क के समय शायद 7 लाख 50 हज़ार थी, अपनी भूमि से विस्थापित कर दिए गए, नरसंहार और जबरन विस्थापन के शिकार हुए, और बाहर से आई बीमारियों से तबाह हो गए। बीसवीं शताब्दी के आरंभ तक उनकी आबादी घटकर लगभग 1 लाख रह गई थी। "चुराई गई पीढ़ियों" की नीति, जिसके तहत आदिवासी और टोरेस स्ट्रेट द्वीपवासी बच्चों को जबरन उनके परिवारों से अलग करके संस्थाओं या श्वेत परिवारों के पास रखा जाता था, 1970 के दशक तक जारी रही।
न्यूज़ीलैंड में, 1840 में ब्रिटिश क्राउन और कई माओरी प्रमुखों के बीच हस्ताक्षरित वाइटांगी की संधि ने माओरी के भूमि और संसाधनों पर अधिकारों की गारंटी देते हुए ब्रिटिश संप्रभुता स्थापित की। संधि की व्याख्या और अनुप्रयोग तब से लेकर आज तक बहस और विवाद का विषय बना हुआ है, और यह न्यूज़ीलैंड का मूल संवैधानिक दस्तावेज़ बना हुआ है।
प्रशांत द्वीपों में यूरोपीय और अमेरिकी उपनिवेशवाद मिशनरियों, व्यापारियों, बागान मालिकों और अंततः औपनिवेशिक सरकारों को लेकर आया। बीमारियों के प्रसार ने द्वीपीय आबादी के बड़े हिस्से को मार डाला। "ब्लैकबर्डिंग" के नाम से जानी जाने वाली श्रम प्रथा, जिसमें प्रशांत द्वीपवासियों को अपहरण या धोखे से बागानों में जबरन मज़दूरी के लिए ले जाया जाता था — विशेष रूप से ऑस्ट्रेलिया के क्वींसलैंड और फिजी में — उन्नीसवीं शताब्दी का एक गंभीर अत्याचार था।
बीसवीं शताब्दी में इस क्षेत्र के अधिकांश भागों में उपनिवेशवाद से मुक्ति आई। ऑस्ट्रेलिया और न्यूज़ीलैंड बीसवीं शताब्दी के आरंभ तक प्रभावी स्वशासन प्राप्त कर चुके थे और सदी के मध्य तक पूर्ण स्वतंत्र हो गए। अधिकांश प्रशांत द्वीपीय राष्ट्रों ने 1960, 1970 और 1980 के दशक में स्वतंत्रता प्राप्त की।
सांस्कृतिक विशेषताएँ
ओशिनिया की संस्कृतियाँ असाधारण रूप से विविध हैं, जो विशाल समुद्री दूरियों से अलग सैकड़ों द्वीपों पर हज़ारों वर्षों के स्वतंत्र विकास को दर्शाती हैं।
ऑस्ट्रेलियाई आदिवासी संस्कृति विश्व की सबसे पुरानी और जटिल संस्कृतियों में से एक है। "ड्रीमिंग" या "ड्रीमटाइम" आदिवासी संस्कृति का मूलभूत आध्यात्मिक ढाँचा है, जो उस सृष्टि काल का वर्णन करता है जब पूर्वज सत्ताओं ने धरती को आकार दिया और जीवन को नियंत्रित करने वाले नियमों और रीति-रिवाजों की स्थापना की। आदिवासी कला, जिसमें मध्य ऑस्ट्रेलिया की जटिल डॉट पेंटिंग परंपरा और अर्नहेम लैंड की छाल चित्रकला परंपरा शामिल हैं, विश्व के सबसे विशिष्ट कलारूपों में से एक है और इसे अंतरराष्ट्रीय पहचान मिल चुकी है। आदिवासी लोग सैकड़ों अलग-अलग भाषाएँ बोलते हैं, हालाँकि उनमें से कई संकटग्रस्त हैं।
न्यूज़ीलैंड की माओरी संस्कृति की पहचान मज़बूत मौखिक परंपरा, विस्तृत लकड़ी की नक्काशी और बुनाई, तथा हाका से होती है — हाका एक शक्तिशाली अनुष्ठानिक नृत्य है जिसमें ज़ोरदार शारीरिक हलचल और उच्च स्वर में गायन शामिल है। ता मोको, यानी पारंपरिक टैटू, सांस्कृतिक पहचान का एक रूप है जो वंश और जनजातीय संबद्धता से गहराई से जुड़ा है। माओरी संस्कृति ने 1970 के दशक से एक महत्वपूर्ण पुनरुत्थान देखा है, और ते रेओ माओरी, यानी माओरी भाषा, न्यूज़ीलैंड की आधिकारिक भाषा है।
मेलानेशियाई संस्कृतियाँ असाधारण रूप से विविध हैं। अकेले पापुआ न्यू गिनी में लगभग 840 भाषाएँ हैं, जो पृथ्वी के किसी भी अन्य देश से अधिक हैं — यह हज़ारों वर्षों में पर्वतीय घाटियों और द्वीपीय समुदायों के भौगोलिक अलगाव की विरासत है। विस्तृत मुखौटा निर्माण परंपराएँ, विस्तृत अनुष्ठानिक विनिमय प्रणालियाँ, और जटिल शरीर सजावट कई मेलानेशियाई संस्कृतियों की विशेषताएँ हैं।
पॉलिनेशियाई संस्कृति में मौखिक कविता, संगीत और नृत्य की एक मज़बूत परंपरा है। हवाई का हुला, ताहीती का ओरी ताहिती, और समोआ का सिवा प्रशांत के सबसे प्रसिद्ध नृत्य रूपों में से हैं। पॉलिनेशियाई नौ-परिचालन ज्ञान, जो औपनिवेशिक काल में लगभग लुप्त हो गया था, हाल के दशकों में नाव-यात्रा आंदोलन के माध्यम से एक महत्वपूर्ण पुनरुत्थान का अनुभव कर रहा है, जिसने पारंपरिक नौकाओं और नौ-परिचालन तकनीकों का पुनर्निर्माण किया है।
प्रशांत व्यंजन समुद्र और उष्णकटिबंधीय परिवेश की प्रचुरता को दर्शाते हैं: ताज़ी मछली, नारियल, अरबी, शकरकंद, ब्रेडफ्रूट, और उष्णकटिबंधीय फल इस क्षेत्र के आहार का आधार हैं। पॉलिनेशियाई हांगी — एक भूमिगत चूल्हा जिसमें गर्म पत्थरों पर भोजन पकाया जाता है — सबसे विशिष्ट पाक परंपराओं में से एक है।
ओशिनिया में बोली जाने वाली भाषाएँ
ओशिनिया में असाधारण भाषाई विविधता है। ऑस्ट्रेलिया में लगभग 250 स्वदेशी भाषा परिवार हैं, हालाँकि उनमें से कई अब गंभीर रूप से संकटग्रस्त या विलुप्त हो चुकी हैं। शेष बची स्वदेशी भाषाओं में से केवल मुट्ठी भर ऐसी हैं जिनके कुछ सैकड़ों से अधिक वक्ता हैं। ऑस्ट्रेलिया में दैनिक जीवन की प्रमुख भाषा अंग्रेज़ी है।
न्यूज़ीलैंड में दो आधिकारिक भाषाएँ हैं: अंग्रेज़ी और ते रेओ माओरी। माओरी भाषा लगभग 1 लाख 85 हज़ार लोगों द्वारा बोली जाती है और इसके पुनरुद्धार के लिए महत्वपूर्ण प्रयास किए जा रहे हैं, जिनमें कोहांगा रेओ नामक इमर्शन स्कूलिंग कार्यक्रम शामिल हैं।
पापुआ न्यू गिनी में लगभग 840 जीवित भाषाएँ हैं, जो इसे पृथ्वी का सबसे अधिक भाषाई विविधता वाला देश बनाती हैं। टोक पिसिन, एक अंग्रेज़ी-आधारित क्रियोल भाषा, अंग्रेज़ी और हिरी मोटू के साथ — ये तीनों देश की आधिकारिक भाषाएँ हैं — राष्ट्रीय संपर्क भाषा के रूप में काम करती है।
माइक्रोनेशिया और पॉलिनेशिया में, प्रत्येक द्वीप समूह की स्वदेशी ऑस्ट्रोनेशियाई भाषाएँ अंग्रेज़ी, फ्रांसीसी (फ्रेंच पॉलिनेशिया और न्यू कैलेडोनिया में), और कुछ मामलों में अन्य औपनिवेशिक भाषाओं के साथ-साथ बोली जाती हैं। समोआई, टोंगाई, फिजियाई, और विभिन्न माइक्रोनेशियाई राष्ट्रों की भाषाएँ सभी अपनी स्वयं की व्याकरणिक संरचनाओं और शब्द-भंडार के साथ अलग-अलग भाषाएँ हैं।
प्रसिद्ध पर्यटन स्थल
ऑस्ट्रेलिया के क्वींसलैंड तट के किनारे स्थित ग्रेट बैरियर रीफ, दुनिया की सबसे बड़ी प्रवाल भित्ति प्रणाली है, जो लगभग 2,300 किलोमीटर तक फैली है और इसमें 2,900 से अधिक अलग-अलग भित्तियाँ हैं। यह दुनिया की सबसे बड़ी जीवित संरचना है और अंतरिक्ष से भी दिखाई देती है। यह भित्ति असाधारण जैव विविधता को सहारा देती है, जिसमें मछलियों की 1,500 प्रजातियाँ, 4,000 प्रकार के मोलस्क, और 240 पक्षी प्रजातियाँ शामिल हैं। इसे यूनेस्को विश्व धरोहर स्थल के रूप में सूचीबद्ध किया गया है, लेकिन यह जलवायु परिवर्तन, समुद्री अम्लीकरण और कृषि अपवाह से गंभीर खतरों का सामना कर रही है।
ऑस्ट्रेलिया की नॉर्दर्न टेरिटरी में स्थित उलुरु दुनिया के सबसे पहचाने जाने वाले प्राकृतिक स्थलों में से एक है। यह विशाल बलुआ पत्थर की अखंड चट्टान सूर्योदय और सूर्यास्त के समय नाटकीय रूप से रंग बदलती है और अनांगु लोगों के लिए — जो इसके पारंपरिक संरक्षक हैं — गहन आध्यात्मिक महत्व रखती है। इसे 1985 में आदिवासी स्वामित्व में वापस कर दिया गया था और अब इसे अनांगु और ऑस्ट्रेलियाई सरकार द्वारा संयुक्त रूप से प्रबंधित किया जाता है।
न्यूज़ीलैंड के साउथ आइलैंड में फियोर्डलैंड नेशनल पार्क में दुनिया के कुछ सबसे नाटकीय दृश्य हैं। मिल्फोर्ड साउंड, जो ग्लेशियरों द्वारा गढ़ा गया एक फियोर्ड है और जो खड़ी चट्टानों और झरनों से घिरा है, न्यूज़ीलैंड के सर्वाधिक देखे जाने वाले प्राकृतिक आकर्षणों में से एक है। यह पार्क किवी का भी घर है — वह उड़ानहीन पक्षी जो न्यूज़ीलैंड का राष्ट्रीय प्रतीक है।
क्वींसलैंड में डेन्ट्री रेनफोरेस्ट दुनिया का सबसे पुराना जीवित उष्णकटिबंधीय वर्षावन है, जिसके कुछ हिस्से कम से कम 13 करोड़ 50 लाख वर्ष पुराने हैं। यह ग्रेट बैरियर रीफ के बगल में स्थित है, जो ऑस्ट्रेलिया के इस कोने को पृथ्वी के सबसे अधिक जैव विविधता वाले क्षेत्रों में से एक बनाता है।
फ्रेंच पॉलिनेशिया में बोरा बोरा का लैगून, अपने प्रतिष्ठित जल के ऊपर बने बंगलों और स्वच्छ फ़िरोज़ी पानी के साथ, दुनिया में सबसे अधिक पहचानी जाने वाली द्वीपीय छवियों में से एक है। यह ज्वालामुखीय द्वीप और इसकी आसपास की भित्ति उष्णकटिबंधीय स्वर्ग का पर्याय बन गई है।
ऑस्ट्रेलिया
ऑस्ट्रेलिया दुनिया का छठा सबसे बड़ा देश है और एकमात्र ऐसा राष्ट्र है जो एक पूरे महाद्वीप पर कब्जा करता है। लगभग 2 करोड़ 60 लाख की आबादी के साथ, यह दुनिया के सर्वाधिक शहरीकृत देशों में से एक है, जहाँ अधिकांश जनसंख्या सिडनी, मेलबर्न, ब्रिस्बेन, पर्थ और एडिलेड जैसे तटीय शहरों में रहती है। "आउटबैक" के नाम से जाना जाने वाला विशाल आंतरिक भाग विरल आबादी वाला है और इसमें दुनिया के कुछ सबसे प्राचीन भू-दृश्य हैं।
आदिवासी और टोरेस स्ट्रेट द्वीपवासी लोग 1788 में ब्रिटिश उपनिवेशीकरण शुरू होने से कम से कम 65,000 वर्ष पहले से ऑस्ट्रेलिया में बसे थे। औपनिवेशिक काल स्वदेशी लोगों के लिए विनाशकारी रहा, जिन्हें उनकी भूमि से बेदखल किया गया, हिंसा और बीमारियों का सामना करना पड़ा, और सांस्कृतिक आत्मसातीकरण की नीतियों के अधीन किया गया। ब्रिटिश स्वतंत्र बसावट, 1850 के दशक की सोने की दौड़, और बीसवीं शताब्दी में आप्रवासन की लहरों ने ऑस्ट्रेलिया को एक समृद्ध, बहुसांस्कृतिक राष्ट्र में बदल दिया। ऑस्ट्रेलिया का कॉमनवेल्थ 1901 में छह ब्रिटिश उपनिवेशों के संघ के माध्यम से स्थापित किया गया था।
ऑस्ट्रेलिया दुनिया के सबसे संपन्न देशों में से एक है, जिसकी अर्थव्यवस्था खनन, कृषि, सेवाओं और शिक्षा पर आधारित है। यह दुनिया के सबसे सफल बहुसांस्कृतिक समाजों में से एक रहा है, जहाँ एशिया, यूरोप और अन्य क्षेत्रों से आए प्रवासियों ने एक महानगरीय संस्कृति को समृद्ध किया है। कलाओं में ऑस्ट्रेलिया का योगदान उल्लेखनीय है — इसमें Baz Luhrmann, Peter Weir और अन्य निर्देशकों की फिल्में; Patrick White के उपन्यास — जो साहित्य में नोबेल पुरस्कार जीतने वाले पहले ऑस्ट्रेलियाई थे; और एक जीवंत संगीत दृश्य शामिल है जिसने विश्व स्तर पर पहचाने जाने वाले कलाकार पैदा किए हैं। खेल ऑस्ट्रेलियाई संस्कृति का केंद्र है, जहाँ क्रिकेट, ऑस्ट्रेलियन रूल्स फुटबॉल, रग्बी लीग और रग्बी यूनियन सभी के उत्साही प्रशंसक हैं।
फिजी
फिजी दक्षिण प्रशांत में लगभग 330 द्वीपों का एक द्वीपसमूह है, जिनमें से लगभग 110 पर स्थायी आबादी है। न्यूज़ीलैंड से लगभग 1,100 मील उत्तर में स्थित, फिजी प्रशांत में सबसे लोकप्रिय पर्यटन स्थलों में से एक बन गया है, जो अपनी गर्म जलवायु, स्वच्छ जल, प्रवाल भित्तियों और मिलनसार लोगों के लिए जाना जाता है।
फिजी में यूरोपीय संपर्क से पहले लगभग 3,500 वर्षों तक मेलानेशियाई लोग बसे हुए थे। 1643 में डच खोजकर्ता Abel Tasman फिजी को देखने वाले पहले यूरोपीय थे। 1874 में इन द्वीपों को ब्रिटिश उपनिवेश घोषित किया गया और 1970 में ये स्वतंत्र हो गए। 1879 से 1916 के बीच ब्रिटिश चीनी बागानों में काम के लिए भारत से अनुबंधित मज़दूर लेकर आए, और इन मज़दूरों के वंशज, जिन्हें भारतीय-फिजियाई के नाम से जाना जाता है, आज आबादी का लगभग 38 प्रतिशत हैं। मूल फिजियाई और भारतीय-फिजियाई के बीच संबंध राजनीतिक तनाव का एक स्थायी स्रोत रहा है, जिसमें 1987, 2000 और 2006 में सैन्य तख्तापलट शामिल हैं।
फिजियाई संस्कृति असाधारण गर्मजोशी और आतिथ्य सत्कार के लिए जानी जाती है। काव शेयरिंग की पारंपरिक रस्म, जिसमें प्रतिभागी मिर्च के पौधे से बने हल्के मादक पेय का सेवन करते हैं, सामाजिक और अनुष्ठानिक जीवन का केंद्र है। रग्बी यूनियन एक राष्ट्रीय जुनून है; फिजी की सेवेंस रग्बी टीम दुनिया की सबसे सफल टीमों में से एक रही है। द्वीपों का पर्यटन उद्योग, जो मामानुका और यसावा द्वीप समूहों की प्राकृतिक सुंदरता पर केंद्रित है और जिसमें लग्ज़री रिसॉर्ट और गोताखोरी शामिल हैं, अर्थव्यवस्था का एक प्रमुख स्तंभ है।
किरिबाती
किरिबाती भौगोलिक दृष्टि से दुनिया के सबसे उल्लेखनीय देशों में से एक है। इसके 33 एटोल और एक उठी हुई प्रवाल द्वीप केंद्रीय प्रशांत महासागर के लगभग 35 लाख वर्ग किलोमीटर में फैले हैं, जो भूमध्य रेखा और अंतर्राष्ट्रीय तिथि रेखा दोनों को पार करते हैं। कुल भूमि क्षेत्रफल केवल लगभग 811 वर्ग किलोमीटर है, जो किरिबाती को भूमि क्षेत्रफल के हिसाब से दुनिया के सबसे छोटे देशों में से एक बनाता है, जबकि इसका एक्सक्लूसिव इकॉनोमिक ज़ोन सबसे बड़े में से एक है।
यूरोपीय संपर्क से पहले इन द्वीपों पर लगभग 3,000 वर्षों तक माइक्रोनेशियाई और पॉलिनेशियाई लोग बसे थे। उन्नीसवीं शताब्दी में ब्रिटिश और अमेरिकी व्हेलर और व्यापारी यहाँ आए। द्वीप ब्रिटिश संरक्षित राज्य और बाद में उपनिवेश बने। किरिबाती ने 1979 में स्वतंत्रता प्राप्त की। द्वितीय विश्व युद्ध के दौरान, 1943 में तारावा की लड़ाई प्रशांत अभियान की सबसे खूनी लड़ाइयों में से एक थी।
किरिबाती उन देशों में से एक है जो जलवायु परिवर्तन और बढ़ते समुद्र स्तर से सबसे तीव्र रूप से खतरे में है। अधिकांश एटोल की औसत ऊँचाई समुद्र तल से केवल लगभग 2 मीटर है, और खारे पानी का अतिक्रमण, तटीय कटाव, और तूफानी बाढ़ पहले से ही कृषि और मीठे पानी की आपूर्ति को प्रभावित कर रहे हैं। किरिबाती सरकार ने अपनी आबादी के लिए संभावित शरण के रूप में फिजी में भूमि खरीदी है और जलवायु परिवर्तन पर महत्वपूर्ण अंतरराष्ट्रीय पैरवी की है।
मार्शल द्वीप
मार्शल द्वीप दो एटोल श्रृंखलाओं से बना है — पूर्व में रातक श्रृंखला और पश्चिम में रालिक श्रृंखला — जिनमें केंद्रीय प्रशांत महासागर में कुल 29 एटोल और 5 एकल द्वीप शामिल हैं। कुल भूमि क्षेत्रफल लगभग 181 वर्ग किलोमीटर है, जो इसे पृथ्वी के सबसे छोटे देशों में से एक बनाता है। राजधानी माजुरो सबसे अधिक आबादी वाला एटोल है।
मार्शल द्वीप लगभग 2,000 वर्ष पहले माइक्रोनेशियाई लोगों द्वारा बसाए गए थे। जर्मनी ने 1885 में इन द्वीपों पर दावा किया और जापान ने प्रथम विश्व युद्ध के दौरान इन पर कब्जा कर लिया और लीग ऑफ नेशंस के जनादेश के अधीन इनका प्रशासन किया। द्वितीय विश्व युद्ध के दौरान, मार्शल द्वीप तीव्र लड़ाई का स्थल था क्योंकि अमेरिकी सेनाएँ जापान की ओर आगे बढ़ रही थीं। संयुक्त राज्य अमेरिका ने 1946 से 1958 के बीच इन द्वीपों का उपयोग परमाणु हथियार परीक्षण के लिए किया, जिसमें 1954 में बिकिनी एटोल पर कैसल ब्रावो हाइड्रोजन बम परीक्षण भी शामिल था, जो अमेरिका द्वारा विस्फोट किया गया अब तक का सबसे बड़ा परमाणु विस्फोट था और जिसने पास के एटोल के निवासियों को गंभीर विकिरण के संपर्क में लाया। मार्शल द्वीप 1979 में स्वशासी बने और 1986 में संयुक्त राज्य अमेरिका के साथ कॉम्पैक्ट ऑफ फ्री एसोसिएशन पर हस्ताक्षर किए।
परमाणु परीक्षण की विरासत मार्शल द्वीप को अभी भी प्रभावित करती है — चल रही स्वास्थ्य समस्याएँ, पर्यावरण प्रदूषण, और बिकिनी एटोल के निवासियों का विस्थापन, जो अभी भी सुरक्षित रूप से वापस नहीं लौट सके हैं। अन्य निचले प्रशांत राष्ट्रों की तरह, मार्शल द्वीप को जलवायु परिवर्तन और बढ़ते समुद्र से अस्तित्वगत खतरों का सामना करना पड़ रहा है।
माइक्रोनेशिया (फेडरेटेड स्टेट्स ऑफ)
फेडरेटेड स्टेट्स ऑफ माइक्रोनेशिया में चार राज्य शामिल हैं — याप, चुउक, पोह्नपेई और कोसराए — जो पश्चिमी प्रशांत में 2,700 से अधिक द्वीपों में फैले हैं। कुल भूमि क्षेत्रफल लगभग 702 वर्ग किलोमीटर है, लेकिन एक्सक्लूसिव इकॉनोमिक ज़ोन लगभग 30 लाख वर्ग किलोमीटर समुद्र में फैला है। यह देश संयुक्त राज्य अमेरिका के साथ स्वतंत्र सहयुक्तता में है।
माइक्रोनेशिया में लगभग 3,500 वर्षों से आबादी बसी है। पोह्नपेई द्वीप पर नान माडोल का स्थल — जो बेसाल्ट और प्रवाल से निर्मित कृत्रिम द्वीपों की एक श्रृंखला है और लगभग 800 से 1000 वर्ष पहले बनाई गई — प्रशांत के सबसे उल्लेखनीय पुरातात्विक स्थलों में से एक है और इसे यूनेस्को विश्व धरोहर स्थल घोषित किया गया है। स्पेन ने सत्रहवीं शताब्दी में इन द्वीपों को उपनिवेश बनाया। जर्मनी ने 1899 में स्पेन से इन्हें खरीदा। जापान ने 1914 से द्वितीय विश्व युद्ध तक लीग ऑफ नेशंस के जनादेश के अधीन इनका प्रशासन किया, जिसके बाद अमेरिकी सेनाओं ने इन पर कब्जा कर लिया। माइक्रोनेशिया ने 1979 में स्वशासन प्राप्त किया।
माइक्रोनेशिया की संस्कृति चारों राज्यों में समृद्ध और विविध है। याप अपने पत्थर के धन के लिए प्रसिद्ध है — दूरस्थ द्वीपों से लाई गई चूना पत्थर की विशाल नक्काशीदार चकतियाँ जो सामाजिक मुद्रा के एक रूप के रूप में काम करती हैं। पारंपरिक नौ-परिचालन ज्ञान, जिसमें दूरस्थ नौकायन के लिए तारों और समुद्री लहरों को पढ़ने की क्षमता शामिल है, याप में संरक्षित है और इसे एक महत्वपूर्ण सांस्कृतिक धरोहर के रूप में मान्यता दी गई है। चुउक लैगून, जहाँ द्वितीय विश्व युद्ध के दौरान अमेरिकी हमलों में दर्जनों जापानी जहाज़ डुबो दिए गए थे, अब दुनिया के सर्वश्रेष्ठ जलपोत गोताखोरी स्थलों में से एक है।
नौरू
नौरू दुनिया का सबसे छोटा द्वीपीय राष्ट्र है, जो केवल 21 वर्ग किलोमीटर में फैला है और भूमध्य रेखा से लगभग 42 किलोमीटर दक्षिण में केंद्रीय प्रशांत में स्थित है। लगभग 10,000 की आबादी के साथ, यह दुनिया के सबसे कम आबादी वाले देशों में से एक है। अपने अत्यंत छोटे आकार के बावजूद, नौरू का एक उल्लेखनीय और कुछ मायनों में सचेत करने वाला आधुनिक इतिहास है।
नौरू पर लगभग 3,000 वर्ष पहले माइक्रोनेशियाई और पॉलिनेशियाई लोग बस गए थे। जर्मनी ने 1888 में इस द्वीप पर कब्जा कर लिया। प्रथम विश्व युद्ध के बाद ऑस्ट्रेलिया ने लीग ऑफ नेशंस के जनादेश के अधीन नौरू का प्रशासन किया। द्वितीय विश्व युद्ध के दौरान जापान ने इस द्वीप पर कब्जा कर लिया। नौरू 1968 में स्वतंत्र हुआ। बीसवीं शताब्दी के प्रारंभ में फॉस्फेट भंडार की खोज ने नौरू को प्रति व्यक्ति आय के मामले में संक्षेप में दुनिया के सबसे अमीर देशों में से एक बना दिया, क्योंकि फॉस्फेट को कृषि उर्वरक के रूप में उपयोग के लिए निर्यात किया गया। बीसवीं शताब्दी में फॉस्फेट का व्यापक खनन किया गया, जिससे द्वीप के आंतरिक भाग का अधिकांश हिस्सा चूना पत्थर की नुकीली चट्टानों और खाली हो चुके खनन क्षेत्रों का तबाह भू-दृश्य बन गया।
1980 और 1990 के दशक में जब फॉस्फेट समाप्त हो गया, तो नौरू की अर्थव्यवस्था चरमरा गई। तब से सरकार ने ऑफशोर बैंकिंग, मत्स्य पालन लाइसेंस, और अधिक विवादास्पद रूप से एक ऑस्ट्रेलियाई आप्रवासन निरोध केंद्र की मेज़बानी में विविधता लाई है, जो महत्वपूर्ण अंतरराष्ट्रीय चिंता का स्रोत रहा है। नौरू में दुनिया में मोटापे और टाइप 2 मधुमेह की सबसे अधिक दरें हैं, जो फॉस्फेट युग में आहार और जीवनशैली में नाटकीय बदलावों से संबंधित हैं।
न्यूज़ीलैंड
न्यूज़ीलैंड दक्षिण-पश्चिमी प्रशांत महासागर में एक द्वीपीय राष्ट्र है जिसमें दो मुख्य द्वीप — नॉर्थ आइलैंड और साउथ आइलैंड — और कई छोटे द्वीप शामिल हैं। लगभग 50 लाख की आबादी के साथ, यह मनुष्यों द्वारा बसाई गई अंतिम प्रमुख भूमियों में से एक है और दुनिया के सबसे शानदार प्राकृतिक परिवेशों में से एक है। न्यूज़ीलैंड एक संवैधानिक राजतंत्र और संसदीय लोकतंत्र है, जो ब्रिटिश राजशाही को राज्य प्रमुख के रूप में साझा करता है।
माओरी लोगों के पॉलिनेशियाई पूर्वज लगभग 700 से 800 वर्ष पहले न्यूज़ीलैंड पहुँचे, जो प्रशांत अन्वेषण की अंतिम महान यात्राओं में से एक थी। यूरोपीय लोग पहली बार 1642 में डच खोजकर्ता Abel Tasman के साथ पहुँचे, जिसके बाद 1769 में James Cook आए। 1840 में वाइटांगी की संधि पर हस्ताक्षर के बाद 1840 के दशक में ब्रिटिश उपनिवेशीकरण गंभीरता से शुरू हुआ — यह एक संस्थापक दस्तावेज़ है जो न्यूज़ीलैंड की संवैधानिक और सांस्कृतिक पहचान के लिए केंद्रीय बना हुआ है। उन्नीसवीं शताब्दी में माओरी और बसने वालों के बीच भूमि को लेकर न्यूज़ीलैंड वार्स सहित महत्वपूर्ण संघर्ष हुए। न्यूज़ीलैंड 1907 में एक स्वशासी डोमिनियन बना और 1893 में महिलाओं को मताधिकार देने वाले पहले देशों में से एक था।
न्यूज़ीलैंड की एक मज़बूत सांस्कृतिक पहचान है जो माओरी विरासत और ब्रिटिश औपनिवेशिक अतीत दोनों से आकार लेती है, जिसमें प्रशांत द्वीपीय और एशियाई प्रवासी समुदाय और अधिक विविधता जोड़ते हैं। देश अपने फिल्म उद्योग के लिए अंतरराष्ट्रीय स्तर पर जाना जाता है, विशेष रूप से Peter Jackson की लॉर्ड ऑफ द रिंग्स त्रयी के लिए जिसने न्यूज़ीलैंड के शानदार परिदृश्यों का व्यापक उपयोग किया। रग्बी यूनियन प्रमुख खेल है और तीव्र राष्ट्रीय गर्व का स्रोत है; ऑल ब्लैक्स रग्बी इतिहास की सबसे सफल अंतरराष्ट्रीय टीम है। न्यूज़ीलैंड की वाइन, विशेष रूप से मार्लबरो सोविग्नों ब्लां, ने वैश्विक पहचान प्राप्त की है।
पलाऊ
पलाऊ पश्चिमी प्रशांत महासागर में एक द्वीपीय देश है जिसमें लगभग 340 द्वीप हैं और कुल भूमि क्षेत्रफल लगभग 459 वर्ग किलोमीटर है। जनसंख्या लगभग 18,000 है। पलाऊ को अपने जल की असाधारण स्वच्छता और समुद्री जीवन की विविधता के कारण दुनिया के सर्वश्रेष्ठ गोताखोरी स्थलों में से एक माना जाता है।
पलाऊ में लगभग 3,000 वर्षों से आबादी बसी है। द्वितीय विश्व युद्ध के बाद संयुक्त राज्य अमेरिका द्वारा प्रशासित किए जाने से पहले ये द्वीप स्पेनी, जर्मन और जापानी प्रशासन के अधीन थे। पलाऊ 1994 में संयुक्त राज्य अमेरिका के साथ कॉम्पैक्ट ऑफ फ्री एसोसिएशन के अंतर्गत पूरी तरह स्वतंत्र हुआ। 1944 में पेलेलियू की लड़ाई प्रशांत युद्ध की सबसे महंगी लड़ाइयों में से एक थी, जिसमें तैनात सैनिकों की संख्या के सापेक्ष हताहतों की दर सबसे अधिक थी।
पलाऊ को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर संरक्षण में अग्रणी के रूप में मान्यता प्राप्त है। 2009 में पलाऊ ने दुनिया का पहला शार्क अभयारण्य स्थापित किया, जिसमें अपने जल में सभी वाणिज्यिक शार्क मछली पकड़ने पर प्रतिबंध लगाया गया। 2020 में, उसने पलाऊ प्लेज शुरू की, जिसके तहत सभी आगंतुकों से पर्यावरणीय रूप से ज़िम्मेदार व्यवहार करने का वचन लेना देश में प्रवेश की शर्त बनाई गई — ऐसी आवश्यकता अपनाने वाला यह पहला देश था। रॉक आइलैंड्स सदर्न लैगून एक यूनेस्को विश्व धरोहर स्थल है, जो अपनी असाधारण समुद्री जैव विविधता के लिए प्रसिद्ध है।
पापुआ न्यू गिनी
पापुआ न्यू गिनी न्यू गिनी द्वीप के पूर्वी आधे भाग पर स्थित है — जो दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा द्वीप है — और इसमें बिस्मार्क आर्किपेलागो तथा सोलोमन द्वीप श्रृंखला सहित कई द्वीप समूह भी शामिल हैं। लगभग 1 करोड़ की जनसंख्या और 840 जीवित भाषाओं के साथ, यह पृथ्वी का सबसे अधिक भाषाई विविधता वाला और सांस्कृतिक दृष्टि से सबसे जटिल देशों में से एक है।
पापुआ न्यू गिनी में लगभग 50,000 वर्षों से मानव बस्तियाँ हैं। न्यू गिनी हाइलैंड्स में कृषि सभ्यताएँ थीं जिन्होंने लगभग 9,000 वर्ष पहले स्वतंत्र रूप से खेती विकसित की — जो मानव इतिहास के सबसे प्रारंभिक कृषि विकासों में से एक है। 1884 में जर्मन और ब्रिटिश औपनिवेशिक शक्तियों ने न्यू गिनी को विभाजित किया। प्रथम विश्व युद्ध के बाद ऑस्ट्रेलिया ने इस क्षेत्र का प्रशासन किया और द्वितीय विश्व युद्ध के बाद जर्मन हिस्से का भी नियंत्रण प्राप्त कर लिया। पापुआ न्यू गिनी ने 1975 में स्वतंत्रता प्राप्त की।
पापुआ न्यू गिनी की असाधारण सांस्कृतिक विविधता सामान्यीकरण को कठिन बनाती है, लेकिन कुछ विशेषताएँ व्यापक रूप से पाई जाती हैं। विस्तृत अनुष्ठानिक परंपराएँ, मुखौटा निर्माण, शरीर सजावट, और शंख तथा अन्य मूल्यवान वस्तुओं से जुड़े विनिमय समारोह कई समुदायों में पाए जाते हैं। गोरोका शो और अन्य सांस्कृतिक उत्सव सैकड़ों जनजातीय समूहों को पारंपरिक वेशभूषा और नृत्य के शानदार प्रदर्शन में एक साथ लाते हैं। पापुआ न्यू गिनी में सोना, तांबा, तेल और गैस सहित महत्वपूर्ण प्राकृतिक संसाधन हैं, लेकिन इसकी अधिकांश आबादी आधुनिक सेवाओं तक सीमित पहुँच के साथ ग्रामीण क्षेत्रों में रहती है।
समोआ
समोआ दक्षिण प्रशांत में एक पॉलिनेशियाई द्वीपीय राष्ट्र है जिसमें दो मुख्य द्वीप — उपोलू और सवाई'ई — और कई छोटे द्वीप शामिल हैं। लगभग 2 लाख 20 हज़ार की आबादी के साथ, यह एक सांस्कृतिक रूप से समृद्ध समाज है जहाँ फ़ा'आ समोआ — समोआई जीवन पद्धति — के नाम से जानी जाने वाली पारंपरिक रीतियाँ दैनिक जीवन के केंद्र में हैं।
समोआ में लगभग 3,000 वर्षों से पॉलिनेशियाई लोग बसे हैं। अठारहवीं शताब्दी में यूरोपीय लोग यहाँ पहुँचे। उन्नीसवीं शताब्दी में समोआ जर्मन, ब्रिटिश और अमेरिकी हितों के बीच फंसा रहा। 1899 में इन द्वीपों को विभाजित किया गया — जर्मनी ने पश्चिमी द्वीप लिए और संयुक्त राज्य अमेरिका ने पूर्वी द्वीप, जो आज अमेरिकन समोआ के नाम से जाना जाता है। प्रथम विश्व युद्ध के बाद पश्चिमी समोआ का प्रशासन न्यूज़ीलैंड ने किया और 1962 में इसे स्वतंत्रता मिली, जिससे यह बीसवीं शताब्दी में स्वतंत्रता पाने वाला पहला प्रशांत द्वीपीय राष्ट्र बना।
समोआई संस्कृति की पहचान एक मज़बूत सामूहिक सामाजिक संरचना से होती है जो आईगा — यानी विस्तारित पारिवारिक समूहों — के इर्द-गिर्द संगठित है, जिनका नेतृत्व मताई अर्थात प्रमुखों द्वारा किया जाता है। फ़ा'आ समोआ सामूहिक दायित्व, बड़ों के प्रति सम्मान और उदारता पर ज़ोर देता है। पारंपरिक हाथ-थपथपाने की तकनीकों का उपयोग करके बनाए जाने वाले समोआई टैटू की परंपरा दुनिया की सबसे पुरानी और सबसे विस्तृत में से एक है। समोआ रग्बी यूनियन के प्रति उत्साही है; समोआई खिलाड़ी कई देशों में इस खेल के उच्चतम स्तरों पर प्रतिस्पर्धा करते हैं।
सोलोमन द्वीप
सोलोमन द्वीप पापुआ न्यू गिनी के पूर्व में लगभग 900 द्वीपों का एक मेलानेशियाई द्वीपसमूह है, जिसकी जनसंख्या लगभग 7 लाख 20 हज़ार है और जो लगभग 28 बसे हुए द्वीपों में फैली है। यह देश प्रशांत में सबसे कम शहरीकृत देशों में से एक है, जहाँ अधिकांश आबादी ग्रामीण गाँवों में रहती है।
सोलोमन द्वीप में लगभग 30,000 वर्षों से मेलानेशियाई लोग बसे हैं। यूरोपीय लोग सोलहवीं शताब्दी में यहाँ आए। ब्रिटेन ने 1893 में एक संरक्षित राज्य की स्थापना की। द्वितीय विश्व युद्ध के दौरान सोलोमन द्वीप ग्वाडलकैनाल अभियान का स्थल था, जो प्रशांत युद्ध के सबसे महत्वपूर्ण और खूनी अभियानों में से एक था। जापान और संयुक्त राज्य अमेरिका ने 1942 से 1943 तक ग्वाडलकैनाल के नियंत्रण के लिए लड़ाई की, जो प्रशांत संघर्ष में एक निर्णायक मोड़ साबित हुई। इन द्वीपों ने 1978 में स्वतंत्रता प्राप्त की।
सोलोमन द्वीप में दर्जनों अलग-अलग सांस्कृतिक समूहों और भाषाओं के साथ महत्वपूर्ण जातीय और सांस्कृतिक विविधता है। मलाइता द्वीप के लोगों और ग्वाडलकैनाल के लोगों के बीच जातीय तनाव 1990 के दशक के अंत में हिंसा में बदल गया, जिसके लिए ऑस्ट्रेलिया के नेतृत्व में एक क्षेत्रीय शांति सेना की आवश्यकता पड़ी। देश में महत्वपूर्ण लकड़ी, मत्स्य और खनिज संसाधन हैं। पारंपरिक संस्कृति ग्रामीण क्षेत्रों में मज़बूत बनी हुई है, जहाँ विस्तृत अनुष्ठानिक जीवन, लकड़ी की नक्काशी की परंपराएँ और शंख मुद्रा विनिमय प्रणालियाँ अभी भी प्रचलित हैं।
टोंगा
टोंगा दक्षिण प्रशांत में एक पॉलिनेशियाई राजतंत्र है जिसमें लगभग 170 द्वीप हैं, जिनमें से 36 पर आबादी है। यह प्रशांत का एकमात्र राजतंत्र है और एकमात्र प्रशांत द्वीपीय राष्ट्र है जिसे कभी औपचारिक रूप से किसी यूरोपीय शक्ति द्वारा उपनिवेश नहीं बनाया गया, हालाँकि उन्नीसवीं सदी के अंत और बीसवीं सदी के अधिकांश समय तक यह ब्रिटिश संरक्षित राज्य था।
टोंगा में लगभग 3,000 वर्षों से आबादी बसी है और यह बारहवीं से पंद्रहवीं शताब्दी के बीच मध्य प्रशांत के अधिकांश हिस्से पर वर्चस्व रखने वाले समुद्री टोंगाई साम्राज्य का केंद्र था। पहला यूरोपीय संपर्क 1616 में डच खोजकर्ताओं द्वारा स्थापित किया गया था। James Cook ने टोंगा की कई बार यात्रा की और उन्हें मिली गर्मजोशी भरी अगवानी के कारण इन द्वीपों का नाम फ्रेंडली आइलैंड्स रखा। टोंगा 1900 में ब्रिटिश संरक्षित राज्य बना और 1970 में पूर्ण स्वतंत्रता प्राप्त की।
टोंगाई संस्कृति पद, समारोह और पारंपरिक रीति-रिवाजों के संरक्षण को बहुत महत्व देती है। यह देश गहराई से ईसाई है, जहाँ रविवार को कड़ाई से विश्राम का दिन माना जाता है। टोंगाई बुनाई, टापा कपड़ा बनाना और लकड़ी की नक्काशी महत्वपूर्ण कलात्मक परंपराएँ हैं। टोंगाई रग्बी यूनियन खिलाड़ी कई देशों में उच्चतम स्तर पर खेल रहे हैं, और राष्ट्रीय टीम विश्व कप प्रतियोगिता में प्रतिस्पर्धी रही है।
तुवालु
तुवालु केंद्रीय प्रशांत महासागर में नौ एटोल और रीफ द्वीपों से बना एक पॉलिनेशियाई द्वीपीय राष्ट्र है, जिसका कुल भूमि क्षेत्रफल लगभग 26 वर्ग किलोमीटर है, जो इसे भूमि क्षेत्रफल के हिसाब से दुनिया के सबसे छोटे देशों में से एक बनाता है। लगभग 11,000 की आबादी के साथ, यह दुनिया का चौथा सबसे कम आबादी वाला देश है।
तुवालु में लगभग 2,000 वर्षों से पॉलिनेशियाई लोग बसे थे। ब्रिटेन ने 1892 में गिल्बर्ट और एलिस द्वीप के हिस्से के रूप में एक संरक्षित राज्य स्थापित किया। तुवालु ने किरिबाती से अलग होने के लिए मतदान किया और 1978 में स्वतंत्रता प्राप्त की। देश की अर्थव्यवस्था अत्यंत सीमित है; आय मुख्यतः मत्स्य पालन लाइसेंस, अपने इंटरनेट डोमेन .tv के पट्टे से और विदेशों में काम करने वाले तुवालुवासियों के प्रेषण से आती है।
तुवालु उन देशों में से एक है जो जलवायु परिवर्तन से सबसे गंभीर रूप से खतरे में हैं। समुद्र तल से अधिकतम लगभग 4.5 मीटर की ऊँचाई के साथ, इन द्वीपों को बढ़ते समुद्र, तूफानी उफान और मीठे पानी की आपूर्ति में खारे पानी के अतिक्रमण से अस्तित्वगत खतरा है। तुवालु अंतरराष्ट्रीय जलवायु वार्ताओं में अग्रणी रहा है और अपनी उत्साही पैरवी के लिए ध्यान आकर्षित कर चुका है। 2023 में तुवालु ने ऑस्ट्रेलिया के साथ एक संधि पर हस्ताक्षर किए जिसके तहत ऑस्ट्रेलिया ने सुरक्षा सहयोग के बदले तुवालुवासियों को निवास अधिकार देने पर सहमति जताई — यह एक ऐतिहासिक समझौता है जो राष्ट्र के भौतिक रूप से विलुप्त हो जाने की संभावना को स्वीकार करता है।
वानुआतु
वानुआतु दक्षिण प्रशांत में लगभग 80 द्वीपों से बना एक मेलानेशियाई द्वीपीय राष्ट्र है, जो ऑस्ट्रेलिया के पूर्व और न्यू कैलेडोनिया के उत्तर-पूर्व में स्थित है। लगभग 3 लाख 30 हज़ार की आबादी और लगभग 110 अलग-अलग भाषाओं के साथ, इसमें प्रति व्यक्ति भाषाओं का घनत्व दुनिया में सबसे अधिक है।
वानुआतु में लगभग 3,000 वर्षों से मेलानेशियाई लोग बसे हैं। अठारहवीं शताब्दी में यूरोपीय लोग यहाँ आने लगे। 1906 में ब्रिटेन और फ्रांस ने न्यू हेब्रिड्स कॉन्डोमिनियम स्थापित किया — एक संयुक्त औपनिवेशिक प्रशासन जो अपनी जटिलता और कभी-कभी अपनी बेतुकापन के लिए उल्लेखनीय था, क्योंकि दोनों शक्तियाँ अलग-अलग न्यायिक प्रणालियाँ, पुलिस बल और जेलें बनाए रखती थीं। वानुआतु ने 1980 में स्वतंत्रता प्राप्त की।
वानुआतु अपनी असाधारण सांस्कृतिक विविधता और पारंपरिक प्रथाओं के संरक्षण के लिए जाना जाता है। पेंटेकॉस्ट द्वीप पर नाघोल भूमि-ныряние समारोह, जिसमें पुरुष ऊँचे लकड़ी के टावरों से अपनी टखनों में बेलें बांधकर कूदते हैं, बंजी जंपिंग की मूल प्रेरणा है। वानुआतु में अपनी प्राकृतिक सुंदरता, गोताखोरी स्थलों और सांस्कृतिक आकर्षणों के कारण महत्वपूर्ण पर्यटन क्षमता है, और यहाँ तन्ना द्वीप पर यासुर ज्वालामुखी स्थित है जो दुनिया के सबसे सुलभ सक्रिय ज्वालामुखियों में से एक है।
स्रोत
पैसिफिक कम्युनिटी (SPC): https://www.spc.int
यूनेस्को विश्व धरोहर, ओशिनिया: https://whc.unesco.org
पैसिफिक आइलैंड्स रिपोर्ट: https://www.pireport.org
ग्रेट बैरियर रीफ मरीन पार्क अथॉरिटी: https://www.gbrmpa.gov.au
कंट्री रिपोर्ट्स, ओशिनिया: https://www.countryreports.org
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https://www.countryreports.org

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